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अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक मामले में अल्मोड़ा न्यायालय ने फैसला देते हुए दुराचारी पिता को आजीवन...
03/01/2018

अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक मामले में अल्मोड़ा न्यायालय ने फैसला देते हुए दुराचारी पिता को आजीवन कारावास की सजा दी। विशेष सत्र न्यायाधीश डाॅ. ज्ञानेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा दुष्कर्म, मानव तस्करी एवं बाल विवाह मामले में अभियुक्त को भारतीय दण्ड सहिता की धारा 376 व पोक्सो अधिनियम की 5, 6 के अन्तर्गत देाषी मानते हुए पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के अन्तर्गत आजीवन कारावास से दण्डित किया गया है। अभियुक्त पर अपनी पुत्री से कई बार बलात्कार करने और उसका बाल विवाह करने का आरोप कोर्ट में साबित हुआ है। पीड़िता की ओर से पटवारी पनुवानौला को प्रार्थना पत्र दिया गया कि उसके पिता द्वारा उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया, इस पर प्रथम सूचना रिपोर्ट पटवारी पनुवानौला द्वारा दर्ज की गयी। अभियुक्त ने दुराचार के साथ ही पीड़िता का बाल विवाह भी करवाया। अभियुक्त को पोक्सो न्यायालय द्वारा पास्को अधिनियम की धारा 5 सपठित धारा 6के अन्तर्गत दण्डनीय किये जाने का आदेश आज पारित किया गया। न्यायालय द्वारा कहा गया कि यदि कानून के श्रोतों पर ध्यान आकर्षित किया जाये तो ऐसे अपराधियों के लिए मृत्यु दण्ड देना समीचीन है। रामचरित्रमानसस, वदों, उपनिषदों, बाईबिल कुरान का वर्णन करते हुए न्यायालय ने रामचरित्रमानस के किष्किंधा काण्ड की चैपाई का वर्णन कियां। ‘‘अनुज वधु,भगनी सुत नारी, सुन सत ये कन्या समचारी। इन्हें कुदृष्टि विलोपे जोई, ताहि बधे कछु पाप ना होई। अर्थात पुत्री छोटे भाई की पत्नी, पुत्रवधु व बहिन ये सभी पुत्री के समान होती है। यदि कोई व्यक्ति इनके साथ दुराचार करता है तो उसका बध करने में कोई पाप नहीं होता। इस न्यायालय द्वारा यह वर्णित किया गया कि भारतवर्ष एक लोकतांत्रिक देश है जहां पर कानून का राज्य स्थापित है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुये न्यायालय द्वारा अभियुक्त केा धारा 6 के अन्तर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अभियुक्त को अपने बजाव के लिये वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश लोहनी न्यायमित्र के रूप में उपलब्ध कराया गया। यायालय द्वारा पीडिता जिसकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति खराब है न्यायालय द्वारा 7 लाख रूपये प्रतिकर देने का आदेश भी पोक्सो नियमावली 2012 के निमय के अन्तर्गत पारित किया गया तथा जिलाधिकारी अल्मोड़ा से अपेक्षा की गयी कि वे पीडिता की शिक्षा को निरन्तर बनाये रखने तथा उसके कोई स्वरोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।

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नैनीताल।  उत्तराखंड के सपूत ने एक बार फिर राज्‍य का नाम देशभर में रोशन किया है। रामनगर के छात्र शिवांश ने एनडीए की प्रवे...
26/11/2017

नैनीताल। उत्तराखंड के सपूत ने एक बार फिर राज्‍य का नाम देशभर में रोशन किया है। रामनगर के छात्र शिवांश ने एनडीए की प्रवेश परीक्षा में देश में सर्वोच्च स्थान हासिल कर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। रामनगर के मोहल्ला भवानीगंज स्थित पंचवटी कॉलोनी निवासी सुभाष जोशी के पुत्र शिवांश जोशी(17 वर्ष) ने इस साल 24 अप्रैल को संपन्न हुई एनडीए की प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया था। रविवार को घोषित परिणाम के बाद शिवांश ने देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। शिवांश जोशी ने 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहली रैंक प्राप्त की है। बेटे की इस उपलब्धि को लेकर परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ है। प्रतिभावान छात्र शिवांश ने इसी साल लिटिल स्कॉलर स्कूल से कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उसके पिता सुभाष जोशी हल्द्वानी स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। जबकि उसकी मां तनुजा जोशी ग्राम चिल्किया स्थित प्राथमिक विद्यालय में एक अध्यापिका के पद पर तैनात हैं।

नैनीताल। उत्तराखंड के सपूत ने एक बार फिर राज्‍य का नाम देशभर में रोशन किया है। रामनगर के छात्र शिवांश ने एनडीए की प्रवेश परीक्षा में देश में सर्वोच्च स्थान हासिल कर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। रामनगर के मोहल्ला भवानीगंज स्थित पंचवटी कॉलोनी निवासी सुभाष जोशी के पुत्र शिवांश जोशी(17 वर्ष) ने इस स...

