IsHq Da RoG LaGa

IsHq Da RoG LaGa ““ बात ”” उन्ही की होती है , जिनमें कोई बात होती हैं

तुम्हारा लौट आना दिल अब भी चाहता हैतेरी आंखों के बादल तलेतन रूह  भिगोना चाहता हैदिल आज भी चाहतातुझसे ,इकरार-ए-इश्क करेजव...
13/02/2023

तुम्हारा लौट आना
दिल अब भी चाहता है
तेरी आंखों के बादल तले
तन रूह भिगोना चाहता है

दिल आज भी चाहता
तुझसे ,इकरार-ए-इश्क करे
जवां मन जज़्बात लेकर
फिर,सांसों से सांसे कश करे
मदहोशी भी होश गवां दे
बेसुध कांधे पर सिरहाना चाहता है
तेरी आंखों के बादल तले
तन रूह ..........…............!

सब लिखना पढ़ना है तुझसे
ये शायरी बस जज्बात है
मैं सुबह उठा तो तुझे निहारा
जो रात ढली तू मेरे साथ है
है कमबख्त ,तेरी यादों का दफ्तर
बस रुजगार ही दिलाना चाहता है
तेरी आंखों के बादल तले
तन रूह ..........…............!

10/03/2022

इश्क़ में तेरे अब
मैं एक किताब लिखूंगा
चांद कम जवां है
चेहरा तेरा अब आफ़ताब लिखूंगा

हवा में महकी जो
खुशबू तेरी गुलाब लिखूंगा
छूने से हलचल है जो
गिर गया गर तो,शराब लिखूंगा

दिनभर आंखों में तुम हो
रातों का भी तुमको ख़्वाब लिखूंगा
कर गया बेखबर मुझको जो
हुस्न तेरा वो लाजवाब लिखूंगा

रूठी हो या गुस्सा हो
अदा तेरे मैं रूआब लिखूंगा
लबों पे चढ़के तेरे मैं
आया आग़ोश तो,कामयाब लिखूंगा ।

03/03/2022

मानता रहा जिसे गुरुर
वो नज़रो तक से गिर गया
मेरा खुदा मुझसे खफा नही
मैं बस बेपरवाही से मर गया

दुःख में साथ का वादा किया
वो दर्द सुनने से डर गया
तोहमतें बेफिक्री लगा के मुझपे
शायद,नज़रो में अपनी निखर गया

इश्क़ का मंजर बयां था मुझको
पाके पनाह मैं उसकी बिखर गया
संभलना जरा अब मुश्किल है
लगता है जैसे लहू में उतर गया

11/11/2015
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों……ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही
13/06/2015

पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों……
ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही

कोई शहर में उलझा ,कोई कहर में उलझासमझने वाला ही यहाँ ,अपनी खबर में उलझातारीफ का मौका ढुंढता रहा जो ताउम्र अपनीवक़्त की दह...
23/02/2015

कोई शहर में उलझा ,कोई कहर में उलझा
समझने वाला ही यहाँ ,अपनी खबर में उलझा

तारीफ का मौका ढुंढता रहा जो ताउम्र अपनी
वक़्त की दहलीज़ चढा के ,जा कब्र में उलझा

ये तो कोई फ़रिश्ता था जो उस को लाँघ दिया
वरना दो कदम चला नहीं धीवर,के भँवर में उलझा

कोई क्यों पूछ बैठता ,आखिर मुझसे मेरा पता
वो जान गया था ये पथिक, आ इस सफ़र में उलझा

वो नटखट भला कैसे , लहू में उतरता मीरा के
था राणा ,बदौलत जिसके कृष्ण जा जहर में उलझा

ये दुनीया उसे ही स्वार्थी कहती है अपने स्वार्थवश
भूलकर निज को , जो सब की कदर में उलझा

वो बदकिस्मती खुद का अस्तित्व रखती आखिर कैसे
ये तो था “ मनु ” जो जा उसकी नज़र में उलझा !

