Shivesh Kumar Karn

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आज दिनांक 07 सितंबर 2026 दिन सोमवार को सुबह 08 बजे के लगभग में वरीय सहायक लोको पायलट स्वर्गीय जितेंद्र कुमार सहनी जी की ...
07/09/2026

आज दिनांक 07 सितंबर 2026 दिन सोमवार को सुबह 08 बजे के लगभग में वरीय सहायक लोको पायलट स्वर्गीय जितेंद्र कुमार सहनी जी की मृत्यु हो गई है जो की बरौनी संयुक्त क्रू लॉबी में पद स्थापित थे। अब वह हम सभी के बीच नहीं रहे। स्वर्गीय जितेंद्र जी पिछले करीब 02 वर्षों से एक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि उनके दिव्यगंत आत्मा को शांति दें और उनके परिवार को इस दुःख की घड़ी में पीड़ा को सहन करने की अपार शक्ति प्रदान करें। न ही जन्म और न ही मरण का कोई समय निश्चित है फिर भी मैं ईश्वर से इतना जरूर कहूंगा कि आपने दुनिया का अनमोल तोहफा मानव शरीर मनुष्य को दिए हैं तो मनुष्य को इस दुनिया का भरपूर आनंद लेने के लिए समय से पहले मौत मत दीजिए। मैं जानता हूँ कि धरती पर जो भी व्यक्ति आए हैं उनकी मृत्यु निश्चित है फिर भी किसी माँ बाप और पत्नी के सामने बच्चों एवं पति की मौत का होना बहुत ही तकलीफ देती है। मैं तो ईश्वर से यही कहूंगा कि शादीशुदा आदमी को मौत देकर छोटे छोटे बच्चों के उपर से पिता का साया उठना और पत्नी का विधवा होना बहुत ही दर्द होता है। मैं ईश्वर से अनुरोध करता हूँ कि शरीर में किसी भी तरह की बीमारी कभी नहीं दें और यदि कोई गंभीर बीमारी हो भी जाए तो भगवान उन्हें सही करने की कृपा जरूर करेंगे। ईश्वर आपको अपने चरणों में स्थान दें। मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। ओम् शांति ओम् शांति ओम् शांति ✍️🕉🌞🪔🚩🛕🎪🌏👫🍼🏠❤💔😭😢⚖️🔥🙏👏

आज दिनांक 04 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को मध्यरात्रि में हम सभी देशवासियों बड़े ही धूमधाम से कृष्ण भगवान का जन्म उत्सव मना...
04/09/2026

आज दिनांक 04 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को मध्यरात्रि में हम सभी देशवासियों बड़े ही धूमधाम से कृष्ण भगवान का जन्म उत्सव मना रहे हैं। यँहा मैं आप सभी के बीच कृष्ण भगवान के जन्मदिन पर कुछ प्रेरणा स्रोत आधारित अपनी बात रख रहा हूँ। जिन लोगों को बुरा लगे वह हमें माफ करने की कृपा करेंगे। इसके लिए आप सभी देशवासियों को ध्यान से पढ़ने और क्षमा करने के लिए धन्यवाद देता हूँ। कृष्णजन्माष्टमी को जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी भी कहते हैं। यह पर्व (त्योहार) प्रति वर्ष भाद्रपद मास (महिना) में कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था। श्री कृष्ण के पिताजी का नाम वासुदेव जी और माताजी की नाम देवकी जी हैं। माताजी ने शरीर और पिताजी ने जीवन शक्ति (प्राण) दिए हैं। जब शरीर ने प्राण को धारण किए तब जाकर भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ। हम सभी लोग श्री कृष्ण जी का जन्म बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह जन्म उत्सव उत्साह और प्रेम के साथ अपनापन का प्रतीक भी है। आप सभी को श्री कृष्णजन्माष्टमी पर भगवान समस्त परिवार को एक बेटा (पुत्र) और एक बेटी (पुत्री) जरूर (अवश्य) दें ताकि हर घर में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का स्वरूप भी बन सकें। इनदोनों के मिलने से ही राधा कृष्ण एक साथ बनते और दिखते हैं जिससे कि हम सभी को मनोरंजन के साथ साथ कृष्णलीला और बालपन भी देखने को मिलेंगे। हम सभी के जीवन में राधा और कृष्ण दोनों ही महत्वपूर्ण है क्योंकि राधा के बिना कृष्ण और कृष्ण के बिना राधा दोनों ही अपूर्ण यानी अधूरा हैं। इसलिए जीवनभर यानी मरते दम तक पति पत्नी एक साथ रहें तभी आप दोनों सम्पूर्ण जीवनसाथी (पति पत्नी) एक दूसरे के लिए कहलाएंगे। जीवन में एक ही विवाह (शादी) करें जो की शुभ विवाह हो। जीवन में प्रेम विवाह अंतर्जातीय हो या सजातीय कदापि नहीं करें। न ही शादी (विवाह) से पहले प्रेम और न ही शादी के बाद किसी अन्य से प्रेम करें क्योंकि प्रेम की बुखार घर और परिवार दोनों को बर्बाद करके ही उतरता है। इसका सबसे बुरा असर अपने ही आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है। इसलिए प्रेम केवल अपने ही पति पत्नी से करें। अपने माता पिता और अभिभावक के द्वारा तय किए गए रिश्ते को ही शुभ विवाह के समय वर वधू के रूप में स्वीकार कर जीवनसाथी (पति पत्नी) का भरपूर आनंद लें तथा अपने माता पिता अभिभावक को सम्मान एवं आभार व्यक्त करें। शादी के बाद जब बच्चे जन्म लेते हैं तब घर के सभी सदस्य खुश होते हैं न कि जन्म देने वाले केवल माता पिता ही खुश होते हैं। इसलिए बच्चे की माता पिता के साथ साथ सभी लोगों को बच्चों पर लार प्यार करने की पूरी हक (अधिकार) है। इस अधिकार (हक) से अपनों को वंचित करना महापाप है। दुनिया की सभी माता गर्भ धारण कर ही अपने बच्चों को कोंख से जन्म देती हैं। इसलिए कभी भी कोई स्त्री (महिला) नहीं कहें कि केवल मेरा बच्चा मेरा बच्चा है। भगवान ने पुरुष को कोंख नहीं दिए हैं। इससे पुरुष को तकलीफ भी हो सकता है। आज हम सभी लोग जिस तरह से अपने बच्चों को आत्म विश्वास के साथ पाल पोश कर बड़ा कर रहें हैं कि मेरा बच्चा पढ़ लिखकर बड़े पद प्रतिष्ठा के साथ हमें सेवा और देखभाल करेगा वही बच्चा शादी के बाद अपने ही माता पिता की सेवा देखभाल करने की बजाय उनसे ही दूर हो जाए तो माता पिता अभिभावक पर क्या बीतेंगे एक बार जरा सोचिए। इसलिए आप सभी दांपत्य जीवन में एक कहावत को हमेशा याद रखिए कि आप बौवा हैं आपको भी बौवा होंगे। आपका बच्चा भी आप ही से सबकुछ अच्छा बुरा सीखेंगे। इसलिए अपने वृद्ध माता पिता अभिभावक की सेवा और देखभाल अवश्य ही तन मन धन से करें एवं संतान धर्म का पालन कर पुण्य के भागी अवश्य (जरूर) ही बनें। जिस तरह से आप सभी बच्चों को आपके माता पिता कष्ट सहकर भी आपको किसी भी तरह का तकलीफ नहीं होने दिए ठीक उसी तरह से आप सभी बच्चें भी अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी पूर्वक निभाएं। आप सभी भारतीय को इस श्री कृष्णजन्माष्टमी पर समस्त सनातन धर्म परिवार के सभी सदस्यों को कृष्ण और राधा के रूप में जन्माष्टमी मनाने के लिए ढेर सारी बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। आप सभी का दिन भगवान श्री कृष्ण जी की असीम कृपा से शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद।✍️🕉🛕🪔🚩🥥🌝🌄💐🎉😊🙌💕❤ ⚖️👯🍼🏠🇮🇳🧁🎂👏🙏 #कृष्ण #कृष्णा #जन्माष्टमी #राधा #राधारानी