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में रविवार को कैबिनेट की बैठक में बाल यौन हिंसा के खिलाफ ...
26/11/2017

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में रविवार को कैबिनेट की बैठक में बाल यौन हिंसा के खिलाफ कड़ा कदम उठाया गया है। मध्‍य प्रदेश में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों के साथ दुष्‍कर्म करने पर जैसे अपराधों के लिए अधिकतम फांसी की सजा सुनाए जाएगी। इस संबंध में संशोधित विधेयक को पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। बीते सितंबर महीने में शांति नोबेल पुरस्‍कार विजेता कैलाश सत्‍यार्शी के नेतृत्‍व में देश भर में बच्‍चों के साथ हो रही यौन हिंसा के खिलाफ भारत यात्रा का आयोजन किया गया था। मध्‍य प्रदेश में हुए कार्यक्रम में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि बच्‍चों के साथ दुष्‍कर्म करने वालों को फांसी की सजा देने के लिए राज्‍य सरकार कानून बनाएगी। इसी क्रम में 27 नवंबर से शुरु हो रहे विधान सभा सत्र में अपने वायदे पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अमल लाने वाले हैं। रविवार को हुई कैबिनेट में दंड विधि संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दे दी गई। विधानसभा में संशोधन विधेयक को पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसमें 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसे अपराध के लिए अधिकतम फांसी की सजा सुनाई जा सकेगी। एमपी ऐसा करने वाला देश का पहला राज्‍य होगा। इस कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि अर्थदंड 100000 रूपये तक लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त जमानत के मामले में बिना लोक अभियोजक के पक्ष में फैसला नहीं सुनाया जा सकेगा। विवाह का प्रलोभन देकर शारीरिक संबंध बनाना भी दंडनीय अपराध होगा। इसके लिए दंड विधि संहिता एवं प्रक्रिया में धारा 376 ए और डी ए जुड़ेगी।

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में रविवार को कैबिनेट की बैठक में बाल यौन हिंसा के खिलाफ कड़ा कदम उठाया गया है। मध्‍य प्रदेश में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों के साथ दुष्‍कर्म करने पर जैसे अपराधों के लिए अधिकतम फांसी की सजा सुनाए जाएगी। इस संबंध में संशोधित विधेयक

देहरादून। उत्‍तराखंड आज अपनी स्‍थापना के 17 वर्ष पूरा कर चुका है और 18वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। दशकों तक चले आंदोल...
09/11/2017