फिर खिल उठा है दिल हमारा,गुजरी यादों को याद करकेवो रंगीन पहली नज़र,ले आती है दामन में खुशियाँ भरके    शीतल जल की नम्र फुव...
20/02/2015

फिर खिल उठा है दिल हमारा,
गुजरी यादों को याद करके
वो रंगीन पहली नज़र,
ले आती है दामन में खुशियाँ भरके

शीतल जल की नम्र फुवांरो से,
खिल उठी है कलियाँ दिल की
तन्हाई के अब इस सफ़र में
जरुरत नहीं किसी महफ़िल की

सहमी-सहमी सी लगती थी,
धीरे-धीरे यों बढ़ती थी
खिले चेहरे पे नम्र मुस्कान उसकी
छूके हवा भी बनी खुशबू थी उससे

ना मालूम था मुझे भी,
देखा ,सुना जिसे किताबों में था
अहसास जगा था ना, मुझे पहले कभी

याद आती है स्कूल की वो रंगीन यादें
जिसके सहारे कटा था वक़्त हमारा
वो आती थी ईद के चाँद की तरह

एक दिन जब पूछा उसने की,
खोये रहते है हम ख्यालों में किसके
देखकर उसको डुब गया मैं,
पलकों के सागर में उसके

नज़रे फिर यूँ मिली हमारी
कभी मिटी तो कभी बनी तक़दीर हमारी
कुछ खोया मैं भी, तो
कुछ चुप-चुप सी थी वो भी

ना इकरार वो कर सकी थी
ना इजहार वो कर सकी थी
बंधन बंधा सा लगा यों हमको
ना दूर वो जा सकी ,ना मैं जा सका

बिन मेघों बरसात हुई यों
चाहत की बूंदों ने भीगो दिया
नम जुल्फे,होंटो से झरता जल
अमिट मुस्कान की और,खिचता चला गया मैं उस पल

प्यार नहीं, इकरार-ए-इजहार नहीं
यों अगले पल का हमको,इतना था इंतजार नहीं
आँखों से झलकता चाहत का पानी,
बता रहा था,प्यार होने की निशानी
कुछ बढ़ा ,मैं ओर उनके
कुछ दूरियों की उसने भी की हानि
मिली नज़रो से ज्ञात नहीं था,के
आ चुके थे हम बहुत करीब
यह दुनीया तो क्या सारा जहाँ
चाहे बन बैठे रब भी रकीब
पर ना जाने बिजली कड़की,या घना अंधकार छाया
रह ना सका था , इक-दूसरे का पास में साया
पता नहीं क्या हुआ उस पल था
ना खबर उसी थी,ना पता मुझे था
आ सका ना वो पल वापस “मनु”
वो सागर तो रेत ने ढक लिया
और उस नज़र के नज़राने का किस्सा
अब इन कोरे पन्नों ने ले लिया....!!!

Koi fir baat wafa ki karta haiKoi pal pal mujhpar marta haiKahu ki kaise mujhe ishq nahi hai...Kahu ki kaise mujhse aitb...
13/02/2015

Koi fir baat wafa ki karta hai
Koi pal pal mujhpar marta hai
Kahu ki kaise mujhe ishq nahi hai...
Kahu ki kaise mujhse aitbar nahi hai...
Ye dil nadaan yuhi thoda hi sahi
Par uski aarju karta hai !

Koi kyu dil de baitha hai mujhko
Mere saye me to koi or hi basta hai
Beshq usne mujhe tod diya ho...
Mujhe b**h raah me chhod diya ho...
Par mere lahu me wo hi utrta hai..!!

Sach kahu to tu us sa nahi hai
Jo mujhse aankh micholi karta hai
Beshq tu kahi roshan ho usse...
Chahe kahi manbhawan ho usse...
Par wo koi or hi hai jo mujhsa dikhta hai !!!

