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28/05/2026

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे राजधानी देहरादून

28/05/2026

सिर्फ ईद पर ही क्यों जागते हैं पशु प्रेमी?

27/05/2026

जमीन तो पीड़ित परिवार की राजस्व अधिकारी भी बता रहे कि आपकी ही है। पर पीड़ित परिवार भूमि पर जा नहीं सकता।

“देश बचाने निकले लोग… शायद देश को ही बाँट रहे !”यह किस दिशा में चल पड़े हैं हम सब? कौन-सी मंज़िल है हमारी और जाना आखिर क...
26/05/2026

“देश बचाने निकले लोग… शायद देश को ही बाँट रहे !”
यह किस दिशा में चल पड़े हैं हम सब? कौन-सी मंज़िल है हमारी और जाना आखिर कहाँ है? समझ में अब कुछ आता नहीं। कभी लगता है हम देश को विकसित कर रहे हैं, फिर सोशल मीडिया खोलते ही एहसास हो जाता है कि नहीं… हम तो बस नए-नए तरीकों से एक-दूसरे से नफरत करना सीख रहे हैं।
अब हाल यह है कि आदमी सुबह उठते ही सबसे पहले यह तय करता है कि आज किससे नफरत करनी है — धर्म से, जाति से, प्रदेश से या भाषा से। देश बाद में याद आता है, दुश्मन पहले खोज लिया जाता है।
जब मेरा जन्म हुआ तब देश को आज़ाद हुए 24 साल हो चुके थे। भारत अपनी सिल्वर जुबली की तैयारी कर रहा था। जब समझ आने लगी तब देश स्वर्ण जयंती मना रहा था। उस दौर में लोगों को यह नहीं सिखाया जाता था कि सामने वाला हिंदू है या मुसलमान, ऊँची जाति का है या नीची जाति का, उत्तर का है या दक्षिण का। तब नेताओं के भाषणों में “एकता” और अखंडता की बात होती थी। नफरती “एजेंडा” नहीं होता था ।
फिर हमने वह समय भी देखा जब देश की प्रधानमंत्री Indira Gandhi की हत्या हुई। देश रो रहा था। लोग सड़कों पर थे। नारे लग रहे थे — “जब तक सूरज चाँद रहेगा…”। लेकिन मज़े की बात देखिए, जहां भीड़ को सिख धर्म के प्रति उत्साया जा रहा था तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सिख समाज की रक्षा के लिए खड़े थे। उस भीड़ में किसी ने किसी से यह नहीं पूछा कि “पहले अपना धर्म बताओ, फिर श्रद्धांजलि देना।”
आज तो श्रद्धांजलि भी विचारधारा देखकर दी जाती है।
अब देशभक्ति का नया संस्करण आ चुका है। पहले लोग देश के लिए लड़ते थे, अब देश के अंदर धर्म के लिए लड़ रहे हैं। कोई धर्म के नाम पर सेना बना रहा है, कोई जाति के नाम पर क्रांति कर रहा है, कोई प्रदेश के नाम पर नफरत बेच रहा है। और सबसे मजेदार बात — हर कोई खुद को “राष्ट्रवादी” भी घोषित किए बैठा है।
कभी हिंदू-मुसलमान, फिर जाति, अब क्षेत्रवाद। उत्तर भारतीय बनाम दक्षिण भारतीय, पहाड़ी बनाम मैदानी, पूर्वोत्तर बनाम बाकी भारत। अभी हाल में सोशल मीडिया पर एक महान ज्ञानी बता रहा था कि “उत्तराखंड को हरियाणा पाल रहा है।” उधर जवाब में दूसरे महापुरुष पूरे हरियाणा को गालियाँ देने लगे।
वाह! एक आदमी बेवकूफ निकला, तो बदले में करोड़ों लोगों को बेवकूफ घोषित कर दो। यही है नया डिजिटल राष्ट्रवाद।
अब स्थिति यह है कि किसी प्रदेश का एक आदमी गलत क्या बोल दे, लोग पूरे प्रदेश को दुश्मन मान लेते हैं। जैसे राज्यों में इंसान नहीं, एक ही साँचे में ढले रोबोट रहते हों।
राजनीति भी क्या कमाल का खेल खेल रही है। वोट चाहिए तो जनता को बाँटो। धर्म में बाँटो, जाति में बाँटो, भाषा में बाँटो, क्षेत्र में बाँटो। और अगर कुछ न मिले तो सोशल मीडिया पर दो फर्जी वीडियो डाल दो — जनता खुद एक-दूसरे का गला पकड़ लेगी।
देश बचाने का शोर इतना ज़्यादा है कि अब सच में डर लगने लगा है। क्योंकि इतिहास गवाह है — जिन देशों में सबसे ज्यादा “धर्म बचाओ” के नारे लगे, अक्सर वहीं सबसे पहले समाज टूटा।
सबको धर्म बचाना है, बस कोई इंसान बचाना नहीं चाहता।
सच कहूँ तो डर अपनी जान का नहीं है। डर इस बात का है कि जिन लोगों ने कुर्बानियाँ देकर यह देश बनाया, कहीं हम उनकी मेहनत को ट्रोल, नफरत और राजनीतिक दुकानों में बेच तो नहीं रहे?
हम आज़ादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे, क्योंकि हमारा जन्म बाद में हुआ। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि देश तोड़ने का लाइसेंस मिल गया?
भारत सिर्फ नक्शे पर बना एक भूभाग नहीं है। यह अलग-अलग भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और प्रदेशों से मिलकर बनी हुई साझी आत्मा है। अगर हर कोई अपने-अपने हिस्से का भारत लेकर बैठ जाएगा, तो अंत में बचेगा क्या?
और फिर शायद आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी —
“देश को सबसे ज्यादा नुकसान किसने पहुँचाया?”
तो जवाब होगा —
“उन लोगों ने, जो हर समय धर्म बचाने का दावा कर रहे थे।”

