Raushan Kumar

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26/11/2025

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09/11/2025

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09/11/2025

🌸 “वो अधूरी कॉफ़ी”

शहर की सुबहें हमेशा जल्दी उठ जाती थीं, पर आरव नहीं।
हर दिन वो उसी छोटे-से कैफ़े की खिड़की वाली सीट पर बैठकर अपनी ब्लैक कॉफ़ी का इंतज़ार करता था — बिना किसी जल्दी के।

एक दिन, बारिश ज़रा ज़्यादा हो गई थी। खिड़की के शीशे पर पानी की बूँदें बह रही थीं, और तभी कैफ़े का दरवाज़ा खुला।
अंदर आई कियारा — एक किताब को अपने बैग में सँभालती हुई, भीगे बालों को झटकते हुए।

वो वही सीट चाहती थी, जो आरव की “रोज़ की सीट” थी।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा, फिर मुस्कुरा दिए।
“आप बैठिए,” आरव ने कहा।
“नहीं, आप बैठे हैं तो मैं यहीं सामने बैठ जाती हूँ,” उसने जवाब दिया।

उस दिन की कॉफ़ी थोड़ी ज़्यादा मीठी लगी दोनों को — जबकि दोनों ने शुगर फ्री मंगाई थी।

दिन बीतते गए।
कॉफ़ी की जगह अब बातें होने लगीं — किताबों, संगीत और सपनों की बातें।
आरव को उसका हँसना पसंद आने लगा, और कियारा को उसकी खामोश मुस्कान।

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ होता है।
कियारा को अपने शहर वापस जाना था — नौकरी के लिए।
आख़िरी दिन दोनों फिर उसी सीट पर बैठे।
आरव ने पूछा, “क्या कभी वापस आओगी?”
कियारा ने कहा, “अगर तुम्हारी कॉफ़ी अभी तक अधूरी होगी, तो ज़रूर।”

वो चली गई।
महीनों बाद, कैफ़े वैसा ही था, बस एक कॉफ़ी हमेशा अधूरी रह जाती थी।

और एक शाम, जब बारिश फिर से वही सुर छेड़ने लगी,
आरव ने देखा — खिड़की के पार कोई मुस्कुरा रहा था।
कियारा।
उसी मुस्कान के साथ।

इस बार कॉफ़ी ठंडी नहीं हुई —
क्योंकि अब किसी को जाने की जल्दी नहीं थी। ☕❤️

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क्या आप चाहेंगे कि मैं इस कहानी का दूसरा भाग भी लिखूँ — जहाँ उनकी ज़िंदगी आगे बढ़ती है?

09/11/2025

छोटा बीज और पत्थरों की ज़मीन

एक बार एक किसान ने अपने खेत में बीज बोए। ज़्यादातर ज़मीन उपजाऊ थी, लेकिन एक कोना बहुत पथरीला था। बाकी बीज जल्दी अंकुरित हुए, पर उस कोने का छोटा बीज पत्थरों के बीच फँस गया।

हर दिन धूप तेज़ होती, बारिश कम पड़ती, और मिट्टी सख्त होती जा रही थी। आसपास के पौधे उस छोटे बीज पर हँसते थे —
“तू यहाँ से नहीं निकल पाएगा, तेरी किस्मत यहीं खत्म है।”

लेकिन उस छोटे बीज ने सोचा —
“अगर मैं कोशिश नहीं करूँगा, तो मैं हमेशा यहाँ ही रह जाऊँगा।”

वो ज़रा-ज़रा करके अपनी जड़ों को पत्थरों के बीच से गुज़ारने लगा। दिन बीतते गए, और धीरे-धीरे उसने रास्ता बना लिया। कुछ महीनों बाद जब बाकी पौधे सूख गए, तब वही छोटा बीज एक मजबूत पौधा बन चुका था — क्योंकि उसने संघर्ष झेला था, और पत्थरों ने ही उसकी जड़ें मज़बूत कर दी थीं।

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🌻 सीख:

मुश्किलें हमें रोकने नहीं, बल्कि मजबूत बनाने आती हैं।
अगर रास्ता कठिन है, तो समझो कि मंज़िल बड़ी है।

05/10/2025

Good morning
Jai shree Ram
🙏

04/10/2025

राम राम जी
क्या हाल है आपलोगों का
🤔

25/09/2025

Jai mata di
Dosto
🙏

24/09/2025

नवरात्रि का दिन चल रहा हैं
जय माता दी
लिखिए
🙏

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