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14/05/2026

#नालंदा - #पूर्व #मुख्यमंत्री #नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार के साथ पहुंचे अपने पैतृक हरनौत के गांव कल्याण बीघा, पत्नी की 19वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके बेटे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार की सुबह 10 बजे अपने पैतृक गांव हरनौत के कल्याण बिगहा पहुंचे। मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने और राज्यसभा सांसद बनने के बाद यह उनका अपने पैतृक गांव का पहला दौरा है।
नीतीश कुमार और निशांत कुमार ने गांव के देवी मंदिर में पूजा अर्चना की। उसके बाद राम लखन सिंह स्मृति वाटिका परिसर में पहुंचकर नीतीश कुमार ने अपनी पत्नी स्वर्गीय मंजू देवी को श्रद्धांजलि दी। बता दें आज उनकी पत्नी की 19वीं पुण्यतिथि है। गौरतलब है कि नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री के सत्ता में थे तो स्थानीय लोग हजारों की संख्या में उन्हें आवेदन देने के लिए कल्याण बीघा पहुंचते थे लेकिन इस बार कुछ अलग नजर देखने को मिला है। इस बार महज दर्जनों आवेदन मुख्यमंत्री को ग्रामीणों ने सौंपा है। प्राप्त आवेदन की निष्पादन को लेकर नीतीश कुमार ने जिला अधिकारी कुंदन कुमार को जांच करने का दिर्देश दिए ।इस दौरान उनके साथ ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार,नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार और जिले के सभी जनप्रतिनिधि भी रहे। इसी दौरान नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे लगे। और फरियादियों को भी सुना। हरनौत के पूर्व विधायक इंजीनियर सुनील कुमार ने बताया पूर्व मुख्यमंत्री की पूरी तरह से निजी और पारिवारिक यात्रा थी, लेकिन गांववासियों और समर्थकों के प्रेम को देखते हुए विशेष तैयारियां की गई थी। उन्होंने बताया कि पहले की तरह इस बार भी नीतीश कुमार ने अपने आचरण को प्रस्तुत किए।
उनके आगमन को लेकर कल्याण बीघा गांव में सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतेजाम किए गए थे। एवं पूरे गांव को तोरण द्वारों और फूलों से सजाया गया था। नीतीश कुमार के पुत्र स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार लगभग कल्याण बीघा गांव स्थित अपने मकान में एक घंटे तक रुके। और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। वही मौके पर अस्थवा विधायक डॉक्टर जितेंद्र कुमार, इस्लामपुर विधायक रोहल रंजन, विधायक पुत्र सह जदयू जिला उपाध्यक्ष अनिल सिंह,जदयू प्रखंड अध्यक्ष रविकांत कुमार, जदयू कार्यकर्ता कक्कू सिंह,इंजीनियर रविशंकर, संतोष कुमार सिंह,रोहित सिंह,कुशेश्वर सिंह, सोनू कुमार,अरविंद सिंह,मुन्ना जी,हरनौत नगर पंचायत के मुख्य पार्षद प्रतिनिधि धीरज कुमार उर्फ पल्लू सिंह, हरनौत व्यापार मंडल अध्यक्ष दिलीप सिंह,सदर डीएसपी 2 संजय कुमार जायसवाल, बिहार शरीफ डीएसपी नूरुल हक, हरनौत थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार वर्मा, कल्याण बीघा थाना अध्यक्ष निशा कुमारी,बीडीओ डॉ पंकज कुमार, सीओ पूजा कुमारी, कार्यपालक पदाधिकारी सौरव सुमन, चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर राजीव रंजन सिन्हा, डॉ राकेश कुमार, नवीन कुमार, सूरज कुमार समेत सैकड़ो लोग मौजूद थे।

नालंदा - राजगीर मलमास मेले का काला सच : थिएटर में संस्कृति की जगह अश्लीलता का कब्जारिपोर्टर - राकेश कुमारनालंदा - बिहार ...
14/05/2026

