Chhindwara Chhavi

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12/09/2026

जल, जंगल, जमीन
ये नारा किसने दिया था।
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  : बैतूल के श्री नीलेश कालभोर अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एडिशनल डायरेक्टर जनरल मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के रोंढा...
07/09/2026

: बैतूल के श्री नीलेश कालभोर अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एडिशनल डायरेक्टर जनरल

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के रोंढा निवासी लेखक स्व. श्री गोपीनाथ कालभोर जी के सुपुत्र श्री नीलेश कालभोर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) के पद पर पदोन्नति मिली है।

श्री नीलेश कालभोर की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि रोंढा और बैतूल जिले के लिए भी गर्व का विषय है।

ज्ञात हो कि स्व. श्री गोपीनाथ कालभोर जी खंडवा को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले ‘भोज पर्णिका’ के संपादक-प्रकाशक और अनेक पुस्तकों के लेखक रहे हैं।

श्री नीलेश कालभोर की पदोन्नति संयुक्त सचिव स्तर की है। यह नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) की स्वीकृति से होती है।

🎉 छिंदवाड़ा छवि Chhindwara Chhavi परिवार की ओर से श्री नीलेश कालभोर जी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। 🌹

  : तानों और बंदिशों को पीछे छोड़ मीरा ने रचा सफलता का नया अध्यायअंबिकापुर की थर्ड जेंडर मीरा रघुवंश ने यूजीसी नेट परीक्...
06/09/2026

: तानों और बंदिशों को पीछे छोड़ मीरा ने रचा सफलता का नया अध्याय

अंबिकापुर की थर्ड जेंडर मीरा रघुवंश ने यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने सपनों को नई उड़ान दी है। अब उनका लक्ष्य असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना है।

मिशन चौक निवासी मीरा ने शासकीय स्कूलों से पढ़ाई शुरू की। संगीत शिक्षक सुरेंद्र परीडा के मार्गदर्शन में ओडिसी नृत्य सीखा और प्रतिभा के दम पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। यहां से उन्होंने ओडिसी नृत्य में स्नातक और फिर मास्टर डिग्री हासिल की।

यूजीसी नेट का सपना आसान नहीं था। दो बार आवेदन करने के बावजूद समाज के डर और आत्मविश्वास की कमी के कारण मीरा परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सकीं। तीसरी बार थर्ड जेंडर समुदाय के साथियों ने हौसला दिया—“परीक्षा दो, पास-फेल बाद की बात है।” मीरा ने परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।

वर्तमान में वह राजीव गांधी शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में एलएलबी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। उनका उद्देश्य कानून की पढ़ाई के जरिए अपने समुदाय के अधिकारों की आवाज बनना भी है।

मीरा का संदेश है—हमें अलग नजर से नहीं, बराबरी के मौके से देखिए। शिक्षा और सपनों पर हर इंसान का समान अधिकार है।

  : आदिवासी अंचल बिछुआ की मिट्टी से ईडी के संयुक्त आयुक्त तक पहुंचे अवध किशोर पवारमध्यप्रदेश के जिले छिंदवाड़ा के बिछुआ ...
04/09/2026

: आदिवासी अंचल बिछुआ की मिट्टी से ईडी के संयुक्त आयुक्त तक पहुंचे अवध किशोर पवार

मध्यप्रदेश के जिले छिंदवाड़ा के बिछुआ जैसे छोटे कस्बे से निकलकर भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के माध्यम से प्रवर्तन निदेशालय (ED) में Joint Commissioner (OSD) के पद तक पहुंचने वाले अवध किशोर पवार (बिसेन) युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। UPSC 2015 बैच के अधिकारी अवध किशोर की सफलता के पीछे निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की कहानी है।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा एक्सीलेंस स्कूल छिंदवाड़ा और बिछुआ से पूरी की। इसके बाद LNCT भोपाल से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियर के रूप में गोदरेज कंपनी में कार्य करने के बाद उनका चयन 2012 में सहायक कमांडेंट, SSB के रूप में हुआ। श्रीनगर गढ़वाल में प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और UPSC के जरिए IRS में चयन हासिल किया। IRS प्रशिक्षण के दौरान मसूरी, नागपुर सहित देश-विदेश के विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शिक्षक पिता शांतिराम पवार और गृहिणी माता सुमित्रा बाई के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत आधार दिया। पत्नी दीपा खवसे JRF और PhD शोधार्थी हैं।

UPSC और PSC अभ्यर्थियों के लिए उनका संदेश बेहद सहज है—“UPSC की रेस में कुछ अच्छा मिल जाए तो यह बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे जिंदगी और मौत का सवाल न बनाएं। बिंदास मेहनत करें, सफल लोगों के अनुभवों से सीखें और खुद को कभी किसी से कमतर न समझें। जिंदगी में लगातार स्मार्ट हार्डवर्क करते रहें।”

🌟 ऐसी ही प्रेरणादायक सफलता की कहानियों के लिए अभी 'छिंदवाड़ा छवि | Chhindwara Chhavi' को Follow करें! 🚀

