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23/05/2026

पुरानी तहसील से दुकाने हटने पर युवाओं में आक्रोश, रोजगार छिनने का आरोप

छतरपुर। पुरानी तहसील क्षेत्र में ऑनलाइन एवं अन्य दुकानों को हटाए जाने के बाद स्थानीय युवाओं और व्यापारियों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। प्रभावित लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से कई गरीब परिवारों और बेरोजगार युवाओं का रोजगार पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र की बेसकीमती जमीनों को लेकर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की गई। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि छोटे व्यापारियों को बिना उचित वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना अन्यायपूर्ण है।

लोगों का आरोप है कि विधायक ललिता यादव के प्रभाव में पुरानी तहसील क्षेत्र की दुकानों को हटवाया गया, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। साथ ही क्षेत्र में कीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

हालांकि इन आरोपों पर विधायक पक्ष अथवा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रभावित व्यापारी और स्थानीय नागरिक मामले में निष्पक्ष जांच तथा रोजगार पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

छतरपुर /राजनगर - थानों में कानून या वसूली का राज?राजनगर थाने से जुड़ा मामला केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था के भी...
14/02/2026

छतरपुर /राजनगर - थानों में कानून या वसूली का राज?
राजनगर थाने से जुड़ा मामला केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर छिपे उस सच की परत खोलता है, जिसे अक्सर दबा दिया जाता है। सवाल सीधा है — थाना जनता की सुरक्षा का केंद्र है या डर और वसूली का अड्डा?

सूत्रों के हवाले से जो आरोप सामने आए हैं, वे किसी भी सभ्य समाज को झकझोर देने वाले हैं। कहा जा रहा है कि एक युवक को थाने लाकर घंटों तक पीटा गया, कथित रूप से पैसों की मांग की गई, और अंततः युवक ने आत्महत्या कर ली।

यदि यह सच है, तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं — यह कानून की आत्महत्या है।

आज आम नागरिक की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि वह अपराधी से कम, वर्दी के भय से अधिक डरने लगा है। जिस व्यवस्था का काम न्याय देना है, वही व्यवस्था यदि वसूली और अत्याचार की मशीन बन जाए, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाती है।

प्रश्न यह भी है कि अगर संबंधित कर्मियों पर पहले भी आरोप रहे हैं, तो उन्हें समय रहते रोका क्यों नहीं गया? क्या हर थाने में ऐसी “गैंग संस्कृति” पनप रही है? क्या जनता का भरोसा अब केवल फाइलों और जांच रिपोर्टों में दफन कर दिया जाएगा?

अब जरूरत है केवल बयानबाजी की नहीं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई की। क्योंकि अगर थाने ही सुरक्षित नहीं रहे, तो फिर आम आदमी जाए तो जाए कहां?

यह मामला चेतावनी है —
यदि पुलिस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो कानून की किताबें रह जाएंगी, और न्याय केवल पोस्टरों में दिखाई देगा।

दीपावली पर छतरपुर SP अगम जैन का बड़ा संदेश....जरूर पढे दीपावली का पर्व खुशियों एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर...
20/10/2025

दीपावली पर छतरपुर SP अगम जैन का बड़ा संदेश....जरूर पढे

दीपावली का पर्व खुशियों एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आतिशबाजी होना स्वाभाविक है, सभी नागरिकों से अपील है कि हर्ष फायरिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है। हर्ष फायरिंग या किसी भी प्रकार के अवैध हथियार का उपयोग करने पर संबंधित व्यक्ति पर अपराध दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जाएगी तथा लाइसेंस निरस्त करवाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

जनता से अपील है कि ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत छतरपुर पुलिस हेल्पलाइन नंबर 7049101021 पर दें।
आपका सहयोग सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने में सहायक है।

— छतरपुर पुलिस द्वारा जनहित में जारी
Sp chhatarpur

04/10/2025

1857 की क्रांति में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के सहभागी रहे क्रांतिकारीओं को अंग्रेजों ने, बाद में ग्वालियर के सिंधिया राज्य ने, उन्हें भारी कष्ट पहुँचाये।