नालंदा - राजगीर मलमास मेले का काला सच : थिएटर में संस्कृति की जगह अश्लीलता का कब्जा

रिपोर्टर - राकेश कुमार

नालंदा - बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर सदियों से अपनी आध्यात्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां लगने वाला मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, कला, संगीत और सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। हर तीन वर्ष पर लगने वाला यह मेला देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता रहा है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मलमास मेले के दौरान राजगीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इसी आस्था के कारण लाखों श्रद्धालु इस अवधि में राजगीर पहुंचकर विभिन्न कुंडों में स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

लेकिन समय के साथ इस मेले की सांस्कृतिक पहचान में बड़ा बदलाव आया है। एक समय था जब मलमास मेले में लगने वाला थिएटर लोगों के मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था। थिएटर केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मंच था। वहां प्रस्तुत नाटक सामाजिक कुरीतियों, पारिवारिक मूल्यों, देशभक्ति, प्रेम, त्याग और नैतिकता जैसे विषयों पर आधारित होते थे। गांव से लेकर शहर तक के लोग रातभर बैठकर नाटक देखते थे। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी वर्ग के लोग थिएटर का आनंद लेते थे। लेकिन आज वही थिएटर अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है।
करीब दो दशक पहले तक राजगीर के मलमास मेले में थिएटर का अलग ही महत्व हुआ करता था। मेले में एक महीने तक प्रतिदिन अलग-अलग नाटक खेले जाते थे। कलाकार अपनी अभिनय कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उस समय थिएटर में पारिवारिक माहौल होता था। लोग पूरे परिवार के साथ नाटक देखने पहुंचते थे। मंच पर कलाकारों की संवाद शैली, संगीत, भाव-भंगिमा और सामाजिक संदेश लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ते थे। कई नाटक ऐसे होते थे जिन्हें देखने के बाद लोग घंटों तक उसकी चर्चा करते थे।

बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर सदियों से अपनी आध्यात्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां लगने वाला मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, कला, संगीत और सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। हर तीन वर्ष पर लगने वाला यह मेला देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता रहा है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मलमास मेले के दौरान राजगीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इसी आस्था के कारण लाखों श्रद्धालु इस अवधि में राजगीर पहुंचकर विभिन्न कुंडों में स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

लेकिन समय के साथ इस मेले की सांस्कृतिक पहचान में बड़ा बदलाव आया है। एक समय था जब मलमास मेले में लगने वाला थिएटर लोगों के मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था। थिएटर केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मंच था। वहां प्रस्तुत नाटक सामाजिक कुरीतियों, पारिवारिक मूल्यों, देशभक्ति, प्रेम, त्याग और नैतिकता जैसे विषयों पर आधारित होते थे। गांव से लेकर शहर तक के लोग रातभर बैठकर नाटक देखते थे। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी वर्ग के लोग थिएटर का आनंद लेते थे। लेकिन आज वही थिएटर अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है।
करीब दो दशक पहले तक राजगीर के मलमास मेले में थिएटर का अलग ही महत्व हुआ करता था। मेले में एक महीने तक प्रतिदिन अलग-अलग नाटक खेले जाते थे। कलाकार अपनी अभिनय कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उस समय थिएटर में पारिवारिक माहौल होता था। लोग पूरे परिवार के साथ नाटक देखने पहुंचते थे। मंच पर कलाकारों की संवाद शैली, संगीत, भाव-भंगिमा और सामाजिक संदेश लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ते थे। कई नाटक ऐसे होते थे जिन्हें देखने के बाद लोग घंटों तक उसकी चर्चा करते थे।

