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23/03/2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे टीबी पर वार, अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी की पहचान में गेमचेंजर
• अब नहीं छिपेगी टीबी, एआई मशीन से गांव-गांव में त्वरित जांच
• आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक तकनीक का उपयोग
छपरा। कभी जानलेवा मानी जाने वाली तपेदिक (टीबी) अब चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और समय पर पहचान के कारण काफी हद तक नियंत्रित बीमारी बन चुकी है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और समय पर जांच नहीं होने के कारण आज भी यह बीमारी कई जिंदगियों को प्रभावित कर रही है। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार नई तकनीकों को अपना रहा है। इसी कड़ी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी की पहचान में गेमचेंजर साबित हो रही है। 2024 से 2025 तक जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक 435 कैंप का आयोजन किया गया है। जिसमें 42868 लोगों की जांच हुई है। 4331 लोगों का पोर्टेबल एक्सरे मशीन के द्वारा एक्स- रे किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान आसान:
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में एआई तकनीक से लैस पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का उपयोग शुरू कर दिया गया है, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो गई है। यह मशीन मौके पर ही एक्स-रे लेकर फेफड़ों में मौजूद संक्रमण के संकेतों- जैसे सफेद धब्बों की पहचान कर लेती है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए रेडियोलॉजिस्ट की अनिवार्यता नहीं होती, क्योंकि एआई तकनीक खुद ही प्रारंभिक विश्लेषण कर रिपोर्ट उपलब्ध करा देती है।
यह मशीन पूरी तरह पोर्टेबल, हल्की और बैटरी से संचालित है, जिसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। जांच की प्रक्रिया भी बेहद सरल है। मरीज को एक प्लेट के सामने खड़ा कर एक्स-रे लिया जाता है और कुछ ही क्षणों में कंप्यूटर से जुड़ी प्रणाली के जरिए एआई यह बता देता है कि टीबी की आशंका है या नहीं। संदिग्ध मामलों को तुरंत आगे की जांच के लिए भेज दिया जाता है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक तकनीक का उपयोग:
जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक इस तकनीक का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। पहले से उपलब्ध एक मशीन के साथ हाल ही में विभाग को एक और नई मशीन प्राप्त हुई है, जिससे जांच की क्षमता और भी बढ़ गई है।
6773 टीबी मरीजों की पहचान:
यक्ष्मा विभाग के डीपीसी हिमांशु शेखर ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच जिले में कुल 6773 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इनमें 4076 मरीज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और 2697 मरीज निजी अस्पतालों से चिन्हित हुए हैं। वहीं सीबीनेट और ट्रूनेट मशीनों के माध्यम से 32,111 लोगों की जांच की गई। निक्षय पोषण योजना के तहत इन मरीजों को कुल 1 करोड़ 52 लाख 19 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है, जिससे इलाज के दौरान पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

टीबी चैंपियन की भी भूमिका महत्वपूर्ण :

जिले में टीबी उन्मूलन अभियान में टीबी से ठीक हो चुके मरीजों अब चैंपियन की भूमिका निभा रहें है। टीबी चैंपियन के रूप में जन जागरूकता फैलाकर विभाग को सहयोग कर रहें। कई ऐसे टीबी चैंपियन है जो लगातार अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहें है।

अब गांव के पास ही जांच की सुविधा:

सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के एक गांव निवासी टीबी मरीज सोनू कुमार ने बताया कि पहले जांच के लिए शहर के अस्पताल जाना पड़ता था, जिसमें समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब गांव के पास ही जांच हो जाती है और रिपोर्ट भी तुरंत मिल जाती है, जिससे इलाज जल्दी शुरू हो पाया।

कारगर साबित हो रही है एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीन
जिला क्षय रोग पदाधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने कहा एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीन टीबी उन्मूलन अभियान में बेहद कारगर साबित हो रही है। इससे दूरदराज के इलाकों में भी मरीजों की समय पर पहचान हो पा रही है। हमारा लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर टीबी को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीक, समय पर जांच और जनजागरूकता के समन्वय से टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को जल्द हासिल किया जा सकता है।

अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य उद्घाटन आज दिनांक 23 मार्च 2026 को जय प्रकाश विश्वविद्यालय, ...
23/03/2026

अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य उद्घाटन आज दिनांक 23 मार्च 2026 को जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन जी द्वारा किया गया। 23 से 25 मार्च 2026 तक आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का केंद्रीय विषय “चराचर संवेदी एकात्मता: भारतीय जीवन दर्शन” है। उद्घाटन सत्र अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न भागों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही और पूरा परिसर दार्शनिक चिंतन एवं विमर्श से गुंजायमान हो उठा। मंचासीन गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत के क्रम में माननीय कुलाधिपति महोदय का स्वागत कुलपति महोदय ने किया। माननीय कुलपति महोदय का स्वागत प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव जी ने, अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सभापति प्रो. अमरनाथ झा का स्वागत कुलसचिव प्रो. नारायण दास जी, अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अंबिका दत्त शर्मा जी का स्वागत प्रो. हरिश्चंद जी ने किया। अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सचिव प्रो. किस्मत कुमार सिंह जी का स्वागत प्रो. विश्वामित्र पाण्डेय जी ने किया।

अपने *उद्घाटन अभिभाषण में माननीय कुलाधिपति महोदय* ने भारतीय दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को बौद्धिक योद्धा बताते हुए ज्ञान, विवेक और नैतिकता के संतुलन पर विशेष बल दिया। उन्होंने “चराचर संवेदी एकात्मता” की अवधारणा को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह चर और अचर के बीच संबंध स्थापित करता है और समस्त सृष्टि को एकात्म दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भी उन्होंने भारतीय चिंतन की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अधिवेशन समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवता के लिए लाभकारी सिद्ध होगा तथा सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएँ दीं। माननीय कुलाधिपति महोदय ने तीन नए भवनों और गैलरी का भी उद्घाटन किया।

**विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) परमेंद्र कुमार बाजपेई जी ने अपने गरिमामय स्वागत भाषण* में माननीय कुलाधिपति और सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए इस अधिवेशन को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्यों और शैक्षणिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान निरंतर अधोसंरचना विकास, नए भवनों के निर्माण तथा शैक्षणिक गुणवत्ता के उन्नयन की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, नामांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाने, ऑनलाइन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने तथा छात्र सहायता केंद्र की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कदमों की चर्चा की। साथ ही उन्होंने पीएम उषा योजना और डीएसटी-फिस्ट कार्यक्रम के माध्यम से शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने के प्रयासों को रेखांकित किया। कुलपति ने प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट को सशक्त बनाने, व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के विस्तार तथा “वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन” जैसी पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण संसाधन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विभिन्न संस्थानों के साथ हुए समझौता ज्ञापनों (MoU) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनसे शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी और अंततः गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य साकार होगा।

*अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अंबिका दत्त शर्मा जी ने विषय प्रवेश* करते हुए “चराचर संवेदी एकात्मता” की दार्शनिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया और अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के इतिहास, उसके विकास तथा बढ़ती सदस्य संख्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस प्रकार के अधिवेशन ज्ञान परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उद्घाटन सत्र में परिषद् के सभापति प्रो. अमरनाथ झा जी, सचिव प्रो. किस्मत कुमार सिंह जी सहित अन्य गणमान्य विद्वान मंचासीन रहे और उन्होंने भी भारतीय दर्शन की समग्र एवं जीवनोपयोगी दृष्टि की सराहना की।

आयोजन सचिव प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव जी ने बताया कि यह अधिवेशन 25 मार्च 2026 तक विभिन्न अकादमिक सत्रों के माध्यम से विषय के विविध आयामों पर गहन चर्चा के साथ आगे बढ़ेगा। समापन सत्र में तीन दिनों के विमर्श का सार प्रस्तुत किया जाएगा और भावी दिशा निर्धारित की जाएगी। विश्वविद्यालय आयोजन सचिव प्रो. हरिश्चंद जी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अधिवेशन भारतीय दर्शन के अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगा तथा ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगा। मंच संचालन डॉ. ऋचा मिश्रा जी ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षेत्तर कर्मी, शोधार्थी उपस्थित थे।

19/03/2026

जय प्रकाश विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय रसायन विज्ञान सम्मेलन (FCS-2026) का भव्य आगाज़: शोध और नवाचार पर विशेषज्ञों का मंथन


छपरा। जय प्रकाश विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "Frontiers in Chemical Sciences: Applications in Energy, Environment and Health (FCS-2026)" का भव्य शुभारंभ आज विश्वविद्यालय स्थित सीनेट हॉल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। PM-USHA के सहयोग से आयोजित इस हाइब्रिड सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ।