देहरादून। उत्‍तराखंड आज अपनी स्‍थापना के 17 वर्ष पूरा कर चुका है और 18वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। दशकों तक चले आंदोलनों, शहीदों की शहादत और लाखों सपनों उम्‍मीदों के साथ राज्‍य की स्‍थापना हुई थी। शुरुआती दौर से ही उत्‍तराखंड को पड़ोसी राज्‍य हिमाचल से सीखने की सलाह मिलती रही। हजारों लेख स्‍थापना दिवस से लेकर कई मौकों पर विभिन्‍न अखबारों, पत्र पत्रिकाओं में छपते रहे कि उत्‍तराखंड को विकास कार्यों को लेकर पड़ोसी राज्‍य हिमाचल प्रदेश से सीख लेनी चाहिए। दोनों राज्‍यों की भौगोलिक, सांस्‍कृतिक स्थिति एक सी है, हिमाचल की शायद कई मायनों में ज्‍यादा दुष्‍कर। खैर, हिमाचल प्रदेश की स्‍थापना उत्‍तराखंड से करीब चार दशक पहले हो चुकी थी और प्रति व्‍यक्ति आय हो या संपन्‍नता या फिर संसाधनों को लेकर हिमाचल समान परिस्थितियों के बावजूद उत्‍तराखंड से मीलों आगे दिखता है। उत्‍तराखंड राज्‍य जो आज 18 वर्ष का हो रहा है, हर स्‍थापना दिवस के साथ ही उन उम्‍मीदों, आंकक्षाओं को तोड़ता नजर आया है जिसके लिए इस राज्‍य की स्‍थापना को लंबे आंदोलन चले थे, कई लोगों ने अपनी शहादत दी थी। ऐसे में हर उत्‍तराखंडी के जेहन में सवाल उठता रहता है कि क्‍यों उत्‍तराखंड हिमाचल प्रदेश से सबक नहीं लेता। उत्‍तराखंड में जहां सभी गांवों को सड़क से जोड़ना दूर की कौड़ी नजर आता है तो हिमाचल प्रदेश समुद्रतट से साढ़े 12 हजार फीट की ऊंचाई पर महज छह गांवों को जोड़ने के लिए सड़क पहुंचा देता है, जबकि उत्‍तराखंड में इतनी ऊंचाई पर सड़क तो दूर की बात ढंग के ट्रैक तक नहीं बन सके है। बागवानी, पर्यटन ने हिमाचल की तकदीर बदल दी। हालांकि, दोनों की संभावनाएं उत्‍तराखंड में भी बराबर ही है लेकिन इस राज्‍य ने इन दोनों पर ही कभी ध्‍यान देने की जेहमत नहीं उठाई। उत्‍तराखंड में चारधाम को छोड़ दे तो सरकारों ने कभी बारहमासा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई ढंग की योजना तक नहीं चलाई। हजारों बुग्‍यालों में जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं है वहां ढंग के ट्रैक तक नहीं है तो हिमाचल ने चाईंशील जैसे बुग्‍याल जो समुद्रतल से साढ़े बारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है उसे दस वर्ष पहले सड़क से जोड़ दिया। कसौल, कूल्‍लू मनाली, धर्मशाला, किन्‍नौर, रिकांगपिओ, चितकुल जैसे कई प्रमुख पर्यटन स्‍थलों पर सालभर पर्यटकों का तांता लगा रहता है लेकिन उत्‍तराखंड में चारधाम में छह महीने के सीजन में ही पर्यटन व्‍यवसाय सिमट कर रह गया है। हिमाचल प्रदेश फिलम निर्माताओं की पसंदीदा जगह बनी रही है लेकिन जिस फिल्‍म निर्माता निर्देशक ने उत्‍तराखंड में फिल्‍मों की शूटिंग की कोशिश की यहां की बेढंग नीति और महंगे शुल्‍कों की वजह से वह यहां दोबारा लौट कर नहीं आया। हिमाचल से सीखने की जरूरत है जहां हर गांव, हर बगीचे को सड़क से जोड़ने की मुहिम चलाई गई जिससे किसानों की उपज बाजार तक पहुंच सके। हालांकि, ज्‍यादातर