25/12/2025
महिला सशक्तिकरण🫶🙏❤️
प्रियंका चोपड़ा महिलाओं की शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे बड़ा ज़रिया मानती हैं, उनका मानना है कि लड़कियों की शिक्षा से न केवल परिवार, बल्कि पूरे समुदाय और अर्थव्यवस्था को फायदा होता है, जिससे गरीबी कम होती है और समाज में स्थिरता आती है; वह UNICEF की गुडविल एंबेसडर के तौर पर 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी पहलों का समर्थन करती हैं और कहती हैं कि शिक्षा महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने और समाज में बदलाव लाने के लिए ज़रूरी है.
प्रियंका चोपड़ा के मुख्य विचार:
परिवर्तन का आधार: प्रियंका कहती हैं कि लड़कियों की शिक्षा भविष्य को बेहतर बनाने की कुंजी है, क्योंकि इससे परिवार, समुदाय और अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.
सामाजिक जिम्मेदारी: एक इन्फ्लुएंसर और एंबेसडर के रूप में, वह खुद को आवाज़हीन लोगों की आवाज़ बनने और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध मानती हैं.
समानता और अवसर: वह मानती हैं कि शिक्षा महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता और नेतृत्व के अवसर देती है, जिससे वे बिना किसी भेदभाव के अपने निर्णय खुद ले सकें.
बाल विवाह और किशोरावस्था: UNICEF के साथ काम करते हुए, उन्होंने बाल विवाह और विस्थापन जैसी समस्याओं से प्रभावित बच्चों और किशोरों के लिए शिक्षा की वकालत की है.
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ': उन्होंने भारत सरकार की इस योजना की सराहना की और कहा कि हर किसी के समर्थन से यह एक बड़ा आंदोलन बन सकता है.
संक्षेप में, प्रियंका चोपड़ा के लिए, महिलाओं की शिक्षा केवल स्कूल जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा शक्तिशाली माध्यम है जो महिलाओं को सशक्त बनाता है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाता है.