कार्यक्रम के अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी जी ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में तर्कपूर्ण तरीके से रसायन विज्ञान को जीवन दर्शन से जोड़ा। भौतिकी का छात्र होने के बावजूद रसायन शास्त्र से अपने जुड़ाव को साझा करते हुए उन्होंने इसे "बंधन (Bonding) और समूहों (Clusters) का विज्ञान" बताया। कुलपति महोदय ने प्रेरित करते हुए कहा कि हमें रसायनों से सीखना चाहिए कि जीवन में कब स्थिर (Ground State) रहना है और कब ऊर्जावान (Excited State) होकर कार्य करना है। उन्होंने घोषणा की कि बिहार सरकार आगामी सत्र से विद्यार्थियों के लिए "Centre of Excellence" और "Centre for Research and Innovation" की स्थापना करने जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय जल्द ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर शोध और संसाधनों के आदान-प्रदान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।

इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में सम्मेलन के संयोजक और रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार जी ने अपने स्वागत भाषण में देश-विदेश से आए अतिथियों, प्रतिभागियों एवं वक्ताओं का अभिनंदन किया, जबकि आयोजन सचिव डॉ. शाची मिश्रा ने सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह मंच ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोधों के आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. के. पी. श्रीवास्तव ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय में शोध के प्रति बढ़ते उत्साह के लिए कुलपति महोदय के सतत मार्गदर्शन को श्रेय दिया।

​अकादमिक सत्र के दौरान विश्वविद्यालय के आरएंडडी (R&D) सेल के निदेशक प्रो. रबिंद्र सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए शोध की गुणवत्ता और मौलिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान केवल डिग्री प्राप्त करने का जरिया नहीं बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

वहीं, राजकीय पॉलिटेक्निक मढ़ौरा के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार सिंह ने तकनीकी शिक्षा और शुद्ध विज्ञान के बीच गहरे अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयोगशाला के प्रयोगों को तकनीकी कौशल के साथ जोड़कर ही हम औद्योगिक क्रांति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि और प्रख्यात plenary वक्ता प्रो. वी. के. तिवारी (BHU, वाराणसी) ने अपने संबोधन में भारतीय वैज्ञानिकों को चीन और जापान जैसे देशों की तर्ज पर शोध कार्यों के व्यावसायीकरण (Commercialization) की सलाह दी, ताकि अनुसंधान का सीधा लाभ उद्योग और आम जनमानस तक पहुंच सके। उन्होंने भाषा की दीवार को तोड़ते हुए कहा कि विज्ञान को मातृभाषा में भी प्रभावी ढंग से समझा और साझा किया जा सकता है।

उद्घाटन सत्र का समापन संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. वर्चस्वल कश्यप द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. नारायण दास, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. अभिषेक दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद और शोधार्थी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर: डीएम ने की समीक्षा, सदर अस्पताल में जल्द शुरू होगा आंखों का ऑपरेशन थिएटरएम्बुलें...
07/03/2026

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर: डीएम ने की समीक्षा, सदर अस्पताल में जल्द शुरू होगा आंखों का ऑपरेशन थिएटर
एम्बुलेंस की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए नियंत्रण कक्ष बनाया गया