Tu kah de bhale aaj mujhse pyar hai tujhko
Par dil kal tere chhod jane darta hai
Likh le kismat me tanhai ya bana le kisi diwane ko.....
Mujh me ab or himmat nahi bachi ek or shaqs aajmane ko....
Ho na payegi kabhi wo puri “mnu”
Jo tu aasha krta hai !!!!

याद रखना ,तुझे जब याद मेरी आएगी......तू रो-रो कर बदहाल सी हो जाएगी ।सहारा ढूंढना उस वक़्त तुझे मुश्किल सा पड़ जायेगाखूब दु...
06/02/2015

याद रखना ,तुझे जब याद मेरी आएगी......
तू रो-रो कर बदहाल सी हो जाएगी ।

सहारा ढूंढना उस वक़्त तुझे मुश्किल सा पड़ जायेगा
खूब दुआ मांगेगी तू,फिर भी मुझसा ना कोई मिल पायेगा
तू आज भले से कह दे, अपने रूप गर्व में आकर के
तोड़ दे हर रिश्ता बेशक, मेरी ज़िन्दगी से जाकर के
पर इतना भी तू याद रखना,
तू मुझ बिन कभी न जी पायेगी...
तुझे जब याद मेरी आएगी ।।

दफना दिए हो तूने बेशक , अपनी कसमें अपने वादों को
तोड़ के दिल तू मेरा बेशक , पूरी करले अपनी मुरादो को
पर जीने को नहीं काफी ,शोहरत और झूठी चमक यारा
इनके भी खत्म होने की कभी , होती नहीं भनक यारा
तू रुसवा कर के मुझको ,
आखिर कब तक ख़ुशी मनाएगी...
तुझे जब याद मेरी आएगी......
तू रो-रो कर बदहाल सी हो जाएगी ।।

कभी तलाशना खुद यारा ,अपने दिल के उस आईने में
कितनी खुदगर्ज हो बैठी है , तू अपने ही मायिने में
हो अगर तुझे पछतावा तो , रोकर मुझे भुला देना
मैं ना कभी फिर आ पाउँगा, कैसे भी खुद को मना लेना
तब तक तो तू मुझे,
अपने किस्मत में भी नहीं लिख पायेगी ....
तुझे जब याद मेरी आएगी......
तू रो-रो कर बदहाल सी हो जाएगी ।

नेकी की राह पर एक बार,खुद चलकर तो देखदर्द भी मुस्कराएगा, एक बार बढकर तो देखदेख आजमाके तू अपने को नि:शब्द करके तो देखपथ क...
13/01/2015

नेकी की राह पर एक बार,खुद चलकर तो देख
दर्द भी मुस्कराएगा, एक बार बढकर तो देख

देख आजमाके तू अपने को नि:शब्द करके तो देख
पथ की ठोकरों से एक बार संभलकर कर तो देख

देख मुनासिब है जो तेरे सपनों में छुपा बैठा है,वो
हकीकत होगा जरुर ,एक बार डगर कर तो देख

बस कोई नहीं तुझसा जो इस डगर पर चला होगा
लगा होशलों के पर , एक बार जमीं चलकर तो देख

है तुझमे भी वो चोर , जो तुझे कमजोर किये बैठा है
संकल्प कर मन में, और खुद को बदलकर तो देख

है पता, अगर तुझे की राह दुष्कर है तेरी मंजिलो की
पर आसान भी है, एक बार ऐसा समझकर तो देख

वो कोई नहीं तेरा, जिसकी तू उम्मीद लगाये बैठा है
इन छोटी-छोटी बाधाओं से,अब निकलकर तो देख

तेरे सपने तो कुछ और थे , जो तूने बचपन से बुने थे
आज तू खोया है कहाँ, खुद को पहले पाकर तो देख

तेरा टूटा ही कब था सपना, जो तू ख़ामोश हो गया
अपने जमीर को पूर्णता से, एक दफा पढकर तो देख

