22/10/2025
एक तौलिया से पुरा घर नहाता था,
दूध का नम्बर बारी-बारी आता था,
छोटी माँ के पास सो कर इठलाता था,
पिताजी से मार का डर सबको सताता था,
बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था,
पूड़ी खीर से पूरा घर रविवार मनाता था,
बडे भार्ई के कपडे छोटे होने का इन्तजार रहता था,
स्कूल मे बड़े की ताकत से छोटा रौब जमाता था,
बहन-भाई के प्यार का सबसे बडा नाता था,
धन का महत्व कभी सोच भी न पाता था,
बडे का बस्ता किताबें साईकिल कपडे खिलोने पेन्सिल स्लेट,
स्टाईल चप्पल सब से मेरा नाता था,
मामा-मामी नाना-नानी पर हक जताता था,
एक छोटी से सन्दूक को अपनी जान से ज्यादा प्यारी तिजोरी बताता था,
अब
तौलिया अलग हुआ,
दूध अधिक हुआ,
माँ तरसने लगी,
पिता जी डरने लगे बुआ से कट गये,
खीर की जगह पिज्जा बर्गर मोमो आ गये,
कपडे भी व्यक्तिगत हो गये,
भाईयो से दुर हो गये,
बहन के प्रेम की जगह गर्लफ्रेण्ड आ गई,
धन दौलत प्रमुख हो गया,
अब सब नया चाहिये,
नाना नानी आदि महज़ दूर के रिश्ते हो गये,
कई भाषायें तो सीखे मगर संस्कार भुल गये,
बहुत पाया पर अकेले खो गये,
रिश्तो के अर्थ बदल गये,
हम जीने तो लगते है पर एहसास खो गये,
अब आप भी सोचें कहाँ थे, कहाँ पहुँच गये,!