छपरा, 7 मार्च। जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन के लिए आधुनिक ऑपरेशन थिएटर स्थापित करने की प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए इसे जल्द से जल्द क्रियाशील करने का निर्देश दिया, ताकि जिले के मरीजों को बेहतर नेत्र उपचार की सुविधा मिल सके।
एम्बुलेंस की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए नियंत्रण कक्ष बनाया गया
बैठक में एम्बुलेंस सेवा की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिलाधिकारी ने बताया कि सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर एम्बुलेंस की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जो अब पूरी तरह क्रियाशील है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसके माध्यम से एम्बुलेंस की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और अवैध रूप से संचालित एम्बुलेंस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही खराब पड़ी एम्बुलेंस और शव वाहनों की तत्काल मरम्मत कराने या नियमों के अनुसार स्क्रैप नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।
सदर अस्पताल में फिलहाल दो शव वाहन उपलब्ध हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर निजी वाहनों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन उसका भुगतान रोगी कल्याण समिति के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि जिले के अस्पतालों में औसतन 90 प्रतिशत से अधिक दवाएं उपलब्ध हैं। जिलाधिकारी ने सभी एमओआईसी को निर्देश दिया कि आवश्यक दवाओं की अधियाचना समय पर भेजी जाए, ताकि अस्पतालों में दवाओं की लगातार उपलब्धता बनी रहे और मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
चिकित्सीय प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट केवल ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से ही बनाई जाए। ऑफलाइन इंजुरी रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया। वर्तमान में जिले में लगभग 66 प्रतिशत इंजुरी रिपोर्ट ऑनलाइन बनाई जा रही हैं, जबकि सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल सोनपुर, मकेर और मांझी में यह व्यवस्था शत-प्रतिशत लागू है।
जिलाधिकारी ने भव्या पोर्टल के माध्यम से सभी चिकित्सीय जांच और प्रिस्क्रिप्शन जारी करने का भी निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि जिले के 14 अस्पतालों में भव्या पोर्टल के माध्यम से 100 प्रतिशत एंट्री की जा रही है, जबकि शेष 6 अस्पतालों को भी जल्द ही शत-प्रतिशत एंट्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
ओपीडी सेवाओं की समीक्षा के दौरान पाया गया कि प्रति मरीज औसत प्रतीक्षा समय लगभग 30 मिनट है। जिलाधिकारी ने इसमें सुधार लाने के लिए डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर को संशोधित कर युक्तिसंगत बनाने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी समय पर्याप्त संख्या में डॉक्टर उपलब्ध रह सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय का पालन नहीं करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अस्पतालों में, एपीएचसी सहित, शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि लगभग 73 प्रतिशत आशा कार्यकर्ता एम-आशा ऐप पर लाइन लिस्टिंग कर रही हैं। जिलाधिकारी ने खराब प्रदर्शन करने वाली आशा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा फरवरी माह में ओपीडी में 50 से कम मरीज देखने वाले चिकित्सकों को बैठक में बुलाकर कारण पूछा गया और उन्हें कार्य में सुधार लाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची तैयार कर विभाग को कार्रवाई के लिए भेजने का भी निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। रूटीन टीकाकरण के तहत जिले में औसत उपलब्धि लगभग 90 प्रतिशत पाई गई। उन्होंने सेविका, सहायिका और आशा कार्यकर्ताओं के बेहतर समन्वय से लक्षित आयु वर्ग के बच्चों की ड्यू लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि टीकाकरण शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में जिले के सभी सरकारी चिकित्सकों की विभिन्न सेवा मानकों पर की गई रैंकिंग भी प्रस्तुत की गई। इसमें डॉ. आयुषी सिंह, डॉ. सीमा कुमारी, डॉ. उमेश रजक और डॉ. सरिता सिन्हा को सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग वाले डॉक्टरों में शामिल किया गया। जिलाधिकारी ने बेहतर कार्य करने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करने की घोषणा की।
जनवरी माह की जिला स्तरीय रैंकिंग में नगरा प्रखंड को प्रथम, एकमा को द्वितीय और तरैया को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
बैठक में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, सभी जिला स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारी, सभी एमओआईसी, सभी बीएचएम, बीसीएम तथा पार्टनर एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

ईश्वर की असीम अनुकम्पा और बड़ों के आशीर्वाद से मेरा पुत्र हर्ष वर्धन अशोक पौत्र स्वर्गीय प्रोफेसर मान सिंह एवं स्मृतिशेष...
06/03/2026

ईश्वर की असीम अनुकम्पा और बड़ों के आशीर्वाद से मेरा पुत्र हर्ष वर्धन अशोक पौत्र स्वर्गीय प्रोफेसर मान सिंह एवं स्मृतिशेष सावित्री सिंह तथा सुपुत्र श्रीमती निरुपमा सिंह एवं अशोक कुमार सिंह दहियावां टोला छपरा का चयन संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा २०२५ में हुआ।हर्ष वर्धन अशोक एक मैकेनिकल इंजीनियर है जो पूर्व में मारुति उद्योग लिमिटेड में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे।
Dear Sir/Ma'am/Friends
By the grace of God and good wishes of seniors,friends and family members my son Harsh Vardhan Ashok Grand son of Late Savitry Singh and Late Prof Man Singh and son of Nirupama Singh and Ashok Kumar Singh cracked civil srvices examination conducted by UPSC in 2025 and secured rank 424 in the merit list.
Congratulations to Harsh.

