22/12/2025
#रामरस #शीतलप्रसाद #लंका की दुकान का नाम आपने नहीं सुना होगा यह छपरा में कचहरी स्टेशन के पास हुआ करता था अब नहीं है। जो लोग छपरा के हैं वही इन शब्दों का अर्थ भी जानते हैं बाकी लोगों के लिए यह एक ब्रांड नेम हो सकता है राम रस नमक को बोलते हैं शीतल प्रसाद सतुआ का नाम है i लंका हरि तीखी मिर्च को कहा जाता है। इसीलिए छपरा की सबसे प्रसिद्ध सत्तू की दुकान राम रस शीतल प्रसाद लंका की दुकान के नाम से जानी जाती थी यहां पर हकीम से लेकर गरीब मजदूर तक सतुआ खाने आते थे तरह-तरह की चटनी मौसमी अचार ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करता था। टीनहा प्लेट जिसे आम बोल चाल की भाषा में छिपा बोलते हैं में मकई का सतुआ और लोटा में पानी मिलता था। छपरा में कचहरी स्टेशन बगल में कचहरी होने के कारण ही बना था पूरे जिले के लोग कोर्ट कचहरी का काम लेकर यहां आते थे पर साथ में सतुआ खाने का भी लोभ था जब वहां जाएंगे तो सतुआ जरूर खाएंगे। उसे जमाने के जानकार बताते हैं कि वैसे तो छपरा में दर्जनों सतुआ की दुकान थी पर जो दुकान कचहरी के पास थी उसका बड़ा नाम हुआ था झोपड़ी नुमा दुकान में खाने के लिए है अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। बड़े-बड़े हातिम अपने नौकर चाकर को भेज कर दोपहर के टिफिन में यहां से सतुआ और आचार मंगवाते थे। 1980 के दशक में यहां 50 पैसे में सेर भर सतुआ खान की व्यवस्था थी। समय ने सब कुछ बदल दिया पुरानी यादों को लोगों के खान-पान की आदतों को।