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11/08/2026

" बैरियर तोड़कर विधानसभा की तरफ दौड़े झारखण्ड आंदोलनकारी छात्र"
Jharkhand students protest live
रांची विधानसभा के बाहर हंगामा
आंदोलनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज वीडियो
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10/08/2026

"भारी बारिश में नेपाल में भयंकर भूस्खलन, सावधानियां बरते , यात्रा से बचे"
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10/08/2026
"टाटानगर स्टेशन पर मची अफरा-तफरी, अस्पताल में इलाज जारी; हालत स्थिर"ट्रेन की छत पर चढ़ा युवक, हाईटेंशन तार की चपेट में आ...
10/08/2026

"टाटानगर स्टेशन पर मची अफरा-तफरी, अस्पताल में इलाज जारी; हालत स्थिर"
ट्रेन की छत पर चढ़ा युवक, हाईटेंशन तार की चपेट में आकर नीचे गिरा

जमशेदपुर। टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 30 वर्षीय युवक सागु राम स्टेशन पर खड़ी टाटा-दानापुर एक्सप्रेस की छत पर चढ़ गया। युवक कुछ देर तक ट्रेन की छत पर घूमता रहा। इसी दौरान वह ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन ओवरहेड तार की चपेट में आ गया और करंट का जोरदार झटका लगने के बाद ट्रेन से नीचे गिर पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ट्रेन की छत पर चढ़ने से पहले लोगों से कह रहा था कि वह ट्रेन के एक छोर से दूसरे छोर तक जाएगा। यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह ट्रेन की छत पर पहुंच गया। इसके बाद काफी देर तक वह छत पर ही घूमता रहा। घटना को लेकर यात्रियों और रेलकर्मियों में हड़कंप मच गया।

इसी बीच युवक ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया। करंट का झटका लगने के बाद वह ट्रेन की छत से नीचे गिर गया। घटना के तुरंत बाद रेलकर्मियों और आसपास मौजूद लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार उसका इलाज जारी है और फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलने के बाद रेलवे के अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। कुछ देर तक स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में ट्रेन की छत या रेलवे पटरियों पर न चढ़ें। ओवरहेड हाईटेंशन तार से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसकी चपेट में आने से जान का खतरा रहता है।

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10/08/2026

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09/08/2026

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दादी की ह*त्या का आरोप, पोता फरार; इलाज के दौरान मौ*तचांडिल/नीमडीह।जिला सरायकेला खरसावां के नीमडीह थाना क्षेत्र के स्टेश...
09/08/2026

दादी की ह*त्या का आरोप, पोता फरार; इलाज के दौरान मौ*त

चांडिल/नीमडीह।जिला सरायकेला खरसावां के नीमडीह थाना क्षेत्र के स्टेशन बस्ती स्थित शिवपुरी कॉलोनी में रविवार सुबह घरेलू विवाद के दौरान 67 वर्षीय विधवा महिला पर तेजधार हथियार से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। गंभीर रूप से घायल महिला की टीएमएच अस्पताल, जमशेदपुर में इलाज के दौरान मौ*त हो गई। मृतका की पहचान पूर्व एएनएम सुप्रित्रि रानी मजूमदार के रूप में हुई है।

परिजनों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच महिला का अपने पोते से किसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर पोते ने तेजधार हथियार से दादी पर हमला कर दिया। महिला के चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। उस समय महिला खू*न से लथपथ हालत में जमीन पर पड़ी थी, जबकि आरोपी पोता मौके से फरार हो गया।

परिजनों ने आनन-फानन में घायल महिला को टीएमएच अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौ*त हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद नीमडीह पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

परिजनों का कहना है कि जमीन और रुपये को लेकर परिवार में पहले से विवाद चल रहा था। घटना के बाद मौके पर टेबल पर चश्मा, लाठी और अन्य सामान बिखरा मिला। मृतका के बेटे ने बताया कि वह घटना के समय छत पर कपड़े सुखा रहा था। आवाज सुनकर नीचे आया तो उसकी मां खू*न से लथपथ पड़ी थीं।