21/02/2026

“ *स्वच्छ परिसर, स्वस्थ समाज : राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रेरक अभियान”*
*जय प्रकाश विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना स्नातकोत्तर इकाई ने स्वच्छता अभियान का किया सफल आयोजन”*

दिनांक 21 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय सेवा योजना की चारों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा परिसर स्थित अतिथि गृह के आसपास स्वच्छता अभियान के अंतर्गत व्यापक सफाई कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस पुनीत एवं सामाजिक दायित्व से ओत-प्रोत कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर माननीय कुलपति महोदय ने अपना प्रेरणास्पद संदेश प्रेषित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का मूल मंत्र — “Not Me, But You” अर्थात “स्वयं से पहले दूसरों की सेवा” — समाज सेवा की सर्वोच्च भावना को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि इस भावना को व्यवहारिक रूप देने का सबसे सशक्त माध्यम स्वच्छता अभियान है।

कुलपति महोदय ने महात्मा गांधी के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा — “स्वच्छता स्वतंत्रता से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता के इस स्वप्न को साकार करने में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक एक सशक्त एवं जीवंत कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

यह अभियान केवल सफाई कार्य तक सीमित न होकर एक व्यापक सामाजिक संदेश का प्रतीक रहा — यह संदेश कि हम अपने परिवेश के प्रति सजग, जिम्मेदार एवं सक्रिय नागरिक हैं।

कार्यक्रम के सफल संचालन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. हरिश्चंद्र यादव तथा चारों इकाइयों के कार्यक्रम पदाधिकारी — डॉ. आलोक रंजन तिवारी, डॉ. जया कुमारी पाण्डेय, डॉ. आशुतोष द्विवेदी एवं श्री रितेश्वर तिवारी — ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विद्या भूषण श्रीवास्तव, विवेक कुमार, धीरज मिश्रा, जितेंद्र राय, तपन कुमार सनी, सूरज कुमार राय, शिखा, रूपेश पिंकी, ज्योति, रुस्तम आलम अंसारी, शकील आलम, सुधीर कुमार, गिरिधर कुमार, रूपाली, राहुल, अभिषेक, पंकज यादव, अंकिता, ज्योति विकास, सत्यजीत, निभा, पूनम, कृष्ण, अर्चना, आभा, ममता, सिद्धार्थ सहित अनेक स्वयंसेवकों ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ सहभागिता निभाई।

यह कार्यक्रम न केवल परिसर की स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करने में सफल रहा।

अब पति भी निभाएंगे जिम्मेदारी, सास-बहू मिलकर लेंगी समझदारी का फैसला• परिवार नियोजन में बढ़ेगी पुरुषों की भागीदारी• सास-ब...
19/02/2026

अब पति भी निभाएंगे जिम्मेदारी, सास-बहू मिलकर लेंगी समझदारी का फैसला
• परिवार नियोजन में बढ़ेगी पुरुषों की भागीदारी
• सास-बहू सम्मेलन से घर-घर तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश
• 23 फरवरी से चलेगा मिशन परिवार विकास अभियान
• मुखिया और जनप्रतिनिधि भी करेंगे सहयोग
छपरा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, स्वस्थ अंतराल और संतुलित परिवार के उद्देश्य से 23 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक जिले में “मिशन परिवार विकास अभियान” चलाया जायेगा। इस अभियान को इस बार विशेष रूप से पुरुषों की भागीदारी और सास-बहू सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने पर केंद्रित होगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जब परिवार नियोजन केवल महिलाओं की जिम्मेदारी न रहकर पूरे परिवार का साझा निर्णय बनेगा, तभी इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक कुमार गौरव (भा.प्र.से.) ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा निर्देश दिया है।
पुरुषों की भागीदारी पर विशेष जोर
अभियान के दौरान पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पंचायत स्तर पर पुरुष समूह बैठकें, चौपाल संवाद और प्रेरक सत्र आयोजित कर यह बताया जाए कि परिवार नियोजन केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। पुरुष नसबंदी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें अस्पताल में कम समय लगता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। इसके बावजूद सामाजिक संकोच और भ्रांतियों के कारण पुरुष सहभागिता अपेक्षाकृत कम रही है। अभियान के तहत इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक और काउंसलर ग्रामीण स्तर तक संवाद करेंगे। इसके साथ ही जिन पुरुषों ने स्वेच्छा से नसबंदी कराई है, उन्हें “परिवार नियोजन प्रेरक” के रूप में आगे लाकर अन्य लोगों को प्रेरित किया जाएगा। प्रोत्साहन राशि की समयबद्ध भुगतान व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
सास-बहू सम्मेलन से आयेगी समुदाय में बदलाव:
ग्रामीण और शहरी समुदायों में निर्णय प्रक्रिया में सास की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसे ध्यान में रखते हुए “सास-बहू सम्मेलन” आयोजित किए जाएंगे, जहां सही उम्र में विवाह, पहले बच्चे में दो वर्ष का अंतर और दो बच्चों के बीच कम से कम तीन वर्ष का अंतर रखने के महत्व पर चर्चा होगी।
इन सम्मेलनों में आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियां मिलकर संवाद स्थापित करेंगी। नई पहल किट के माध्यम से गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी दी जाएगी और शंकाओं का समाधान किया जाएगा।
सम्मेलन का उद्देश्य पीढ़ियों के बीच संवाद बढ़ाना है, ताकि परिवार नियोजन को लेकर घर के भीतर सकारात्मक वातावरण बन सके।
घर-घर संपर्क और पूर्व पंजीयन
23 फरवरी से 05 मार्च तक “दम्पत्ति संपर्क सप्ताह” के दौरान आशा और एएनएम घर-घर जाकर योग्य दम्पत्तियों की पहचान कर पूर्व पंजीयन करेंगी। Community Need Assessment के आधार पर स्थायी और अस्थायी साधनों की जानकारी दी जाएगी। 06 मार्च से 20 मार्च तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बंध्याकरण, IUCD, अंतरा इंजेक्शन, कंडोम, माला-एन एवं अन्य साधन उपलब्ध रहेंगे। Fixed Day Service (FDS) के तहत निर्धारित तिथियों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
जनजागरूकता के विविध माध्यम
अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ई-रिक्शा जागरूकता रथ, पंचायत स्तरीय बैठकें, युवा क्लबों की भागीदारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा। स्वास्थ्य मेले के माध्यम से भी लोगों को सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। परिवार नियोजन पूरी तरह स्वैच्छिक और सुरक्षित है। जब पुरुष आगे आएंगे और सास-बहू मिलकर निर्णय लेंगी, तब ही स्वस्थ और खुशहाल परिवार का सपना साकार होगा। मिशन परिवार विकास इसी सामूहिक संकल्प की दिशा में एक मजबूत कदम है।

