13/01/2026
#दमोह जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर लोहे का गेट: सुरक्षा या सरकारी धन की बर्बादी?*
जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर हाल ही में लगाया गया लोहे का भारी गेट अब शहर में चर्चा और सवालों का विषय बन गया है। वर्षों से जिला अस्पताल में आने-जाने वाले नागरिक यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर इस गेट की आवश्यकता क्यों पड़ी, जबकि अस्पताल परिसर में पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
जिला अस्पताल में पहले से दो मुख्य गेट बनाए गए हैं, जिनमें से एक गेट लंबे समय से लगभग हमेशा बंद रहता है। इसका कारण सुरक्षा बताया जाता है। इसके बावजूद अब मुख्य प्रवेश द्वार पर एक और लोहे का गेट लगाया जाना कई सवाल खड़े करता है। खासकर तब, जब इसी गेट पर एक पुलिस चौकी पहले से स्थापित है और अस्पताल की सुरक्षा में लगभग 22 से 24 सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, जिनमें दो गनमैन भी शामिल हैं। मेंटेनेंस के नाम पर हर साल लाखों खर्च स्थानीय नागरिकों और जागरूक युवाओं का आरोप है कि जिला अस्पताल में हर माह और हर वर्ष मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कई काम या तो बेवजह तोड़े जाते हैं या फिर बार-बार बनाए जाते हैं। चाहे वह टॉयलेट हों या बाथरूम के गेट, “तोड़ो-फोड़ो और फिर बनाओ” की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सूत्रों का दावा है कि तोड़फोड़ और मेंटेनेंस के नाम पर भुगतान निकालने वाले लोग अक्सर वही होते हैं। *सुरक्षा की आड़ में भविष्य की रणनीति?* कुछ जागरूक नागरिकों का मानना है कि यह गेट भविष्य में सुरक्षा से ज्यादा नियंत्रण का जरिया बन सकता है। आशंका जताई जा रही है कि यदि अस्पताल में किसी मरीज की मौत होती है और परिजन अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए आवाज उठाते हैं, तो इसी गेट के सहारे उन्हें बाहर निकालने या दबाव बनाने की स्थिति पैदा की जा सकती है। इससे जनता की आवाज को दबाने और प्रशासनिक असुविधा से बचने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
*जनता से जवाबदेही की मांग*
शहर के जागरूक युवाओं और नागरिकों का कहना है कि अब समय आ गया है कि जिला अस्पताल में आने वाले फंड और उनके खर्च का सार्वजनिक हिसाब मांगा जाए। “शहर हमारा है और इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है इसी भावना के साथ वे जनता से अपील कर रहे हैं कि अपने अधिकारों के प्रति सजग हों। आज सोशल मीडिया के दौर में हर नागरिक के पास मोबाइल है। यदि कहीं भी गलत या संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो उसका वीडियो बनाकर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए। परिजनों की पीड़ा को सुनना और उनकी आवाज बनना ही एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर