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फौजी की गाढ़ी कमाई हड़पी, परवल निवासी नौशाद एवं आशीष ने जमीन के नाम पर 6.80 लाख की धोखाधड़ीदेहरादून के ईस्ट होप टाउन में...
12/06/2026

फौजी की गाढ़ी कमाई हड़पी, परवल निवासी नौशाद एवं आशीष ने जमीन के नाम पर 6.80 लाख की धोखाधड़ी

देहरादून के ईस्ट होप टाउन में दिखाई फर्जी जमीन, 5 साल से जांच में उलझा मामला, मुकदमा दर्ज

देहरादून। देश की सरहदों की रक्षा में तैनात एक फौजी की जमा-पूंजी पर भूमाफियाओं ने डाका डाल दिया। प्रेमनगर के ईस्ट होप टाउन में सेना के जवान और उनकी पत्नी को झांसा देकर जालसाजों ने एक ऐसी जमीन का बैनामा कर दिया, जिसका मालिकाना हक उनके पास था ही नहीं। दाखिल-खारिज न होने पर जब पीड़ित परिवार ने पड़ताल की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पिछले पांच साल से पुलिस महकमे के चक्कर काट रही पीड़ित महिला ने अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। मूल रूप से खालीसँण (गैरसैंण, चमोली) की रहने वाली श्रीमती कमला देवी पत्नी चंद्र सिंह ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके पति चंद्र सिंह भारतीय सेना में कार्यरत हैं और वर्तमान में भटिंडा में तैनात हैं। वर्ष 2015 में देहरादून के अम्बीवाला (प्रेमनगर) निवासी आशीष रावत पुत्र मदन सिंह रावत ने उन्हें मौजा ईस्ट होप टाउन में 3 बिस्वा का एक भूखंड दिखाया था। आशीष ने दावा किया था कि यह जमीन परवल निवासी नौशाद खान पुत्र सुलेमान के नाम पर है।

टालमटोल करते रहे आरोपी, बाद में नंबर किया ब्लॉक पीड़िता का आरोप है कि बैनामे के बाद जब उन्होंने दाखिल-खारिज के लिए कहा, तो आरोपी दो-दो महीने का समय मांगकर टालमटोल करने लगे। शक होने पर जब फौजी ने अपने वकील से खतौनी और सरकारी दस्तावेजों की जांच कराई, तो पता चला कि बैनामे में दर्ज खाता और खसरा नंबर पर नौशाद खान के नाम कोई भूमि है ही नहीं। ठगी का अहसास होने पर जब फौजी ने नौशाद को फोन किया, तो उसने पल्ला झाड़ते हुए आशीष से बात करने को कहा और फौजी का नंबर ब्लॉक कर दिया।

वकील का हवाला देकर जीता भरोसा, कुल ₹6.80 लाख हड़पे
पीड़िता के मुताबिक, कुल 6 लाख 30 हजार रुपये में जमीन का सौदा तय हुआ था। आरोपियों ने झांसा दिया कि उनके वकील ने सारे कागजात जांच लिए हैं, इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनकी बातों पर भरोसा कर 5 जुलाई 2016 को बैनामा करा दिया गया। आरोपियों ने चालाकी से कहा कि 'अभी यहां निर्माण मत करना, हम जमीन की नाप करवा रहे हैं।' इस बीच फौजी का ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया। जालसाजों ने एडवांस, बैनामा राशि और नकद मिलाकर ₹6,30,000 और रजिस्ट्री के खर्च के 50,000 सहित कुल 6,80,000 हड़प लिए।

किराए के मकान में कट रही फौजी के परिवार की जिंदगी
पीड़िता कमला देवी वर्तमान में देहरादून में ही बच्चों के साथ किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने एसएसपी को बताया कि पिछले 5 वर्षों से पुलिस महकमे द्वारा विभिन्न स्तरों पर इस मामले की जांच की जा रही है, लेकिन आज तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला और न ही मुकदमा दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपियों को भूमाफिया बताते हुए जल्द से जल्द मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