ये जो तेरा दुःख है ,वैसा तो यहाँ हर कोई लिए बैठा है
संभल ऐ मुसाफ़िर ! एक दफ़ा इनसे संभलकर तो देख

त्याग दे उस स्मृति को “मनु" जो मोह चंचलता से संलग्न है
कर परमात्मा का स्मरण, और आत्म में उतरकर तो देख

है बस में तेरे तो भुला दे मुझकोपर बेवफाई की वजह बता दे मुझकोयूँ ना छोड़ मुझे अजनबी बनाकरहुआ हैं गुनाह तो सजा दे मुझकोकल त...
09/01/2015

है बस में तेरे तो भुला दे मुझको
पर बेवफाई की वजह बता दे मुझको

यूँ ना छोड़ मुझे अजनबी बनाकर
हुआ हैं गुनाह तो सजा दे मुझको

कल तक मेरा नाम तेरी जुबा पर था
आज भी होटों से बहा दे मुझको

तेरे रूठने से दिल में मायूसी सी है
लौटकर खुद से मिला दे मुझको

रिश्तों के गाँठे,यूँ ही नहीं टुटा करती
बांधकर अपने से कैदी बना दे मुझको

है बस में तेरे तो भुला दे मुझको
पर बेवफाई की वजह बता दे मुझको

मेरी पहचान बनके उभरी है तू
आज भी मेरा तू ,पता दे मुझको

किये है बहुत से वादें जो एक-दूजे से
फूलों के तरह उनपर सजा दे मुझको

ये गलियाँ, ये चौबारे तलाशेंगे तुझको
करके भरोसा अब, वफ़ा दे मुझको

तुझे लगता है के,मोहब्बत नहीं है मुझको
तो अहसान कर अपना सा बना दे मुझको

खाई थी जो कसमें, अपना बनाके तूने
करदे वो पूरी , यूँ ना दगा दे मुझको

है बस में तेरे तो भुला दे मुझको
पर बेवफाई की वजह दे मुझको

तुझे लगता है के,तू जी पायेगी मेरे बिन
तो आज तुझसा जीना सिखा दे मुझको

या फिर कर एक और अहसान मुझपर
डाल के सीने में खंज़र, दफ़ना दे मुझको

ये "मनु" ना मरेगा , मर कर भी तुझसे
मेरी जान तू अपना बना दे मुझको ।।

क्यों कहते हो, हालातों के आगे तुम मजबूर हो गएये हमारी थी चाहत, जिसके दरमियाँ तुम मशहूर हो गएछोड़ दो ये बाते,ये फ़ितरत , अब...
08/01/2015

क्यों कहते हो, हालातों के आगे तुम मजबूर हो गए
ये हमारी थी चाहत, जिसके दरमियाँ तुम मशहूर हो गए

छोड़ दो ये बाते,ये फ़ितरत , अब ये मासूम अदाएँ
तुम वो हो ही नहीं , जो कभी हमारे दिल के हुजूर हो गए

ये केशुओं के लटाए , ये अंखियों के बरसातें, पर ऐतबार....
नहीं है मुझको, जिनकी छाँव में सपने मेरे चकनाचूर हो गए

है चाहत भी, है मोहब्बत भी , है रंगते ,है वो जिद भी,
पर है सब पर हक़ मेरा , तुम इनसे कबके दूर हो गए

तुझे लगता है की, तुझे अब भी पाना हसरत है मेरी.. तो भूलो...
इस राह पर कितने है गुजरे, जिनको तेरी तरह गुरुर हो गए

हाँ इक तअल्लुक जरुर है , जो तेरी यादें बसती है रूह में
पर अब ढूंड़ो कोई और मंजिल,“मनु" के दरवाजे तेरी पहुँच से दूर हो गए ।।

Address

Dausa

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when IsHq Da RoG LaGa posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category