सड़कों की हालत खराब है पर किसानों की उपज तो बाजार तक पहुंच ही जाती है, जहां सड़के नहीं वहां छोटे छोटे रोपवे के जरिए उपज को सड़क तक पहुंचाया जाता है, लेकिन उत्‍तराखंड में इस ओर कभी ही शायद सरकार का ध्‍यान गया हो। उत्‍तरकाशी के नाल्‍ड कठूड क्षेत्र में सीजनल सब्‍जी और ककड़ी का वृहद पैमाने पर उत्‍पादन होता है। सड़क से दूर बसे इन गांवों के ग्रामीणों को छह किमी की पैदल दुर्गम दूरी नाप पीठ पर ढोकर अपनी ककड़ी को सड़क तक पहुंचाना होता है जहां से उन्‍हें बिचौलियां औने पौने दामों पर लूट लेते है। इन गांवों में छेाटे छोटे रोपवे की संभावनाएं थी जिससे इन किसानों की मेहनत से उगाई ककड़ी आसानी से सड़क तक पहुंचे पसीने से तरबतर होकर अपनी लागत को औने पौने दामों पर न बेचना पड़े और या कीमत के बराबर खच्‍चर की ढुलान ने देनी पड़े। इसे कुछ इस तरह समझे कि इस साल आलू बेहद कम कीमतों पर बिका। उत्‍तरकाशी का सालंग गांव सड़क से छह किमी दूरी पर है। आलू चार सौ रुपये क्विंटल के दाम पर बिका और यहां के ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचाने के लिए आलू के हर क्विंटल पर दो सौ रुपये खर्च करने पड़े। जबकि, एक अदद छोटा रोपवे होता तो शायद यह ढुलान की लागत बच जाती। लेकिन, हमें क्‍या सिर्फ हिमाचल से ही सबक लेना चाहिए। क्‍यों सरकारी नीतियों को अपनाने भर से हम हिमाचल की तरह विकास की पटरी पर आ सकते हैं। शायद नहीं, हिमाचल की जिस तस्‍वीर को देख हमें उत्‍तराखंड राज्‍य को उसी तरह सजाने संवारने की बात करते हैं उसके पीछे छिपा है हिमाचलवासियों की अथक मेहनत पर समर्पण। हिमाचल में सड़कों अगर जाल बिछा है और हर गांव हर सेब के बागीचे तक सड़क पहुंची है तो इसके पीछे हिमाचलवासियों का त्‍याग भी महत्‍वपूर्ण है। हिमाचल प्रदेश में सड़क बनवाने की पहली शर्त है कि बिना मुआवजा लिए यह शपथ पत्र देना कि सड़क के लिए खेत का जो हिस्‍सा खोदा जाएगा मुझे कोई एतराज नहीं होगा। किसान भी सड़क के लिए बिना मुआवजा लिए खुशी खुशी अपनी खेती को सरकार को सौंप देते हैं। जिस सेब की वजह से हिमाचल की आर्थिक स्थिति के साथ ही यहां के जन जन की स्थिति सुधरी उसके लिए भी हिमाचलवासियों का त्‍याग नकारा नहीं जा सकता। रोहडू के किसी दुर्गम गांव में एक किसान ने बातचीत के दौरान बताया कि करीब बीस साल पहले जब सेब लगाने का जोखिम लिया तो सब की तरह की खेती को अलविदा कहना पड़ा और शुरुआती पांच सालों तक मजदूरी करके पेट भरना पड़ा पर खेत सारे सेब के नाम कुर्बान कर दिए थे, नतीजा आज सामने हैं, वह किसान हर साल तीन करोड़ रुपये के सेब बेचता है। दुर्गम क्षेत्र में आलीशान मकान व बेहतरीन गाड़ी का मालिक। हिमाचल में सरकार की नीतियां और आम आदमी की मेहनत ने हिमाचल को हिमालयी प्रदेशों में सिरमौर बनाया है। हालात वहां के भी उत्‍तराखंड जैसे हैं बस वहां नेता और आम जन अपने राज्‍य के प्रति ईमानदार है। वहां यह प्रथा तो नहीं है कि जिसको मौका मिले वह अपने हिस्‍से के संसाधन लूट ले।