उस दौर में थिएटर केवल व्यवसाय नहीं था, बल्कि कला और संस्कृति का जीवंत उदाहरण था। स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता था। लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों को बढ़ावा मिलता था। सामाजिक जागरूकता फैलाने में भी थिएटर की बड़ी भूमिका थी। दहेज प्रथा, बाल विवाह, शराबबंदी, शिक्षा और महिला सम्मान जैसे विषयों पर आधारित नाटक समाज को सोचने पर मजबूर कर देते थे।
धीरे-धीरे समय बदला और थिएटर का स्वरूप भी बदलने लगा। आधुनिकता और बाजारवाद की दौड़ में थिएटर की आत्मा कहीं खो गई। अब नाटक की जगह रिकॉर्डेड गानों पर डांस ने ले ली। अभिनय और संवाद की जगह तेज आवाज वाले संगीत और भड़काऊ प्रस्तुतियां होने लगीं। दर्शकों को आकर्षित करने के नाम पर मंच पर अश्लीलता परोसी जाने लगी। छोटे कपड़ों और उत्तेजक नृत्य को मनोरंजन का साधन बना दिया गया।
स्थिति यहां तक पहुंच गई कि कई बार मंच पर नग्नता जैसी घटनाएं भी सामने आने लगीं। इसका असर समाज पर भी पड़ा। परिवार के साथ थिएटर देखने जाने की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होने लगी। महिलाएं और बुजुर्ग थिएटर से दूरी बनाने लगे। जिस मंच पर कभी सामाजिक संदेश दिए जाते थे, वहां अब केवल सस्ते मनोरंजन का प्रदर्शन होने लगा।

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने कई बार इस पर चिंता जताई। धार्मिक नगरी राजगीर की सांस्कृतिक गरिमा को ठेस पहुंचने लगी। लोगों का कहना था कि जहां एक ओर मलमास मेले में करोड़ों देवी-देवताओं के वास की मान्यता है, वहीं दूसरी ओर उसी मेले में अश्लीलता का प्रदर्शन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद जिला प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। थिएटर परिसरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने लगे। प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई ताकि अश्लील कार्यक्रमों पर रोक लगाई जा सके। कई बार आयोजकों को चेतावनी भी दी गई। इसका असर कुछ हद तक दिखाई दिया और खुलेआम अश्लील प्रदर्शन पर नियंत्रण लगा।
हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी थिएटर अपनी पुरानी गरिमा वापस नहीं पा सका। अश्लीलता में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन नाटक पूरी तरह समाप्त हो गए। अब अधिकांश थिएटर केवल रिकॉर्डेड गानों पर आधारित डांस कार्यक्रमों तक सीमित हो गए हैं। कलाकारों की अभिनय कला, संवाद और सामाजिक संदेश गायब हो चुके हैं। दर्शकों को अब वह पारिवारिक और सांस्कृतिक वातावरण नहीं मिलता, जो कभी इस मेले की पहचान हुआ करता था।
कला और संस्कृति से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन और समाज दोनों मिलकर प्रयास करें तो थिएटर की पुरानी पहचान को फिर से जीवित किया जा सकता है। मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत भी है। ऐसे में यहां लोकनाट्य, भिखारी ठाकुर शैली के नाटक, भोजपुरी-मगही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक संदेश देने वाले कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
स्थानीय कलाकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को निखारा जा सकता है। विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर नाट्य प्रतियोगिताएं आयोजित कर नई पीढ़ी को थिएटर से जोड़ा जा सकता है। यदि सरकार और प्रशासन सांस्कृतिक समितियों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम आयोजित कराएं तो मेले की खोई हुई गरिमा फिर लौट सकती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि मनोरंजन और अश्लीलता के बीच अंतर समझा जाए। मनोरंजन समाज को स्वस्थ दिशा देने वाला होना चाहिए, न कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने वाला। राजगीर जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित मेले में प्रस्तुत होने वाले कार्यक्रमों का स्तर भी उसी अनुरूप होना चाहिए।
2026 में 17 मई से 15 जून तक एक बार फिर राजगीर में मलमास मेले का आयोजन होने जा रहा है। ऐसे में लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार अश्लीलता पर पूरी तरह रोक लगा पाएगा? क्या थिएटर अपनी पुरानी सांस्कृतिक पहचान वापस हासिल कर सकेगा? क्या आने वाली पीढ़ी फिर से सामाजिक और पारिवारिक नाटकों का आनंद ले पाएगी?
यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। जब तक दर्शक स्तरहीन कार्यक्रमों को स्वीकार करते रहेंगे, तब तक बदलाव संभव नहीं होगा। लोगों को भी अच्छे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा।
राजगीर का मलमास मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। इसकी गरिमा और पवित्रता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां केवल किताबों में पढ़ेंगी कि कभी राजगीर के थिएटर समाज को दिशा देने वाले मंच हुआ करते थे।
आज जरूरत है उस पुरानी सांस्कृतिक चेतना को फिर से जगाने की, जहां थिएटर मनोरंजन के साथ-साथ समाज का दर्पण भी हुआ करता था। तभी मलमास मेले की वास्तविक पहचान और उसकी सांस्कृतिक गरिमा सुरक्षित रह पाएगी।