11/06/2026

फर्जी लोन से 4.80 करोड़ का गबन, तत्कालीन बैंक प्रबंधक गिरफ्तार

अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अन्य आरोपियों की तलाश जारी

देहरादून। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये के गबन और फर्जीवाड़े के मामले में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का ऋण स्वीकृत कराने और बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की क्रॉस रोड स्थित मुख्य शाखा के वर्तमान शाखा प्रबंधक रिंकू गौतम ने 15 मई 2026 को कोतवाली नगर में तहरीर दी थी। तहरीर में बताया गया कि बैंक द्वारा कराए गए फोरेंसिक ऑडिट में वर्ष 2013 से 2016 के बीच लेखा अभिलेखों और लेजर प्रविष्टियों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं जांच में पता चला कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक महाबीर सिंह ने बैंक में कार्यरत अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी प्रविष्टियां कीं और निजी खातों में धनराशि का लेन-देन कर बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। मामले में कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर मामले की गहन जांच की गई। विवेचना के दौरान सामने आया कि महाबीर सिंह और उसके सहयोगियों ने 20 जेसीबी मशीनों की खरीद के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से 4 करोड़ 80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया और धनराशि का गबन कर लिया। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर 10 जून 2026 को मुख्य आरोपी महाबीर सिंह (74) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी रायपुर थाना क्षेत्र के नालापानी चौक स्थित बाबा विहार का निवासी है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

11/06/2026

ठग बाबा गिरफ्तार: अनिष्ट का भय दिखाकर महिला से 65 तोला सोना हड़पा, 15 तोला सोना और 5 लाख नकद बरामद

सेलाकुई (देहरादून)। तंत्र-मंत्र और अनिष्ट का भय दिखाकर लोगों को ठगने वाले एक कथित बाबा को दून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पूजा-पाठ और अनुष्ठान के नाम पर एक महिला से 65 तोला सोना हड़प लिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर करीब 15 तोला सोना (150 ग्राम का बिस्कुटनुमा बार) और पांच लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे "ऑपरेशन प्रहार" के तहत थाना सेलाकुई पुलिस ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान राहुल थापा (34) निवासी तेलपुरा अटक फार्म, सेलाकुई के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सेलाकुई निवासी ओशीन गुरंग ने 31 मई को शिकायत दर्ज कराई थी कि राहुल थापा ने तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का सहारा लेकर उनके परिवार पर अनिष्ट होने का डर पैदा किया। इसके बाद घर में पूजा-अनुष्ठान कराने के बहाने उनके और उनकी मां के करीब 65 तोला सोने के आभूषण गायब कर दिए।
जांच में आरोप सही पाए जाने पर नौ जून को आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की दो टीमों का गठन किया गया। साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

ऐसे रचता था ठगी का जाल

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2013 से पंडिताई का काम कर रहा है। अधिक धन कमाने के लालच में उसने लोगों को ठगने का तरीका अपनाया। वह रात के समय अपने संपन्न शिष्यों के घरों के बाहर उड़द की दाल, नींबू, रोली और अन्य सामग्री से भरी पोटली फेंक देता था। अगले दिन फोन कर उन्हें सपने में अशुभ संकेत मिलने की बात कहता और घर पर जादू-टोना होने का भय दिखाता था। इसके बाद अनिष्ट दूर करने के नाम पर पूजा-अनुष्ठान कराकर मोटी रकम वसूलता था।