नोट : अवध किशोर पवार जी का इंटरव्यू देखने के लिए कृपया कमेंट बॉक्स चेक करें।






क्षत्रिय पवार समाज में बदलाव की नई तस्वीरसमय के साथ समाज की सोच, प्राथमिकताएं और जीवनशैली तेजी से बदल रही हैं। क्षत्रिय ...
04/09/2026

क्षत्रिय पवार समाज में बदलाव की नई तस्वीर

समय के साथ समाज की सोच, प्राथमिकताएं और जीवनशैली तेजी से बदल रही हैं। क्षत्रिय पवार समाज भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। कभी समाज की पहचान मुख्य रूप से परंपराओं, सामूहिक आयोजनों और पारंपरिक व्यवसायों तक सीमित दिखाई देती थी, लेकिन आज शिक्षा, रोजगार और आधुनिक सोच ने इसकी तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। फेसबुक पेज छिंदवाड़ा छवि Chhindwara Chhavi की प्रस्तुति... ।

नई पीढ़ी अब केवल सरकारी नौकरी को ही सफलता का पैमाना नहीं मानती। इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, कारोबार और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में युवा अपनी पहचान बना रहे हैं। बेटियां भी उच्च शिक्षा लेकर नौकरी, प्रशासन, व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।

समाज में विवाह को लेकर भी सोच बदल रही है। युवा अब शिक्षा, करियर और आपसी समझ को प्राथमिकता दे रहे हैं। महंगे विवाह और अनावश्यक दिखावे के बजाय सादगी और सामाजिक सरोकारों पर जोर बढ़ रहा है।

डिजिटल दौर ने समाज को जोड़ने का नया माध्यम दिया है। सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग शहरों और राज्यों में रहने वाले परिवार एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। प्रतिभाओं को सम्मान और जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद जैसी पहल भी बढ़ रही हैं।

हालांकि चुनौतियां अभी बाकी हैं। नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा और अवसरों के लिए तैयार करना ही समाज के भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।






क्या आप भी इस जाल में फंसे हैं! एक मिनट की कहानी, घंटों का कब्जा… फेसबुक के माइक्रो ड्रामा का मायाजाल“बस एक वीडियो और दे...
03/09/2026

क्या आप भी इस जाल में फंसे हैं! एक मिनट की कहानी, घंटों का कब्जा… फेसबुक के माइक्रो ड्रामा का मायाजाल

“बस एक वीडियो और देख लेते हैं…”

यही वह एक वाक्य है, जिसके बाद मोबाइल स्क्रीन पर अगले 40-50 मिनट कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता। फेसबुक खोलते ही आजकल ऐसे छोटे-छोटे ड्रामा सामने आने लगे हैं, जिनकी लंबाई मुश्किल से एक-दो मिनट होती है। कहानी शुरू होती है, कोई बड़ा राज खुलने वाला होता है और ठीक उसी वक्त स्क्रीन पर आ जाता है—“अगला पार्ट देखने के लिए फॉलो करें…”। फेसबुक पेज छिंदवाड़ा छवि Chhindwara Chhavi की विशेष प्रस्तुति... ।

यही है माइक्रो ड्रामा का नया संसार।

यह महज छोटे वीडियो नहीं हैं। यह कहानी कहने का ऐसा नया फॉर्मेट है, जिसने दर्शक की बदलती आदत को पहचान लिया है। आज दर्शक के पास समय कम है, लेकिन मनोरंजन की भूख उतनी ही बड़ी। माइक्रो ड्रामा इसी विरोधाभास का फायदा उठाता है।

इनकी कहानियां बेहद साधारण होती हैं, लेकिन प्रस्तुति बेहद चालाक। अमीर लड़का-गरीब लड़की, गरीब लड़का-अमीर लड़की, पति का धोखा, सास-बहू का संघर्ष, प्रेम में बदला, परिवार की संपत्ति, छिपी हुई पहचान, बॉस और कर्मचारी का रिश्ता… विषय नए कम और पुराने ज्यादा होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इन्हें इतनी तेजी से और इस तरह पेश किया जाता है कि दर्शक अगले दृश्य के लिए बेचैन हो जाए।

माइक्रो ड्रामा की असली ताकत कहानी नहीं, उसका ‘हुक’ है।

पहले कुछ सेकंड में ही ऐसा सवाल खड़ा कर दिया जाता है, जिसका जवाब पाने के लिए दर्शक वीडियो छोड़ना नहीं चाहता। मसलन—जिस लड़की को सब गरीब समझ रहे थे, वह अचानक करोड़ों की मालकिन निकलती है। जिस पति को पत्नी बेवफा समझ रही थी, उसके पीछे कोई और कहानी होती है। जिस नौकर को परिवार तुच्छ समझता है, वही अंत में पूरे परिवार का मालिक निकलता है।

फिर कहानी ठीक उस मोड़ पर रोक दी जाती है, जहां दर्शक के मन में सबसे बड़ा सवाल पैदा हो चुका होता है—“अब आगे क्या होगा?”