आज दिनांक 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को सावन (श्रावण) मास (महिना) में पूर्णिमा के दिन हम सभी देशवासियों बड़े ही धूमधाम स...
30/08/2026

आज दिनांक 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार को सावन (श्रावण) मास (महिना) में पूर्णिमा के दिन हम सभी देशवासियों बड़े ही धूमधाम से भाई बहन का पावन पर्व रक्षाबंधन मनाए हैं। अब मैं अपनी कुछ बातों को आप सभी के समक्ष दैनिक जीवन में प्रेरणा पर आधारित रक्षाबंधन पर्व के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहता हूँ। जिन भारतीय भाई बहन को बुरा लगे हों तो वह माफ करेंगे और जिनको अच्छा लगे हों वह अपना आशीर्वाद भी हमें देंगे। भारतीय हिंदू धर्म संस्कृति की वैदिक पंचाग के अनुसार हर (प्रत्येक) साल (वर्ष) रक्षाबंधन का पर्व श्रावण (सावन) महिना (मास) में पूर्णिमा के दिन मनाते हैं। यह एक पारंपरिक पर्व भाई बहन को स्नेह की रेशम डोर में बांधता है यानि यह पर्व (त्योहार) भाई बहन के प्रेम और पवित्र बंधन का प्रतीक भी है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टिका लगाके कलाई पर रक्षा की बंधन बांधती है जिसे हम सभी राखी कहते हैं। इस दिन सभी बहनें भाई की कलाई पर राखी प्रतीकात्मक धागे और सुरक्षा का वादे के साथ भाई बहन के बीच पवित्र बंधन को बांधती है। राखी बंधवाने के बाद भाई राखी बांधने वाली बहन को अपनी क्षमता अनुकूल उपहार (गिफ्ट) स्वरूप कुछ भी जैसे रुपया मिठाई वस्त्र आदि देते हैं। रक्षाबंधन की कहानी महाभारत में भी दिखाई गई है। धार्मिक कथाओं के अनुसार माता लक्ष्मी ने सावन मास में पूर्णिमा के दिन राजा बलि को भाई मानकर राखी बांधी थी। राजा बलि माता लक्ष्मी की भावना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कर दिए। माता लक्ष्मी पत्नी और भगवान विष्णु पति के रूप में एकसाथ मिले हैं। हम सभी भाई बहन अपने देवतुल्य माता पिता और अभिभावक के अनुसार ही जीवन में शादी करें। माता पिता और अभिभावक के द्वारा तय किया गया रिश्ता ही वर (दुल्हा) वधु (दुल्हन) के रूप में हम सभी को स्वीकार करना चाहिए। अपने माता पिता और अभिभावक को शादी (विवाह) होने के बाद दिल से धन्यवाद भी दें। हम सभी देशवासियों को प्रेम विवाह (शादी) अंतर्जातीय हो या सजातीय जीवन में कदापि नहीं करना चाहिए क्योंकि माता पिता और अभिभावक के भी अपने सपने होते हैं। हम सभी भाई का परम कर्तव्य है कि अपने बहन की सुहाग यानी पति की भी रक्षा करें। जब हम सभी भाई अपने बहन की शादी करते हैं तब दो अलग अलग परिवारों का आपस में मिलन होता है। इस तरह यह दोनों परिवार आपस में एक खून की रिश्तों में बंध जाते हैं। जब कभी हिन्दू धर्म में लड़का और लड़की की शुभ विवाह में शादी होती है तब उस समय एक पारंपरिक विध लहछू भी होता है जो कि पति पत्नी के खूनी रिश्तों को आपस में दिल से मिलाता (या जोड़ता) है। यह विध पति पत्नी के दांपत्य जीवन में सुख दुःख अटूट प्रेम और प्यार एवं विश्वास को स्थापित करता है। जब हम सभी भाई ने अपनी बहन की शादी शिक्षा संस्कार व्यवहार रहन सहन आदि को देखते हुए उनके अनुकूल एक अच्छे लड़के से कर दिए हैं तब हम सभी भाइयों का अपना कर्तव्य है कि अब मेरी बहन ससुराल ही बसे तो अच्छा है। भगवान ने हम सभी बहनों को शादी के बाद दो घर एक माइका (पराया घर) और दूसरा ससुराल (अपना घर) बनाए हैं। माता सीता एक राज घराना परिवार की बेटी (पुत्री) थी फिर भी हर सुख दुःख में अपने पति श्री राम के साथ कदम से कदम मिलाकर चली। राजा जनक ने अपनी बेटी की शादी एक राज घराना परिवार अयोध्या के राजा दशरथ के जयेष्ठ पुत्र राम से करवाए। फिर भी पति राम को माँ सीता ने 14 वर्ष तक जंगल में हर सुख दुःख में जीवनसाथी बनकर हर कदम पर साथ दी। हम सभी बहनों की शादी के बाद असली घर ससुराल ही होता है। ससुराल में सास माता, ससुर पिता, बड़ी ननद जेठानी बड़ी बहन, छोटी ननद देवरानी छोटी बहन, भैंसुर (जेठ) बड़े भाई और देवर छोटे भाई की तरह ही होते हैं। आप सभी बहनों से मेरा विनम्र अपील है कि यदि आपसे ससुराल में किसी भी तरह की गलती होने पर सास ससुर यदि आपको डांटे तो उन्हें अपनी माता पिता और अभिभावक समझकर दिल से माफ करने की कृपा करेंगे। आप सभी बहनों को रक्षाबंधन के इस पुनीत शुभ अवसर पर भाईयों की रक्षा के लिए रेशम धागे बांधने की ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी भाई बहन का दिन शुभ और मंगलमय हो, धन्यवाद। ✍️🕉🛕🥥🪔🌞🔥⌚⚖️🤝👫🇮🇳🎂🧁🌕🌠❣️💔😢🌏🙏👏 #रक्षा #रक्षाबंधन #भाई #बहन