संदूक में रखवाए आभूषण, मौका मिलते ही कर दिए गायब

पुलिस के मुताबिक, राहुल थापा ओशीन गुरंग को पहले से जानता था और उसे उनके कीमती आभूषणों की जानकारी थी। एक मार्च की रात उसने महिला के घर के बाहर जादू-टोने की सामग्री वाली पोटली फेंकी। अगले दिन महिला को फोन कर घर पर टोना-टोटका होने की बात कही और पूजा कराने पहुंच गया। अनुष्ठान के दौरान उसने महिला और उसकी मां से सभी आभूषण एक पोटली में बांधकर संदूक में रखने को कहा। बाद में दोनों को छत की परिक्रमा के लिए भेज दिया और मौका पाकर संदूक से आभूषण निकाल लिए। पूजा समाप्त होने पर उसने संदूक को मंदिर में रखने और 62 दिन बाद खोलने की बात कहकर उन्हें झांसे में रखा।

अभी और बरामदगी की उम्मीद

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर आभूषणों को गलाकर बनाया गया 150 ग्राम वजन का सोने का बार और आभूषण बेचकर प्राप्त पांच लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि घटना करीब तीन माह पुरानी होने के कारण शेष आभूषणों की बरामदगी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए आरोपी की पुलिस रिमांड लेकर आगे भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, उसके सहयोगियों और इसी तरह की अन्य घटनाओं की भी जांच कर रही है।

10/06/2026

खोए मोबाइल लौटाकर दून पुलिस ने बिखेरी मुस्कान, 16 फोन मालिकों को मिले उनके मोबाइल

सेलाकुई। आमजन की सहायता के लिए लगातार कार्य कर रही दून पुलिस ने एक बार फिर सराहनीय पहल करते हुए गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके स्वामियों को सौंप दिए। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी लौट आई और उन्होंने उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए आभार जताया।थाना सेलाकुई पुलिस ने भारत सरकार द्वारा संचालित संचार सारथी (सीईआईआर) पोर्टल की सहायता से करीब तीन लाख रुपये मूल्य के 16 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मंगलवार को इन मोबाइलों को उनके वास्तविक स्वामियों के सुपुर्द किया गया। पुलिस के अनुसार, मोबाइल गुम होने संबंधी शिकायत या गुमशुदगी रिपोर्ट प्राप्त होते ही संबंधित मोबाइल को सीईआईआर पोर्टल पर ट्रेसिंग के लिए दर्ज किया जाता है। इसी क्रम में थाना सेलाकुई में गठित पुलिस टीम ने लगातार प्रयास करते हुए विभिन्न कंपनियों के 16 मोबाइल फोन बरामद करने में सफलता हासिल की।
मोबाइल वापस मिलने पर स्वामियों ने दून पुलिस का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके खोए हुए मोबाइल इतनी जल्दी वापस मिल जाएंगे। पुलिस ने बताया कि थाना सेलाकुई द्वारा अब तक सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से लगभग 18 लाख रुपये मूल्य के 70 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को सौंपे जा चुके हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से आमजन में विश्वास और मजबूत हुआ है।

10/06/2026

भूमाफिया की 'गंदी बात': सरकारी जमीन बेचकर कमाए करोड़ों, अब जेल में शुरू हुआ वसूली और गैंगवार का खूनी खेल

जेल में बंद भूमाफिया संजय राजपूत से साथी ने मांगी 30 लाख की रंगदारी, घर पर कराई फायरिंग

शिकायतकर्ता ने खोला राज: अफसरों की फर्जी मोहरें बनाकर 32 बेकसूरों को बेची सरकारी भूमि

देहरादून पुलिस के 'ऑपरेशन प्रहार' में तमंचे के साथ शूटर अमन गिरफ्तार, खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क

देहरादून। राजधानी देहरादून में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले एक कुख्यात भूमाफिया नेटवर्क का ऐसा सनसनीखेज चेहरा सामने आया है, जिसने पुलिस और राजस्व विभाग के होश उड़ा दिए हैं। एक तरफ जहां इस गिरोह द्वारा सरकारी अफसरों के फर्जी दस्तखत और मोहरें तैयार कर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन आम जनता को बेचने का बड़ा खुलासा हुआ है; वहीं दूसरी तरफ इसी गिरोह के भीतर अब जेल की सलाखों के पीछे से रंगदारी और खूनी गैंगवार का खेल शुरू हो गया है। एसएसपी दून के नेतृत्व में 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत पुलिस ने एक शूटर को अवैध हथियार के साथ दबोचकर इस पूरे गठजोड़ का पर्दाफाश किया है।

