17/01/2026
यशवंतव होलकर अगर 1818 को जिंदा होते तो उनके नेतृत्व में दूसरे बाजीराव पेशवा के खिलाफ जंग होती!
लेकिन विठोजी होलकर जी के हत्या का बदला 1 जनवरी 1818 को 500 सूरवीर नाग वंशियो ने लिया!
महाराष्ट्र के धनगर लोगो मे जानकर,गोपीचंद जो नेता है वह आरएसएस प्रायोजित नेता है। जानकर ब्राम्हणो के वोटों से जीतकर गए ऐसा बोले, गोपीचंद भीमायकोरेगाव का फसाद करवाने वाला भिड़े का शिष्य है।
जिसे आरएसएस ने योजना 2019 के चुनाव में आंबेडकरवादी लोगो को गुमराह करने के लिए उतारा था अब वह भाजपा में है।वही पडलकर अब फडणवीस की इज्जत उतर जाती है तब तब उसे मैदान में उतारा जाता है। ऐसे लोगो से धनगरों ने सावधान होना चाहिए।
मौर्य क्रांति संघ ही धनगरों का वास्तविक नेतृत्व कर रहा है।
याद रहे कि दूसरे बाजीराव पेशवा ने विठोजी होलकर जी को क्रूरता से शनिवार वाडा हाथी के पैरों तले कुचलकर मारा था। उसका बदला लेने के लिए यशवंतराव होलकर पुणे पर हमला करने आये तब दूसरा बाजीराव पेशवा पुणे छोड़कर भाग गया था और वह कोंकण में जाकर छिप गया था।
अंग्रेजो का महाराष्ट्र में लाने का कार्य भी बाजीराव पेशवा का है।इसलिए विदेशी ब्राम्हण कितने स्वराज्यद्रोही थे इसकी पूरी की पूरी जानकरी हमारे पास है। इतना ही नही पेशवा ब्राम्हणो ने सतारा के महाराज के खिलाफ क्या क्या साजिशें की थी इसके दस्तावेज भी मौजूद है।
राजें यशवंतराव होलकर
जन्म: 3 दिसम्बर 1776
मृत्यु :28 अक्टूबर 1811
महाराष्ट्र में जिन्हें धनगर कहते है वे अपना इतिहास भूल गए? उनके वास्तविक दुश्मन कौन है?
पेशवा ब्राम्हणो के दस्तावेजों में एक पेशवा ब्राम्हण का कारकुन (क्लार्क) मिरज सांगली के ब्राम्हण को खत लिखता है जिसमे उसने 17 अप्रैल 1801 को बाजीराव (दूसरा) ने सूर वीर बहुजनो का महानायक विठोजी होलकर जी की हाथी के नीचे कुचलकर हत्या की।
उस खत में यह भी जिक्र है कि सैन्य के प्रमुख होने के कारण होलकर 20 से 21 लाख रुपये का पैसा बाजीराव के पास लेने आये थे। बाजीराव साल भर उसे देने के लिए टाल रहे थे।
बाजीराव अत्यंत मगरूर था उसने विठोजी होलकर जी के शनिवार महल के सामने ही बहुत मारा, यह कहते हुए भी दुख होता है कि उनकी चमड़ी उधेड़कर मारा, वे चिल्लाते रहे रहे उन्हें अत्यंत क्रूरता से मारा गया। ब्राम्हण लोग इससे खुश थे। और बाद में उन्हें हाथी के पैरों तले कुचलकर मार डाला। यह खबर वह ब्राम्हण सांगली के ब्राम्हण को बहुत खुशी से बता रहा है।
बाद में मई 1802 को यशवंतराव होलकर जी ने बाजीराव पर पुणे में आकर हमला किया भगोड़ा बाजीराव वहाँ से भाग कोकण में भाग गया,शायद वह पकड़ा जाता तो उसी शनिवार वाड़ा (महल) पर पेशवाई खत्म होती और 1802 में महाराष्ट्र ब्राम्हणो के चुंगल से आज़ाद होता शायद 1818 के पहले महाराष्ट्र में बहुजनो का शासन होता। वह बात अलग है कि बाजीराव ने होलकर को पुणे से निकालने के लिए अंग्रेजो की सहायता ली।
दूसरा बाजीराव पेशवा के लोग ही देश पर वर्तमान में ईवीएम के जरिये से देश पर राज कर रहे है।
-डॉ. विलास खरात