कन्यादान का मतलब कन्या (बेटी) का आदान करना होता है न कि कन्या (बेटी) का दान करना है अर्थात् कन्या कोई वस्तु या संपत्ति न...
25/08/2026

कन्यादान का मतलब कन्या (बेटी) का आदान करना होता है न कि कन्या (बेटी) का दान करना है अर्थात् कन्या कोई वस्तु या संपत्ति नहीं है जिसे दान किया जाए यानी कन्यादान कोई भीख भी नहीं है। कन्यादान केवल अरेंज्ड मैरिज (विवाह) में ही होता है न कि प्रेम विवाह के लिए है। हिन्दू धर्म में बेटी की विवाह करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण पवित्र रस्म कन्यादान है। कन्यादान शुभ विवाह का एक मुख्य हिस्सा है जिसमें दुल्हन (वधु) के पिता या अभिभावक के द्वारा दूल्हा (वर) को दुल्हन की अच्छाई भलाई खुशी सेवा और देखभाल करने के लिए जीवनसाथी के रूप में जीवनभर के लिए जिम्मेदारी सौंपते हैं। वर (पति) इस जिम्मेवारी को दांपत्य जीवन में खुशीपूर्वक स्वीकार करते हैं। कन्यादान के उपरांत ही बेटी लड़की से दुल्हन (पत्नी) बनती है। बेटी पिता के गोत्र से निकलकर अपनी जीवनसाथी पति (वर) के गोत्र में प्रवेश करती है। आप सभी माता पिता और अभिभावक अपनी पुत्री (बेटी) या किसी अन्य की बेटी (पुत्री) को भारतीय हिंदू धर्म में विवाह के समय कन्यादान करते हैं और करना भी चाहिए जो कि अपने आप में एक महादान भी है। हम सभी मनुष्यों का जीवन अतिमहत्वपूर्ण हैं। कन्यादान करने से पहले बहुत ही सारे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने योग्य बातें हैं। आप सभी अभिभावक एक पुरानी कहावत बड़े बुजुर्गों से सुने होंगे कि अपने ही जाती और धर्म में बेटा की शादी नीच और बेटी की शादी ऊँच या समकक्ष में करें अर्थात आय उच्च शिक्षा और रहन सहन आदि का जीवन स्तर देखकर ही करें तो अच्छा है। हम सभी अपनी बहन या बेटी को शादी करने से पहले होने वाले पति (दुल्हा) सास और ससुर की ग्रामीण या शहरी परिवेश और उनका एकल या संयुक्त परिवार के सदस्यों की आय पेशा शिक्षा और कार्यशैली आदि के बारे में उन्हें जानकारी अवश्य (जरूर) दें और उनसे सहमति भी जरूर (अवश्य) लें। हम सभी अपनी बहन या बेटी के लिए शिक्षा विश्वास संस्कार और व्यवहार आदि को देखते हुए माईका या ससुराल में बसने हेतु घर जम्हाई या परिवारिक जम्हाई खोजें ताकि शादी के बाद किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न न हो। हम सभी की बहन या बेटी जितनी ससुराल बसे उतनी ही अच्छा है क्योंकि भगवान ने शादी के बाद लड़की के लिए दो घर एक माईका (पराया घर) और दूसरा ससुराल (अपना घर) बनाए हैं। हम सभी अपनी बहन या बेटी को शादी के बाद पूर्ण रूप से स्वतंत्र दांपत्य जीवन जीने के लिए ससुराल में बसने दें। इसमें हस्तक्षेप नहीं करके सहयोग की भावना रखनी चाहिए। आप सभी देशवासियों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि जिस तरह से अपने घर में दही को जमाते समय दूध में अँगुली बार बार नहीं करते हैं ठीक उसी तरह से बेटियों की शादी करने के बाद पति पत्नी के दांपत्य जीवन में बार बार दखल देने से घर बसने की बजाय उनकी अपनी ही घर उजड़ भी सकती है। यदि किसी कारणवश दांपत्य जीवन सही (ठीक) से नहीं चल रहे हों तो आप सभी अभिभावक शांतिपूर्ण ढंग से दोनों ही परिवार पति पत्नी को एकसाथ मिलकर समझाएं ताकि उन दोनों का घर उजड़ने की बजाय बस जाए। आप सभी अभिभावक ध्यान दें दांपत्य जीवन में छोटी छोटी समस्या आते रहते हैं उन्हें आसानी से हल करने का प्रयास करें। माता और पिता के रहते हुए बच्चे कभी भी अभिभावक नहीं बनें क्योंकि जितनी दिन दुनिया आप सभी के माता पिता देखें हैं उनसे हम सभी बच्चे कम ही देखें होंगे। लड़की की शादी के बाद जन्म लिए हुए बच्चों पर दोनों ही परिवार के सदस्यों को लार प्यार करने का अधिकार (हक) एकसमान है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि जो माता पिता और अभिभावक बिना छल किए कन्यादान करते हैं उनकी वैवाहिक जीवन को सफल बनाएं और सुहागन भी रखें। मैं पुनः ईश्वर से विनती (अनुरोध) करता हूँ कि आप सभी पति पत्नी को राम और सीता की तरह हर सुख दुःख में साथ रखें। आप सभी माता पिता और अभिभावक को शुभ विवाह हेतु कन्यादान करने के लिए ढेर सारी बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, धन्यवाद। ✍️🤱💃🕺🌹🎂♥️💔😭😢🎺🎆🧨🎇🪔🛕🎪💕👍😊🙌💖👌💗🌸🎉🙃💞😘🎁😍👏🙏 #कन्यादान #शुभविवाह #विवाह