करोड़ों की सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा, 32 परिवारों को लगाया चूना
मामले का पहला पहलू विकासनगर क्षेत्र ईस्ट ऑफ टाउन से जुड़ा है, जहां शिकायत कर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को शिकायती पत्र सौंपकर भूमाफिया संजय राजपूत, उसकी पत्नी सीमा नेगी और उनके सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप:
संजय राजपूत और सीमा नेगी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस्लाम (पुत्र हनीफ) को एक कंपनी का फर्जी प्रतिनिधि बनाया। इसके बाद राजस्व विभाग की आंखों में धूल झोंककर करीब 14 बीघा सरकारी भूमि फर्जी तरीके से अपने नाम ट्रांसफर करवा ली। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने तहसीलदारों और लेखपाल की फर्जी मोहरें व जाली दस्तखत तैयार कर इस सरकारी जमीन को 32 मासूम खरीदारों को बेच डाला। यही नहीं, उन्हें बैंक से लोन दिलाने के लिए फर्जी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट भी थमा दिए।
तहसीलदार विकासनगर की जांच आख्या में भी खाता संख्या 2284, 2202 और खसरा नंबर 870मि से जुड़े इस महाफर्जीवाड़े में सीमा नेगी और संजय राजपूत की सीधी संलिप्तता की पुष्टि हो रही है।

जेल की सलाखों के पीछे दरार और 30 लाख की रंगदारी
कहानी में खूनी मोड़ तब आया जब इस जमीनी जालसाजी के मामले में भूमाफिया संजय राजपूत और मंजीत हत्याकांड का आरोपी अर्जुन पुत्र बलवान देहरादून जिला कारागार में एक साथ बंद हुए। पहले तो दोनों में गहरी दोस्ती रही, लेकिन बाद में पैसों के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच ठन गई। अर्जुन का आरोप था कि संजय राजपूत के इशारे पर ही उसने मर्डर की वारदात को अंजाम दिया था, लेकिन संजय ने उसे मोटी रकम नहीं दी। जमानत के लिए पैसों की तंगी से जूझ रहे अर्जुन ने जेल के भीतर ही संजय राजपूत से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांग डाली और पैसे न देने पर पूरे परिवार को भून डालने की धमकी दी।

दून पुलिस का 'ऑपरेशन प्रहार': बिधौली से शूटर गिरफ्तार
इस धमकी को हकीकत में बदलने के लिए जेल से बाहर आए शार्प शूटर अमन (निवासी नालापानी) को सुपारी दी गई। गत 20 मई की तड़के करीब 4 बजे अमन और उसके साथी विकास बलारा ने लक्ष्मीपुर ईस्ट होप टाउन स्थित संजय राजपूत के घर पर धावा बोल दिया। आरोपियों ने पहले एक धमकी भरी चिट्ठी घर के अंदर फेंकी और फिर दहशत फैलाने के इरादे से तमंचे से ताबड़तोड़ फायरिंग कर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल टीमों का गठन किया। प्रेमनगर पुलिस ने मुखबिर तंत्र की मदद से जाल बिछाकर मुख्य शूटर अमन को बिधौली क्षेत्र से दबोच लिया। जांबाज पुलिस टीम ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल .315 बोर का अवैध देसी तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।

दबोचे गए आरोपी का खौफनाक इतिहास
पुलिस गिरफ्त में आया अमन कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि उस पर पहले से ही हत्या और तस्करी के कई संगीन मामले दर्ज हैं:

