02/09/2026
एक तारे की पूंछ इतनी लंबी है कि प्रकाश को भी उसे पार करने में 13 साल लग जाएंगे?
आपने आसमान में तारे टूटते हुए देखे होंगे जिनकी एक छोटी सी चमकदार लकीर बनती है और कुछ ही सेकंड में गायब हो जाती है। लेकिन सोचिए क्या हो अगर कोई तारा हमेशा के लिए अपने पीछे एक विशाल पूंछ छोड़ता चले और वह पूंछ इतनी लंबी हो कि प्रकाश को भी उसे पार करने में 13 साल लग जाएं? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है,यह सच में मौजूद एक तारा है,जिसका नाम है मीरा।
मीरा तारा है क्या?
मीरा एक बहुत पुराना तारा है,जिसे वैज्ञानिक 400 साल से जानते हैं। यह व्हेल नाम के तारामंडल में स्थित है और हमसे लगभग 350 प्रकाश वर्ष दूर है। मीरा अपने जीवन के आखिरी दौर में है,इसे लाल दानव तारा कहा जाता है। जैसे हम इंसान बुढ़ापे में कमजोर होते जाते हैं,वैसे ही मीरा भी अपने अंदर की गैस और धूल को लगातार अंतरिक्ष में उड़ा रहा है।
पूंछ कैसे बनी?
मीरा तारा अंतरिक्ष में बहुत तेज़ रफ्तार से करीब 291000 मील प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ रहा है। जैसे कोई तेज़ रफ्तार गाड़ी धूल भरी सड़क पर पीछे धूल का एक बादल छोड़ जाती है,वैसे ही मीरा भी अपने पीछे गैस और धूल की एक लंबी लकीर छोड़ता जा रहा है। इसे और आसानी से समझें तो जैसे कोई जेट प्लेन आसमान में उड़ते हुए अपने पीछे एक सफेद धुएं की लकीर छोड़ जाता है,ठीक वैसे ही मीरा तारा भी अपने पीछे एक तारकीय पूंछ छोड़ रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि प्लेन की पूंछ कुछ मिनटों में गायब हो जाती है जबकि मीरा की पूंछ हज़ारों सालों से बन रही है।
पूंछ कितनी बड़ी है?
अब असली चौंकाने वाली बात यह पूंछ 13 प्रकाश वर्ष लंबी है। इसका मतलब है कि अगर आप इस पूंछ के एक सिरे से रोशनी की किरण छोड़ें तो उसे दूसरे सिरे तक पहुंचने में पूरे 13 साल लगेंगे। तुलना की बात करें तो सूरज का सबसे नज़दीकी पड़ोसी तारा प्रॉक्सिमा सेंटौरी हमसे सिर्फ 4 प्रकाश वर्ष दूर है यानी मीरा की पूंछ उस दूरी से भी तीन गुना ज्यादा लंबी है।
यह पूंछ हमें कब तक दिखी?
दिलचस्प बात यह है कि वैज्ञानिक 400 साल से मीरा तारे को जानते थे लेकिन उसकी यह विशाल पूंछ 2007 तक किसी को नहीं दिखी थी। इसकी वजह यह है कि यह पूंछ सिर्फ पराबैंगनी रोशनी में चमकती है,जिसे हमारी आंखें नहीं देख सकतीं। जब नासा के एक खास टेलीस्कोप (GALEX) ने आसमान को पराबैंगनी रोशनी में देखा तभी यह अनोखी पूंछ पहली बार नज़र आई।
एक तारे की डायरी जैसी पूंछ
सबसे खास बात यह है कि यह पूंछ मीरा तारे के पिछले 30000 सालों के सफर की कहानी बताती है। जितनी पुरानी सामग्री उतनी ही दूर पूंछ के छोर पर मिलती है,बिल्कुल वैसे जैसे किसी डायरी के पन्ने पलटकर हम पुरानी घटनाएं पढ़ सकें।
सोचने वाली बात
अगर एक तारा 30000 सालों में इतनी विशाल पूंछ बना सकता है तो सोचिए हमारा अपना सूरज भी लगभग 5 अरब साल बाद ऐसा ही लाल दानव तारा बनेगा। क्या तब सूरज भी अपने पीछे ऐसी ही कोई अनोखी पूंछ छोड़ेगा?