Pawan Kumar Vishwakarma

Pawan Kumar Vishwakarma ‼️जय श्री राम ‼️

12/03/2026

shreeRamCharitManas

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11/03/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Manoj-Maan R. Panchal, Raju Sharma, Ghanshyam Vishwakarma, Vala Vala J, MP Vishkarma, Ajayvishvkarma, Rakesh Kumar Sharma, Panchal Shailesh, Alok Jangid, Kamal Jangid, Sharda Vishwakarma, Pramod Vishwakrma, Sonu Kumar, Manoj Kumar, Lakshmi Kant, Jp Foji Jangid, Manjay Kumar, Rajendr Vishwakarma, Chandra Bhushan Vishwakarma, Sanni Kumar Sanni Kumar, Shailendra Kumar, Kamalkishor Ojha, Shani Vishwakarma, Durgesh Vishwakarma, Pankaj Kumar, Mahesh Choudhary, Asha Kalam, Amarjeet Vishwakarma, Ram Kumar, Shyamkumar Sharma, Pappu Vishawakrma, Mritunjay Mritunjay, Hanuman Jangid, Manoj Vishwakarma, Sstyynarayan Sstyynarayan, Anil Pandit, Rampukar Sharma, Goutam Shamar, छोटू विश्वकर्मा य, Rajnish Dhiman, Vishnu Dyal, Abhinesh Kumar, अमित कुमार विश्वकर्मा जी, Jay Prakash, Munna Munna Sharma, Shambhu Lal Suthar Suthar, Rajendra Nath Shide, Kudan Sharma, Sunil Sandeep Vishwakarma, Prem Premdatt

10/03/2026

03/03/2026

"आग लगे बस्ती में, हम अपनी मस्ती में"

03/03/2026

आजकल शादी के बाद रिश्ते खराब होने के मुख्य कारणों में आपसी संवाद की कमी, अवास्तविक उम्मीदें और विश्वास का अभाव हैं। समय ...
24/01/2026

आजकल शादी के बाद रिश्ते खराब होने के मुख्य कारणों में आपसी संवाद की कमी, अवास्तविक उम्मीदें और विश्वास का अभाव हैं। समय की कमी, सोशल मीडिया के प्रभाव, आर्थिक तनाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की चाहत के कारण कपल्स के बीच दूरी बढ़ रही है। धैर्य की कमी और 'तुरंत समाधान' वाली मानसिकता भी रिश्तों को कमजोर कर रही है।

नारी एक ऐसा विषय है जिसे पुरुष पूरी जीवनावधि में समझने का प्रयास करे तो भी वह उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक अंक प्राप्त नह...
24/01/2026

नारी एक ऐसा विषय है जिसे पुरुष पूरी जीवनावधि में समझने का प्रयास करे तो भी वह उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक अंक प्राप्त नहीं कर सकता। जब उसे लगता है कि वह सब कुछ जानता है, तब उसके समक्ष एक नया पहलू प्रकट होता है। इस प्रकार उसे समझने में ही उसकी सारी आयु व्यतीत हो जाती है। जय काशी हर हर महादेव

22/01/2026

विश्वकर्मा समुदाय में मुख्य रूप से पाँच जातियाँ (शिल्पकार समूह) मानी जाती हैं - बढ़ई (काष्ठकार), लोहार (धातुकार), सुनार (स्वर्णकार), कुम्हार (मिट्टी के कारीगर), और ताम्रकार (तांबे के कारीगर), जो पारंपरिक रूप से शिल्पकला और निर्माण से जुड़े हैं, और इन्हें भगवान विश्वकर्मा के वंशज माना जाता है। ये जातियाँ भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं, जैसे पंचाल, शिल्पकार, और इनके विभिन्न उप-समूह हैं।
मुख्य शिल्पकार समूह:
बढ़ई (काष्ठकार): लकड़ी का काम करने वाले।
लोहार (लोहकार): लोहे का काम करने वाले (धातुकार)।
सुनार (स्वर्णकार): सोने-चाँदी का काम करने वाले।
कुम्हार (मिट्टी के कारीगर): मिट्टी के बर्तन बनाने वाले।
ताम्रकार (कसेरा/कंसार): तांबे और कांसे के बर्तन बनाने वाले।
अन्य संबंधित नाम और समूह:
पंचाल: यह इन पाँच शिल्पकार जातियों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक व्यापक शब्द है, जो "पाँच" से बना है।
शिल्पकार: यह समुदाय के लिए एक सामान्य नाम है जो उनके शिल्पकला के कार्य को दर्शाता है।
जांगिड़, धीमान, मिस्त्री: ये कुछ अन्य उपनाम और समूह हैं जो विश्वकर्मा समुदाय से जुड़े हैं।
विभिन्नता:
सरकार द्वारा चलाई गई PM विश्वकर्मा योजना में इन पारंपरिक शिल्पों से जुड़ी कई अन्य जातियों (लगभग 140) को भी शामिल किया गया है, जिससे यह समुदाय व्यापक हो गया है।

31/12/2025

Happy new year friends

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