Me and My Loving World

Me and My Loving World I hate your smile. I hate the way your teeth shine perfectly in the light but your eyes betray that smile as fake.

I hate how your smile never conveys a true happiness. I hate how your smile though so beautiful at face value “Being yourself means shedding all the layers of looking good, wanting to be liked, being scared to stand out, and trying to be who you think people want you to be.”

जब भी मैने स्वयं को दुखो में लिप्त पाया तब मेरे मन ने तुम्हे स्मरण किया ......मन...❣️
10/05/2026

जब भी मैने स्वयं को दुखो में लिप्त पाया
तब मेरे मन ने तुम्हे स्मरण किया ......

मन...❣️

10/05/2026

आज मदर्स डे पर किसी ने अपने पापा का शुक्रिया अदा नहीं किया इतनी अच्छी मम्मी ढूंढने के लिए एहसान फरामोश बच्चों😂😂😂

कर्म का सिद्धांत अत्यंत कठोर है। जहाँ अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं, वहीं बुरे कर्म उसे प...
08/05/2026

कर्म का सिद्धांत अत्यंत कठोर है। जहाँ अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं, वहीं बुरे कर्म उसे पतन की ओर ले जाते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार - मनुष्य को किए हुए शुभ या अशुभ कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरित मानस के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भुगतना पड़ता है। इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि हम अपने कर्मों का लेखा-जोखा करें। हमारा अगला जन्म किस प्राणी के रूप में होगा, यह सब कुछ हमारे कर्मों पर ही निर्भर करता है। अनेक जन्मों में किए हुए कर्म हमारे अंत:करण में संग्रहित रहते हैं। वे संचित कर्म कहलाते हैं और उनसे ही प्रारब्ध बनता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्म को प्रधानता देते हुए यहाँ तक स्पष्ट किया है कि व्यक्ति की यात्रा जहाँ से छूटती है, अगले जन्म में वह वहीं से प्रारंभ होती है।

जो प्रकृति के नियमों का पालन करता है, वह परमात्मा के करीब है। लेकिन ध्यान रहे.. यदि परमात्मा भी मनुष्य के रूप में अवतरित होता है, तो वह उन सारे नियमों का पालन करता है.. जो सामान्य मनुष्यों के लिए हैं। लौकिक और पारमार्थिक कर्मों के द्वारा उस परमात्मा का पूजन तो करना चाहिए, पर उन किए हुए कर्मों और संसाधनों के प्रति अपनी आसक्ति न बढ़ाएँ। मात्र यह मानें कि मेरे पास जो कुछ है, उस परमात्मा का दिया हुआ है। हम निमित्त मात्र हैं। तो बात बनते देर नहीं लगती है। कर्म को पूजा मानते हुए व्यक्ति जब राग-द्वेष को मिटा देता है, तब उसके स्वभाव की शुद्धि होती है। उसके लिए समूची वसुधा एक परिवार दिखती है। उसका हर कर्म समाज के हित के लिए होता है। साधारण तौर पर हम कह सकते हैं कि कर्म किए बगैर व्यक्ति किसी भी क्षण नहीं रह सकता है। कर्म हमारे अधीन हैं, उसका फल नहीं। महापुरुष और ज्ञानी जन हमेशा से कहते रहे हैं कि अच्छे कर्मों को करने और बुरे कर्मों का परित्याग करने में ही हमारी भलाई है। किसी संत से एक व्यक्ति ने पूछा कि आपके जीवन में इतनी शांति, प्रसन्नता और उल्लास कैसे है ? इस पर संत ने मुस्कराते हुए कहा था कि अपने कर्मों के प्रति यदि आप आज से ही सजग और सतर्क हो जाते हैं, तो यह सब आप भी पा सकते हैं। सारा खेल कर्मों का है। हम कर्म अच्छा करते नहीं और फल बहुत अच्छा चाहते हैं। यह भला कैसे हो सकता है ?