क्रान्तिकाल में चंदेरी, नानकपुर के धंधेरे और तात्या टोपे

ओरछा के मधुकरशाह बुंदेला के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र रामशाह 1592 ई. में ओरछा की गद्दी पर बैठे थे। परंतु जहांगीर बादशाह ने 1605 ई. में उन्हें अपदस्थ कर ओरछा की गद्दी उनके छोटे भाई वीरसिंहदेव बुंदेला को सौंपकर, उन्हें चंदेरी के समीप बार नामक स्थान की जागीर दे दी थी। बाद में इसी वंश के भरतसिंह बुंदेला (1612–1630) को शाहजहां ने बार के साथ चंदेरी भी दे दिया था।

इसी वंश में चंदेरी के शासक मोरप्रहलाद (1802–1842) हुए थे। वे कमजोर शासक थे, अतः अंग्रेजों में ग्वालियर के सिंधिया के सेनापति जॉन बेस्टनर ने चंदेरी के बहुत से क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था। बाद में अंग्रेजों के दबाव के चलते मोरप्रहलाद को बार, बानपुर, केलुंगों के भाग सहित 30 गाँव मिल गये। बाकी 2/3 भाग चंदेरी के सिंधिया के कब्जे में रह गया। इन्हीं मोरप्रहलाद के पुत्र मर्दनसिंह बुंदेला (1842–58) हुए, जिन्होंने अपनी नई राजधानी बानपुर से अंग्रेजों से संघर्ष किया, और रानी को भी सहयोग एवं समर्थन दिया था।

यह बानपुर कस्बा ललितपुर जिले में, उत्तर प्रदेश का भाग है; यह क्षेत्र चंदेरी के समीपवर्ती है। चंदेरी से 4–5 कि.मी. दूर स्थित नानकपुर ठिकाना, धंधेरों को चंदेरी के बुंदेलाओं ने जागीर में दिया था। ये धंधेरे ठाकुर इन भागों में पिछोर अनुबाग के धंधेरों के भागों से विवाहिक सम्बन्धों के माध्यम से आये थे।

क्रान्तिकाल में नानकपुर के धंधेरों ने अंग्रेजों का विरोध करते हुए मर्दनसिंह के साथ युद्ध किया था। फलस्वरूप नानकपुर के धंधेरे परिवार के पहले अंग्रेजों ने, बाद में ग्वालियर के सिंधिया राज्य ने, उन्हें भारी कष्ट पहुँचाये।

नानकपुर के धंधेरे और सिंधिया शासन

नानकपुर में दो गढ़ियाँ थीं, जिनमें से एक पुरानी गढ़ी गिर चुकी थी, दूसरी गढ़ी को सिंधिया का खुदादाद कहा जाता था। सन् 1813 ई. के समय नानकपुर सिंधिया का हिस्सा बन गया था, परंतु नानकपुर के धंधेरे का पुराना ठिकाना यथावत बना रहा।

ग्वालियर के सिंधिया प्रशासन के अधिकारी उमराव महिपतजुन ने 1815 ई. में दुर्गासिंह धंधेरे को संबोधित एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था—

“उमराव महिपतजुन दुर्गासिंह को कुशलता के समाचार का आदान-प्रदान करते हुए लिखते हैं कि पलटन ने गाँव के बैल पकड़ लिये थे। तब तुमने बड़ा फसाद अर्थात उपद्रव किया था, और सिपाही गाँव में पानी पीने आये तो तुमने उन पर हमला बोला और बंदूकें चलाईं। इस कारण तुम्हें चेताया जाता है कि तुम सरकार में उपस्थित हो, क्योंकि तुम सरकार की चाकरी पर हो।”

इस पत्र से स्पष्ट होता है कि सिंधिया की ओर से नानकपुर के धंधेरे को चाकर-नौकर समझा जाता था, जबकि वे चंदेरी के बुंदेलाओं के सामंत ठाकुर थे, जो अपने क्षेत्र में राजा समान माने जाते थे। यही कारण था कि अंग्रेजों और बुंदेलखण्ड–धंधेरखण्ड के ठाकुरों के बीच संघर्ष का वातावरण बना।

