02/09/2026
⚠️ नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अज्ञात मछलियां, खाने से बचने की सरकार की सलाह
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद गंडक समेत बिहार की कुछ नदियों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में असामान्य और अज्ञात मछलियां मिलने की खबरों के बीच बिहार सरकार ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने एडवाइजरी जारी कर बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात या असामान्य दिखने वाली मछलियों को खरीदने, बेचने और खाने से बचने को कहा है। विभाग के अनुसार, बाढ़ के दौरान तालाबों, नदियों और अन्य जलस्रोतों की मछलियां पानी के तेज बहाव के साथ दूर तक पहुंच सकती हैं।
आखिर खतरा क्या है?
बाढ़ का पानी कई जगह नालों, सीवेज, मृत जानवरों और अन्य प्रदूषित स्रोतों के संपर्क में आ सकता है। ऐसे पानी में रहने या बहकर आने वाली मछलियों के शरीर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे रोगजनक मौजूद होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसी वजह से विभाग ने सलाह दी है कि जब तक बाढ़ का पानी स्थिर न हो जाए और जलस्रोतों की स्थिति सामान्य न हो, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने से बचें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बाढ़ के बाद दूषित पानी और भोजन से होने वाली बीमारियों के खतरे को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है और बाढ़ के पानी के संपर्क में आए भोजन को नहीं खाने की बात कहता है।
कौन-कौन सी मछलियों की चर्चा है?
बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गोनच/गूंज कैटफिश, बघार, ग्रास कार्प, बराली यानी वॉलागो और रोहू जैसी मछलियों के मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इन मछलियों को “आदमखोर” या “शव खाने वाली खतरनाक मछली” बताकर किए जा रहे दावों को तथ्य मानना सही नहीं है। कुछ रिपोर्टों में मिली बड़ी मछलियों को स्थानीय रूप से पहचानी जाने वाली वॉलागो अट्टू प्रजाति से जोड़ा गया है, लेकिन इनसे जुड़े कई वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन की लोगों से अपील
लोगों से कहा गया है कि—
• बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात मछली न खाएं।
• ऐसी मछलियों की खरीद-बिक्री से बचें।
• बिना पहचान और संबंधित विभाग की पुष्टि के किसी अज्ञात मछली को खाने योग्य न मानें।
• ऐसी मछली मिलने पर स्थानीय मत्स्य पदाधिकारी या प्रशासन को सूचना दें।
• अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
यानी फिलहाल सबसे सुरक्षित तरीका यही है—बाढ़ के पानी से आई या अज्ञात मछली को न खरीदें, न बेचें और न खाएं।