20/02/2015
फिर खिल उठा है दिल हमारा,
गुजरी यादों को याद करके
वो रंगीन पहली नज़र,
ले आती है दामन में खुशियाँ भरके
शीतल जल की नम्र फुवांरो से,
खिल उठी है कलियाँ दिल की
तन्हाई के अब इस सफ़र में
जरुरत नहीं किसी महफ़िल की
सहमी-सहमी सी लगती थी,
धीरे-धीरे यों बढ़ती थी
खिले चेहरे पे नम्र मुस्कान उसकी
छूके हवा भी बनी खुशबू थी उससे
ना मालूम था मुझे भी,
देखा ,सुना जिसे किताबों में था
अहसास जगा था ना, मुझे पहले कभी
याद आती है स्कूल की वो रंगीन यादें
जिसके सहारे कटा था वक़्त हमारा
वो आती थी ईद के चाँद की तरह
एक दिन जब पूछा उसने की,
खोये रहते है हम ख्यालों में किसके
देखकर उसको डुब गया मैं,
पलकों के सागर में उसके
नज़रे फिर यूँ मिली हमारी
कभी मिटी तो कभी बनी तक़दीर हमारी
कुछ खोया मैं भी, तो
कुछ चुप-चुप सी थी वो भी
ना इकरार वो कर सकी थी
ना इजहार वो कर सकी थी
बंधन बंधा सा लगा यों हमको
ना दूर वो जा सकी ,ना मैं जा सका
बिन मेघों बरसात हुई यों
चाहत की बूंदों ने भीगो दिया
नम जुल्फे,होंटो से झरता जल
अमिट मुस्कान की और,खिचता चला गया मैं उस पल
प्यार नहीं, इकरार-ए-इजहार नहीं
यों अगले पल का हमको,इतना था इंतजार नहीं
आँखों से झलकता चाहत का पानी,
बता रहा था,प्यार होने की निशानी
कुछ बढ़ा ,मैं ओर उनके
कुछ दूरियों की उसने भी की हानि
मिली नज़रो से ज्ञात नहीं था,के
आ चुके थे हम बहुत करीब
यह दुनीया तो क्या सारा जहाँ
चाहे बन बैठे रब भी रकीब
पर ना जाने बिजली कड़की,या घना अंधकार छाया
रह ना सका था , इक-दूसरे का पास में साया
पता नहीं क्या हुआ उस पल था
ना खबर उसी थी,ना पता मुझे था
आ सका ना वो पल वापस “मनु”
वो सागर तो रेत ने ढक लिया
और उस नज़र के नज़राने का किस्सा
अब इन कोरे पन्नों ने ले लिया....!!!