01/10/2026
*क्या सच आयेगा सामने या फिर पर्दा डाला जायेगा?*
▪️*साहवा नगरपालिका में सफाई टेंडर में कथित अनियमितता के आरोप*
▪️*क्या टेंडर नियमों के मुताबिक हुआ काम या फिर गरीबों के हक का पैसा किसी के रसूखदार की जैब भरने में चला गया ? यह सब सच्चाई सामने लाने की जरूरत !*
▪️*उठ रहे गंभीर सवाल, क्या जनता के सामने सच लाएगा नव गठित नगरपालिका बोर्ड!*
▪️*बार बार आरटीआई को दबाने के पीछे जिम्मेदारों की क्या मंशा?*
*स्टार सिटी न्यूज नेटवर्क*
*साहवा।* नवगठित साहवा नगरपालिका में पिछले करीबन डेढ़ साल से सफाई व्यवस्था और इसमें बड़े पैमाने पर कथित बंदरबांट (कथित वित्तीय अनियमितताओं) की शिकायतें लगातार तूल पकड़ रही । कस्बे के जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा अब इस पूरे खेल को सार्वजनिक करने की मांग जोर-शोर से उठने लगी है। जनता का सीधा सवाल है कि क्या झाड़ू लगाने वाले और नाली साफ कर अपना रोजगार करने वाले गरीब परिवारों के हक की राशि किसी रसूखदार की जेब भरने में तो नहीं चली गई?
▪️*क्या पर्दे के पीछे हुआ टेंडर ?, क्या नियम-शर्तों के अनुसार हो रहा काम ?*
साहवा को नगरपालिका का दर्जा मिलने
के बाद सफाई कार्य के लिए कब और किस प्रक्रिया के तहत टेंडर जारी किए गए, इसकी भनक तक आम जनता को नहीं लगी! टेंडर की शर्तों को लेकर कई अनुत्तरित सवाल हवा में तैर रहे हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना बेहद जरूरी है। टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रतिदिन कस्बे में कितने सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है? वास्तव में मौके पर कितने कर्मी लगाए गए और उन्हें कितना मानदेय दिया जा रहा है? कचरा संग्रहण और साफ-सफाई के लिए टेंडर के तहत कितने वाहनों का निर्धारण था और वर्तमान में कितने वाहन ऑन-फील्ड काम कर रहे हैं? कार्मिकों और वाहनों के लिए टेंडर में कितना बजट निर्धारित था और वास्तव में कितना भुगतान किया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आंकड़ों को तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की आशंका को खत्म किया जा सके।
▪️*टेंडर अवधि पूरी होने पर भी 'एक्सटेंशन' का खेल क्यों?*
जागरूक लोगो के अनुसार मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व में हुए सफाई टेंडर की निर्धारित समयावधि पूरी हो गई। नियमों के मुताबिक समय सीमा समाप्त होने पर पूरी पारदर्शिता के साथ नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाने चाहिए थे। लेकिन साहवा नगरपालिका में ऐसा न करके, उसी पुराने टेंडर को आगे बढ़ाने (एक्सटेंशन देने) की नौबत क्यों आई? इस फैसले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं!
▪️*क्या नवगठित बोर्ड दिखाएगा पारदर्शिता?*
कस्बे की जनता अब नवनिर्वाचित और नवगठित नगरपालिका बोर्ड की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। लोगों के बीच यह सवाल सुलग रहा है कि क्या नया बोर्ड इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर टेंडर के सारे दस्तावेज क्षेत्र की जनता के सामने रखेगा? या फिर पूर्व की तरह ही नियमों को ताक पर रखकर यह 'कथित खेल' पर्दे के पीछे यूं ही बदस्तूर चलता रहेगा? अब देखना यह है कि नव गठित नगरपालिका बोर्ड और जनप्रतिनिधि इस मामले में क्या कदम उठाते हैं ?
▪️*आरटीआई को बार बार दबाने का खेल क्यों ?*
नगरपालिका क्षेत्र में साफ सफाई कार्य में कथित बंदरबांट की आशंका पर कस्बे के कुछ जागरूक नागरिकों ने नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी साहवा से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत साफ सफाई के टेंडर, वर्क ऑर्डर, जी अनुसूची से जुड़ी जानकारी तथा नगरपालिका के टेंडरों से जुड़ी कुछ अन्य कई जानकारियां भी मांगी थी लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी ईओ द्वारा जानकारी नहीं देना तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी, प्रशासक उपखंड अधिकारी तारानगर द्वारा भी आरटीआई की प्रथम अपील पर भी कोई संज्ञान नहीं लेना, इस बात पर संदेह पैदा करता है कि इस पूरे मामले को दबाने के पीछे कथित काले कारनामे उजागर होने का डर तो नहीं सता रहा है? आमजन के जहन में यह सवाल बार बार उठता रहा है कि अगर नगरपालिका साहवा द्वारा नियमों के मुताबिक साफ सफाई कार्य करवाया जा रहा है तो फिर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को क्यों बार बार दबाया जा रहा है? हालांकि कुछ आरटीआई की द्वितीय अपील अब राज्य सूचना आयोग में दाखिल हो चुकी है जिस पर निर्णय होना अभी बाकी है। आरटीआई कार्यकर्ताओ का कहना है कि आयोग के फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट होकर दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।