जंगल में बैठकर भेज रहे थे गैस कनेक्शन ,आम लोगों को गैस कनेक्शन और ई-चालान का एपीके फाइल भेजकर ठगी कर रहे छह साइबर अपराधि...
14/05/2026

जंगल में बैठकर भेज रहे थे गैस कनेक्शन ,आम लोगों को गैस कनेक्शन और ई-चालान का एपीके फाइल भेजकर ठगी कर रहे छह साइबर अपराधियों को गिरिडीह की पुलिस ने गिरफ्तार किया है. सभी को एसपी डॉ बिमल कुमार को मिली गुप्ता सूचना पर पकड़ा गया है. गिरफ्तारी साइबर डीएसपी आबिद खान के नेतृत्व में हुई है.सभी अपराधियों को बेंगाबाद थाना इलाके के चरनबारी, कोठाहरिया जंगल से पकड़ा गया है. जिनकी गिरफ्तारी हुई है उनमें महेंद्र कुमार मंडल, कृष्णा कुमार मंडल, ईश्वर मंडल, पंकज कुमार मंडल, रंजीत कुमार मंडल वऔर आदित्य कुमार मंडल उर्फ राजा बाबू शामिल हैं.एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि गिरफ्तार अपराधी फर्जी APK फाइल का लिंक भेजकर लोगों को झांसे में लेते थे. किसी को गैस कनेक्शन, किसी को गैस सिलिंडर डिलीवरी तो किसी को ई-चालान का लिंक भेजा जाता था. लोग जैसे ही लिंक को क्लिक करते तो मोबाइल ही हैक हो जाता. इसके बाद बैंक खाते में ये अपराधी सेंधमारी करते थे. इनके पास से 11 मोबाइल, 13 सिम कार्ड और 5 बाइक बरामद किया है.*गिरिडीह से लेकर दिल्ली तक एफआईआर,* एसपी ने बताया कि गिरफ्तार साइबर अपराधियों में कृष्णा मंडल गिरिडीह साइबर थाना कांड संख्या-38/2023 एवं 43/2023 में पहले भी जेल जा चुका है. वहीं महेंद्र कुमार मंडल सफदरगंज थाना, दिल्ली से साइबर अपराध में जेल जा चुका है. एसपी डॉ. बिमल कुमार ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ठगी की

मोतिहारी छतौनी थाना पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल करते हुए पांच शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरो...
14/05/2026

