31/05/2026
भारतीय मानव कल्याण समिति ने विनायक मार्ग स्थित समिति कार्यालय पर बड़े ही धूमधाम से पुण्य श्लोक अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती मनाई।विचार गोष्ठी का शुभारंभ देवी अहिल्याबाई होलकर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन के साथ मुख्य अतिथि मुख्य वक्ता कार्यक्रम अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से किया।
समिति प्रबन्धक डॉ टीएस पाल ने बताया चन्दौसी में समिति विगत 25 वर्षों से निरन्तर अहिल्याबाई होल्कर की जयंती मना रही है।उन्होंने कहा
अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की महानतम महिला शासकों में गिनी जाती हैं। उन्हें “लोकमाता” और “पुण्यश्लोक” की उपाधि उनके धर्म, न्याय और जनकल्याणकारी कार्यों के कारण मिली। उनका जीवन त्याग, साहस, सेवा और आदर्श शासन का अद्भुत उदाहरण है। अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गाँव में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे गाँव के पाटिल थे। बचपन से ही अहिल्याबाई धार्मिक, बुद्धिमान और दयालु स्वभाव की थीं। कहा जाता है कि उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर मराठा सेनापति मल्हार राव होल्कर ने उनका विवाह अपने पुत्र खंडेराव होल्कर से कराया।
मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ राजकुमार गोयल ने कहा अहिल्याबाई का अल्प आयु में उनका विवाह होल्कर राजघराने में हुआ। विवाह के बाद उन्होंने राज्य व्यवस्था और प्रशासन की शिक्षा प्राप्त की। 1754 में उनके पति खंडेराव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। बाद में ससुर मल्हार राव होल्कर का भी निधन हो गया। इन कठिन परिस्थितियों में अहिल्याबाई ने साहसपूर्वक राज्य की जिम्मेदारी संभाली।
मुख्य वक्ता एडवोकेट चंद्रपाल सिंह धनगर ने कहा 1767 में अहिल्याबाई होल्कर मालवा राज्य की शासिका बनीं। उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। उनका शासन न्यायप्रिय, धर्मनिष्ठ और जनहितकारी माना जाता है। वे प्रतिदिन जनता की समस्याएँ सुनती थीं और निष्पक्ष निर्णय देती थीं। उनके शासनकाल में मालवा राज्य समृद्ध और सुरक्षित बना।
विशिष्ट अतिथि ठेकेदार प्रेमपाल सिंह ने कहा अहिल्याबाई होल्कर ने पूरे भारत में मंदिरों, घाटों,धर्मशालाओं और कुओं का निर्माण कराया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर तथा अनेक तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण कराया। वे समाज सेवा और धार्मिक सहिष्णुता की प्रतीक थीं। कवि सुखपाल गौर, दिनेशपाल सिंह"दिव्य" एवम डॉ जयशंकर दुबे ने अहिल्याबाई की वीरगाथा महिमा मंडन काव्यपाठ के माध्यम से किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मुकेश कुमार वार्ष्णेय ने एवम संचालन राजवीर सिंह पाल ने किया।सुशील कुमार भोलेनाथ,गिर्राज किशोर पाल,डॉ एम एल पाल,राजेश पाल,डॉ राजू सिंह पाल,रतन वार्ष्णेय,राहुल पाल,रामाशंकर गौड़,वीना वार्ष्णेय,दुर्गेशवरी ,रुचिका गुप्ता,बीपी तिवारी,सत्यपाल सिंह,श्यामसुंदर दुबे,रोशनलाल,आकाश शर्मा, राजेश गुप्ता,ओमप्रकाश गुप्ता,सुभाष गुप्ता,मुनेश धनगर,केजी गुप्ता आदि उपस्थित रहे।