यहीं से माइक्रो ड्रामा दर्शक को कहानी से ज्यादा जिज्ञासा का उपभोक्ता बना देता है।

इसका एक दूसरा पहलू भी है। माइक्रो ड्रामा ने कहानी कहने की उस पुरानी धारणा को चुनौती दी है, जिसमें अच्छी कहानी के लिए लंबा समय, बड़ा सेट और भारी बजट जरूरी माना जाता था। अब मोबाइल कैमरा, कुछ कलाकार, छोटी स्क्रिप्ट और दमदार संवाद के सहारे कहानी लाखों लोगों तक पहुंच सकती है।

लेकिन इस तेजी की कीमत भी है। एक ही तरह के प्लॉट बार-बार दोहराए जा रहे हैं। भावनाओं को कई बार जरूरत से ज्यादा खींचा जाता है। रिश्तों को सनसनीखेज बनाया जाता है और संयोगों के सहारे कहानी आगे बढ़ती है। कई वीडियो में अभिनय और पटकथा से ज्यादा जोर वायरल होने पर दिखाई देता है।

फिर भी इसे खारिज करना भूल होगी।

क्योंकि माइक्रो ड्रामा केवल मनोरंजन का नया रूप नहीं, बल्कि दर्शक के बदलते ध्यान और डिजिटल कहानी कहने की बदलती अर्थव्यवस्था का संकेत है। जिस पीढ़ी ने लंबे टीवी सीरियल से दूरी बनाई, वही अब मोबाइल स्क्रीन पर उसी तरह की भावनाएं छोटे-छोटे हिस्सों में देख रही है।

सवाल यह नहीं कि माइक्रो ड्रामा अच्छा है या खराब। बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारी कहानी देखने की आदत हमेशा के लिए बदल रही है?

शायद जवाब हमारे हाथ में मौजूद उसी छोटे से मोबाइल में छिपा है।

सिनेमा दो घंटे मांगता है, टीवी आधा घंटा… लेकिन माइक्रो ड्रामा सिर्फ एक मिनट मांगकर आपका अगला एक घंटा ले लेता है।

03/09/2026

| पवारी पहेली |
बाप-बेटा-दो-रोटी-पकाई-तीन-केत्ती-केत्ती-खाई।

02/09/2026

| पवारी पहेली |
रात म खाई लप्सी,
सबेरे आयो स्वाद

01/09/2026

समीर मरकाम की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सपनों की जीत की कहानी है। 🌟

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्राम चुरेगांव के किसान परिवार से आने वाले समीर ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद NEET-2026 में सफलता हासिल की है। उनका चयन मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर में हुआ है। आर्थिक तंगी के बीच समीर ने पिता के साथ खेतों में काम किया। घर में मां लंबे समय से बीमार हैं और महंगी कोचिंग का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद समीर ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

सरकार की निश्शुल्क ज्ञान गुड़ी कोचिंग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और बड़े भाई के सहयोग ने उनके सपनों को नई दिशा दी। मेहनत रंग लाई और अब समीर अपने गांव से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले पहले डॉक्टर बनने की राह पर हैं।

समीर का सपना भी बेहद खास है—गांव और आसपास के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, ताकि इलाज के लिए किसी को दूर न भटकना पड़े।

समीर की सफलता पर कलेक्टर ने उन्हें बधाई दी और प्रोत्साहन स्वरूप टैबलेट भी भेंट किया। 📱👏

❤️ संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल जरूर मिलती है। समीर ने यही साबित किया है।

रायपुर की बेटी चाहत विरानी ने रचा इतिहास! ✨🇮🇳मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर हासिल की CS परीक्षा में शानदार सफलताछत्...
31/08/2026

रायपुर की बेटी चाहत विरानी ने रचा इतिहास! ✨🇮🇳

मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर हासिल की CS परीक्षा में शानदार सफलता

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा के लिए आज का दिन गर्व और खुशी से भरा है। क्षेत्र की होनहार बेटी चाहत विरानी ने देश की प्रतिष्ठित और कठिन व्यावसायिक परीक्षाओं में शामिल कंपनी सेक्रेटरी (CS) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर परिवार और पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। 🎓🏆

दादा खेमचंद विरानी, चाचा रमेश विरानी और पिता गोपीचंद विरानी के परिवार की लाडली चाहत की इस उपलब्धि से विरानी परिवार के साथ-साथ तिल्दा-नेवरा में भी खुशी की लहर है। मिठाइयां बांटी जा रही हैं और शुभचिंतकों की ओर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। 🎉🍬

चाहत की सफलता इस बात की मिसाल है कि बड़ा सपना देखने के लिए बड़े शहर में पैदा होना जरूरी नहीं। स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, दिन-रात की मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ छोटे शहरों से निकली बेटियां भी देश के प्रतिष्ठित मुकाम हासिल कर सकती हैं। 💪🌟

उनकी यह कामयाबी खासतौर पर युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा है। चाहत अब कंपनी सेक्रेटरी के रूप में करियर की नई शुरुआत करने जा रही हैं।

चाहत, आपकी इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई! 💐🎊
आपका उज्ज्वल भविष्य नई ऊंचाइयों से भरा हो।

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