02/06/2026
सत्तापक्ष की भी सुनवाई नहीं हो रही तो हो किसकी रही है? :-चित्रा सरवारा
ट्रीपल से ज्यादा इंजन लेकिन विकास की गाड़ी ठप:- चित्रा सरवारा
अपनी सरकार में भाजपा पार्षदों की सुनवाई नहीं तो आम जनता को क्या उम्मीद:-चित्रा सरवारा
अम्बाला का हर विकास बिंदु या तो आज रुका हुआ है या अधूरा है:- चित्रा सरवारा
पीने के पानी से लेकर सड़क पर चलने तक सब व्यवस्था खराब:-चित्रा सरवारा
अम्बाला छावनी:- अम्बाला छावनी में नगर परिषद की कार्यप्रणाली और सफाई व्यवस्था को लेकर उठे ताज़ा विवाद ने स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। नगर परिषद के अनेक पार्षदों द्वारा स्वयं अपनी चेयरपर्सन को लिखित शिकायत सौंपे जाने और सफाई व्यवस्था पर खुलकर असंतोष जताने के बाद हरियाणा की युवा नेत्री एवं अंबाला छावनी की बेटी चित्रा सरवारा ने पूरे मामले को लेकर भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखा प्रहार किया है।
अगर सत्तापक्ष के नुमाइंदों की नहीं चल रही तो किसकी चल रही है? कौन चला रहा है? कौन देख रहा है?
चित्रा सरवारा ने कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक और चिंताजनक स्थिति है कि केंद्र से लेकर प्रदेश और स्थानीय निकाय तक सत्ता में होने के बावजूद भाजपा अपने ही जनप्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही। यदि नगर परिषद के निर्वाचित सदस्य स्वयं यह कह रहे हैं कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही, अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद के पार्षदों द्वारा सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया जाना कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहे, शिकायतों का समाधान नहीं हो रहा और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं, अपने आप में प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। यह केवल सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि स्थानीय शासन व्यवस्था में व्याप्त जवाबदेही के संकट का विषय है।
चित्रा सरवारा ने कहा कि भाजपा वर्षों से “डबल इंजन” और “ट्रिपल इंजन” सरकार के नाम पर विकास के बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन अंबाला छावनी की वास्तविक तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यहां इंजन तो लगातार बढ़ते गए, लेकिन विकास की गाड़ी वहीं की वहीं खड़ी रह गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगर परिषद की चेयरपर्सन को ही भाजपा पार्षदों द्वारा लिखित शिकायत देकर यह बताने को मजबूर हैं कि अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे, तो आखिर प्रशासनिक नियंत्रण किसके हाथ में है? जिम्मेदारी किसकी है? और जवाबदेही कौन तय करेगा?
युवा नेत्री ने कहा कि शहर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। अनेक स्थानों पर टूटी सड़कें, जलभराव की आशंका, अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था, पेयजल से जुड़ी शिकायतें और मूलभूत सुविधाओं की कमी लगातार लोगों को परेशान कर रही है। मानसून सिर पर खड़ा है, लेकिन नालों और ड्रेनों की समुचित सफाई को लेकर भी लोगों में गंभीर चिंता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी के नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों को इसलिए नहीं चुना था कि वे अपनी ही व्यवस्था के खिलाफ शिकायत पत्र लेकर घूमते रहें। जनता ने सरकार को अधिकार दिए थे ताकि समस्याओं का समाधान हो, लेकिन आज हालात यह हैं कि लोग स्वयं को उपेक्षित और असहाय महसूस कर रहे हैं।
चित्रा सरवारा ने कहा कि भाजपा के स्थानीय नेताओं को अब जनता के सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई है। यदि नगर परिषद के सदस्य, चेयरपर्सन और जनता सभी असंतोष जता रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था, अधूरे विकास कार्यों और प्रशासनिक उदासीनता का उत्तर आखिर कौन देगा?
उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी कहने को केवल एक शहर नहीं बल्कि ऐतिहासिक महत्व की वह धरती है जहां 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चेतना ने आकार लिया था। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज उसी शहर के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश दिखाई दे रहे हैं।
चित्रा सरवारा ने मांग की कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली, सफाई व्यवस्था और अधिकारियों के आचरण को लेकर उठी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जवाबदेही तय की जाए तथा शहरवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी की जनता अब बहानों नहीं बल्कि परिणाम चाहती है।