02/06/2026
ईरान का सख़्त लहजे में अमरीका और सहयूनी निज़ाम पर हमला, कहा – सीज़फ़ायर की हर ख़िलाफ़वर्ज़ी का दिया जाएगा जवाब
वज़ारत-ए-ख़ारिजा का बयान; लेबनान पर हमलों और ईरानी जहाज़रानी के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों को करार दिया सीज़फ़ायर का खुला उल्लंघन
तेहरान, 2 जून 2026।
इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान ने अमरीका और सहयूनी निज़ाम (इज़राइल) पर 8 अप्रैल 2026 को हुए सीज़फ़ायर मुआहिदे की लगातार ख़िलाफ़वर्ज़ी का इल्ज़ाम लगाते हुए एक सख़्त बयान जारी किया है। ईरान की वज़ारत-ए-ख़ारिजा ने कहा है कि अमरीका और इज़राइल की कार्रवाइयाँ न सिर्फ़ इलाक़ाई अम्न के लिए ख़तरा हैं बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को दोबारा तनाव और बे-यक़ीनी की तरफ़ धकेल सकती हैं।
वज़ारत-ए-ख़ारिजा की जानिब से जारी बयान में कहा गया कि 8 अप्रैल 2026 को हुए सीज़फ़ायर समझौते के तहत अमरीका और सहयूनी निज़ाम द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ शुरू की गई जंग को तमाम महाज़ों पर रोक दिया गया था, जिसमें लेबनान भी शामिल था। इसके बावजूद अमरीका ने ईरानी तिजारती जहाज़ों और समुद्री गतिविधियों के ख़िलाफ़ अपनी दुश्मनाना कार्रवाइयाँ जारी रखीं, जो सीज़फ़ायर की खुली और सरीह ख़िलाफ़वर्ज़ी है।
बयान में सहयूनी निज़ाम पर लेबनान की सरज़मीन, उसकी हाकिमियत और सलामियत को निशाना बनाने का इल्ज़ाम लगाया गया। ईरान के मुताबिक़ इन हमलों के नतीजे में हज़ारों लेबनानी शहीद और ज़ख़्मी हुए, लगभग बीस लाख लोग बेघर हुए और मुल्क का बुनियादी ढाँचा व रिहायशी इमारतें तबाही का शिकार हुईं।
ईरान ने वाज़ेह किया कि सीज़फ़ायर किसी एक मोर्चे तक महदूद नहीं होता, बल्कि किसी भी महाज़ पर उसकी ख़िलाफ़वर्ज़ी को पूरे समझौते की ख़िलाफ़वर्ज़ी माना जाएगा। इसी बुनियाद पर लेबनान में जारी इज़राइली कार्रवाइयों को भी सीज़फ़ायर समझौते के ख़िलाफ़ बताया गया है।
तेहरान ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगरचे सीज़फ़ायर के शुरुआती दिनों में अमरीका ने इज़राइल को रोकने की कोशिशों का दावा किया था, लेकिन मौजूदा हालात में अमरीका की ज़िम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान के अनुसार लेबनान में होने वाली कार्रवाईयों और ईरान के ख़िलाफ़ उठाए गए क़दमों के नतीजों की पूरी ज़िम्मेदारी वाशिंगटन पर आयद होती है।
वज़ारत-ए-ख़ारिजा ने चेतावनी दी कि सीज़फ़ायर की मुसलसल ख़िलाफ़वर्ज़ियाँ इलाक़ाई अम्न व इस्तेहकाम को गंभीर नुक़सान पहुँचा सकती हैं। ईरान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इन कार्रवाइयों को रोकने और ज़िम्मेदार पक्षों के ख़िलाफ़ प्रभावी क़दम उठाने की अपील की।
बयान के आख़िर में इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान ने दो-टूक लहजे में कहा कि वह अपने हक़-ए-दिफ़ा की बुनियाद पर, जहाँ और जब ज़रूरी समझेगा, अपने क़ौमी मफ़ाद और सलामती के दिफ़ा के लिए तमाम दस्तयाब वसाइल और सलाहियतों का इस्तेमाल करेगा।
ईरान के इस ताज़ा बयान को मिडिल ईस्ट की बदलती सियासी और फ़ौजी सूरत-ए-हाल में एक अहम और दूरगामी पैग़ाम के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में इलाक़े की सियासत और अम्न-ओ-अमान पर गहरे असरात छोड़ सकता है।रिपोर्ट: रिज़वान मुस्तफ़ा, तहलका टुडे