हत्या के मामले: थाना डालनवाला और नेहरू कॉलोनी में दो अलग-अलग मर्डर केस दर्ज हैं, जिनमें वह 5 साल जेल काट चुका है।थाना रायपुर में एनडीपीएस (मादक पदार्थ तस्करी) और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं।

इन आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने इस मामले में जेल में बंद मुख्य साजिशकर्ता अर्जुन के अलावा, सोनीपत निवासी विकास बलारा और दीपिका को वांछित (वांटेड) घोषित किया है। पुलिस का कहना है कि सरकारी जमीनों को हड़पने वाले इस संगठित भूमाफिया नेटवर्क और जेल से रंगदारी चलाने वाले गिरोह के हर एक मददगार को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

बागपत डबल मर्डर केस: टेंट व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या का मुख्य आरोपी वरुण लुहारी भी मौत के आगोश में, अस्पताल में तोड़ा ...
10/06/2026

बागपत डबल मर्डर केस: टेंट व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या का मुख्य आरोपी वरुण लुहारी भी मौत के आगोश में, अस्पताल में तोड़ा दम

बड़ौत स्थित मकान की कुर्की के बाद से ही देहरादून में रह रहा था आरोपी

बड़ौत/देहरादून। टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके पुत्र विकास अग्रवाल की हत्या के मुख्य आरोपी कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। वारदात के बाद भाग रहे वरुण को आक्रोशित लोगों ने घेर लिया था। भीड़ की पिटाई और गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए वरुण ने बुधवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत वरुण लुहारी के बड़ौत स्थित मकान की कुर्की की गई थी। इसके बाद वह अपना ठिकाना बदलकर देहरादून में रहने लगा था। मंगलवार को वह एक मुकदमे में पेशी (तारीख) पर बागपत न्यायालय आया था। अदालत से लौटते समय उसने अपने साथियों के साथ मिलकर टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके पुत्र विकास अग्रवाल पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वारदात को अंजाम देकर भाग रहे वरुण को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस अभिलेखों के मुताबिक वरुण लुहारी पर हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, बलवा, मारपीट, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों समेत कुल 19 मुकदमे दर्ज थे। लंबे समय से वह पुलिस की निगरानी में चिन्हित हिस्ट्रीशीटर था। मामले में पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। वहीं पिता-पुत्र की हत्या और मुख्य आरोपी की मौत के बाद बड़ौत कस्बे में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

10/06/2026

मसूरी में दर्दनाक हादसा: 500 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, महिला की मौत, तीन अन्य की तलाश जारी

मसूरी। झड़ीपानी रोड स्थित बार्लोगंज क्षेत्र में बुधवार सुबह एक कार अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि अन्य सवारों की तलाश के लिए पुलिस, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमों द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
पुलिस के अनुसार बुधवार सुबह करीब 9:16 बजे 112 कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचना मिली कि बार्लोगंज क्षेत्र में एक कार गहरी खाई में गिर गई है। सूचना मिलते ही कोतवाली मसूरी पुलिस मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ, फायर सर्विस तथा 108 एंबुलेंस को भी तत्काल घटनास्थल पर बुलाया गया। संयुक्त रेस्क्यू अभियान के दौरान टीमों ने अब तक एक महिला का शव खाई से बरामद किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दिल्ली नंबर की एक मारुति सिलेरियो कार सड़क किनारे ढलान पर खड़ी थी। कार सवारों ने पास की दुकान से कुछ सामान खरीदा था और बातचीत में स्वयं को उत्तरकाशी से आने वाला बताया था। सामान लेकर जैसे ही वे कार में बैठे, वाहन अचानक तेज गति से ढलान की ओर बढ़ने लगा और एक खाली प्लॉट से होते हुए गहरी खाई में जा गिरा पुलिस जांच में कार में सत्यप्रकाश निवासी सोनीपत, मनीत (19 वर्ष), सविता (48 वर्ष) पत्नी धर्मवीर निवासी नेहरू नगर गाजियाबाद तथा संगीता (46 वर्ष) पत्नी टीटू निवासी करोलबाग, दिल्ली के सवार होने की जानकारी मिली है।
प्रथम दृष्टया हादसे का कारण कार के ब्रेक फेल होना माना जा रहा है, जिसके चलते वाहन अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। घटनास्थल पर पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी मसूरी स्वयं मौजूद हैं तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना की सूचना वाहन सवारों के परिजनों को दे दी गई है। मामले की जांच जारी है।