मुखिया और जनप्रतिनिधि भी करेंगे सहयोग:
इस अभियान के बेहतर प्रबंधन एवं अन्य विभागों से समन्वय के लिए जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी के अध्यक्षता में सम्बद्ध विभाग- आईसीडीएस, पंचायती राज, जीविका, महादलित विकास मिशन इत्यादि के जिला स्तरीय पदाधिकारी सलाहकार एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी-सलाहकार के साथ समन्वय बैठक का आयोजन किया जाय, ताकि समुदाय स्तर पर आमजन को उत्प्रेरित करने में आशा, आंगनबाड़ी सेविका, जीविका दीदी, विकास मित्र आदि की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। आंगनवाड़ी सेविका, जीविका दीदी, पंचायती राज सदस्यों एवं विकास मित्र का उन्मुखीकरण कर पखवाड़ा के दौरान इच्छुक एवं योग्य दम्पतियों को परिवार कल्याण के अस्थाई एवं स्थाई उपाय अपनाने के लिए उत्प्रेरित किया जायेगा।

फाइलेरिया के खिलाफ एकजुट हुए गांव, रैली से लेकर कक्षा तक गूंजा संदेश•विश्व उपेक्षित रोग दिवस पर बच्चों, जनप्रतिनिधियों औ...
31/01/2026

फाइलेरिया के खिलाफ एकजुट हुए गांव, रैली से लेकर कक्षा तक गूंजा संदेश
•विश्व उपेक्षित रोग दिवस पर बच्चों, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी
•चित्रकला-निबंध से लेकर सामुदायिक बैठकों तक चला जागरूकता अभियान
•बच्चे बने संदेशवाहक, जनप्रतिनिधियों ने संभाली कमान

छपरा। विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस के अवसर पर फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न गांवों में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रोगी हितधारक मंच के सहयोग से इनई, भादपा, वीरम परसा एवं ढेलहारी आम सहित कई गांवों में रैली, सामुदायिक बैठक, जन-संपर्क अभियान और विद्यालय स्तरीय गतिविधियों के माध्यम से आमजन को दवा सेवन के लिए प्रेरित किया गया।

इसी क्रम में वीरम परसा गांव में सीएनआरपी उषा, बीके विधा सागर एवं जीविका प्रितम के नेतृत्व में संसार वीओ समूह के सहयोग से जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों को फाइलेरिया से बचाव, नियमित दवा सेवन और अभियान में सहभागिता का संदेश दिया गया।

