19/01/2026
एक गाँव में एक ग़रीब किसान रहता था।
दिन भर खेत में मेहनत करता,
और शाम होते ही जंगल से लकड़ी काटकर बेचता।
उसी से उसका घर चलता था।
एक दिन जंगल में लकड़ी काटते-काटते
उसकी कुल्हाड़ी फिसल गई
और पास की नदी में जा गिरी।
किसान नदी किनारे बैठकर रोने लगा।
उसकी मेहनत की एकमात्र कमाई
उसी कुल्हाड़ी से जुड़ी थी।
तभी नदी से एक साधु प्रकट हुए।
उन्होंने किसान से रोने की वजह पूछी।
साधु नदी में उतरे और
सोने की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आए।
“क्या ये तुम्हारी है?”
किसान ने सिर हिलाया—
“नहीं महाराज, मेरी कुल्हाड़ी लोहे की थी।”
साधु फिर नदी में गए,
चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आए।
किसान ने फिर मना कर दिया।
आख़िर में साधु लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आए।
किसान की आँखों में चमक आ गई।
“हाँ महाराज, यही मेरी है।”
साधु मुस्कुराए।
किसान की ईमानदारी से खुश होकर
उन्होंने तीनों कुल्हाड़ियाँ किसान को दे दीं।
किसान समझ गया—
मेहनत से ज़्यादा क़ीमती
ईमानदारी होती है।