देहरादून में नई प्रशासनिक पारी शुरू, डीएम डॉ. आशीष चौहान से मिले कप्तान प्रमेन्द्र डोभाल जनसेवा, कानून व्यवस्था और बेहतर...
25/05/2026

देहरादून में नई प्रशासनिक पारी शुरू, डीएम डॉ. आशीष चौहान से मिले कप्तान प्रमेन्द्र डोभाल जनसेवा, कानून व्यवस्था और बेहतर समन्वय के साथ काम करने का संदेश
देहरादून में प्रशासनिक नेतृत्व परिवर्तन के बाद सोमवार को जिले में नई कार्यशैली और बेहतर समन्वय की झलक देखने को मिली। नव नियुक्त जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान से देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमिंदर डोभाल ने शिष्टाचार भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान कानून व्यवस्था, चारधाम यात्रा, आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
आईएएस डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को विधिवत रूप से देहरादून के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कोषागार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को पारदर्शी एवं समयबद्ध कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।
नवागत जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ आमजन तक सरल और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही चारधाम यात्रा प्रबंधन को मजबूत करना, आपदा प्रबंधन कार्यों को समय पर पूरा करना और विकास योजनाओं में तेजी लाना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
डॉ. चौहान इससे पहले पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे संवेदनशील जनपदों में जिलाधिकारी रह चुके हैं। तकनीक आधारित जनहितकारी पहल, स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और सड़क सुरक्षा को लेकर उनके कार्यों को प्रदेशभर में सराहा गया है।
वहीं पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल के कार्यकाल को भी जनसरोकारों से जुड़ा और संवेदनशील प्रशासनिक दौर माना गया। अब देहरादून में डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में प्रशासन से नई उम्मीदें जुड़ गई हैं।

25/05/2026

मोहम्मद दीपक से एक मुलाकात इंसानियत मंच के कार्यक्रम पर

24/05/2026

गिरफ्तारी के बाद पत्रकार हेम भट्ट का वीडियो आया सामने

24/05/2026

राजपुर थाना अंतर्गत हुई हत्या के आरोप मे प्रेमी महिला आई पुलिस की गिरफ्त में

“नफरत का ज़हर: पढ़े लिखे समझदार या पढ़े लिखे अनपढ़?”आज समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है, जहां नफरत धीरे-धीरे हमारे...
24/05/2026