वहीं ढेलहारी आम में राजकीय मध्य विद्यालय ढेलहारी से सीएचओ दीपक कुमार, शिवा मेहता, एएनएम नीतू कुमारी के सहयोग से जागरूकता रैली के साथ जन-संपर्क अभियान चलाया गया। इस दौरान उन लोगों से विशेष संवाद किया गया, जो दवा सेवन से परहेज करते हैं। बच्चों और ग्रामीणों को फाइलेरिया मरीज से मिलवाकर उसकी दैनिक परेशानियों को साझा कराया गया, ताकि लोग बीमारी की गंभीरता को समझें और दवा सेवन के लिए प्रेरित हों।

भादपा पंचायत में सरपंच मीनहाज असगर खाँ के सहयोग से उनके निवास पर सामुदायिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में इमाम साहब ने सभी लोगों से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए दवा सेवन की अपील की। इस अवसर पर सीएचओ दीपक कुमार ने एलएफ (लिम्फैटिक फाइलेरियासिस) से संबंधित जानकारी साझा करते हुए दवा सेवन के लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विद्यालय में निबंध लेखन प्रतियोगिता:

इसी कड़ी में उत्क्रमित बालिका उच्च एवं उच्चतर विद्यालय, इनई में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चित्रकला एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार, इनई पंचायत की मुखिया रीणा देवी एवं सीएचओ दीपक कुमार का विशेष सहयोग रहा। प्रतियोगिता में कुल 42 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर चित्रों और निबंधों के माध्यम से फाइलेरिया के प्रति अपनी समझ और संदेश प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बच्चों को मुखिया रीणा देवी द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुखिया एवं विद्यालय परिवार ने फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दवा सेवन ही फाइलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है, और इसके लिए समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।

*NEET छात्रा से दुष्कर्म मामला; रामबली चंद्रवंशी बोले-बिहार सरकार 13 करोड़ जनता की सुरक्षा और उनके साथ न्याय के लिए जिम्...
31/01/2026

*NEET छात्रा से दुष्कर्म मामला; रामबली चंद्रवंशी बोले-बिहार सरकार 13 करोड़ जनता की सुरक्षा और उनके साथ न्याय के लिए जिम्मेदार, पुलिस तत्काल जांच पूरी कर मामले का जल्द खुलासा करे*

*इतने लंबे समय बाद मामले को सीबीआई को सौंपना, राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े कर रहा गंभीर सवाल: पूर्व एडीजी जेपी सिंह*

*पटना:* जन सुराज ने NEET छात्रा से दुष्कर्म मामले में पुलिस प्रशासन से तत्काल और निष्पक्ष जांच पूरी कर पूरे प्रकरण का जल्द से जल्द खुलासा करने की मांग की है। बता दें कि शनिवार को जन सुराज के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी कार्यालय पाटलीपुत्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक (हिमाचल) जेपी सिंह ने कहा कि इतने लंबे समय बाद मामले को सीबीआई को सौंपा जाना, राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि मामले में हुई देरी के कारण से अब न तो पीड़िता का दोबारा पोस्टमार्टम संभव है और न ही कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच की जा सकती है। इस प्रकार की लापरवाही से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक तंत्र पर आती है। बिहार सरकार 13 करोड़ जनता की सुरक्षा और उनके साथ न्याय के लिए जिम्मेदार है और इस प्रकरण में सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर वह जनता के साथ जमीन पर उतरकर लगातार सवाल उठाता रहेगा, जब तक सरकार इस मामले में पारदर्शी और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करती।
प्रेस वार्ता में यह भी रेखांकित किया गया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, जिससे आम जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। पुलिस प्रशासन को अपनी कार्यशैली में सुधार कर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक (हिमाचल) जेपी सिंह, पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी, व प्रवक्ता सोनाली आनंद उपस्थित रहे।

29/01/2026

पुराना जर्जर भवन इतिहास बना, नए एसएनसीयू में संवर रही नवजातों की सांसें
• जहाँ कभी संसाधनों की कमी थी, अब वहीं मिल रहा नवजातों को जीवनदान
• सरकारी अस्पताल में निजी से बेहतर व्यवस्था
• एसएनसीयू में बढ़ायी गयी बेड की संख्या
• एक साल में 1498 नवजात शिशुओं का हुआ इलाज