देहरादून। उत्‍तराखंड आज अपनी स्‍थापना के 17 वर्ष पूरा कर चुका है और 18वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। दशकों तक चले आंदोलनों, शहीदों की शहादत और लाखों सपनों उम्‍मीदों के साथ राज्‍य की स्‍थापना हुई थी। शुरुआती दौर से ही उत्‍तराखंड को पड़ोसी राज्‍य हिमाचल से सीखने की सलाह मिलती रही। हजारों लेख स्‍थापना

रोहडू : रोहडू विधान सभा में भाजपा प्रत्‍याशी शशिबाला के समर्थन में सोमवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्‍मृति ईरानी, उत्‍तर...
06/11/2017

रोहडू : रोहडू विधान सभा में भाजपा प्रत्‍याशी शशिबाला के समर्थन में सोमवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्‍मृति ईरानी, उत्‍तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और गंगोत्री विधायक गोपाल रावत ने चिड़गांव में जनसभा को संबोधित किया। चिड़गांव में सोमवार को भाजपा प्रत्‍याशी शशिबाला के समर्थन में अपार जनसमर्थन उमड़ा। पारंपरिक रूप से कांग्रेस की इस विधान सभा सीट पर शशिबाला के समर्थन में उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया है कि इस चुनाव में कांग्रेस के इस गढ़ को भाजपा भेद चुकी है। जनता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी ने सड़कों की दशा में पर चिंता जताई। उन्‍होंने कहा कि सड़कों की हालत आवाजाही लायक भी नहीं है, जबकि कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री इस क्षेत्र से कई बार विधायक भी रहे हैं तो जब मुख्‍यमंत्री के अपने क्षेत्र की सड़कों की इतनी खराब हालत है तो पूरे हिमाचल का अंदाजा लगाया ही जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र की जन उपयोगी योजनाओं का हिमाचल सरकार ने ढंग से क्रियान्‍यवन नहीं किया जिसका फायदा जनता को नहीं मिल सका, ऐसे में भाजपा सत्‍ता में आई तो केंद्र की योजनाओं को जन जन तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि भाजपा प्रतयाशी शशिबाला रोहडू को विकास की मुख्‍यधारा में शामिल करवाने के लिए इकलौती विकल्‍प है। जनसभा को संबोधित करते हुए उत्‍तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि रेाहडू में चाईंशील बुग्‍याल जैसे पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे इलाके को हिमाचल सरकार पहचान नहीं दे सकी, पब्‍बर घाटी पर्यटन के क्षेत्र मं हजारों लोगों को रोजगार देने में सक्षम है लेकिन हिमाचल सरकार के लिए रोजगार व यहां की जनता प्राथमिकता में नहीं है बल्कि अपने रिश्‍तेदार और भ्रष्‍टाचार उनकी प्राथमिकता में है। जनसभा को संबोधित करते हुए गोपाल सिंह रावत विधायक गंगोत्री ने कहा कि रोहडू जो हिमाचल प्रदेश का 45 फीसदी सेब उत्‍पादित करता है वहां कांग्रेस सरकार एक कोल्‍ड स्‍टोर तक नहीं खुलवा सकी जबकि इसी विधान सभा ने सात बार वीरभद्र सिहं को विधान सभा में भेजा और उनके नाम पर मौजूदा विधायक को भी जितवाया। उन्‍होंने कहा कि रोहडू में सड़कों की खराब हालत, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा सुविधाओं की बदहाल हालत से लोगों में रोष है और यह रोष 9 नवंबर को वोट के रूप में कांग्रेस के खिलाफ वोटिंग मशीन में पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि रोहडू की जनता मेहनती है जो हर साल करोड़ों के सेब का उत्‍पादन करती है, करोड़ों रुपये सरकार को टैक्‍स के रूप में देती है लेकिन सरकार के पास उनकी एक किमी सड़क को पक्‍का करवाने के लिए 23 साल से बजट नहीं होता है। इस मौके पर प्रत्‍याशी शशिबाला, मंडल अध्‍यक्ष राजेश भ्राक्‍टा, महामंत्री विजय मेहता, नमामि गंगे के प्रुमख रावल हरीश सेमवाल, जिला परिषद अरविंद धीमान, बाल कृष्‍ण दुल्‍टा, जिला पंचायत आराकोट प्रकाश देवनाटा समेत बड़ी संख्‍या में लोग मौजूद रहे।

रोहडू : रोहडू विधान सभा में भाजपा प्रत्‍याशी शशिबाला के समर्थन में सोमवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्‍मृति ईरानी, उत्‍तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और गंगोत्री विधायक गोपाल रावत ने चिड़गांव में जनसभा को संबोधित किया। चिड़गांव में सोमवार को भाजपा प्रत्‍याशी शशिबाला के समर्थन में अपार जनसमर्थन…

रोहडू : 1951 से लेकर 2012 तक (2009 के उपचुनाव को छोड़) रोहडू विधान सभा पर कांग्रेस पार्टी का ही दबदबा रहा है। 2012 में सु...
02/11/2017

