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08/06/2026

"डर मत दिखाइए तरुण महतो को, एक बार जेल भेज दिए तो डरता है क्या? पुष्पा राज स्टाइल में बोले: "
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07/06/2026

तरुण महतो JLKM रैली, चांडिल

" संदेश पूरे झारखण्ड में पहुँच चुका है, तरुण महतो के जेल से छुटने के बाद प्रखंड अध्यक्ष ललित महतो का बयान"  |   |   |
07/06/2026

" संदेश पूरे झारखण्ड में पहुँच चुका है, तरुण महतो के जेल से छुटने के बाद प्रखंड अध्यक्ष ललित महतो का बयान"
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07/06/2026

"आंगनबाड़ी बहाली विवाद ने पकड़ा तूल, निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण"
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कांड्रा/सरायकेला-खरसावां, दिनांक: 07 जून 2026झारखंड लोकतांत्रिक क्रान्तिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष तरुण महतो के ल...
07/06/2026

कांड्रा/सरायकेला-खरसावां, दिनांक: 07 जून 2026

झारखंड लोकतांत्रिक क्रान्तिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष तरुण महतो के लगभग सात माह बाद जेल से रिहा होकर लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कांड्रा गिद्दीबेड़ा टोल प्लाजा पर उन्हें फूल-माला एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

स्वागत समारोह के दौरान राकेश रंजन महतो ने कहा कि तरुण महतो ने क्षेत्र में अवैध बालू एवं पत्थर खनन के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है। जनहित एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए उनकी लड़ाई सराहनीय है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अवैध खनन के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि अवैध बालू और पत्थर खनन के विरुद्ध चल रहा जन आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और इस मुद्दे पर जनहित की आवाज को बुलंद किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तरुण महतो की रिहाई से इस जनसंघर्ष को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने तरुण महतो का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा क्षेत्र के विभिन्न जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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07/06/2026

"2029 में बदलाव होगा जेल से छुटेते साथ बोले तरूण महतो"
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07/06/2026

"न्यूनतम मजदूरी दर को लेकर भड़के राकेश रंजन महतो"
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सरायकेला : ईचागढ़ में डेरा डाले हैं दलमा के हाथी, जंगल कटने और पानी-भोजन की कमी से बढ़ा मानव-हाथी संघर्ष""पर्यावरण दिवस ...
06/06/2026

सरायकेला : ईचागढ़ में डेरा डाले हैं दलमा के हाथी, जंगल कटने और पानी-भोजन की कमी से बढ़ा मानव-हाथी संघर्ष"
"पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण का दिखावा, दूसरी ओर कॉटेज के लिए कट रहे पेड़"

सरायकेला : चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के तूतां और दुलमीडीह जंगल में शनिवार को हाथियों का एक झुंड जलाशय के आसपास विचरण करते देखा गया। बीते 6-8 वर्षों से दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी छोड़कर दर्जनों हाथी ईचागढ़ के चारों प्रखंडों—ईचागढ़, चांडिल, नीमडीह और कुकड़ू—में स्थायी डेरा डाले हुए हैं। नतीजा, रोजाना मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं।

*"पौधा लगाने में साल, उखाड़ने में पलभर"*
विश्व पर्यावरण दिवस पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान चलाकर पौधारोपण किया जा रहा है। मगर सवाल उठ रहा है कि जंगल बनने में दशकों लगते हैं, लेकिन उखाड़ने में पलभर। ईचागढ़ के ग्रामीण पूछ रहे हैं—आखिर दलमा के हाथी अपना घर छोड़कर क्यों भाग रहे हैं?

*193 वर्ग किमी का दलमा, फिर भी हाथी बेघर क्यों?*
चांडिल अनुमंडल में स्थित दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी 193.22 वर्ग किमी में फैली है। इसे 'गज परियोजना जमशेदपुर' के नाम से भी जाना जाता है। विडंबना यह है कि आज गज परियोजना में ही हाथी देखने को नहीं मिलते। पर्यटक और ग्रामीण दोनों जानना चाहते हैं कि आखिर कारण क्या है?

वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार हर साल जंगल एवं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये देती है। बावजूद इसके दलमा सेंचुरी में वन्य जीवों को पर्याप्त भोजन-पानी नहीं मिल रहा। इसी कारण वर्षों से हाथी अपना आवासीय क्षेत्र छोड़कर पलायन कर रहे हैं और भोजन-पानी की तलाश में ईचागढ़ क्षेत्र में शरण लिए हुए हैं।

*ईको सेंसेटिव जोन में भी कट रहे पेड़*
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को 'ईको सेंसेटिव जोन' भी घोषित किया गया है। इसके बावजूद विभाग पर्यटकों को बढ़ावा देने के नाम पर नए-नए कॉटेज और रिसॉर्ट का निर्माण कर रहा है। इसके लिए धड़ल्ले से पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर हाथियों का प्राकृतिक आवास उजाड़ा जा रहा है।

*बंगाल का अयोध्या पहाड़ भी बना कारण*
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का अयोध्या पहाड़ इलाका भी हाथी बहुल क्षेत्र रहा है। वहां भी बड़े होटल, गेस्ट हाउस और कॉटेज बनने से हाथियों की आवासीय जगह सिकुड़ती जा रही है। नतीजा, झारखंड-बंगाल सीमा के हाथी भोजन की तलाश में जंगल छोड़कर सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंच रहे हैं। फसल बर्बादी और जनहानि की घटनाएं बढ़ी हैं।

*"हमें भी जीने का अधिकार है"*
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी शांत और एकांत जगह चाहता है। लगातार जंगल कटने, बड़े होटल बनने और शोर-शराबे से हाथी अशांत होकर रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं। सवाल वन विभाग पर उठ रहा है—जब करोड़ों का बजट है तो दलमा में जल स्रोत और चारा विकास क्यों नहीं हो रहा? हाथी पूछ रहे हैं, "हमें भी जीने का अधिकार है, हमें भी जगह दो?"

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06/06/2026

"NH-32 किनारे काली मंदिर में चोरी, क्या पुलिस की नजरों से दूर हो गया अपराध?"

06/06/2026

" प्रशासन द्वारा लगातार अवैध देसी दारू भट्टी को ध्वस्त कर रहें है लेकिन सवाल क्या करवाई भी जारी है?"
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