02/03/2026
ये भोजपुरी वाले अपना बेइज्जती खुद करवाते हैं
कल पटना में Khesari Lal Yadav और Elvish Yadav का कॉन्सर्ट था। भीड़ थी, जोश था, माहौल बना हुआ था। लेकिन उसी बीच एक ऐसी चीज़ देखने को मिली जिसने बहुत लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
39 साल के खेसारी लाल यादव, 28 साल के एल्विश यादव को “भइया” कहकर संबोधित कर रहे थे। और वही एल्विश यादव “खेसारी” को खेसारी भाई-खेसारी भाई से संबोधित कर रहे थे अब कोई ये ना कहे कि किसी को भइया बोलना गलत है। बिल्कुल नहीं। सम्मान देना अच्छी बात है। लेकिन सवाल यहाँ उम्र का नहीं, मानसिकता का है। सवाल ये है कि बार-बार खुद को छोटा दिखाने की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
जब भी बाहर के या तथाकथित “बॉलीवुड सर्किट” से जुड़े लोग सामने आते हैं, तो हमारे कुछ भोजपुरी स्टार्स का रवैया अचानक बदल क्यों जाता है? अपने ही मंच पर, अपनी ही ज़मीन पर, अपने ही राज्य में — अगर आत्मविश्वास कम पड़ जाए, तो फिर “सबसे बड़ा सुपरस्टार” कहने का क्या मतलब रह जाता है?
बिहार की जनता ने, भोजपुरी दर्शकों ने, खेसारी को सिर पर बैठाया। सुपरस्टार बनाया। नाम, शोहरत, पैसा — सब कुछ दिया। लेकिन जब वही स्टार बाहर के किसी चेहरे के सामने खुद को डाउनग्रेड करता हुआ दिखे, तो तकलीफ होती है। क्योंकि वो सिर्फ अपनी नहीं, पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री की इमेज रिप्रेजेंट करता है।
ये पहली बार नहीं है जब ऐसा महसूस हुआ हो। कई बार देखा गया है कि भोजपुरी के कलाकार खुद ही अपने आपको नेशनल लेवल पर कम आंकते हुए दिखते हैं। जैसे अंदर ही अंदर ये मान लिया गया हो कि “हम छोटे हैं” और सामने वाला “बड़ा” है। ये हीन भावना अगर सच में है, तो ये सबसे बड़ी समस्या है।
सम्मान दीजिए, जरूर दीजिए। लेकिन सम्मान और आत्मसमर्पण में फर्क होता है। विनम्रता और हीन भावना में फर्क होता है। अगर आप खुद अपनी वैल्यू समझेंगे नहीं, तो सामने वाला क्यों समझेगा?
आज जरूरत है कि भोजपुरी इंडस्ट्री के बड़े नाम खुद के लिए स्टैंड लें। आत्मविश्वास दिखाएँ। बराबरी से खड़े हों। क्योंकि टैलेंट में, मेहनत में, फैन फॉलोइंग में — किसी से कम नहीं हैं। लेकिन अगर मंच पर ही खुद को छोटा साबित करेंगे, तो फिर शिकायत किससे करेंगे कि बाहर वाले हमें सीरियस नहीं लेते?