नानकपुर के धंधेरे सिंधिया के अधीन रहकर भी मर्दनसिंह के पक्षधर थे। मर्दनसिंह सिंधिया के विरोधी थे, क्योंकि सिंधिया ने उनसे चंदेरी का क्षेत्र छीन लिया था। मर्दनसिंह इस क्षेत्र को पुनः पाने के लिए सदा प्रयासरत रहे। संभवतः नानकपुर के धंधेरे भी यही चाहते थे कि चंदेरी पर मर्दनसिंह का अधिकार हो जाए, इसी कारण सिंधिया प्रशासन से उनकी नहीं बनती थी।

नानकपुर के धंधेरे दुर्गासिंह के दो पुत्र थे – जुझारसिंह और जवाहरसिंह। जुझारसिंह के नाम से चंदेरी, कैथरी से सन् 1851 ई. में भेजे गये एक परवाने में लिखा गया था—

“यह परवाना राजे दादा साहिब मोरपंत कामिस्सदर चंदेरी खास के गाँव मलारगढ़ से लिखा गया था। यह गाँव चंदेरी से दक्षिण में 35 कि.मी. दूर बेटवा नदी के समीप है। इसमें लिखा है कि आप कैथरी में आयें और निर्धारित रकम जमा कर गाँव के जागीरदार बने रहें।”

सन् 1857 की क्रांति और नानकपुर के धंधेरे

सूबेदार चंदेरी के दौरे पर आ रहे हैं। उनकी व्यवस्था यहाँ करना है और उनकी चाकरी सेवा में हाजिर रहना है।

चंदेरी के कामिस्सदर ने यह पत्र दी के दौरान मलारगढ़ से लिखा था। एक निश्चित राज्य आय की रकम नहीं देना चाहते थे, और उन्हें समय पर विद्रोही प्रवृत्तिकर रह रहे थे।

बुंदेलखण्ड के इतिहास लेखक दीवान प्रतापसिंह ने नानकपुर के धंधेरे जुझारसिंह का उल्लेख करते हुए लिखा है —

“चंदेरी में अप्रैल सन् 1857 ई. से ही विद्रोह की तैयारी आरंभ हो गई थी। पहले मई में नानकपुर के जुझारसिंह ने हथियार उठाये थे।”

यह स्पष्ट करता है कि नानकपुर के धंधेरे सिंधिया प्रशासन में रहते हुए भी अंग्रेजों के विरोध में उठ खड़े हुए थे। मर्दनसिंह का उद्देश्य चंदेरी क्षेत्र, जो उनके पूर्वजों के अधीन रहा था, किसी भी प्रकार पुनः प्राप्त करना था।

वे कभी अंग्रेजों से संबंध रखते थे, परन्तु अंततः उन्हें अंग्रेजों पर विश्वास नहीं रहा। इस कारण वे झाँसी की रानी से भी संपर्क बनाए हुए थे।

झाँसी की छावनी के विद्रोह की लपटें ललितपुर तक पहुँचीं तो मर्दनसिंह ने वहाँ के सिपाहियों को उकसाकर कोषागार और शस्त्रागार को लुटवा दिया। इसी समय नानकपुर के दोनों धंधेरे भाई — जुझारसिंह और जवाहरसिंह — मर्दनसिंह के सहयोगी बन गए। वे दोनों 1857 के विद्रोह में वीरगति को प्राप्त हुए।

उनके बाद उनके गोद लिये पुत्र गणेशू ने नानकपुर की जागीरदारी का दावा किया।

सन् 1861 ई. के बाद नानकपुर का इलाका पूरी तरह सिंधिया राज्य के अधीन आ गया। पहले यह क्षेत्र सिंधिया के नियंत्रण में रहते हुए प्रशासनिक रूप से ललितपुर के अंग्रेज अधिकारियों की देखरेख में था। इस आशय का एक पत्र अंग्रेज अधिकारियों ने जारी किया, जिसमें लिखा था—