08/06/2026

करोड़ों की जमीन पर 'महाफर्जीवाड़ा': फर्जी बलवंत, फर्जी मुख्तारनामा और असली खेल; देहरादून से सहारनपुर तक बुना गया जाल

असली मालिक की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू

एक ही जमीन को फर्जी गवाह और दस्तावेज तैयार कर कई बार बेचा, करोड़ों की ठगी

देहरादून। राजधानी में जमीनों की जालसाजी और भूमाफियाओं का एक ऐसा सनसनीखेज कारनामा सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन के भी होश उड़ा दिए हैं। एक बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए भूमाफियाओं ने न सिर्फ फर्जी मालिक खड़ा किया, बल्कि फर्जी मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार कर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस खेल में देहरादून से लेकर सहारनपुर तक के गिरोह शामिल हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब असली मालिक को इसकी भनक लगी और उसने एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) देहरादून को तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ऐसे रचा गया जालसाजी का पूरा चक्रव्यूह
पुलिस को दी गई शिकायत और जांच में सामने आया कि करीब एक साल पहले भूमाफियाओं के एक संगठित गिरोह ने इस पूरे खेल की पटकथा लिखी।

फर्जी मालिक का खेल:
गिरोह ने जमीन के असली मालिक बलवंत सिंह की जगह एक हमनाम 'फर्जी बलवंत सिंह' खड़ा किया।

अपनों के ही नाम रजिस्ट्री
इस फर्जी बलवंत सिंह के जरिए गिरोह के ही एक सदस्य दीपक अग्रवाल के नाम एक मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) दर्ज करा दिया गया।

दिल्ली के खरीदार और नया ट्विस्ट: इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर दिल्ली निवासी श्याम सुंदर नागपाल और अशोक गुप्ता को जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई।

कब्जा मिला नहीं तो आगे कर दी 'करोड़ों की ठगी

ट्विस्ट तब आया जब दिल्ली के खरीदारों (श्याम सुंदर और अशोक गुप्ता) को जमीन पर कब्जा नहीं मिला। दरअसल, जमीन पर पहले से ही मान देवी नाम की महिला का कब्जा है, जो मजे की बात यह है कि इस पूरी रजिस्ट्री में खुद गवाह भी बनी हुई थी। कब्जा न मिलने पर दिल्ली के इन खरीदारों ने भी कानून को ताक पर रख दिया। उन्होंने खुद को ठगा देख, आगे किसी तीसरे पक्ष को वही विवादित भूमि बेच दी और उनसे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।

फर्जी भाई और नया मुख्तारनामा:
गिरोह की साजिश यहीं नहीं रुकी। जालसाजी को पुख्ता करने के लिए असली मालिक बलवंत सिंह का एक फर्जी भाई 'हरिराज' तैयार किया गया। इसके बाद जमीन पर काबिज मान देवी को भी एक फर्जी मुख्तारनामा सौंप दिया गया ताकि कागजी फेरबदल को कानूनी रूप दिया जा सके।