मोतिहारी छतौनी थाना पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल करते हुए पांच शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के पास से दो लोकलमेड पिस्टल, पांच कारतूस, चार मोबाइल फोन और एक ई-रिक्शा जब्त किया गया है। पुलिस ने सभी हथियारों और सामान को ज़ब्त कर लिया है। अनुमंडल पुलिस उपाधीक्षक सदर-2 जितेश कुमार पांडे ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी ई-रिक्शा से हथियार लेकर बाइपास रोड की ओर आ रहे हैं। इस सूचना पर डीआईयू (DIU) और एसटीएफ (STF) की टीम के साथ संयुक्त रूप से की गयी छापेमारी में पहले तीन लोगों को दबोचा गया। गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान हरसिद्धि थाना क्षेत्र के अब्बास खान, अबरार अंसारी और इस्तेयाज खान के रूप में हुई है निशानदेही पर अन्य गिरफ्तारियां-पकड़े गए अपराधियों की निशानदेही पर पुलिस ने पकड़ीदयाल के मठिया गांव में छापेमारी की, जहाँ से दो अन्य आरोपियों रंजीत कुमार कुशवाहा और रोहित कुमार को दूसरे हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि ये सभी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। इस सफल छापेमारी दल में छतौनी थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार पासवान और अपर थानाध्यक्ष श्रीकांत चौहान सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है

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13/05/2026

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13/05/2026

थानाध्यक्ष के नेतृत्व में महमदपुर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर थाना क्षेत्र के केशव गौड़ में छापेमारी कफ दहेज हत्या कांड के प्राथमिकी अभियुक्त नीरज सिंह के साथ एक महिला को भी पुलिस ने किया गिरफ्तार।

फर्जी सर्टिफिकेट मामले में बड़ी कार्रवाई, लखीसराय के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आशुतोष कुमार निलंबितलखीसराय में ग्रामीण कार्य...
13/05/2026

फर्जी सर्टिफिकेट मामले में बड़ी कार्रवाई, लखीसराय के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आशुतोष कुमार निलंबित

लखीसराय में ग्रामीण कार्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लखीसराय ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता आशुतोष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर सड़क निर्माण विभाग द्वारा आयोजित एक टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक ठेकेदार के अनुभव प्रमाण पत्र का गलत सत्यापन करने के गंभीर आरोप हैं. इस विभागीय कार्रवाई से इंजीनियरिंग जगत में हलचल मच गई है. मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला बिटुमिनस मैस्टिक वर्क से संबंधित एक फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से जुड़ा है. जब सड़क निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.जांच में पता चला कि ठेका लेने वाली फर्म, DK Brothers Trade, द्वारा जमा किए गए अनुभव प्रमाण पत्र में मैस्टिक वर्क का जिक्र था, जबकि असल में वह काम कंपनी ने किया ही नहीं था. इसके अलावा, ग्रामीण कार्य विभाग इस तरह का काम करता ही नहीं है. साथ ही, अन्य कार्यों की मात्रा और विवरण में भी काफी अंतर देखने को मिला, जिससे प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ और जालसाजी के मामले की पुष्टि हो गई. बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता को एक रिपोर्ट भेजी और दोषी कार्यपालक अभियंता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की. इसके बाद, इस सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने कार्यपालक अभियंता आशुतोष कुमार को निलंबित कर दिया.दिलचस्प बात यह है कि लखीसराय ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता आशुतोष कुमार ने खुद 13 फरवरी 2026 को डीके ब्रदर्स ट्रेड के प्रोपराइटर के खिलाफ फर्जी सर्टिफिकेट मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा था कि संवेदक द्वारा विभाग को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया. बावजूद इसके विभाग ने उन्हें भी इस पूरे मामले में जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की है. इधर, कवैया थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 और 336(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अब इस पूरे प्रकरण में विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस जांच भी तेज हो गई है. मामले का खुलासा जी मीडिया संवाददाता राज किशोर मधुकर ने आरटीआई से किया. इसके बाद विभाग सक्रिय हुआ. इधर कारवाई के बाद ग्रामीण कार्य विभाग में हड़कंप मच गया है

1 लाख रुपए घूस लेते एडिशनल SHO गिरफ्तार, :5 लाख की डिमांड थी, 2 लाख पर फाइनल; विजिलेंस की रेड, पकड़े जाने पर पिस्टल निका...
13/05/2026