“बनाम जमींदारान व दियायामा किसान मौजा नानकपुर पर।
चंदेरी भूपबस हुकुम नवाब श्री मनमहाराज —
गवर्नर बहादुर पश्चिम उत्तर देशाधिकारियों तुमको इतिलाव दी जाती है कि तारीख 6 महीना अप्रैल सन् 1861 ई. से तुम्हारा इलाका महाराज आलीजाह सिंधिया बहादुर को सुपुर्द किया जायेगा और तुम लोग सरकार अंग्रेज बहादुर के रैयत नहीं होंगे। तुमको चाहिए कि तारीख मंज़कूर में ताबेदारी करो।”

निष्कर्ष

इस प्रकार नानकपुर और चंदेरी के धंधेरों ने न केवल अंग्रेजों का बल्कि सिंधिया शासन का भी विरोध किया। वे मर्दनसिंह बुंदेला के सच्चे सहयोगी रहे और 1857 की क्रांति में उनके साहस, देशभक्ति और बलिदान का विशेष योगदान रहा। बुंदेलखण्ड की इस भूमि ने ऐसे वीरों को जन्म दिया, जिन्होंने स्वराज की ज्योति को प्रज्वलित रखा।
लेख जानकारी का स्रोत - धंधेरखण्ड का इतिहास और 1857 की क्रांति में उनकी भूमिका (पुस्तक से )

बड़ी खबर : मद्यनिषेध विभाग और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, करोड़ों की शराब बरामदमद्यनिषेध विभाग और जिला पुलिस की संयु...
23/09/2025

बड़ी खबर : मद्यनिषेध विभाग और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, करोड़ों की शराब बरामद
मद्यनिषेध विभाग और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में साल 2025 के अगस्त माह तक अवैध शराब तस्करी पर बड़ी सफलता हासिल हुई है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 22,32,186 लीटर शराब जब्त की गई है। बरामद की गई शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 अरब 67 करोड़ 16 लाख 48 हजार 300 रुपए आँकी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान कई जिलों में दबिश दी गई और गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी कर यह कार्रवाई की गई। इस दौरान अवैध शराब बनाने और तस्करी करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसा गया है। बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी यह दर्शाती है कि राज्य में शराब माफियाओं पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई में न सिर्फ अवैध शराब पकड़ी गई है बल्कि इसके परिवहन में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी जब्त किया गया है। साथ ही, कई आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मद्यनिषेध विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे शराब तस्करी या अवैध भंडारण की सूचना तुरंत विभाग और पुलिस को दें, ताकि अवैध कारोबार पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल : भाजपा विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?राजनगर हत्याकांड मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब...
22/09/2025

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल : भाजपा विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
राजनगर हत्याकांड मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब

नई दिल्ली/भोपाल।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के बहुचर्चित राजनगर हत्याकांड मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर कड़े सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा है कि जब हत्या के मामले में भाजपा विधायक अरविंद पटेरिया का नाम सामने आ चुका है, तो अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?

मामला क्या है
17 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के दौरान राजनगर सीट से कांग्रेस विधायक रहे कुंवर विक्रम सिंह के ड्राइवर सलमान खान की संदिग्ध हालात में गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी राजिया अली ने भाजपा विधायक अरविंद पटेरिया पर हत्या का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी न तो विधायक की गिरफ्तारी हुई और न ही जांच पूरी हो सकी।

सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी
राजिया अली ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। अदालत ने सीबीआई डायरेक्टर, डीजीपी, मुख्य सचिव और संबंधित जिले के एसपी को स्टेटस रिपोर्ट के साथ पेश होने का आदेश दिया है।

सुरक्षा पर सवाल
गंभीर आरोपों के बावजूद विधायक अरविंद पटेरिया को मध्यप्रदेश सरकार ने सुरक्षा प्रदान कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया और विधायक को नोटिस जारी किया है।