🙏🏻‼️ॐ गं गणपतए नमो नमः‼️🚩

सदैव सकारात्मक रहें ! 🙏🏻महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी, तब वो बड़े दुःखी रहते थे ! पर ऐसे समय में उनको ए...
08/05/2026

सदैव सकारात्मक रहें ! 🙏🏻

महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी, तब वो बड़े दुःखी रहते थे ! पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से हौंसला मिलता था, जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था !

और वह था श्रवण के पिता का श्राप..

दशरथ जब-जब दुःखी होते थे, तो उन्हें श्रवण के पिता का दिया श्राप याद आ जाता था... (कालिदास ने रघुवंशम में इसका वर्णन किया है)

श्रवण के पिता ने ये श्राप दिया था कि ''जैसे मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के मर रहा हूँ, वैसे ही तू भी तड़प-तड़प कर मरेगा.....''

दशरथ को पता था कि ये श्राप अवश्य फलीभूत होगा और इसका मतलब है कि मुझे इस जन्म में तो जरूर पुत्र प्राप्त होगा... (तभी तो उसके शोक में मैं तड़प के मरूँगा)
यानि यह श्राप दशरथ के लिए संतान प्राप्ति का सौभाग्य लेकर आया..
ऐसी ही एक घटना सुग्रीव के साथ भी हुई...
वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि सुग्रीव जब माता सीता की खोज में वानर वीरों को पृथ्वी की अलग- अलग दिशाओं में भेज रहे थे.. तो उसके साथ-साथ उन्हें ये भी बता रहे थे कि किस दिशा में तुम्हें कौन सा स्थान या देश मिलेगा और किस दिशा में तुम्हें जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिये...

प्रभु श्रीराम सुग्रीव का ये भौगोलिक ज्ञान देखकर हतप्रभ थे...

उन्होंने सुग्रीव से पूछा कि सुग्रीव तुमको ये सब कैसे पता...?

तो सुग्रीव ने उनसे कहा कि.. “मैं बाली के भय से जब मारा-मारा फिर रहा था, तब पूरी पृथ्वी पर कहीं शरण न मिली... और इस चक्कर में मैंने पूरी पृथ्वी छान मारी और इसी दौरान मुझे सारे भूगोल का ज्ञान हो गया..”
अब अगर सुग्रीव पर ये संकट न आया होता, तो उन्हें भूगोल का ज्ञान नहीं होता और माता जानकी को खोजना कितना कठिन हो जाता...
इसीलिए किसी ने बड़ा सुंदर कहा है -
"अनुकूलता भोजन है, प्रतिकूलता विटामिन है और चुनौतियाँ वरदान हैं और जो उनके अनुसार व्यवहार करे, वही पुरुषार्थी है।
ईश्वर की तरफ से मिलने वाला हर एक पुष्प अगर वरदान है, तो हर एक काँटा भी वरदान ही समझें।
मतलब.. अगर आज मिले सुख से आप खुश हो, तो कभी अगर कोई दुख, विपदा, अड़चन आ जाए.. तो घबरायें नहीं ! क्या पता.. वो अगले किसी सुख की तैयारी हो..

इसलिए हर परिस्थिति में सदैव सकारात्मक रहें !
हमेशा याद रहे -
दुनिया बनाने वाला ईश्वर सदैव आपके साथ है !!

🙏🏻‼️जय श्री राम‼️🚩

कैसे करें निगेटिव थॉट्स को पॉजिटिव में कन्वर्ट ?"हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं !!"Law Of Attraction (LOA) अर्थात् आकर्...
08/05/2026

कैसे करें निगेटिव थॉट्स को पॉजिटिव में कन्वर्ट ?

"हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं !!"