छपरा। सदर अस्पताल में संचालित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) अब जिले के नवजातों के लिए जीवनदान साबित हो रही है। कुछ महीने पहले तक जर्जर और संकुचित भवन में चलने वाला एसएनसीयू अब नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य भवन (एमसीएच) में पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रहा है। स्थान की कमी और सीमित संसाधनों से जूझ रहे इस यूनिट को अब न सिर्फ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिला है, बल्कि बेड की संख्या भी 14 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।
नए एमसीएच भवन में शिफ्ट होने के बाद अब प्रसव से लेकर नवजात की गहन देखभाल तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। जन्म के समय कमजोर, समय से पूर्व जन्मे या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात शिशुओं को यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, इनक्यूबेटर, फोटोथेरेपी समेत अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सीधा असर शिशु मृत्यु दर में कमी के रूप में देखा जा रहा है।
पहले इलाज के लिए भटकते थे परिजन
एसएनसीयू इंचार्ज ज्योति आइजक ने बताया कि जिले में पहले सरकारी स्तर पर ऐसी उन्नत नवजात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार शिशुओं को इलाज के अभाव में जान गंवानी पड़ती थी। अब सदर अस्पताल में एसएनसीयू की सुविधा मिलने से परिजनों को निजी अस्पतालों या दूसरे जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यहां निमोनिया, पीलिया (जॉन्डिस), श्वसन संबंधी बीमारियों और कुपोषित नवजातों का आधुनिक तरीके से इलाज किया जा रहा है।

प्रशिक्षित स्टाफ, 24 घंटे सेवा:

एसएनसीयू के सुचारू संचालन के लिए चिकित्सकों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित नर्सें चौबीसों घंटे सेवा भाव से नवजातों की निगरानी और देखभाल में लगी रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सुविधाएं कई निजी अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं।

मेरे बच्चों को मिला जीवनदान:

एसएनसीयू में भर्ती एक नवजात के पिता गड़खा निवासी राजेश कुमार ने बताया मेरे बच्चे का जन्म समय से पहले हो गया था। सांस लेने में दिक्कत थी। अगर यहां एसएनसीयू की सुविधा नहीं होती तो हम इलाज के लिए बाहर जाने को मजबूर होते। डॉक्टरों और नर्सों की मेहनत से आज मेरा बच्चा सुरक्षित है। यह हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

आंकड़ों में एसएनसीयू की उपलब्धि:

जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक एसएनसीयू में कुल 1498 नवजात शिशुओं का इलाज किया गया। सदर अस्पताल में जन्मे 569 नवजात और अन्य अस्पतालों से रेफर 929 नवजात को बेहतर इलाज की सुविधा मिली है।

क्या है एसएनसीयू:

अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) नवजात शिशुओं के लिए एक विशेष गहन चिकित्सा इकाई है, जहां आधुनिक चिकित्सकीय उपकरणों की सहायता से गंभीर रूप से बीमार या कमजोर शिशुओं का इलाज किया जाता है।
इन रोगों का होता है उपचार
• समय से पूर्व जन्मे शिशु (प्री-मैच्योर बेबी)
• निमोनिया
• पीलिया (जॉन्डिस)
• श्वसन संबंधी बीमारियां
• कमजोर और कुपोषित नवजात शिशु

24/01/2026

छपरा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में भाजपा का VB-G RAM G कार्यक्रम आयोजित

छपरा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके अंतर्गत मीरा मुश्ररी गांव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा VB-G RAM G कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छपरा विधानसभा की विधायक छोटी कुमारी सहित पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं ग्रामीण विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सभा में विकसित भारत – गरीबों को रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) तथा VB-G RAM G Act 2025 जैसे विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
विधायक छोटी कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य गांव, गरीब, किसान और युवाओं को सशक्त बनाना है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में गांवों की भूमिका को मजबूत कर रही हैं।
कार्यक्रम में विवेक सिंह महामंत्री, धर्मेंद्र शाह महामंत्री, कार्यक्रम संयोजक शत्रुघ्न भगत, अध्यक्ष संजीव सिंह रिंकू, संचालनकर्ता धर्मेंद्र सिंह चौहान उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में मदन कुमार सिंह (प्रवक्ता), अधेन्दु शेखर (कार्यालय प्रभारी), अनुप यादव (मंडल अध्यक्ष), अनिल सिंह (महामंत्री मंडल सदर), उपेंद्र सिंह (उपाध्यक्ष), बच्चा सिंह, संतोष सिंह, राहुल सिंह तथा कंचन कुशवाहा (महिला जिला उपाध्यक्ष) सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं—जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं—की जानकारी ग्रामीणों को दी और ग्रामीणों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के साथ-साथ भाजपा संगठन को सशक्त बनाने की अपील की।

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