Uttarakhand Trend - UT

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हालिया फैसलों ने देशभर में व्यापक चर्चा और बहस को जन्म दे दिया है। ति...
24/01/2026

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हालिया फैसलों ने देशभर में व्यापक चर्चा और बहस को जन्म दे दिया है। तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े अहम ऐलानों में उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर से जुड़े सभी कार्यों में केवल हिंदू कर्मचारियों की ही नियुक्ति की जाएगी, जबकि गैर-हिंदू कर्मचारियों को अन्य विभागों या स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। उनके अनुसार, यह निर्णय मंदिर की धार्मिक मर्यादा और परंपराओं की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है।

इसके साथ ही चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति में प्रस्तावित मुमताज़ होटल प्रोजेक्ट के लिए किए गए भूमि आवंटन को भी रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि तिरुपति केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, और इसकी आध्यात्मिक पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार का मानना है कि ऐसे व्यावसायिक प्रोजेक्ट मंदिर नगरी की पवित्रता पर असर डाल सकते हैं।

इतना ही नहीं, नायडू ने एक और बड़ा प्रस्ताव रखते हुए कहा कि भारत के हर राज्य की राजधानी में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी का मंदिर बनाया जाना चाहिए, ताकि देशभर में सनातन संस्कृति और आस्था को और मजबूत किया जा सके। उनके इस विचार को कुछ लोग सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग इसे राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

इन फैसलों और प्रस्तावों ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज कर दी है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम धार्मिक स्थलों की गरिमा और परंपराओं की रक्षा के लिए ज़रूरी हैं, वहीं आलोचक इसे संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से सवालों के घेरे में रख रहे हैं। साफ है कि चंद्रबाबू नायडू के ये ऐलान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर बड़े विमर्श का विषय बने रहेंगे।

🚨 बड़ी खबर | PG मेडिकल एडमिशन नियमों में बड़ा बदलावस्वास्थ्य मंत्रालय के एक हालिया आदेश के अनुसार PG मेडिकल सीटों (MD, M...
16/01/2026

🚨 बड़ी खबर | PG मेडिकल एडमिशन नियमों में बड़ा बदलाव

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक हालिया आदेश के अनुसार PG मेडिकल सीटों (MD, MS आदि) में प्रवेश के लिए SC, ST और OBC श्रेणी के उम्मीदवारों की न्यूनतम योग्यता (कटऑफ/परसेंटाइल) को समाप्त कर दिया गया है।

अब तक आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत योग्यता मानदंड निर्धारित था।
NEET-PG परीक्षा के कुल 800 अंकों में से लगभग 235 अंक लाना आवश्यक माना जाता था।

❗ अब क्या बदला?

नए आदेश के तहत:
आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए कटऑफ घटाकर 0 प्रतिशत कर दी गई है

यानी 0 अंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी भी, सीट उपलब्धता होने पर, PG मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए पात्र होगा।

⚠️ असली सवाल: मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल स्टैंडर्ड

PG मेडिकल शिक्षा वह स्तर है जहाँ डॉक्टर:

दिल का ऑपरेशन

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज

नवजात और बच्चों की जान बचाने
जैसी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हैं।

ऐसे में विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि:

क्या चिकित्सा जैसे जीवन-मृत्यु से जुड़े पेशे में न्यूनतम योग्यता मानदंड से समझौता किया जाना चाहिए?
डॉक्टरी एकमात्र ऐसा पेशा है जहाँ दक्षता (competence) और मानक (standards) से समझौता सीधे आम लोगों की जान को प्रभावित करता है।

🔍 बहस का केंद्र

क्या यह फैसला मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा?
क्या सामाजिक न्याय और पब्लिक सेफ्टी के बीच संतुलन बना रह पा रहा है?
क्या भविष्य में इसका असर मरीजों के भरोसे पर पड़ेगा?

📌 निष्कर्ष

यह मुद्दा किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि
👉 मेडिकल स्टैंडर्ड,
👉 मरीजों की सुरक्षा,
👉 और स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता से जुड़ा है।

इसी पर अब देशभर में गंभीर बहस शुरू हो चुकी है।


















Indian Medical Association Indian Doctors Ministry of Health and Family Welfare, Government of India

ईरान की सबसे बड़ी अल रसूल मस्जिद को ईरान के मुसलमानो ने जला दिया उनका कहना है इस्लाम की शिक्षा ने उनके जीवन को बर्बाद कर...
11/01/2026