आज हम सभी लोग दिनांक 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को शुक्ल पक्ष में नाग पंचमी मना रहे हैं जो कि हिंदुओं का एक प्रमुख (मुख्य)...
17/08/2026

आज हम सभी लोग दिनांक 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को शुक्ल पक्ष में नाग पंचमी मना रहे हैं जो कि हिंदुओं का एक प्रमुख (मुख्य) त्योहार (पर्व) भी है। इससे पहले दिनांक 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार को कृष्ण पक्ष में भी नाग पंचमी हम सब लोग मिलकर मनाए हुए थे। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा परीक्षित जी को साँपों (सर्पों) के राजा तक्षक जी के काटने यानी डसने से मृत्यु हो गया था। राजा परीक्षित जी के पुत्र राजा जनमेजय जी ने अपने पिता जी की मृत्यु का बदला लेने के लिए एक सर्प सत्र यज्ञ करवाए जिससे नाग सर्पों (साँपों) की मृत्यु होने वाला था लेकिन आस्तिक मुनि जी ने इस सर्प सत्र यज्ञ में हस्तक्षेप कर नाग साँपों को मरने से बचा लिए थे। इस हस्तक्षेप से नाग देवता जी प्रसन्न होकर आस्तिक मुनि जी को वरदान दिए कि जो भी हमें इस पंचमी के दिन पूजा अर्चना करेगा मैं उसे कभी नहीं काटूंगा और उसके घर में कभी किसी तरह की भय का माहौल भी नहीं रहेगा। इसलिए नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहारों (पर्वों) में से एक है जो कि पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह सावन मास (माह) का पहला त्योहार भी है। सावन का महीना बहुत ही अच्छा एवं पवित्र माना गया है। हिंदू पंचाग के अनुसार यह पर्व सावन माह (मास) में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन मास में अलग अलग जगहों पर ज्यादातर लोग शुक्ल पक्ष में ही तो कुछ लोग कृष्ण पक्ष में भी पंचमी के दिन नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने के लिए मनाते हैं। इस नाग पंचमी के दिन कुछ लोग व्रत (उपवास) रखकर भी पूजा अर्चना करते हैं। इस त्योहार में भगवान शिव शंकर जी के आभूषण नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने के लिए मुख्य सामग्री दूध और लावा एवं खीर आदि होते हैं। नाग पंचमी के दिन विधिपूर्वक उपवास (व्रत) रखकर पूजा अर्चना करने से जीवन में सारे कष्ट यानी दुःख दूर हो जाते हैं और इससे परिवार में सुख तथा शान्ति भी आ जाती है। आप सभी लोग अपने दैनिक जीवन में एक कहावत जरूर सुने होंगे कि तुलसी का पत्ता छोटा हो या बड़ा सभी का महत्व एक ही तरह है और दूसरी कहावत यह भी सुने होंगे कि मानो तो देव नहीं तो पत्थर हैं। परिवार में सभी सदस्यों को समान स्थान यानी महत्व दें। परिवार में सास जी और ससुर जी भी माँ जी और पापा जी की तरह ही हैं। हम सभी लोग एक दिन अवश्य ही सास जी और ससुर जी भी बनेंगे। हम सभी मनुष्यों का जीवन जिस तरह से अनमोल रत्नों में से एक है ठीक उसी तरह से जीव जंतु का भी जीवन अनमोल ही हैं। अपने दैनिक जीवन में किसी भी प्राणी को कभी कमजोर नहीं समझें। अपने स्वार्थ के लिए जीवन में किसी को किसी भी तरह की नुकसान कभी नहीं पहुचाएँ। अपने जीवन में सभी जीव जंतु को आदर सम्मान करें। इस नाग पंचमी पर्व के पावन शुभ अवसर पर पर आप सभी भारतीय हिंदू को सावन माह में नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने एवं व्रत रखने के लिए ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी भारतीय सनातन हिन्दू का दिन भोलेनाथ की असीम कृपा से शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद। हर हर महादेव की जय हो ✍️🛕🪔🚩🕉️🌺👑💖❤😊👌💕🎉🌈👑🕊️🌹 💐🙌🌻🌴🎊🌟🌠💫🔥💥🎁👍👏🙏

