12/03/2026
जब अंधकार गहरा होता है और भय मन में घर करने लगता है, तब शिव का एक उग्र और शक्तिशाली रूप प्रकट होता है — काल भैरव।
शैव परंपरा में काल भैरव को भगवान शिव का ऐसा स्वरूप माना जाता है जो समय, भय और अधर्म पर नियंत्रण रखता है।
कहा जाता है कि जब संसार में अहंकार और अन्याय बढ़ गया था, तब भगवान शिव के क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए।
पुराणों के अनुसार, काल भैरव ने ब्रह्मा के अहंकार को समाप्त करने के लिए उनका एक सिर काट दिया था। इसी कारण उन्हें “कपाल भैरव” भी कहा जाता है। यह कथा हमें यह सिखाती है कि अहंकार चाहे किसी में भी हो, उसका अंत निश्चित है।
वाराणसी (काशी) में काल भैरव को “काशी के कोतवाल” यानी शहर के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि काशी में प्रवेश करने वाले हर भक्त को पहले काल भैरव का आशीर्वाद लेना चाहिए, क्योंकि वही इस पवित्र नगरी के संरक्षक हैं।
भैरव का स्वरूप उग्र है, परंतु अपने भक्तों के लिए वे भय को दूर करने वाले और रक्षा करने वाले देवता हैं।
उनके हाथ में त्रिशूल, डमरू और कपाल होता है, और उनके साथ काला श्वान (कुत्ता) उनका वाहन माना जाता है।
भैरव साधना हमें यह सिखाती है कि भय से भागना नहीं, बल्कि उसे शक्ति में बदलना ही सच्ची साधना है।
इस रील में जो ध्वनि और ऊर्जा आप सुन रहे हैं, वह उसी दिव्य शक्ति को समर्पित है।
हर हर भैरव 🔱
जय काल भैरव