23/03/2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे टीबी पर वार, अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी की पहचान में गेमचेंजर
• अब नहीं छिपेगी टीबी, एआई मशीन से गांव-गांव में त्वरित जांच
• आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक तकनीक का उपयोग
छपरा। कभी जानलेवा मानी जाने वाली तपेदिक (टीबी) अब चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और समय पर पहचान के कारण काफी हद तक नियंत्रित बीमारी बन चुकी है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और समय पर जांच नहीं होने के कारण आज भी यह बीमारी कई जिंदगियों को प्रभावित कर रही है। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार नई तकनीकों को अपना रहा है। इसी कड़ी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी की पहचान में गेमचेंजर साबित हो रही है। 2024 से 2025 तक जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक 435 कैंप का आयोजन किया गया है। जिसमें 42868 लोगों की जांच हुई है। 4331 लोगों का पोर्टेबल एक्सरे मशीन के द्वारा एक्स- रे किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान आसान:
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में एआई तकनीक से लैस पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का उपयोग शुरू कर दिया गया है, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो गई है। यह मशीन मौके पर ही एक्स-रे लेकर फेफड़ों में मौजूद संक्रमण के संकेतों- जैसे सफेद धब्बों की पहचान कर लेती है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए रेडियोलॉजिस्ट की अनिवार्यता नहीं होती, क्योंकि एआई तकनीक खुद ही प्रारंभिक विश्लेषण कर रिपोर्ट उपलब्ध करा देती है।
यह मशीन पूरी तरह पोर्टेबल, हल्की और बैटरी से संचालित है, जिसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। जांच की प्रक्रिया भी बेहद सरल है। मरीज को एक प्लेट के सामने खड़ा कर एक्स-रे लिया जाता है और कुछ ही क्षणों में कंप्यूटर से जुड़ी प्रणाली के जरिए एआई यह बता देता है कि टीबी की आशंका है या नहीं। संदिग्ध मामलों को तुरंत आगे की जांच के लिए भेज दिया जाता है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक तकनीक का उपयोग:
जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक इस तकनीक का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। पहले से उपलब्ध एक मशीन के साथ हाल ही में विभाग को एक और नई मशीन प्राप्त हुई है, जिससे जांच की क्षमता और भी बढ़ गई है।
6773 टीबी मरीजों की पहचान:
यक्ष्मा विभाग के डीपीसी हिमांशु शेखर ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच जिले में कुल 6773 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इनमें 4076 मरीज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और 2697 मरीज निजी अस्पतालों से चिन्हित हुए हैं। वहीं सीबीनेट और ट्रूनेट मशीनों के माध्यम से 32,111 लोगों की जांच की गई। निक्षय पोषण योजना के तहत इन मरीजों को कुल 1 करोड़ 52 लाख 19 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है, जिससे इलाज के दौरान पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
टीबी चैंपियन की भी भूमिका महत्वपूर्ण :
जिले में टीबी उन्मूलन अभियान में टीबी से ठीक हो चुके मरीजों अब चैंपियन की भूमिका निभा रहें है। टीबी चैंपियन के रूप में जन जागरूकता फैलाकर विभाग को सहयोग कर रहें। कई ऐसे टीबी चैंपियन है जो लगातार अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहें है।
अब गांव के पास ही जांच की सुविधा:
सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के एक गांव निवासी टीबी मरीज सोनू कुमार ने बताया कि पहले जांच के लिए शहर के अस्पताल जाना पड़ता था, जिसमें समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब गांव के पास ही जांच हो जाती है और रिपोर्ट भी तुरंत मिल जाती है, जिससे इलाज जल्दी शुरू हो पाया।
कारगर साबित हो रही है एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीन
जिला क्षय रोग पदाधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने कहा एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी उन्मूलन अभियान में बेहद कारगर साबित हो रही है। इससे दूरदराज के इलाकों में भी मरीजों की समय पर पहचान हो पा रही है। हमारा लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर टीबी को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीक, समय पर जांच और जनजागरूकता के समन्वय से टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को जल्द हासिल किया जा सकता है।