इस वर्ष सावन ( श्रावण ) के मस्त महीने में मधुश्रावणी पर्व दिनांक 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार से नाग पंचमी पर्व के साथ ही प्...
15/08/2026

इस वर्ष सावन ( श्रावण ) के मस्त महीने में मधुश्रावणी पर्व दिनांक 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार से नाग पंचमी पर्व के साथ ही प्रथम सोमवारी भी शुरू हो चुकी है एवं टेमी विध से समापन दिनांक 15 अगस्त 2026 दिन शनिवार को हो जाएगी। मधुश्रावणी पर्व ( त्योहार ) बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में हिंदू मैथिल नवविवाहित महिलाओं के द्वारा मनाई जाने वाली एक प्रमुख ( मुख्य ) पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से कर्ण कायस्थ एवं मैथिल ब्राह्मण आदि जाती की नवविवाहित महिलाओं के द्वारा मनाई जाती है। यह पर्व मिथिला संस्कृति पर आधारित है। इस पर्व में कई तरह के विध विधान भी होते हैं। यह पर्व मैथिल नवविवाहित महिलाओं में लोकप्रिय आस्था और पति की दीर्घायु तथा सुख एवं शान्ति वैवाहिक जीवन के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्व सदा सुहागन बनी रहने के लिए मनाई जाती है। यह पर्व पूर्ण रूप से नवविवाहित महिलाओं के लिए ही है। इस पर्व में पुरुष की भूमिका नाममात्र ही रहता है। नवविवाहित महिलाओं के द्वारा यह पर्व जीवन में एक बार शादी के एक वर्ष के अंदर ही सावन मास ( माह) में मनाई जाती है। इस पर्व में नवविवाहित कन्या ( बेटी ) नाग देवता जी और शिव जी एवं पार्वती जी की पूजा अर्चना भी करती हैं। नवविवाहित महिलाएं यह पर्व अपनी माईके में ही 14 दिनों तक प्रतिदिन व्रत ( उपवास ) रखकर वासी फूल ( पुष्प ) से पूजा अर्चना कर मनाती हैं। इस मधुश्रावणी व्रत कथा में 14 खंड ( अध्याय ) होते हैं। इस पर्व में एक बुजुर्ग महिला कथावाचक ( पुरोहित ) बनकर कथा सुनाती हैं। इस पर्व के अंत में नई नवेली विवाहित कन्याओं की अग्नि परीक्षा भी होती है। इस अग्नि परीक्षा में नई नवेली विवाहित कन्याओं को टेमी से दागनी पड़ती है। टेमी पड़ना भी एक अचल सुहाग की निशानी ( प्रतीक ) ही है। इसके साथ ही इस पर्व की समापन हो जाती है। अब आप सभी नवविवाहित महिलाएं एक दूसरे की तुलना अपने वैवाहिक जीवन में कभी भी नहीं करें क्योंकि जो मेरे लिए मिला है वही सबसे बेहतर हैं। भगवान का बनाया हुआ पति पत्नी का रिश्ता पवित्र बंधन की तरह अनमोल रिश्तों में से एक है। आप सभी महिलाएं खुशी पूर्वक दांपत्य जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहें। विवाह दो अलग अलग स्थानों के रहन सहन के मिलन का संगम है। जीवन में सुख और आनंद लेने के लिए दो अलग अलग विचारधाराओं को एक साथ समावेश करनी पड़ती है। अपने ही दोनों हाथों की पाँचों अंगुलियाँ एक जैसी नहीं हैं फिर भी हाथ में सभी अंगुलियाँ एक साथ है चाह के भी हम सभी अलग नहीं कर सकते ठीक उसी तरह से परिवार में भी सभी सदस्य एक जैसे नहीं होते फिर भी अपनी बुद्धि ( दिमाग ) और विवेक से परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ रखने का प्रयास कर सकते हैं। आप सभी नवविवाहित महिलाएं अपने माता जी और पिता जी एवं अभिभावक जी की सम्मान तथा आभार व्यक्त करें। मैं सभी महिलाओं के लिए ईश्वर से सदैव प्रार्थना करता हूँ कि आप सभी महिलाओं के पति की उम्र लंबी हों और आप सभी महिलाएं सदा सुहागन भी बनी हुई रहें। आप सभी नवविवाहित महिलाओं को मधुश्रावणी पर्व हर्सोल्लास से मनाने के लिए ढेर सारी बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। आप सभी महिलाओं का दिन भोलेनाथ जी और माता पार्वती जी की असीम कृपा से शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद। ✍️🕉🛕🪔🌞🏹🎎🚩🥥🥰👫🍼⌚⚖️🪞🏠❤️🤝👏🙏 #मधुश्रावणी #नागपंचमी #सावन #भोलेनाथ #पार्वती

आज हम सभी लोग दिनांक 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार को कृष्ण पक्ष में नाग पंचमी मना रहे हैं जो कि हिंदुओं का एक प्रमुख ( मुख्य...
09/08/2026

