15/06/2026
कुछ वर्षों पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी, जिसको लेकर काफी चर्चा हुई और मुझे आलोचना व ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। आज कुछ लोग उसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर उसे जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए अपनी बात स्पष्ट करना आवश्यक समझता हूँ।
सबसे पहले मैं यह साफ कर देना चाहता हूँ कि उस पोस्ट को लिखते समय मेरा उद्देश्य किसी भी जाति, समाज या समुदाय का अपमान करना नहीं था। मैंने जो लिखा था, वह कुछ व्यक्तियों के व्यवहार को देखकर व्यक्त की गई मेरी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया थी, न कि किसी पूरे समाज के प्रति मेरी सोच
मैंने हमेशा पढ़ा और सुना था कि ठाकुर समाज अपने वचन, सम्मान और उदारता के लिए जाना जाता रहा है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ लोगों ने अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और जरूरतमंदों के हित में त्याग किया। इसी धारणा के आधार पर जब मैंने कुछ लोगों का आचरण उसके विपरीत देखा, तो भावनावश वह पोस्ट लिख दी। लेकिन मेरा आशय कभी भी पूरे समाज को लेकर कोई टिप्पणी करना नहीं था।
फिर भी यदि मेरी उस पोस्ट से किसी व्यक्ति या किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुँची हो, तो मैं पूरे सम्मान के साथ क्षमा प्रार्थी हूँ। एक सभ्य समाज में अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी की भावनाओं को आहत करना कभी मेरा उद्देश्य नहीं रहा और न ही आगे कभी रहेगा।
मैं आज भी यही मानता हूँ कि किसी व्यक्ति के कर्मों का मूल्यांकन उसके व्यक्तिगत आचरण के आधार पर होना चाहिए, न कि उसकी जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर। मेरे मन में किसी भी जाति, धर्म या वर्ग के प्रति न कोई दुर्भावना है और न ही किसी प्रकार का भेदभाव।
जो लोग वर्षों पुरानी बातों को तोड़-मरोड़कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने या राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे मेरा केवल इतना कहना है कि समाज को जोड़ने का प्रयास कीजिए, बाँटने का नहीं। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए।
यदि मेरी किसी बात से किसी को दुख पहुँचा है, तो मैं एक बार फिर विनम्रतापूर्वक क्षमा चाहता हूँ।🙏