20/08/2026
भारत में "आरक्षण हटाओ आंदोलन" (Anti-Reservation Movement) समय-समय पर जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरोध या उसमें बदलाव की मांग को लेकर चलाए गए आंदोलनों को संदर्भित करता है।
मुख्य कारण और तर्क
योग्यताओं की अनदेखी (Meritocracy): विरोध करने वालों का मानना है कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में चयन का आधार केवल योग्यता (Merit) और प्रतिभा होना चाहिए, न कि जाति।
आर्थिक आधार पर आरक्षण: प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग रहती है कि आरक्षण का आधार 'जाति' के बजाय 'आर्थिक स्थिति' (Economic status) होना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को लाभ मिले।
समान अवसर: सामान्य वर्ग (General Category) के युवाओं का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था से उन्हें समान अवसर नहीं मिलते और उच्च अंक लाने के बावजूद वे अवसर से वंचित रह जाते हैं।
ऐतिहासिक और प्रमुख आंदोलन
1990 का मंडल विरोधी आंदोलन: जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण (मंडल आयोग की सिफारिशें) लागू किया, तब देशभर (विशेषकर उत्तर भारत) के छात्रों ने इसका व्यापक विरोध किया था।
2006 का यूथ फॉर इक्वेलिटी (Youth for Equality): केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (जैसे IIT, IIM, AIIMS) में OBC आरक्षण लागू करने के निर्णय के खिलाफ डॉक्टरों और छात्रों ने देशव्यापी प्रदर्शन किए थे।
विभिन्न राज्यों में आंदोलन: समय-समय पर विभिन्न राज्यों में भी सामान्य वर्ग के संगठनों और छात्र संघों द्वारा जातिगत आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन होते रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय की समयावधि और सीमाओं (जैसे 50% की सीमा) के निर्देशों के तहत आरक्षण व्यवस्था लागू है। हालांकि, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% EWS आरक्षण लागू होने के बाद बहस के आयामों में कुछ बदलाव आया है, लेकिन जाति आधारित आरक्षण बनाम योग्यता/आर्थिक आधार की बहस आज भी भारतीय राजनीति और समाज का एक संवेदनशील विषय बनी हुई है। Part 8