आज हम सभी लोग दिनांक 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार को कृष्ण पक्ष में नाग पंचमी मना रहे हैं जो कि हिंदुओं का एक प्रमुख ( मुख्य ) त्योहार ( पर्व ) भी है। पुनः दिनांक 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को शुक्ल पक्ष में भी नाग पंचमी हम सब लोग मिलकर मनाएंगे। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा परीक्षित जी को साँपों ( सर्पों ) के राजा तक्षक जी के काटने यानी डसने से मृत्यु हो गया था। राजा परीक्षित जी के पुत्र राजा जनमेजय जी ने अपने पिता जी की मृत्यु का बदला लेने के लिए एक सर्प सत्र यज्ञ करवाए जिससे नाग सर्पों ( साँपों ) की मृत्यु होने वाला था लेकिन आस्तिक मुनि जी ने इस सर्प सत्र यज्ञ में हस्तक्षेप कर नाग साँपों को मरने से बचा लिए थे। इस हस्तक्षेप से नाग देवता जी प्रसन्न होकर आस्तिक मुनि जी को वरदान दिए कि जो भी हमें इस पंचमी के दिन पूजा अर्चना करेगा मैं उसे कभी नहीं काटूंगा और उसके घर में कभी किसी तरह की भय का माहौल भी नहीं रहेगा। इसलिए नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहारों ( पर्वों ) में से एक है जो कि पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह सावन मास ( माह ) का पहला त्योहार भी है। सावन का महीना बहुत ही अच्छा एवं पवित्र माना गया है। हिंदू पंचाग के अनुसार यह पर्व सावन माह ( मास ) में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन मास में अलग अलग जगहों पर ज्यादातर लोग शुक्ल पक्ष में ही तो कुछ लोग कृष्ण पक्ष में भी पंचमी के दिन नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने के लिए मनाते हैं। इस नाग पंचमी के दिन कुछ लोग व्रत ( उपवास ) रखकर भी पूजा अर्चना करते हैं। इस त्योहार में भगवान शिव शंकर जी के आभूषण नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने के लिए मुख्य सामग्री दूध और लावा एवं खीर आदि होते हैं। नाग पंचमी के दिन विधिपूर्वक उपवास ( व्रत ) रखकर पूजा अर्चना करने से जीवन में सारे कष्ट यानी दुःख दूर हो जाते हैं और इससे परिवार में सुख तथा शान्ति भी आ जाती है। आप सभी लोग अपने दैनिक जीवन में एक कहावत जरूर सुने होंगे कि तुलसी का पत्ता छोटा हो या बड़ा सभी का महत्व एक ही तरह है और दूसरी कहावत यह भी सुने होंगे कि मानो तो देव नहीं तो पत्थर हैं। परिवार में सभी सदस्यों को समान स्थान यानी महत्व दें। परिवार में सास जी और ससुर जी भी माँ जी और पापा जी की तरह ही हैं। हम सभी लोग एक दिन अवश्य ही सास जी और ससुर जी भी बनेंगे। हम सभी मनुष्यों का जीवन जिस तरह से अनमोल रत्नों में से एक है ठीक उसी तरह से जीव जंतु का भी जीवन अनमोल ही हैं। अपने दैनिक जीवन में किसी भी प्राणी को कभी कमजोर नहीं समझें। अपने स्वार्थ के लिए जीवन में किसी को किसी भी तरह की नुकसान कभी नहीं पहुचाएँ। अपने जीवन में सभी जीव जंतु को आदर सम्मान करें। इस नाग पंचमी पर्व के पावन शुभ अवसर पर पर आप सभी भारतीय हिंदू को सावन माह में नाग देवता जी यानी साँपों की पूजा अर्चना करने एवं व्रत रखने के लिए ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी भारतीय सनातन हिन्दू का दिन भोलेनाथ की असीम कृपा से शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद। हर हर महादेव की जय हो ✍️🛕🪔🚩🕉️🌺👑💖❤😊👌💕🎉🌈👑🕊️🌹 💐🙌🌻🌴🎊🌟🌠💫🔥💥🎁👍👏🙏

आज दिनांक 02 अगस्त 2026 दिन रविवार को अगस्त माह के प्रथम रविवार यानी संडे होने के कारण अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस अर्थात...
03/08/2026

आज दिनांक 02 अगस्त 2026 दिन रविवार को अगस्त माह के प्रथम रविवार यानी संडे होने के कारण अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस अर्थात फ्रेंडशिप डे मनाया जा रहा है जो प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के प्रथम रविवार को ही आयोजित किया जाता है। इस अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस की शुरुआत सर्वप्रथम 1958 ईस्वी को की गई थी। अपने जीवन में दोस्ती की डोर को मजबूत बनाने का हरसंभव प्रयास अवश्य ही करें यानी जीवन में इस विश्वास की डोर को कभी भी कमजोर नहीं होने देना चाहिए। श्री कृष्ण जी ने पार्थ यानी अर्जुन जी से कहे थे कि मित्रता प्रेम से कहीं बढ़कर है। अपने जीवन में सच्चे दोस्त की अहमियत को अवश्य ही समझें और दिल से उनके लिए हमेशा प्यार बनाए हुए रखें। अपने जीवन में सच्चे दोस्त को दिल से सम्मान अवश्य ही करें। सच्चा दोस्त हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी यानी मूल्यवान धन हैं। आप सभी मित्र कृष्ण जी और सुदामा जी के बचपन की अद्भुत दोस्ती की कहानी के बारे में अवश्य ही जानते होंगे। इसलिए अपने जीवन में दोस्तों को पैसों यानी धनों से तुलना कभी भी नहीं करें। दोस्ती में स्वार्थ की भावना नहीं होकर अपनत्व की भावना होनी चाहिए। जीवन में स्थाई रूप से कुछ भी नहीं है अर्थात गरीबी और अमीरी, सुख और दुःख, ऊँच और नीच, उतार और चढ़ाव, दिन और रात, अंधकार और प्रकाश, एवं शुक्ल और कृष्ण पक्ष आदि बदलते हुए रहते हैं। हमारे जीवन में कर्म बहुत ही प्रधान होते हैं अर्थात केवल अच्छे कर्म करते रहें बुरा कर्म करने का प्रयास कभी नहीं करें। इस मित्रता दिवस पर अपने रिश्तों को यदि किसी कारण से दूरी बन गई हों तो उस दूरी को कम करने का प्रयास अवश्य ही करें। जो मित्र परिवार की तरह होते हैं उन्हें जीवन में अच्छे मित्र समझ कर अवश्य ही याद करें। जीवन में कुछ मित्र शत्रु की तरह होते हैं उन्हें भी पहचानने का प्रयास अवश्य ही करें। जीवन में हम सभी एक महत्वपूर्ण पुरानी कहावत को अवश्य ही याद रखें कि कर भला तो हो भला अर्थात जीवन में किसी की भलाई के बारे में सोचें बुराई के बारे में कदापि नहीं सोचें। आप सभी मित्र हमारे पास रहें या दूर लेकिन दिल में जगह जरूर बनाए हुए रखें। यह मित्र जैसी रिश्ता खून की रिश्ता हो या न हो लेकिन अपनों से कम भी नहीं हों। हम सभी का परिवार और समाज भी हम सब का मित्र ही हैं। इस परिवार और समाज में हम सभी का कर्तव्य है कि आपस में भाईचारा और प्रेम एक अच्छे मित्र की तरह बनाए हुए रखें। आप सभी दोस्त जीवन में सकुशल कार्य करते हुए तरक्की अवश्य ही करें। आप सभी दोस्तों पर भगवान शिव शंकर जी हमेशा कृपा बनाए हुए रखें। इसकी मंगल शुभकामना भगवान श्री राम जी से भी करता रहता हूँ। इस अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस पर आप सभी दोस्तों को एक अच्छी दोस्ती और प्रेम एवं भाईचारा बनाए रखने के लिए ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी मित्रों को इस अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस पर ईश्वर की असीम कृपा से दिन शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद। ✍️🔔🌞🚩🛕🎂🏅🌟🌈🎉👍💖💕🌹🌺💫🎊🙌🌸💗🙏 ᩣシ

