28/09/2026
उज्जैन शहर से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जिसने हर संवेदनशील दिल को भावुक कर दिया है।
साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ महापर्व की तैयारियों के तहत प्रशासन द्वारा कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है,इस सड़क चौड़ीकरण के दायरे में वहाँ की ऐतिहासिक और सदियों पुरानी 'शाही मस्जिद' का लगभग 9 से 11 फीट का हिस्सा आ रहा था।
मस्जिद कमेटी के पास सिंधिया रियासत के ज़माने के मुकम्मल, पक्के और वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिसके आधार पर उन्होंने अपनी इबादतगाह को बचाने की हर मुमकिन कानूनी लड़ाई भी लड़ी लेकिन जनहित के बड़े प्रोजेक्ट्स और कोर्ट के आदेश के आगे आख़िरकार कानूनन कोई रास्ता नहीं बचा।
प्रशासन की किसी एकतरफा कार्रवाई, बुलडोजर चलने की स्थिति या इबादतगाह की किसी भी तरह की अदब-ओ-एहतराम में कमी को रोकने के लिए वहाँ की मस्जिद कमेटी और समाज के बुजुर्गों ने बेहद भारी मन से एक बड़ा फैसला लिया।
आज वहाँ का मंज़र देखकर आँखों में आँसू आ जाते हैं स्थानीय लोग खुद आगे बढ़कर, रोते-बिलखते हुए अपने ही हाथों से मस्जिद के उस प्रभावित हिस्से का मलबा हटा रहे हैं,सदियों पुरानी इस अज़ीम धरोहर को इस तरह कम होते देखना वहाँ के हर शख्स के लिए एक गहरे मानसिक और भावनात्मक सदमे जैसा है।
शहर में अमन-चैन कायम रखने और अपनी पाक जगह की गरिमा को महफूज रखने के लिए उज्जैन के उस समाज ने जो यह दर्दनाक समझौता किया है, वह उनकी सूझबूझ और बड़े सब्र की मिसाल है।
या रब्बुल आलमीन, उज्जैन के वो बेबस और लाचार बंदे आज तेरे सामने अश्कबार आँखों से खड़े हैं,ऐ मौला, अपने घर की हुरमत को बचाने के लिए जो लोग आज रो-रोकर वहाँ से मलबे का एक-एक पत्थर उठा रहे हैं, उनकी इस मजबूरी और लाचारी को देखना।
ऐ परवरदिगार, वो कमज़ोर बंदे हैं जो इस ऐतिहासिक इबादतगाह के उस हिस्से की पूरी हिफाज़त न कर सके, उनकी इस खता को माफ़ फरमाना,इलाही, उन लोगों के इस अज़ीम सब्र, उनकी पाक नीयत और इस तकलीफ़ को कबूल फरमा,इस मुश्किल और इम्तिहान की घड़ी में वहाँ के पूरे समाज को सब्र-ए-जमील अता कर, उनके दिलों को हौसला दे और इस मुकद्दस मस्जिद के बचे हुए हिस्से की अब तू खुद हिफाज़त फरमा।
बेशक, तू हर चीज़ पर कादिर है और दिलों के हाल को सबसे बेहतर जानने वाला है। आमीन।