15/08/2026
गलतफहमी पालने से कोई निष्पक्ष नहीं हो जाता है। चंद फेसबुकिए चिरकुट जिन्हें लगता है कि उनके पास ज्यादा ज्ञान है और उन्हें ज्यादा समझ है समाज की और ज्यादा चिंता करते हैं समाज की।
ऐसे चिरकुट प्रोफाइल मोनेटाइज कर डॉलर के चक्कर में नेताओं को ज्ञान पेलते रहते है कि नेताओं को यह करना चाहिए, यह नहीं करना चाहिए, क्या बोलना चाहिये था और क्या नहीं बोलना चाहिये था, ऐसे अनज़ख़ोरों की अपने घर में भी कोई नहीं सुनता, वो दो कौड़ी के लोग ज्ञान की उल्टियाँ करते रहते है ताकि कोई इन्हें जाने-पहचाने। नेता ऐसे लोग होता है जो ऐसे लोगों तो थूके भी ना।
राजनेताओं को पता है कि उनके वोटर्स क्या चाहते हैं और क्या नहीं। जबकि राजनीतिक दल इन सब चीजों में महारत होते हैं तभी तो वो राज करते हैं। नेताओं को पता है कि यह जनता 5 लाख नौकरी देने वालों को नहीं बल्कि 5 किलो अनाज और 10 हज़ार में बिक जाती है, जाति-धर्म के नाम पर बंट जाती है।
राजनीतिक दलों का अपना एजेंडा क्लियर रहता है। उन्हें पता होता है कब क्या करना है, कैसे करना है और क्यों करना है?
नेताओं को ज्ञान दे कर ये चिरकुट बिना पत्रकारिता पढ़े एक फ़ोन हाथ में लेकर फिलासकल पत्रकार बनना चाहते हैं। ऐसे चिरकुट फेसबुक से आने वाले डॉलर के लिए कभी किसी जाति का समर्थक बनकर, कभी किसी जाति का दुश्मन बनकर, कभी किसी पार्टी और नेता का हितैषी बनकर, कभी आलोचक बनकर ये कुछ भी बक सकते है, हग सकते है। ऐसे लोगों को ब्लॉक करिए, अनफ्रेंड करिए और आगे बढ़िए क्योंकि ऐसे चिरकुटों के फ्रेंडलिस्ट में रहेंगे तो ये डॉलर कमाते रहेंगे।