ईरान की सबसे बड़ी अल रसूल मस्जिद को ईरान के मुसलमानो ने जला दिया उनका कहना है इस्लाम की शिक्षा ने उनके जीवन को बर्बाद कर दिया उनका कहना है महिलाओं को बुर्के में लपेटकर 1979 के बाद उनके जीवन बर्बाद कर दिए।
और पुरुषों नौजवानों को कला कौशल विज्ञान के क्षेत्र से रोक कर , उन्हें मुल्ले मौलवी हलाला हर तरह के बेजुबान काटकर खाने और आतंक खून खराबे में लगा दिया , जमीन से जन्नत आसमान तक केवल सेक्स सेक्स सेक्स ही दिमाग में भर दिया।
इसलिए इस्लामी शिक्षा अब हमको नहीं चाहिए इसीलिए ईरान के महिला पुरुष बच्चे नौजवान सब ईरान में इस्लाम से दूर होना चाहते हैं और इस्लाम में जाने से पहले के अपने मूल संस्कृती में वापस लौटना चाहते हैं।

भारत के कँवर्टेडो को भी सोचना चाहिए कि उनका मूल भारत है भारत की सभ्यता संस्कृति है 5,10 पीढ़ी पहले इस्लामी आक्रमण उन्माद में अपनी बहन बेटियों को बचाने के लिए #धर्म बदलने की मजबूरी होगी ठीक है लेकिन ईरान की तरह उन्हें अपने मूल जड़ों की ओर लौटना चाहिए ना की अरबियों से ज्यादा कट्टर होकर कन्वर्टेड होकर भी चाय से ज्यादा केतली गरम बने रहना चाहिए।

ईरान के कन्वर्टेड मुसलमानों ने दुनिया के कन्वर्टेड मुसलमानों को अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक मौका दिया है।

ईरान में बदलाव अब कोई नहीं रोक सकता क्योंकि उन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय ले लिया है भारत के कन्वर्टेड भी विचार करें उन्होंने अरबी नकल करने में अपनी क्या हालत कर ली।

08/01/2026

उत्तराखंड बड़ी खबर | स्वामी दर्शन भारती का बयान आया सामने।

देर रात देहरादून पहुंची उर्मिला सनावर एक बार फिर रहस्यमय तरीके से लापता हो गई हैं। इस पूरे मामले में उनके साथ देहरादून पहुंचे स्वामी दर्शन भारती ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है।

स्वामी दर्शन भारती ने स्पष्ट किया है कि वह पुलिस द्वारा की जा रही सभी जांचों में पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही उन्होंने इस पूरे विवाद और हंगामे के लिए पूर्व विधायक सुरेश राठौर को जिम्मेदार ठहराया है।

स्वामी दर्शन भारती का कहना है कि यदि सुरेश राठौर इस तरह के बयान न देते, तो यह मामला इतना तूल न पकड़ता। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता जनता के सामने आ सके।

फिलहाल उर्मिला सनावर की गुमशुदगी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।











अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक अनदेखा सचअंकिता भंडारी ने अपनी हत्या से पूर्वअपने एक मित्र से व्हाट्सएप बातचीत में “VIP” का ...
06/01/2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक अनदेखा सच

अंकिता भंडारी ने अपनी हत्या से पूर्व
अपने एक मित्र से व्हाट्सएप बातचीत में “VIP” का उल्लेख किया था।
यह कोई अफ़वाह नहीं, बल्कि एक दर्ज तथ्य है।

यदि सच जानना है,
यदि आधे-अधूरे नैरेटिव से आगे बढ़ना है,
तो यह रिपोर्ट पढ़ना ज़रूरी है।

सवाल आज भी वही है
VIP कौन था?
और सच को अब तक पूरी तरह सामने क्यों नहीं आने दिया गया?

यह किसी एक नाम या पार्टी का मुद्दा नहीं है।
यह न्याय का सवाल है,
एक बेटी की आवाज़ का सवाल है।







SC/ST/OBC उम्मीदवारों को जनरल कोटे में अवसर: सुप्रीम कोर्ट का अहम संदेश, आरक्षण बनाम मेरिट की बहस फिर तेज:नई दिल्ली।सुप्...
06/01/2026

SC/ST/OBC उम्मीदवारों को जनरल कोटे में अवसर: सुप्रीम कोर्ट का अहम संदेश, आरक्षण बनाम मेरिट की बहस फिर तेज:

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवार यदि जनरल (ओपन) कैटेगरी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, तो उन्हें केवल आरक्षित श्रेणी तक सीमित नहीं किया जा सकता। ऐसे उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में चयन का पूरा अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट का यह दृष्टिकोण आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने से जुड़ा नहीं है, बल्कि उसे संवैधानिक और न्यायपूर्ण तरीके से लागू करने की दिशा में माना जा रहा है। इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर आरक्षण, मेरिट और सामाजिक न्याय को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आई सुनवाइयों में यह प्रश्न उठा कि
यदि कोई SC/ST/OBC उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल कैटेगरी के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन करता है, तो क्या उसे फिर भी आरक्षित सीट पर ही गिना जाएगा?

