06/06/2026
आदरणीय आपसभी व्यस्क लड़का लड़की पति यानी हस्बैंड पत्नी यानी वाइफ माता पिता और अभिभावकगण से अनुरोध है कि इस मोटीवेशनल स्टोरी को कृप्या ध्यान से पढ़ें और समझें यदि अच्छा लगे हों तो हमें आपसभी भाई या बेटा समझकर आशीर्वाद देंगे और किन्हीं को बुरा लगे हों तो हमें अपना साथी यानी मित्र समझकर माफ भी करेंगे।मैं आपसभी के बीच समाज और परिवार में आजकल विवाह यानी शादी से पहले और शादी के बाद का जीवन हमारे माता पिता और अभिभावकों के द्वारा दिए गए संस्कार और व्यवहार पर ही निर्भर करते हैं।शादी से पहले और शादी के बाद किसी अन्य विवाहित या अविवाहित से प्रेम करना यह हमारे समाज और परिवार को गलत दिशा की ओर बढ़ावा देकर एक खुशहाल परिवार को तोड़कर अपने जीवन को खुश करने की बजाय नर्क में धकेलने के बराबर होते हैं।जीवन में एक बात हमेशा याद रखें कि शादी एक पवित्र बंधन है और शुभ विवाह भी जीवन में एक ही बार होते हैं और इसके अलावा या बाद जितनी भी विवाह होती हैं वह अशुभ विवाह ही है।इसलिए शादी की परंपरा को हमसभी किसी भी तरह से कलंकित नहीं होने दें और इसे हर हाल में पवित्र रखने का प्रयास करें।यदि हम खुद अभिभावक होकर भ्रस्ट और अपवित्र हो जाएं तो हमारा बच्चा भी अपने जीवन की दैनिक जीवन में वह भी मर्यादा को खो देंगे और अनुशासन की जगह अनुशासनहीनता ही केवल उनमें दिखाई देंगे।कोई भी पति पत्नी खुशहाल दांपत्य जीवन में ही केवल बच्चों को जन्म दें अन्यथा कभी नहीं जन्म दें क्योंकि आप दोनों की जिंदगी यदि स्वर्ग हुई तो बहुत ही अच्छा है या नर्क हो गई तो बच्चों को भी आप से ज्यादा नर्क देखने को मिलेंगे।शादी जब भी करें तो माता पिता और अभिभावकों के द्वारा तय किए गए रिश्तों को ही खुशीपुर्वक स्वीकार कर उन्हें दिल से धन्यवाद प्रकट करें।मैं आपसभी अभिभावकों से विनम्र विनती करूँगा कि अपने बच्चों को होने वाले वर या वधु के बारे में पूरी तरह से जानकारी जैसे उच्च शिक्षा उम्र व्यवसाय यानी पेशा सरकारी या प्राइवेट नौकरी एकल या संयुक्त परिवार ग्रामीण या शहरी परिवेश रहन सहन आदि अवश्य दें ताकि शादी के बाद दांपत्य जीवन में किसी भी तरह की समस्या जल्दी में नहीं आ पाए और यदि आए तो रिश्ता को तोड़ने की बजाय जोड़ने का भरसक प्रयास करें।प्रेम विवाह हमारे समझ से कदापि नहीं करें क्योंकि माता पिता अभिभावक के भी अपने सपने होते हैं।यदि प्रेम विवाह ही करना है तो अपने ही धर्म और जाती में माता पिता अभिभावक की सहमति से करें अन्यथा कदापि नहीं करें।पति पत्नी का प्यार भरा पवित्र रिश्ता सात जन्मों तक के लिए होता है।हमारे देश की संवैधानिक कानून से माता पिता अभिभावक पति या पत्नी के साथ रहने का अधिकार मिलेगा लेकिन दिल में जगह नहीं बन पाएगा।इसलिए शादी के बाद न्याय के लिए कोर्ट यानी न्यायालय जाने से हमेशा बचें और अपनी बुद्धि विवेक से परिवार को बिखड़ने से बचाने का भरसक प्रयास करें।एक परिवार को टूटने से बचाने में दोनों ही पक्षों के माता पिता अभिभावक रिश्तेदार और समाज की काफी अहम भूमिका होती हैं।धर्म भी कहता है कि किसी की घर परिवार बस जाए मगर कभी उजड़े नहीं जो कि बहुत ही अच्छा पुण्य का काम भी है।न्यायालय तभी जाए जब आपकी समस्या का हल न हो लेकिन यदि केवल किसी के घर को बर्बाद करने की कसम खाकर जाएंगे तो घर बर्बाद होगा ही और इसके साथ साथ आपका भी घर परिवार किसी न किसी रूप में सर्वनाश हो जाएंगे।इसलिए शादी के बाद पति और पत्नी का मैटर जिस दिन न्यायालय में पहुंच गया उस दिन पति हो या पत्नी उन्हें उनका अधिकार तो मिल सकता है लेकिन इज्जत नहीं वापस मिल पाएगा।इसलिए घर के मैटर को घर में ही खत्म करें वरना कोर्ट हो या थाना या संविधान आपको अपना अधिकार तो दिला सकता है परंतु जबरदस्ती किसी के दिल में जगह नहीं दिला पाएगा।पर्सनल रिश्तों में आप जितना झुकेंगे आपकी इज्जत मान सम्मान उतनी ही बढ़ जाएगी।आपसभी पति पत्नी की दांपत्य जीवन ईश्वर की अशीम कृपा से बच्चों को उज्वल भविष्य देने के साथ ही खुशहाल व्यतीत हों।धन्यवाद✍️🕉🪔🛕🚩🍼🧁🤝⚖️⌚💰👫❤💔😥😭🪞📚🇮🇳🏠🌏🙏