Law Of Attraction (LOA) अर्थात् आकर्षित करने का नियम कहता है कि हम जो भी सोचते हैं, उसे अपने जीवन में आकर्षित करते हैं। फिर चाहे वो चीज अच्छी हो या बुरी।

उदाहरण के लिए - अगर कोई सोचता है कि वो हमेशा परेशान रहता है, बीमार रहता है और उसके पास पैसों की कमी रहती है, तो असल जिंदगी में भी ब्रह्माण्ड घटनाओं को कुछ ऐसे सेट करता है कि उसे अपने जिंदगी में परेशानी, बीमारी और तंगी का सामना करना पड़ता है।

वहीं दूसरी तरफ अगर वो सोचता है कि वो खुशहाल है, सेहतमंद है और उसके पास खूब पैसे हैं, तो LOA की वजह से असल जिंदगी में भी उसे खुशहाली, अच्छी सेहत और समृद्धि देखने को मिलती है।

“वास्तव में हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं !”
“हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।”

जो लोग LOA मानते हैं, वे समझते हैं कि Positive सोचना कितना ज़रूरी है। वे जानते हैं कि हर एक Negative Thought हमारी Life को Positivity से दूर ले जाती है और हर एक Positive Thought Life में ख़ुशियाँ लाती है।

और किसी ने कहा भी है - ”अगर इंसान जानता कि उसकी सोच कितनी पावरफुल है, तो वो कभी निगेटिव नहीं सोचता !”
पर क्या हमेशा Positive सोचना संभव है ?
यहीं पर काम आते हैं हमारे लेकिन, किन्तु, परन्तु...

दोस्तों, वैसे तो ये शब्द ज्यादातर Negative Context में Use होते हैं।
आप लोगों को कहते सुन सकते हैं :
मैं सफल हो जाता, लेकिन...
सब सही चल रहा था, किन्तु... etc
पर हम इन शब्दों का प्रयोग Negative Sentences के अंत में करके उन्हें Positive में Convert कर सकते हैं।

कुछ Examples से समझते हैं :
जैसे ही आपके मन में विचार आये - “दुनिया बहुत बुरी है ”, तो आप इतना कहकर या सोचकर रुके नहीं,
तुरंत Realise करें कि आपने एक Negative Sentence बोला है, इसलिए तुरंत Alert हो जाएँ और Sentence को कुछ ऐसे पूरा करें -
”दुनिया बहुत बुरी है, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। बहुत से अच्छे लोग समाज में अच्छाई का बीज बो रहे हैं और सब ठीक हो रहा है।“
कुछ और Examples देखते हैं :
मैं पढ़ने में कमजोर हूँ !
लेकिन अब मैंने मेहनत शुरू कर दी है और जल्द ही मैं पढ़ाई में भी अच्छा हो जाऊँगा !
मेरा Boss बहुत #%$% है !
पर धीरे-धीरे वो बदल रहे हैं और उनको ज्ञान भी बहुत है, मुझे काफी कुछ सीखने को मिलता है उनसे।
मेरे पास पैसे नहीं हैं !
लेकिन मुझे पता है मेरे पास बहुत पैसा आने वाला है ! इतना कि न मैं सिर्फ अपने, बल्कि अपने अपनों के भी सपने पूरे कर सकूँ !
मेरे साथ हमेशा बुरा होता है !
लेकिन मैं देख रहा हूँ कि पिछले कुछ दिनों से सब अच्छा अच्छा ही हो रहा है, और आगे भी होगा !
मेरे बच्चे की शादी नहीं हो रही !
परंतु अब मौसम शादियों का है ! भाग्य ने उसके लिए बहुत ही बेहतरीन रिश्ता सोच रखा होगा, जो जल्द ही तय होगा !

प्यारे दोस्तों..
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात है ये Realise करना कि कब आपके मन में एक Negative Thought आई है और तुरंत Alert होकर...
इसे “लेकिन” लगा कर Positive में Convert कर देना
और ये आपको सिर्फ तब नहीं करना, जब आप किसी के सामने बात कर रहे हो।
सबसे अधिक तो आपको ये अकेले रहते हुए अपने साथ करना है, आपको अपनी सोच पर ध्यान देना है, Aware रहना है कि आपकी Thoughts Positive हैं या Negative ??
और जैसे ही Negative Thought आये, आपको तुरंत उसे Positive में Mould कर देना है।

और एक चीज.. आप इस बात की चिंता ना करें कि आपने ‘लेकिन‘ के बाद जो लाइन जोड़ी है, वो सही है या गलत।
आपको तो बस एक सकारात्मक वाक्य जोड़ना है, और आपका Subconscious Mind उसे ही सही मानेगा और ब्रह्माण्ड आपके जीवन में वैसे ही अनुभव प्रस्तुत करेगा !
ये तो आसान लग रहा है !!