आज दिनांक 30 जुलाई 2026 दिन गुरुवार से श्रावण मास यानि सावन महीना का शुभारंभ हो चुका है। इस सावन के महीने में बाबा महाका...
02/08/2026

आज दिनांक 30 जुलाई 2026 दिन गुरुवार से श्रावण मास यानि सावन महीना का शुभारंभ हो चुका है। इस सावन के महीने में बाबा महाकाल की भक्ति का विशेष महत्व दिया गया है। यह सावन का महीना खासकर भगवान शिव जी के लिए जाना जाता है। इसी सावन माह में समुंद्र मंथन के दौरान भगवान शिव जी ने हलाहल विषपान किए थे। इस उग्र विष को शांत करने के लिए भक्तगणों ने भगवान शिव जी पर जलाभिषेक करने लगे। इस महादेव जी की पूजा अर्चना करने से अकालमृत्यु दूर होकर लंबी उम्र हो जाती है। भगवान शिव जी ने माता पार्वती जी की कठोर तपस्या एवं सोमवार की व्रत से प्रसन्न होकर उन्हें अपना पत्नी बना लिए। इसलिए सावन माह में व्रत एवं पूजा अर्चना करने के लिए खास दिन सोमवार को माना गया है। भगवान शिव जी की पूजा अर्चना और जलाभिषेक करने के लिए बेलपत्र एवं गंगाजल और दूध की आवश्यकताएँ होती है। यह सावन माह पवित्र रुद्र पूजा रुद्राभिषेक करने के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है। यह सावन माह कावंड़ियों के लिए बहुत ही अच्छा होता है। जब भगवान शिव जी का विवाह माता पार्वती जी से हो रहा था तब महादेव जी के कई विकराल रूप देखकर उनकी माँ मैना जी भी डर गई थी। नारद जी ने वर यानी दूल्हा के रूप में भगवान शिव जी को ही चयन किए थे लेकिन माँ मैना जी को होने वाले दामाद के बारे में विशेष कुछ भी जानकारी नहीं दी गई थी। माता पार्वती जी भगवान शिव जी के बारे में सबकुछ भली भाँति जानती थी फिर भी माता पार्वती जी ने भगवान शिव जी से प्रार्थना किए कि शादी की रीति रिवाज में अपना रूप धारण कर विवाह के मंडप में आएं। माता पार्वती जी ने बहुत ही तकलीफों का सामना बड़े ही सहज और शालीनता एवं सहनशील होकर के दांपत्य जीवन को अच्छी तरह से निभाई है। पति पत्नी का पवित्र रिश्ता अनमोल रिश्तों में से एक होते हैं। अपने माता जी और पिता जी एवं अभिभावक जी के द्वारा चयन किए गए वर या वधु को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार कर सात जन्मों तक साथ रहने के लिए वादा निभाने का वचन अग्नि देवता को ईश्वर का साक्ष्य मानकर लें। अपने माता जी और पिता जी एवं अभिभावक जी को सम्मान करें और उन्हें धन्यवाद भी दें। जीवन में सुख और दुःख, ऊँच और नीच, उतार और चढ़ाव, बड़ा और छोटा, दिन और रात, शुक्ल और कृष्ण पक्ष, अंधकार और प्रकाश, गरीब और अमीर आदि एक जैसे कुछ भी नहीं होते हैं लेकिन सभी एक दूसरे के पूरक हैं अर्थात जीवन में स्थाई कुछ भी नहीं होते बल्कि समय यानी हालात एक दिन जरूर बदलेंगे। अपने दैनिक जीवन में धैर्य अवश्य बनाए रखें। समय आने पर समय के साथ सबकुछ ठीक हो जाएंगे। तीनों लोकों के पालनहार त्रिनेत्र महादेव जी सबकुछ देख रहे हैं। हम सभी लोग अपना कर्तव्य हमेशा ईमानदारी से करते हुए रहें। आप सभी लोग जीवन में हमेशा स्वस्थ और खुशहाल एवं सही सलामत रहें। मैं इसकी प्रार्थना सदैव ईश्वर से करता रहता हूँ। आप सभी सनातन भारतीय को सावन माह के शुभारंभ होने पर भक्तिमय माहौल बनाने एवं कांवर यात्रा पर जाने और जलाभिषेक करने के लिए ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप सभी भक्तों का दिन संकट हरने वाले भोलेनाथ महादेव की असीम कृपा से कांवर यात्रा के साथ शुभ एवं मंगलमय हो, धन्यवाद। ✍️🕉️🌞🏹🪔🎎🛕👁️🌙⚖♥️💔😭😥🌏🇮🇳⌚🍼👫👏🙏