सहारनपुर गिरोह की भी एंट्री, देहरादून की महिला को बनाया मोहरा
इस महाफर्जीवाड़े की गूंज पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के सहारनपुर तक जा पहुंची। सहारनपुर के एक सक्रिय भूमाफिया गिरोह मुजाहिद खान एवं हुमायूँ परवेज ने भी इसी जमीन पर अपनी नजरें गड़ा दीं। उन्होंने भी अपने स्तर से एक और 'फर्जी बलवंत सिंह' खड़ा किया और देहरादून निवासी अनीता शास्त्री के नाम पर एक और पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करवा दी। इस फर्जी दस्तावेज के दम पर यह गिरोह भी बाजार में भूमि का सौदा करने के लिए ग्राहक ढूंढने लगा।

असली मालिक पहुंचा एसएसपी दफ्तर, मांगी सुरक्षा
चारों तरफ से हो रही इस जालसाजी की भनक जब असली भूमि स्वामी बलवंत सिंह को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बलवंत सिंह ने तत्काल देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित शिकायत सौंपी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकद्दमा दर्ज कर लिया है

बलवंत सिंह ने अपनी तहरीर में कहा:
महोदय, मेरी जानकारी के बिना मेरे नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) तैयार की गई है और इसके आधार पर हमारी पैतृक भूमि का एक बड़ा हिस्सा भूमाफियाओं द्वारा बेच दिया गया है। मुझे और मेरे परिवार को इस गिरोह से जान-माल का खतरा है।

मामला बेहद गंभीर है और इसमें कई कड़ियों के जुड़े होने की आशंका है। असली भूमि स्वामी की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फर्जी दस्तावेजों और रजिस्ट्री की कॉपियों को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
> पुलिस प्रशासन, देहरादून

08/06/2026

ऋषिकेश में पुलिस मुठभेड़: हत्या के प्रयास में वांछित दो 15-15 हजार के इनामी बदमाश पैर में गोली लगने से घायल

चारधाम यात्रा के दौरान चेकिंग में पुलिस पर की फायरिंग, अवैध हथियार और बिना नंबर की बाइक बरामद

ऋषिकेश। चारधाम यात्रा के मद्देनजर चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान रविवार देर रात ऋषिकेश पुलिस और दो इनामी बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस पर फायरिंग करने वाले दोनों बदमाश जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने से घायल हो गए। दोनों हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित चल रहे थे और उन पर 15-15 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के अनुसार, नटराज चौक क्षेत्र में चेकिंग के दौरान बिना नंबर प्लेट की काले रंग की मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। दोनों ने चेहरे कपड़े से ढके हुए थे। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन वे बैरियर को टक्कर मारकर हरिद्वार बाईपास की ओर भाग निकले। सूचना प्रसारित कर पुलिस टीम ने उनका पीछा किया। खांड गांव के पास घेराबंदी के दौरान बदमाश रेलवे लाइन के समीप जंगल की ओर भागने लगे, लेकिन उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। इसके बाद दोनों ने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग कर दी। एक गोली पुलिस वाहन के साइड मिरर पर लगी। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें दोनों बदमाशों के पैरों में गोली लगी। घायल बदमाशों की पहचान बिहार निवासी 22 वर्षीय आमिर और 24 वर्षीय अनवारूल हक उर्फ अनवर के रूप में हुई है। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हथियार और नकदी बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक फैक्ट्री मेड पिस्टल, एक तमंचा, तीन जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस, 1500 रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की है।

जानलेवा हमले के मामले में थे फरार

दोनों आरोपी कोतवाली ऋषिकेश में दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे में वांछित थे। पुलिस के मुताबिक, चार जून को भुट्टोवाला क्षेत्र में सड़क किनारे शराब पीने को लेकर स्थानीय लोगों से उनका विवाद हो गया था। इसके बाद उन्होंने अपने साथी वसीम के साथ मिलकर फायरिंग कर दी थी, जिसमें दो लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने वसीम को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि आमिर और अनवर फरार चल रहे थे।

