31/08/2026
कुंडेश्वर मंदिर में विवाद से गरमाया माहौल, संत के अपमान के आरोपों पर उठे सवाल
“अध्यक्ष-सचिव मालिक नहीं, व्यवस्थापक हैं” — बुंदेलखंड पीठाधीश्वर सीताराम दास महाराज ने जताई नाराजगी, कलेक्टर से आमसभा बुलाकर जांच की मांग
टीकमगढ़/कुंडेश्वर। बुंदेलखंड के प्रमुख आस्था केंद्र कुंडेश्वर धाम में मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। श्री आशुतोष अपर्णा धर्म सेतु लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष और सचिव की कार्यशैली को लेकर ट्रस्ट सदस्यों एवं श्रद्धालुओं की नाराजगी के बीच संत के मंदिर प्रवेश से जुड़े विवाद ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
बुंदेलखंड पीठाधीश्वर एवं धजरई मंदिर के महंत श्री सीताराम दास जी महाराज ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ट्रस्ट की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि “अध्यक्ष-सचिव मालिक नहीं हैं, मंदिर के व्यवस्थापक हैं।” साथ ही उन्होंने टीकमगढ़ कलेक्टर से ट्रस्ट की आमसभा बुलाकर शिकायतों, संचालन व्यवस्था और कथित कमियों की समीक्षा कराने की मांग की है।
संत के मंदिर प्रवेश को लेकर क्या हुआ?
आरोप लगाया जा रहा है कि बुंदेलखंड पीठाधीश्वर को कुंडेश्वर मंदिर में प्रवेश एवं दर्शन को लेकर ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसे श्रद्धालु संत समाज के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, घटना की स्वतंत्र पुष्टि और पूरे घटनाक्रम के सभी पक्षों का आधिकारिक विवरण सामने आना अभी बाकी है। इसलिए संत के अपमान अथवा मंदिर प्रवेश रोकने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
“मंदिर की सेवा है, मालिकाना हक नहीं”
विवाद के बीच श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट का पद सेवा, संरक्षण और व्यवस्था की जिम्मेदारी है, न कि मालिकाना अधिकार। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं, संत समाज और श्रद्धालुओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की ओर से अध्यक्ष-सचिव की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आ रही है। शराब के नशे में विवाद और अन्य कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब कलेक्टर के हस्तक्षेप पर टिकी निगाहें
पूरे मामले में अब ट्रस्ट की आगामी आमसभा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, मंदिर व्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दे उठ सकते हैं। कुछ सदस्यों द्वारा निंदा प्रस्ताव लाने की चर्चा भी है, हालांकि अंतिम निर्णय ट्रस्ट के नियमों के अनुसार आमसभा में ही होगा।
आस्था के केंद्र में आखिर व्यवस्था कैसी हो?
कुंडेश्वर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में विवाद चाहे ट्रस्ट के भीतर का हो या व्यवस्थाओं से जुड़ा—उसका समाधान पारदर्शिता, धार्मिक मर्यादा और संवाद के साथ होना जरूरी है।
अब सवाल यही है—
क्या कुंडेश्वर धाम की व्यवस्था सेवा और मर्यादा के आधार पर चलेगी?
क्या ट्रस्ट की शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा होगी?
और क्या संतों एवं श्रद्धालुओं के सम्मान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तय की जाएगी?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासन और ट्रस्ट की अगली कार्रवाई से सामने आएंगे।
#कुंडेश्वर #कुंडेश्वरधाम #टीकमगढ़ #सीतारामदासमहाराज #बुंदेलखंडपीठाधीश्वर #मंदिरट्रस्ट #सनातनधर्म #सनातनपरंपरा #श्रद्धालु #संतसमाज #धार्मिकमर्यादा #मंदिरव्यवस्था #टीकमगढ़कलेक्टर #ट्रस्टविवाद #कुंडेश्वरमंदिर #बुंदेलखंड #दबंगमीडिया