“नफरत का ज़हर: पढ़े लिखे समझदार या पढ़े लिखे अनपढ़?”
आज समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है, जहां नफरत धीरे-धीरे हमारे दिल और दिमाग में घर करती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब नफरत के लिए कारण नहीं, बल्कि बहाने खोजे जा रहे हैं। धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा, रंग और प्रदेश — हर पहचान अब लोगों को बांटने का माध्यम बनती जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शायद हमें खुद भी एहसास नहीं हुआ कि हमने कब इन विभाजनों को अपनी सोच का हिस्सा बना लिया। आज लोग किसी व्यक्ति को उसके कर्मों से नहीं, बल्कि उसकी जाति, धर्म या प्रदेश से पहचानने लगे हैं। यही मानसिकता समाज को भीतर से कमजोर कर रही है।
सवाल यह भी है कि आखिर इस नफरत से लाभ किसका हो रहा है? जो लोग समाज को बांटने वाली बातें करते हैं, उनके भाषणों और व्यवहार में यह स्पष्ट दिखाई देता है। संभव है कि बंद कमरों में वही लोग समाज की इस टूटन पर मुस्कुराते भी हों।
चिंता केवल आम समाज तक सीमित नहीं है। अगर यही सोच उन संस्थाओं तक पहुंच रही है, जिन पर देश सबसे अधिक भरोसा करता है — जैसे सुरक्षा बल और न्याय व्यवस्था — तो यह और भी गंभीर स्थिति है। सेना और पुलिस में कार्यरत लोग भी इसी समाज का हिस्सा हैं; वे भी किसी धर्म, जाति और क्षेत्र से आते हैं। यदि उनके भीतर भी भेदभाव की भावना जन्म लेने लगे, तो निष्पक्षता और न्याय की उम्मीद कैसे की जाएगी?
इसी प्रकार न्यायपालिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जब फैसलों में संविधान से अधिक आस्था और पहचान की चर्चा दिखाई देने लगे, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती महसूस होती है।
हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां भीड़ ने किसी आरोपी को केवल इसलिए पीटा क्योंकि वह किसी दूसरे धर्म, जाति या प्रदेश से था। हाल ही में ऋषिकेश में मां-बेटी के साथ हुई घटना भी इसी मानसिकता की ओर इशारा करती है, जहां विवाद के बाद भीड़ ने कथित तौर पर उन्हें “दूसरे प्रदेश” का होने के कारण निशाना बनाया।
किसी भी अपराध की सजा अपराध के आधार पर होनी चाहिए, न कि आरोपी की पहचान के आधार पर। किसी व्यक्ति को उसके धर्म, जाति या प्रदेश के कारण दोषी मान लेना सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती।
एक मजबूत देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता होती है। लेकिन यदि समाज लगातार पहचान के आधार पर बंटता गया, तो “एकता” और “अखंडता” जैसे शब्द केवल भाषणों तक सीमित होकर रह जाएंगे।
आज सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या हम सच में पढ़-लिखकर समझदार बन रहे हैं, या फिर शिक्षित होकर भी संवेदनहीन और विभाजित समाज की ओर बढ़ रहे हैं?

23/05/2026

विकासनगर में करोड़ों की स्टांप चोरी और प्रतिबंधित भूमि घोटाले का आरोप, सब रजिस्ट्रार और लेखपालों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र में चाय बागान सीलिंग की प्रतिबंधित भूमि और स्टांप शुल्क चोरी से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के भूमि सौदों में नियमों को ताक पर रखकर रजिस्ट्रियां की गईं और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि ग्राम छरबा में दिनांक 17 अगस्त 2023 को विक्रय विलेख संख्या 8916 के तहत एक भूमि की रजिस्ट्री उप निबंधक प्रथम विकासनगर कार्यालय में की गई, जिसमें भूमि का मूल्य जानबूझकर कम दर्शाया गया। आरोप के अनुसार भूमि का वास्तविक सर्किल रेट 4 करोड़ 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर होना चाहिए था, जबकि रजिस्ट्री मात्र 1 करोड़ 99 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कर दी गई। इससे सरकार को लगभग 5 लाख 63 हजार 350 रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान पहुंचा। शिकायत के बाद स्वयं सब रजिस्ट्रार कार्यालय ने शुल्क की कमी स्वीकार करते हुए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को वसूली हेतु रिपोर्ट भेजी।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि चाय बागान सीलिंग की प्रतिबंधित भूमि पर रोक होने के बावजूद विकासनगर के दोनों सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां की गईं। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सब रजिस्ट्रार प्रथम विकासनगर कार्यालय से वर्ष 2023 से 2025 तक कुल 62 रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं, जबकि सब रजिस्ट्रार द्वितीय विकासनगर कार्यालय से इसी अवधि में 226 रजिस्ट्रियां की गईं। इस प्रकार कुल 288 रजिस्ट्रियां प्रतिबंधित भूमि पर दर्ज होने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा तहसील स्तर पर भी फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम रसूलपुर, बाबूगढ़ और अम्बाड़ी में कुल 23 दाखिल-खारिज मामलों को तहसीलदार विकासनगर द्वारा निरस्त किया जा चुका है। आरोप है कि इन मामलों में लेखपालों द्वारा फर्जी और कूटरचित हस्तांतरण आख्या लगाई गई थी। निरस्त मामलों में लेखपाल नरेंद्र सिंह पर 8, डिम्पल यादव पर 7, आनंद तोमर पर 7 और किरन पर 1 फर्जी आख्या लगाने का आरोप लगाया गया है।
प्रेस वार्ता में कुछ रजिस्ट्रेशन क्लर्क और अधिकारियों के नाम भी सामने आए। आरोप है कि रसूलपुर और बाबूगढ़ क्षेत्र में निरस्त हुई रजिस्ट्रियों में रजिस्ट्रेशन क्लर्क सुनील कुमार द्वारा 2, भावना भट्ट द्वारा 2 और सब रजिस्ट्रार अपूर्वा सिंह द्वारा 1 रजिस्ट्री दर्ज की गई थी।
मामले को लेकर मांग उठाई गई है कि विकासनगर के तीन सब रजिस्ट्रार कार्यालय कर्मियों और चार लेखपालों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कराई जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि एक माह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को उच्च न्यायालय नैनीताल तक ले जाया जाएगा।

23/05/2026

क्या एक बार फिर दिखेगा अन्ना आंदोलन का जलवा रामलीला मैदान में

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