बिहार में हत्या और लूट की वारदात में भी शामिल

पूछताछ में अनवारूल ने बताया कि वह और उसका साथी बिहार के सीतामढ़ी जिले में लूट और हत्या की एक वारदात में भी शामिल रहे हैं। आरोप है कि लूट के दौरान एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बिहार के नानपुर थाने में मुकदमा दर्ज है और बिहार पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। पुलिस के अनुसार, बिहार पुलिस से बचने के लिए दोनों आरोपी ऋषिकेश पहुंचे थे। यहां उनके साथी वसीम का ससुराल ढालवाला क्षेत्र में है। हत्या और लूट से मिली रकम बांटने के लिए वे उत्तराखंड आए थे। घटना के बाद से दोनों जंगलों और अन्य स्थानों पर छिपकर रह रहे थे तथा ऋषिकेश से बाहर भागने की फिराक में थे।

पुलिस पर हमले का नया मुकदमा दर्ज

पुलिस टीम पर फायरिंग करने के मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ कोतवाली ऋषिकेश में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराओं में एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।

देहरादून में प्रतिबंधित जमीनों पर बड़ा खेल: पर्ल्स एग्रो की भूमि पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से रजिस्ट्री, मुकदमा दर्ज होने...
07/06/2026

देहरादून में प्रतिबंधित जमीनों पर बड़ा खेल: पर्ल्स एग्रो की भूमि पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से रजिस्ट्री, मुकदमा दर्ज होने के बावजूद बिक रही भूमि

एक ही भूमि के कई फर्जी मालिक खुलेआम कर भूमि का सौदा जब तक होगी जांच तब तक करोड़ों रुपए लेकर हो जाएंगे फरार

देहरादून। राजधानी के आमवाला तरला क्षेत्र में माननीय न्यायालय द्वारा क्रय-विक्रय के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित की गई बेशकीमती जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। भू-माफियाओं ने कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PACL) और गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों को कूट रचित दस्तावेजों के जरिए खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

न्यायालय से प्रतिबंधित भूमि पर कर डाली अवैध रजिस्ट्री
शिकायतकर्ता ने एसएसपी को सौंपे पत्र में बताया कि मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या '94ख, 134, 135 और 136' की भूमि कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। आरोप है कि इसके बावजूद सिकंदर सिंह, खैराती लाल कुक्कड़ और कुछ बाहरी बिल्डर्स ने मिलकर जमीन का वास्तविक विवरण छुपाया। आरोपियों ने फर्जी अभिलेख तैयार कर विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के माध्यम से इस प्रतिबंधित भूमि की अवैध रजिस्ट्री अपने पक्ष में करा ली।

फरवरी 2026 में कोतवाली में दर्ज हो चुकी है पहली एफआईआर
पत्र में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर पूर्व में ही फरवरी 2026 में थाना कोतवाली शहर में इस संबंध में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है। इसके बावजूद भू-माफियाओं का नेटवर्क इस भूमि पर लगातार सक्रिय बना हुआ है।

एक ही जमीन की कई 'फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी' बनाने वाले गिरोह का जाल
प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इस प्रतिबंधित भूमि पर मालिकाना हक जताने और इसे अवैध रूप से बेचने के उद्देश्य से भू-माफियाओं द्वारा कई फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) तैयार कराई गई हैं। इस फर्जीवाड़े के जरिए भूमि के वास्तविक स्वामित्व को पूरी तरह उलझाने का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जो भोले-भाले खरीदारों को भी अपना शिकार बना सकता है।

गहन जांच और गिरोह के खुलासे की मांग
शिकायतकर्ता ने एसएसपी से अनुरोध किया है कि एक ही जमीन पर तैयार की गईं कई फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी की गहनता से जांच की जाए। इसके साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले इस पूरे अंतरराज्यीय या स्थानीय गिरोह का पर्दाफाश कर उनके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले को आर्थिक अपराध और धोखाधड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है और जल्द ही संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से भी दस्तावेजों का रिकॉर्ड तलब किया जाएगा।

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