पीड़िता का आरोप
याचिकाकर्ता राजिया अली का कहना है कि —

हत्या के डेढ़ साल बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोपी विधायक चुनाव जीतकर राजनगर से विधायक बन गए और उनका प्रशासन पर दबदबा है।

स्थानीय पुलिस आरोपियों को संरक्षण दे रही है।

पीड़ित परिवार पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।

अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में दो हफ्ते बाद अगली सुनवाई तय की है। तब तक राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।

👉 यह मामला अब न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी हलचल का केंद्र बन गया है।

प्रशासन पर भारी अतिक्रमणकारी आदेश की अवहेलना कर,हो रहा अतिक्रमण छतरपुर जिला प्रशासन मौन "आखिर क्यू "
23/07/2025

प्रशासन पर भारी अतिक्रमणकारी
आदेश की अवहेलना कर,हो रहा अतिक्रमण छतरपुर जिला प्रशासन मौन "आखिर क्यू "

➡️ निवाड़ी जिले में कूट-रचित दस्तावेज तैयार कर राजस्व अभिलेखों में गलत प्रविष्टियां करने वाले अधिकारियों के विरूध्द आपराध...
01/06/2025

➡️ निवाड़ी जिले में कूट-रचित दस्तावेज तैयार कर राजस्व अभिलेखों में गलत प्रविष्टियां करने वाले अधिकारियों के विरूध्द आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के कमिश्नर ने जारी किए आदेश

➡️ मामला निवाड़ी जिले की ग्राम बबेड़ी में स्थित भूमि के फर्जी दस्तावेजों से हस्तांतरित करने का

कमिश्नर सागर संभाग डा. वीरेन्द्र सिंह रावत ने निवाड़ी जिले की ओरछा तहसील के ग्राम बबेड़ी जंगल में स्थित भूमि खसरा नंबर 37/7/1/1, रकवा 8.000 हेक्टेयर भूमि को फर्जी और कूट-रचित दस्तावेज तैयार कर राजस्व अभिलेखों में बाद के वर्षाे में गलत प्रविष्टियां अंकित कराने वाले अधिकारियांे और कर्मचारियों के साथ संबंधित व्यक्तियों के विरूध्द आपराधिक प्रकरण पंजीबध्द कराये जाने के आदेश जारी किए है। कमिश्नर ने जारी आदेश में तहसीलार ओरछा को भी आदेश दिए है कि तहसीलदार ओरछा शासन हित में उक्त भूमियों को राजस्व अभिलेख में मध्यप्रदेश शासन के पक्ष में दर्ज कर शासन हित में भूमि का कब्जा प्राप्त करें। कमिश्नर सागर संभाग ने यह कार्रवाही 15 दिवसों में कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश कलेक्टर निवाड़ी को दिए है।

गौरतलब है कि कमिश्नर सागर संभाग डा. वीरेन्द्र सिंह रावत के आदेश के अनुसार राजस्व न्यायालय में दो पक्षों ने अपील करते हुए निवाडी जिले के ओरछा तहसील में बबेड़ी जंगल में स्थित लगभग 8.000 हेक्टेयर भूमि पर अपना कब्जा बताया था। जिसपर कमिश्नर सागर संभाग ने कलेक्टर निवाड़ी के माध्यम से भूमि पर दोनों व्यक्तियों के कब्जे के संबंध में वस्तु स्थिति की जांच कराई थी। जांच में यह पाया गया कि ग्राम बबेड़ी जंगल की भूमि सर्वे नंबर 37/7/2/1 जुज रकवा 2.023 हेक्टेयर एवं खसरा नंबर 37/7/1 जुज रकवा 4.000 हेक्टेयर के राजस्व अभिलेख में छेड़-छाड़ करते हुए दायरा पंजी वर्ष 1969-70 में दर्ज प्रकरण क्रमांक 40 से 48 तक कूट रचना कर राजस्व अभिलेख में छेड-छाड एवं पृष्ठ आदि को फाड कर फर्जी इन्द्रराज किए गए है। जो आपराधिक श्रेणी के अंतर्गत आते है। जांच में यह भी पाया गया कि राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों से भूमि की गलत प्रविष्टियां की गई थी। जांच में यह भी पाया गया कि राजस्व न्यायालय में प्राप्त दायरा पंजी वर्ष 1969-70 को अवलोकन करने पर यह तथ्य सामने आया कि दायरा पंजी में प्रारंभ में दर्ज प्रकरणों और बाद में दर्ज प्रकरणों को अन्य स्याही से फर्जी कूटरचित तरीके से दर्ज किया गया है। दायरा पंजी के पृष्ठों को फाड कर उन्हें पुनः इस प्रकार से सेलोटेप द्वारा जोडा गया है। ताकि प्रकरणों से संबंधित वास्तविक जानकारी प्राप्त न हो सके।