1 लाख रुपए घूस लेते एडिशनल SHO गिरफ्तार, :5 लाख की डिमांड थी, 2 लाख पर फाइनल; विजिलेंस की रेड, पकड़े जाने पर पिस्टल निकाली

पटना में जानीपुर थाना के एडिशनल SHO संजय सिंह को विजिलेंस की टीम ने एक लाख रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि जमीन विवाद से जुड़े मामले के निपटारे के लिए पीड़ित कौशल से घूस मांगी गई थी। कौशल ने बताया कि जमीन विवाद के समाधान के लिए उनसे पहले 5 लाख रुपए की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के बाद 2 लाख रुपए में मामला तय हुआ। उन्होंने पहले ही विजिलेंस में संजय सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। संजय सिंह बुधवार को गाजाचक मोहम्मदपुर पंचायत के कोरियावां प्लॉट पर सर्वे के लिए पहुंचे थे। जैसे ही संजय ने एक लाख रुपए लिए, विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद उन्होंने अपनी पिस्टल कॉक कर दी।हालांकि विजिलेंस विभाग के ASI रवि कुमार ने सूझबूझ दिखाते हुए उनका हाथ पकड़ लिया। इस दौरान रवि कुमार के हाथ में चोट भी आई। घूस लेते SHO का वीडियो भी सामने आया है। *पकड़े जाने के बाद विजिलेंस की टीम से भिड़ा SHO,* घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें जानीपुर थाना के एडिशनल SHO संजय सिंह वर्दी में नजर आ रहे हैं। वीडियो में विजिलेंस विभाग और विजिलेंस की टीम उन्हें पीछे से दोनों हाथों से पकड़कर ले जाती दिख रही है। इस दौरान टीम उन्हें वर्दी पकड़कर ले जाने की कोशिश कर रही है, जबकि संजय सिंह खुद को छुड़ाने की कोशिश करते और टीम से उलझते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान आसपास मौजूद कुछ लोग भी स्थिति में शामिल होकर हल्की झड़प करते नजर आते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। *जमीन पर खूंटा गड़वाने पहुंचे थे SHO*,DSP अरुणोदय पांडे ने बताया कि दो दिन पहले इस मामले में शिकायत मिली थी। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद धावा दल का गठन किया गया। उन्होंने बताया कि जमीन पर खूंटा गड़वाने के लिए SHO पहुंचे थे और इसी काम के बदले पीड़ित से रुपए ले रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। *जानीपुर इलाके में भूमाफियाओं का गैंग* एक्टिव,पीड़ित कौशल किशोर ने आरोप लगाया है कि जानीपुर इलाके में भूमाफियाओं का एक गैंग सक्रिय है। उनका कहना है कि यह गिरोह DSP, जानीपुर थाने के पुलिसकर्मियों और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन पर अवैध कब्जे को बढ़ावा देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जमीन विवाद का मामला थाने तक पहुंचता है, तब भी पीड़ित पक्ष से उगाही की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

13/05/2026

*गोपालगंज :- सिधवलिया CO प्रितिलता की मुश्किलें बरकरार। सरकारी जमीन कब्जा केस में बेल पर सुनवाई टली। अब 15 मई को कोर्ट में होगी अगली सुनवाई। माफियाओ से बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद DM पवन कुमार सिन्हा के आदेश पर दर्ज हुई थी FIR।*

*चंडी थाना पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत 22 खोए हुए मोबाइल बरामद कर वास्तविक मालिकों को सौंपा। मोबाइल फोन के अनु...
13/05/2026

*चंडी थाना पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत 22 खोए हुए मोबाइल बरामद कर वास्तविक मालिकों को सौंपा। मोबाइल फोन के अनुमानित कीमत लगभग चार लाख 13 हजार रुपया।नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार*

13/05/2026

*नालन्दा:-संदिग्ध परिस्थितियों में हलवाई की मौत, सड़क किनारे साईकिल समेत मिला शव,जांच में जुटी पुलिस,चण्डी थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव की घटना।नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार*

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