31/12/2025
JUSTICE FOR ANGEL CHAKMA
देहरादून, उत्तराखंड में जो हुआ
वो सिर्फ एक अपराध नहीं —
हमारे समाज की सोच पर एक काला धब्बा है।
एंजेल चकमा, उम्र सिर्फ 24 साल,
त्रिपुरा के चकमा समुदाय से थे।
वो देहरादून में MBA की पढ़ाई कर रहे थे,
एक आम छात्र — सपनों के साथ।
❗ क्या हुआ?
9 दिसंबर 2025 को
एंजेल अपने छोटे भाई के साथ थे,
तभी कुछ लोगों ने उनके चेहरे और पहचान को लेकर
नस्लीय गालियाँ दीं —
“चिंकी”, “चाइनीज़” जैसे शब्द बोले गए।
जब एंजेल ने इसका विरोध किया,
तो बात बहस से आगे बढ़ी —
उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई
और चाकू से हमला किया गया।
एंजेल को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।
उन्होंने 17 दिन तक ज़िंदगी से लड़ाई लड़ी,
लेकिन 26 दिसंबर 2025 को
इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
⚖️ पुलिस और जांच
मामला हत्या (Murder) का दर्ज हुआ
SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई गई
कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए
मुख्य आरोपी अब भी फरार, जिस पर इनाम घोषित है
🕯️ ये सिर्फ एक मौत नहीं है
ये सवाल है हम सब से:
❓ क्या नॉर्थ ईस्ट के लोग भारत में सुरक्षित हैं?
❓ क्या किसी का चेहरा देखकर उसे “विदेशी” कहना सही है?
❓ क्या नस्लीय गालियाँ आज भी “मजाक” मानी जाएँगी?
नॉर्थ ईस्ट भारत का हिस्सा है।
वहाँ के लोग भारतीय हैं — मेहमान नहीं।
✊ इंसाफ की मांग
दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले
नस्लीय हिंसा को हेट क्राइम माना जाए
ताकि किसी और एंजेल को
सिर्फ अपनी पहचान की वजह से
जान न गंवानी पड़े
🕯️ Rest in Peace, Angel Chakma
✊ इंसाफ सिर्फ कानून से नहीं, सोच बदलने से मिलेगा