आज दिनांक 29 जुलाई 2026 को हम सभी लोग आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मना रहे हैं।भगवान शिव जी...
29/07/2026

आज दिनांक 29 जुलाई 2026 को हम सभी लोग आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मना रहे हैं।भगवान शिव जी ने एक शिक्षक यानि गुरु जी के रूप में इसी पूर्णिमा के दिन अपने सात ऋषियों को धर्म का ज्ञान अर्थात उपदेश दिए।भगवान शिव जी को आदि गुरु जी एवं इन सभी ऋषियों को सप्तर्षि जी भी कहा जाता है।महान धर्मग्रंथों के रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म इसी पूर्णिमा के दिन हुआ था।महर्षि वेदव्यास जी ने महान धर्मग्रंथ महाभारत 4 वेदों एवं 18 पुराणों आदि की रचना कर सनातन धर्म के लिए गुरु जी बन गए।इस गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।इन सभी गुरुओं के सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाते आ रहे हैं।गुरु का अर्थ दो भागों गु एवं रु से मिलकर बना शब्द गुरु है जिसका अर्थ क्रमशः गु से अंधकार अर्थात अज्ञान एवं रु से प्रकाश अर्थात रोशनी होता है।गुरु जी का मतलब अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले होते हैं।जीवन में प्रथम गुरु जी माँ जी होती हैं जिन्होंने कई प्रकार के दर्द को सह कर आपको जन्म दी और इस रंग बिरंगी दुनिया से परिचित करवाई है।द्वितीय गुरु जी हम सभी की धरती माँ यानी माता जी हैं जिन्होंने जीवन जीने के लिए कई तरह की वस्तुएं उपहार स्वरूप हमें दी है।तृतीय गुरु जी हमारे पिता जी हैं जिन्होंने अपने बच्चों के लिए कई तरह के तकलीफों को झेलकर अपनों से बेहतर जीवन देने का अथक प्रयास करते रहते हैं।हम सभी को माँ जी जन्म देकर अंदर की दुनिया एवं पिता जी बाहर की दुनिया से अवगत करवाए हैं।माँ जी इस दुनिया की एक छोटी सी हिस्सा है और पिता जी इस पूरी दुनिया की एक बड़ी हिस्सा हैं।इसलिए दांपत्य जीवन में बच्चों की उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए हमेशा माता जी एवं पिता जी का एकसाथ होना बहुत ही जरूरी है।दैनिक जीवन में माँ जी एवं पिता जी का स्वागत गुरु जी की तरह ही करें।चतुर्थ गुरु जी हमारे सभी शिक्षकगण जी हैं जिन्होंने बाल अवस्था से लेकर युवा अवस्था तक हमारे भविष्य को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।पाँचवें और अंतिम गुरु जी हमारे आध्यात्मिक सनातन गुरु जी हैं जिन्होंने हमारे जीवन में कई तरह के उपदेशों को देकर हमें धर्म एवं अध्यात्म से जोड़कर एक साथ रखते हैं और हमारे जीवन जीने की शैली को बहुत ही सरल बनाते हैं।घर में बड़े भैया जी एवं बड़ी भाभी जी का दर्जा पिता जी एवं मां जी के समान ही दिया जाना चाहिए क्योंकि इन दोनों की भी अपनी एक जिम्मेवारी होती हैं।हम सभी के माता जी एवं पिता जी भले ही पढ़े लिखे हो या न हों लेकिन अपने से बेहतर बच्चों को बनाने में अहम भूमिका निभाते रहते हैं।जितनी दिन दुनिया माता जी एवं पिता जी देखे हैं उनसे हम सभी बच्चें कँही कम ही देखे होंगे या हैं।माता जी एवं पिता जी के रहते हुए बच्चों को अभिभावक बनना कदापि उचित नहीं हैं और हर अच्छा बुरा का फैसला लेना यह भी घर के लिए दुर्भाग्यपूर्ण साबित हो सकता है।अपने जीवन में माता जी एवं पिता जी और सभी गुरुजनों को सर्वश्रेष्ठ का दर्जा दें।अपने जीवन में अनुशासन और शिष्टाचार को हमेशा बनाए हुए रखें।मैं आप सभी माता जी पिता जी और सभी शिक्षकगण जी एवं श्रेष्ठजनों को दिल से धन्यवाद देता हूँ कि जिन्होंने मुझे इस रंग बिरंगी दुनिया में जीवन जीने की शैली से लेकर स्वावलंबी होने तक अपना योगदान दिए हैं।पुनः मैं इस गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आप सभी गुरुजनों यानी गुरुदेवों को दिल से आभार व्यक्त करता हूँ कि आप सभी ने हमें अपने पैरों पर खड़ा करने में अहम भूमिका निभाए हैं।इस गुरु पूर्णिमा के पुनीत अवसर पर मैं अपने जीवन में हम से हुई किसी भी तरह की गलतियों को आप सभी माता जी पिता जी और सभी गुरुजन एवं श्रेष्ठजन क्षमा करने की कृपा करेंगे।इसके लिए मैं आप सभी का सदा आभारी बना रहूंगा।आप सभी माताओं पिताओं और गुरुजनों एवं श्रेष्ठजनों को इस गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आप सभी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने एवं गुरु जी की गरिमा को बनाए रखने और आत्म सम्मान प्राप्त करने के लिए ढेर सारी बधाई एवम् हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।आप सभी देवतुल्य गुरुदेवों और बड़ों एवं छोटों का दिन ईश्वर की असीम कृपा से शुभ एवम् मंगलमय हो।धन्यवाद✍️🕉🪔🌞🛕📚❤️🧁🎂⌚🇮🇳🌎👫💑🥰🏹🚂🚈👏🙏

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