इस पर अदालत का रुख साफ रहा—
आरक्षण कोई बाध्यता नहीं, बल्कि अवसर है।
यदि कोई उम्मीदवार सामान्य प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकता है, तो उसे ओपन कैटेगरी में गिने जाने से रोका नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक तर्क
अदालत ने अपने दृष्टिकोण में कहा कि:
:अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) सभी नागरिकों को बराबरी का अवसर देता है।
:अनुच्छेद 15 और 16 के तहत दिया गया आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन को संतुलित करने का माध्यम है, न कि योग्यता को दबाने का औज़ार।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार,
“आरक्षण का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों को पीछे धकेलना नहीं, बल्कि वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।

व्यावहारिक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए:
जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ: 80 अंक
SC/OBC उम्मीदवार के अंक: 85

👉 ऐसे में उस उम्मीदवार को
आरक्षित सीट पर नहीं,
बल्कि जनरल सीट पर चयन मिलना चाहिए।
इससे आरक्षित कोटे की सीट किसी और जरूरतमंद उम्मीदवार के लिए उपलब्ध हो जाती है।

आलोचनाएं और चिंताएं (Demerits)
🔸 1. जनरल वर्ग में असंतोष

जनरल वर्ग के कुछ लोगों का मानना है कि इससे उनकी सीटें और सीमित होती जा रही हैं।

🔸 2. गलत व्याख्या का खतरा

कुछ समूह इसे आरक्षण खत्म करने की दिशा में कदम बताने लगते हैं, जबकि ऐसा नहीं है।

🔸 3. राजनीतिक इस्तेमाल

यह मुद्दा अक्सर चुनावी राजनीति और ध्रुवीकरण का हथियार बन जाता है।

निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ संदेश देता है कि आरक्षण और मेरिट एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं

बल्कि दोनों का उद्देश्य एक ही है— समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज

यह फैसला बताता है कि योग्य व्यक्ति की पहचान जाति से नहीं, क्षमता से होनी चाहिए, और साथ ही यह भी कि समाज के कमजोर वर्गों को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।

परन्तु जनरल कैटिगरी के बारे में कौन सोचेगा भगवान जाने 🙏🙏












 #हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर सख्ती?पवित्रता बनाए रखने की जरूरत: Pushkar Singh Dhami  CM.देहरादून। उत्तराखंड क...
05/01/2026

#हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर सख्ती?
पवित्रता बनाए रखने की जरूरत: Pushkar Singh Dhami CM.

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा है कि सरकार संत नगरी की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। हाल के दिनों में हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री के इस बयान को अहम माना जा रहा है।

सीएम धामी ने कहा कि हरिद्वार करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां की परंपराओं, मर्यादाओं और धार्मिक वातावरण को सुरक्षित रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी समुदाय के खिलाफ भेदभाव सरकार का उद्देश्य नहीं है, लेकिन धार्मिक स्थलों की पवित्रता और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ संगठनों ने इसे आस्था की रक्षा से जोड़कर समर्थन दिया है, वहीं कुछ वर्गों ने इस पर संवैधानिक अधिकारों और समानता के सिद्धांतों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि हरिद्वार में लागू किसी भी नियम या दिशा-निर्देश का उद्देश्य केवल शांति, व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना है। इस मुद्दे पर आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।





महिलाओं के सम्मान पर कोई समझौता नहीं।बिहार राज्य महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान पर कड़ा रुख अपनाया।यह सिर्...
05/01/2026

महिलाओं के सम्मान पर कोई समझौता नहीं।
बिहार राज्य महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान पर कड़ा रुख अपनाया।
यह सिर्फ बिहार नहीं, पूरे देश की महिलाओं का सवाल है।

#महिला_सम्मान



#नारी_सम्मान


कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर का बयान:अगर मेरे पिता ने उस लड़की को बुरी नज़र से भी देखा है, तो उन्हें फांसी की सज़...
01/01/2026

कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर का बयान:

अगर मेरे पिता ने उस लड़की को बुरी नज़र से भी देखा है, तो उन्हें फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए।

पीड़िता का चाचा हिस्ट्री -शीटर अपराधी है, जो फिलहाल तिहाड़ जेल में 17 मामलों के साथ बंद है। उसने मेरे चाचा पर भी हमला किया था।

पीड़िता के परिवार से हमारी बहुत पुरानी दुश्मनी है। यह दुश्मनी इस मामले से पहले की है।

मीडिया को पीड़िता से एक भी सबूत मांगना चाहिए जिससे यह साबित हो कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है।