रोहडू : 1951 से लेकर 2012 तक (2009 के उपचुनाव को छोड़) रोहडू विधान सभा पर कांग्रेस पार्टी का ही दबदबा रहा है। 2012 में सुरक्षित होने से पहले तक रोहडू विधान सभा सीट सूबे के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के चेहरे वीरभद्र सिंह की पारंपरिक सीट हुआ करती थी। छह दशकों से कांग्रेस ने जहां रोहडू विधान सभा सीट पर अपना दबदबा कायम रखा तो वहीं जीत का मार्जिन भी हर साल नए रेकार्ड छूता रहा। पर इस बार रोहडू विधान सभा की हवा बदली सी नजर आ रही है। कांग्रेस का यह अजेय गढ़ उसके हाथ छूटते जा रहा है। रोहडू विधान सभा में भाजपा छह दशक से लगातार हार देखती रही है। 2009 के उपचुनाव में वीरभद्र सिंह के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को यहां पहली जीत मिली थी पर बताया जाता है कि यह जीत भी उन्हें वीरभद्र सिंह की वजह से ही मिली। मनमुताबिक प्रत्याशी को टिकट न मिलने से नाराज वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस के लिए प्रचार न किया जिसका फायदा भाजपा को यहां 1951 के बाद पहली जीत के तौर पर मिला। लेकिन, 2012 में यह सीट सुरक्षित हो गई और भाजपा को रेकार्ड मतों से हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के इस अजेय गढ़ की राह उतनी आसान दिख नहीं रही है। बीते दिनों सूबे के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लाल के लिए रेहडू में जनसभा की थी लेकिन जनसभा में उम्मीद से बेहद कम भीड़ उमड़ी तो कांग्रेस के चेहरे का भी रंग उड़ गया। यहां कांग्रेस अपने प्रत्याशी जो पांच साल विधायक भी रहे उनके काम काज की बजाए अब वीरभद्र सिंह के नाम पर ही वोट मांग रही है। क्योंकि, कांग्रेस को भी एंटी एनकंबेंसी का अहसास हो गया है। मौजूदा विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी के लिए स्थानीय लोगों में खूब रोष है। विकास कार्यों के मामले में हो या फिर फरियादियों की फरियाद सुनने व समस्याओं के निस्तारण के मामले में मौजूदा विधायक व कांग्रेस प्रत्याशी मोहनलाल का रेकार्ड काफी खराब रहा है। रोहडू नगर क्षेत्र में खराब ट्रैफिक व्यवस्था, गढ्डों से भरी सड़कों, विधान सभा क्षेत्र में ज्यादातर सड़कों की स्थिति पांच साल में भी नहीं सुधरी है। वहीं, भाजपा ने इस सीट पर पहली बार किसी महिला पर दांव खेला है। एमबीए शैक्षणिक योग्यता धारक व एक बार जिला परिषद सदस्य व ग्राम प्रधान रह चुकी युवा शशिबाला भाजपा की प्रत्याशी है। एक उच्च शिक्षित और राजनीति में पर्याप्त अनुभव रखने वाली महिला को लेकर विधान सभा वासी काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं। इसकी तस्दीक बुधवार को रेहडू में आयोजित जनसभा में भी हो गई। बुधवार को आयोजित शशिबाला की जनसभा में कोई बड़ा नेता तो मौजूद नहीं था लेकिन भीड़ के मामले में वह हाल ही के दिनों में वीरभद्र सिंह की रैली पर भारी नजर आई। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मिल रहे ‘रिस्पांस‘ से भाजपा भी गदगद है। बीते दिनों पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत शशिबाला के प्रचार में रोहडू के अतिदुर्गम इलाके डोडरा क्वार पहुंचे थे। बूथ स्तर की उनकी बैठक में खूब भीड़ उमड़ी। जबकि, बीते सालों में चार हजार के मतदाताओं वाले इस क्षेत्र से भाजपा के हिस्से बमुश्किल 100 वोट भी नहीं आए थे, ऐसे में बूथ स्तरीय बैठक में सैकड़ों की भीड़ उमड़ने को भी भाजपा अपनी जीत की तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, चुनावी नतीजों के लिए हिमाचल को महीने का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन रोहडू विधान सभा में चुनावी फिजा इस बार कांग्रेस के पक्ष में कतई नहीं कही जा सकती है।

रोहडू : 1951 से लेकर 2012 तक (2009 के उपचुनाव को छोड़) रोहडू विधान सभा पर कांग्रेस पार्टी का ही दबदबा रहा है। 2012 में सुरक्षित होने से पहले तक रोहडू विधान सभा सीट सूबे के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के चेहरे वीरभद्र सिंह की पारंपरिक सीट हुआ करती थी। छह दशकों से कांग्रेस ने जहां

देहरादून।  अब तक सिर्फ सोशल मीडिया में ही प्‍लास्टिक के चावलों की चर्चाएं आम थी लेकिन अब दून के होटलों में भी प्‍लास्टिक...
29/10/2017