हो सकता है ये आपको बड़ा Simple लगे, कुछ लोगों के लिए वाकई में हो भी, पर Maximum लोगों के लिए Thoughts को Control करना और उनके प्रति Aware रहना चैलेंजिंग होता है।

इसलिए अगर आप इस तरीके को Practice करते वक़्त कई बार Negative Thoughts को Miss भी कर जाते हैं, तो No Need to Worry.

जैसे तमाम चीजों को Practice से सही किया जा सकता है, वैसे ही Thoughts को भी Practice से Positivity me Mould किया जा सकता है।

🙏🏻‼️हरि ॐ नमः शिवाय‼️🚩

08/05/2026

है ना आश्चर्यकारी बात... विधवा हुई औरतों को उम्र भर के लिये श्रंगार त्यागना पड़ता था, पुरुषों के रंगीन वस्त्रों पर किसी ने गौर नहीं किया। मन...

प्रेम जब सच्चा होता है,तो उसमें अधिकार कम और समर्पण अधिक होता है।लेकिन जब उसी प्रेम का तिरस्कार मिलता है,तो शब्द नहीं… आ...
08/05/2026

प्रेम जब सच्चा होता है,
तो उसमें अधिकार कम और समर्पण अधिक होता है।
लेकिन जब उसी प्रेम का तिरस्कार मिलता है,
तो शब्द नहीं… आत्मा तक घायल हो जाती है।

जिसे अपना मानकर हर दर्द सहा,
जिसके लिए खुद को बदल दिया,
जब वही व्यक्ति आपके भावों की कीमत ना समझे,
तब इंसान टूटता नहीं… भीतर से शांत हो जाता है।

तिरस्कार प्रेम को खत्म नहीं करता,
बल्कि यह सिखाता है कि
हर मुस्कुराहट के पीछे अपनापन नहीं होता।

फिर भी सच्चा प्रेम करने वाले
नफरत करना नहीं सीखते,
क्योंकि उनका प्रेम स्वार्थ नहीं,
एक पवित्र भावना होता है।

“प्रेम का अपमान सह लेना आसान है,
पर जिस दिल से प्रेम किया हो,
उससे दूरी बना लेना सबसे कठिन होता है…”

मेरी बिगडी आदतों में शुमार है आज़ भीतुम्हें सोचना तुम्हें चाहना और चाहते रहना....!!मन...❣️
07/05/2026

मेरी बिगडी आदतों में शुमार है आज़ भी
तुम्हें सोचना तुम्हें चाहना और चाहते रहना....!!

मन...❣️

🌷🌿मोहब्बत और दोस्ती साबित नहीं की जाती बस निभाई जाती है🌷🌿
06/05/2026

🌷🌿मोहब्बत और दोस्ती साबित नहीं की जाती
बस निभाई जाती है🌷🌿

मेरे अंदर का सबसे दयालु पहलू तब सामने आता है,जब कोई मुझे दुख पहुँचाने के बाद वापस आता है,और मैं उनसे उसी उत्साह और सम्मा...
06/05/2026

मेरे अंदर का सबसे दयालु पहलू तब सामने आता है,
जब कोई मुझे दुख पहुँचाने के बाद वापस आता है,
और मैं उनसे उसी उत्साह और सम्मान के साथ
मिलता हूँ और बात करता हूँ

05/05/2026

हम ऐसे दौर में है जहां पता ही नहीं चलता
कि सामने बैठा इंसान दोस्त है या सांप🌻❤️

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