घटना के बाद परिवार के एक सदस्य की तबीयत बिगड़ने की भी सूचना है, जिसे चांडिल अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। वहीं, स्थानीय कुछ लोगों ने घटना के दौरान गो*ली चलने जैसी आवाज सुनाई देने की बात कही है। हालांकि, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

नीमडीह थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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विश्व आदिवासी दिवस: उत्सव के साथ अधिकार, सुरक्षा और भविष्य की चिंता भी जरूरीसरायकेला-खरसावां। आज 9 अगस्त को पूरी दुनिया ...
09/08/2026

विश्व आदिवासी दिवस: उत्सव के साथ अधिकार, सुरक्षा और भविष्य की चिंता भी जरूरी

सरायकेला-खरसावां। आज 9 अगस्त को पूरी दुनिया विश्व आदिवासी दिवस मना रही है। झारखंड में यह दिन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों को याद करने का अवसर भी है। सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन की ओर से भी विश्व आदिवासी दिवस-2026 को लेकर जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय संस्कृति एवं विरासत से जुड़ी गतिविधियों के आयोजन पर भी जोर दिया गया है।

झारखंड की पहचान आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। सरायकेला-खरसावां भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। खरसावां की ऐतिहासिक स्मृतियां हों, सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत हो या जंगल और गांवों से जुड़ा पारंपरिक जीवन—यह क्षेत्र आदिवासी इतिहास की कई महत्वपूर्ण परतों को अपने भीतर समेटे हुए है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल एक दिन आदिवासी संस्कृति का उत्सव मनाना पर्याप्त है?

आज आदिवासी समाज पहले की तुलना में शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, खेल और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के लिए कई विशेष अधिकार और संरक्षण दिए हैं। बावजूद इसके, जमीन, विस्थापन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और पारंपरिक अधिकारों को लेकर कई जगहों पर चिंता बनी हुई है।

सरायकेला-खरसावां और आसपास के इलाकों में विकास परियोजनाओं तथा विस्थापन से जुड़े सवाल समय-समय पर सामने आते रहे हैं। चांडिल डैम, ईचा-खरकई परियोजना को लेकर भी कई गांवों के लोगों ने अपनी आशंकाएं और विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यही रही है कि विकास की कीमत कहीं उनकी जमीन, आजीविका और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को खत्म करके न चुकानी पड़े।

इसलिए आज के दिन सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होना चाहिए कि आदिवासी समाज सुरक्षित है या असुरक्षित, बल्कि यह होना चाहिए कि ऐसा समाज और ऐसी व्यवस्था कैसे बनाई जाए, जहां किसी आदिवासी परिवार को अपनी जमीन, पहचान, संस्कृति, आजीविका या सम्मान को लेकर असुरक्षित महसूस न करना पड़े।

विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ संवाद भी जरूरी है। सड़क, उद्योग, बांध, खनन और दूसरी परियोजनाएं क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं, लेकिन किसी भी परियोजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब स्थानीय लोगों का भरोसा भी उसके साथ हो।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि आदिवासी क्षेत्रों में कानून का निष्पक्ष पालन हो, जमीन और अधिकारों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता रहे, ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और किसी भी विवाद को समय रहते संवाद के जरिए सुलझाने की कोशिश हो।

वहीं आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाएं तथा विकास और अधिकारों के बीच संतुलन बनाने में सकारात्मक भूमिका निभाएं।

विश्व आदिवासी दिवस का वास्तविक संदेश शायद यही है—आदिवासी समाज को केवल संस्कृति और परंपरा के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी रखने वाले नागरिक के रूप में देखा जाए।

आज जरूरत केवल आदिवासी दिवस मनाने की नहीं, बल्कि ऐसा भविष्य बनाने की है जहां झारखंड का आदिवासी युवा अपनी पहचान पर गर्व करे, गांव का परिवार अपनी जमीन और आजीविका को लेकर आश्वस्त रहे और हर व्यक्ति को कानून और प्रशासन पर भरोसा हो।

उत्सव एक दिन का हो सकता है, लेकिन अधिकार, सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरे साल की होनी चाहिए।

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