देहरादून। अब तक सिर्फ सोशल मीडिया में ही प्‍लास्टिक के चावलों की चर्चाएं आम थी लेकिन अब दून के होटलों में भी प्‍लास्टिक के चावल परोसे जा रहे हैं। वायरल हुए एक रेस्टोरेंट के वीडियो ने इसे साबित कर दिया। अब सवाल ये है कि आखिर दून में प्लास्टिक का चावल कहां से सप्लाई किया जा रहा है। यह जानना और लोगों की सेहत खराब कर रहे इस काले धंधे पर लगाम लगाना फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग से लेकर प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं है। सच तो ये है कि इस धंधे के पनपने की असली वजह विभागीय अधिकारी हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को वैसे तो नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाकर इस धंधे पर लगाम लगानी चाहिए, लेकिन हकीकत ये है कि अफसर साल में सिर्फ दो बार होली व दीपावली पर ही सड़कों पर नजर आते हैं और तब भी कार्रवाई सिर्फ मिठाई की दुकानों तक सिमट जाती है। जबकि, बाजार में चल रहे लोगों की सेहत बिगाडऩे के धंधे से अफसर बेखबर हैं। प्लास्टिक के चावल की ऐसे करें पहचान चमक:जब आप चावल को ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे प्लास्टिक का चावल असली चावल की तुलना में ज्यादा चमकदार नजर आता है। आकार:यदि दो तरह के नकली चावलों को एक साथ मिलाकर देखेंगे तो सारे चावलों की मोटाई और आकार एक जैसा ही दिखाई देगा। वजन:नकली चावल का वजन असली की तुलना में कम होता है, इसीलिए तौलने पर नकली चावल की मात्रा अधिक होगी। भूसी:नकली चावल बिल्कुल साफ सुथरा होगा, जबकि असली चावल में कहीं न कहीं धान की भूसी मिल ही जाएगी। खुशबू:चावल को पकाते वक्त उसे सूंघ कर देखें। प्लास्टिक चावल पकते वक्त, बिल्कुल प्लास्टिक की तरह महकते हैं। कच्चापन:प्लास्टिक का चावल काफी देर तक पकाने के बाद भी ठीक से नहीं पकता, जबकि असली चावल अच्छी तरह से पक जाता है। मांड:प्लास्टिक चावल को पकाने के बाद, बचे हुए उसके पानी यानी मांड पर सफेद रंग की परत जम जाती है। यदि इस मांड को कुछ देर तक धूप में रखा जाए तो यह पूरी तरह से प्लास्टिक बन जाता है, जिसे जलाया भी जा सकता है। यह एक बेहतर तरीका है, प्लास्टिक चावल को पहचानने का। प्लास्टिक चावल से कैंसर होने का भी खतरा विशेषज्ञों की माने तो प्लास्टिक का चावल शरीर हजम नहीं कर पाता, यह चावल व्यक्ति की आंतों में जम जाता है। इससे आंतों की सूजन, रुकावट व इंफेक्शन होने का खतरा बन जाता है। साथ ही, नियमित रूप से इस चावल के इस्तेमाल से कैंसर होने का भी खतरा बन जाता है।

देहरादून। अब तक सिर्फ सोशल मीडिया में ही प्‍लास्टिक के चावलों की चर्चाएं आम थी लेकिन अब दून के होटलों में भी प्‍लास्टिक के चावल परोसे जा रहे हैं। वायरल हुए एक रेस्टोरेंट के वीडियो ने इसे साबित कर दिया। अब सवाल ये है कि आखिर दून में प्लास्टिक का चावल कहां से सप्लाई किया

टिहरी : चंबा ब्लॉक के बादशाहीथौल कस्बे में बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी युवक स्वामी रामतीर्थ परिस...
10/10/2017

टिहरी : चंबा ब्लॉक के बादशाहीथौल कस्बे में बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी युवक स्वामी रामतीर्थ परिसर में बीएड का छात्र है।आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। बादशाहीथौल के स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल से यतेंद्र सिंह (25 वर्ष) पुत्र सकल सिंह निवासी पाली गांव बड़कोट उत्तरकाशी बीएड कर रहा था। जिस मकान में युवक रह रहा था उसी के मकान मालिक की आठ साल की बच्ची से युवक ने बीती शाम दुष्कर्म कर लिया। बच्ची ने जब अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी तो परिजनों ने युवक को पकड़ लिया। बादशाहीथौल पटवारी चौकी में युवक के खिलाफ पोक्सो के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सोमवार को जिला अस्प्ताल में बच्ची और युवक का मेडिकल कराया गया। बादशाहीथौल के राजस्व उप निरीक्षक एसडी गड़ोई ने बताया कि बालिका के साथ युवक ने दुष्कर्म किया है. गौरतलब है कि देश भर में हर साल करीब पंद्रह हजार बच्‍चें यौन उत्‍पीड़न के शिकार होते हैं। बच्‍चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में लगातार बढोत्‍तरी देखी जा रही है।