पीड़िता ने पहले अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, और ढाई महीने बाद उसने जानबूझकर मेरे पिता का नाम भी उसमें शामिल कर दिया।

जब इन्वेस्टीगेशन शुरू हुआ था, तब मेरे पिता ने नार्को टेस्ट करवाने की मांग की थी लेकिन पीड़िता ने नार्को के लिए मना कर दिया। मेरे पिता की CDR है उस दिन की फोटोज हैं , हमारे पास ऐसे सारे प्रूफ हैं, जिस दिन की यह घटना बतायी जा रही है, उस दिन मेरे पिता वहाँ (पीड़िता के बताये गए लोकेशन) पर मौजूद ही नहीं थे और शुरुआत से लेकर अब तक पीड़िता अपनी कहानी बदलती जा रही है।

अंकिता केस में VIP बवाल: भाजपा नेत्री किरण शर्मा ने पार्टी से दिया इस्तीफा।
31/12/2025

अंकिता केस में VIP बवाल: भाजपा नेत्री किरण शर्मा ने पार्टी से दिया इस्तीफा।

24/12/2025

( #अंकिता ) हत्याकांड: उत्तराखंड कांग्रेस की दिल्ली में गूंज, न्याय की मांग तेज उत्तराखंड के पॉपुलर होटल मामले में अंकित भंडारी की संदिग्ध हत्या का केस अब दिल्ली की सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गणेश कोडियाल जी ने दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग कर इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो रही है, जहां लोग न्याय की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में गणेश गोदियाद ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BJP सरकार आरोपी बचाने में लगी है और CBI को दबाव में काम करने दे रही है। गोदीयाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात का जिक्र करते हुए न्याय की मांग की, साथ ही राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की। कांग्रेस ने इसे 'राजनीतिक हत्या' करार दिया है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है।

ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों यूजर्स पोस्ट शेयर कर रहे हैं। युवा वर्ग खासतौर पर आंदोलनकारी नजर आ रहा है, जो सरकार की लापरवाही पर सवाल उठा रहा। विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताया है।यह घटना उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। क्या दिल्ली की हुंकार न्याय दिला पाएगी? सोशल मीडिया यूजर्स कमेंट करें – क्या आपको लगता है कि CBI को और सख्ती बरतनी चाहिए?

#उत्तराखंडकांग्रेस #उत्तराखंड_न्याय_दो

मरोड़ा गांव में  #भालू का हमला:  #उत्तराखंड के  #नारायणबगड में बाघ-भालू का बढ़ता आतंक, पलायन का प्रमुख कारण नारायणबगड़, उ...
22/12/2025

मरोड़ा गांव में #भालू का हमला: #उत्तराखंड के #नारायणबगड में बाघ-भालू का बढ़ता आतंक, पलायन का प्रमुख कारण नारायणबगड़, उत्तराखंड, 22 दिसंबर 2025: उत्तराखंड के नारायणबगड़ तहसील के मरोड़ा गांव में एक भालू ने किसान रामेश्वर (नाम परिवर्तित) पर हमला कर दिया। खेत में काम करते हुए हुए हमले में उन्हें चेहरे और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों ने हंगामा मचाकर भालू को भगाया और घायल को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों ने बताया कि उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन पूर्ण उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

यह घटना पहाड़ी जिलों में बाघ और भालू के आतंक की नवीनतम कड़ी है। पिछले 15 दिनों में राज्यभर में 50 से अधिक वन्यजीव हमले दर्ज हो चुके हैं, जिसमें नारायणबगढ़, कालाआंब और आसपास के क्षेत्र सबसे प्रभावित हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों की अत्यधिक कटाई, अवैध शिकार और मानव अतिक्रमण से जंगली जानवर भोजन-आश्रय की तलाश में गांवों में घुस रहे हैं।

“पलायन का बड़ा कारण बन रहा वन्यजीव आतंक”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार हो रहे हमलों ने जीवन को दुष्कर बना दिया है, जिससे पलायन तेज हो गया है। नारायणबगढ़ ब्लॉक में पिछले दो वर्षों में 20% से अधिक परिवार मैदानी इलाकों की ओर पलायन कर चुके हैं।

जिला वन अधिकारी ने कहा, "वन क्षेत्र 30% सिकुड़ चुका है। हम सोलर फेंसिंग, जागरूकता शिविर और रिलोकेशन पर काम कर रहे हैं, लेकिन तत्काल केंद्रीय सहायता जरूरी है।"नारायणबगड़ विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विशेष टास्क फोर्स गठन और मुआवजा बढ़ाने की मांग की है। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में वनकर्मियों की गश्त बढ़ा दी है और किसानों को रात्रिकालीन खेती से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि यदि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर ठोस नीति नहीं बनी, तो पलायन और जानमाल की हानि और बढ़ेगी।

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