इसी प्रकार मूल दस्तावेजों के राजस्व रिकार्ड में छेड़-छाड़ करते हुए विभिन्न प्रकार की स्याही से प्रविष्टियां तैयार की गई है एवं फर्जी दस्तावेज आदि तैयार कराएं जाकर शासन की बेसकीमती व बहुमूल्य भूमि को हानि पहुंचाने एवं उसे क्रय-विक्रय आदि करने का आपराधिक कृत्य किया गया है।

कमिश्नर ने उक्त तथ्यों के आधार पर अपीलर्थीयों द्वारा प्रस्तुत अपील को बलहीन व सारहीन होने के कारण निरस्त कर दी है। तथा राजस्व भूमि के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नामातरिंत करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के विरूध्द आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए है।

CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #सागर

एमपी: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 40 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ाया पटवारीभोपाल।मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिला...
22/05/2025

एमपी: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 40 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ाया पटवारी

भोपाल।
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रंगेहाथों पकड़ा जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोरी पर लगाम लगती नहीं दिख रही।

ताज़ा मामला छिंदवाड़ा जिले से सामने आया है। यहां जबलपुर लोकायुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि पटवारी ने एक किसान से ज़मीन के मामले में काम करने के बदले में रिश्वत की मांग की थी।

किसान ने इसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त से की, जिसके बाद योजना बनाकर टीम ने रिश्वत लेते हुए पटवारी को दबोच लिया। अब आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।

लोकायुक्त की यह कार्रवाई भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।

डॉ. KNS मेमोरियल हॉस्पिटल की रजत जयंती पर लखनऊ में आयोजित भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री आदित्यन...
20/05/2025

डॉ. KNS मेमोरियल हॉस्पिटल की रजत जयंती पर लखनऊ में आयोजित भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी हुए शामिल ।।

लखनऊ, 20 मई 2025 — आज लखनऊ में आयोजित डॉ. KNS मेमोरियल हॉस्पिटल के रजत जयंती (25वीं वर्षगांठ) कार्यक्रम में भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने सहभागिता की। इस विशेष अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें चिकित्सा जगत, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियाँ शामिल थीं।

समारोह में श्री राजनाथ सिंह जी ने अस्पताल की 25 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा की सराहना करते हुए कहा,

“मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह संस्थान अपने संस्थापकों की मूल भावना और सेवा संकल्प के अनुरूप आगे भी उत्तर प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता रहेगा।”

इस अवसर पर उन्होंने अस्पताल परिवार को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं भी दीं।

कार्यक्रम में डॉ. KNS मेमोरियल हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. के.एन. शर्मा, निदेशक डॉ. अंजू शर्मा, प्रमुख सर्जन डॉ. अर्पित शर्मा, और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज त्रिपाठी सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। उपस्थित जनसमूह ने भी अस्पताल की सेवा भावना और समर्पण की प्रशंसा की।

अस्पताल प्रशासन ने इस अवसर पर आगामी वर्षों के लिए नई स्वास्थ्य योजनाओं और सुविधाओं के विस्तार की घोषणाएं भी कीं।

डॉ. KNS मेमोरियल हॉस्पिटल ने 25 वर्षों में प्रदेशभर के लाखों मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाकर चिकित्सा क्षेत्र में एक विशिष्ट स्थान बनाया है।

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