टिहरी : चंबा ब्लॉक के बादशाहीथौल कस्बे में बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी युवक स्वामी रामतीर्थ परिसर में बीएड का छात्र है।आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। बादशाहीथौल के स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल से यतेंद्र सिंह (25 वर्ष) पुत्र सकल…

दिल्‍ली। 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले के आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने दावा किया है कि जांचकर्ताओं ने योगी आदित्यनाथ एव...
05/10/2017

दिल्‍ली। 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले के आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने दावा किया है कि जांचकर्ताओं ने योगी आदित्यनाथ एवं अन्य हिंदू नेताओं को भी इस मामले में घसीटने का प्रयास किया था। भाजपा नेता योगी आदित्‍यनाथ अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। चतुर्वेदी वर्तमान में जमानत पर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंदू कार्यकर्ताओं को गलत तरीके से फंसाया गया है। पूर्व की कांग्रेस-राकांपा सरकार ने भगवा आतंकवाद का सिद्धांत साबित करने और अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया था। चतुर्वेदी ने कहा, 'पूछताछ के दौरान मुझसे आरएसएस और उसके प्रमुख मोहन भागवत के साथ जुड़ाव के बारे में पूछा गया। योगी आदित्यनाथ के बारे में भी सवाल पूछे गए थे। उन लोगों ने मेरे माध्यम से उन्हें घेरने की कोशिश की थी।' विस्फोट मामले की जांच का काम शुरू में महाराष्ट्र एटीएस के पास था। बाद में इसे एनआइए को सौंप दिया गया। एनआइए की विशेष अदालत ने पिछले महीने चतुर्वेदी और दूसरे आरोपी सुधाकर द्विवेदी उर्फ शंकराचार्य को जमानत दे दी। चतुर्वेदी एवं अन्य पर आतंकी हमले की योजना बनाने के लिए हुई बैठक में शामिल होने का आरोप है। नासिक जिले के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे।

दिल्‍ली। 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले के आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने दावा किया है कि जांचकर्ताओं ने योगी आदित्यनाथ एवं अन्य हिंदू नेताओं को भी इस मामले में घसीटने का प्रयास किया था। भाजपा नेता योगी आदित्‍यनाथ अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। चतुर्वेदी वर्तमान में जमानत पर हैं। उन्होंने यह भी आ...

पंकज कुशवाल, देहरादून। अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की ओर से बीते सितंबर महीने में बधुंवा मजदूरी और जबरन विवाह पर एक ...
05/10/2017

पंकज कुशवाल, देहरादून। अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की ओर से बीते सितंबर महीने में बधुंवा मजदूरी और जबरन विवाह पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट दुनिया में हो रहे मानवाधिकारों के हनन की एक खतरनाक तस्‍वीर सामने रखती है। रिपोर्ट की माने तो दुनियाभर में 152 मिलियन बच्‍चे (करीब पंद्रह करोड़ से ज्‍यादा बच्‍चे) बाल मजदूरी कर रहे हैं, जिसमें से करीब साढ़े छह करोड़ लड़कियां और साढ़े आठ करोड़ से कुछ ज्‍यादा लड़के बाल मजदूरी का दंश झेल रहे हैं। अफ्रीका में सर्वाधिक बाल मजदूर है। 5 से 17 वर्ष की आयु वाले करीब सात करोड़ बच्‍चे अफ्रीकी देशों में बाल मजदूर है, इसके बाद एशिया महाद्वीप का नंबर आता है जहां करीब छह करोड़ बच्‍चे बाल मजदूरी कर रहे हैं। इनमें से करीब एक तिहाई बाल मजदूर शिक्षा से वंचित है। और करीब 38 फीसदी बच्‍चे खतरनाक उद्योगों में बाल मजदूरी कर रहे हैं। रिपोर्ट आधुनिक दासता की क्रूर तस्‍वीर सामने लाती है। रिपोर्ट की माने तो करीब चार करोड़ लोग दुनिया भर में आधुनिक दासता के चंगुल में फंसे हुए है। जिनमें चार में से एक बच्‍चा है जो आधुनिक दासता के चंगुल में फंसा है यानि इसे एक करोड़ के करीब माना जा सकता है। हालांकि, भारत में इस रिपोर्ट पर विवाद गहरा गया है। इंटेलिजेंस ब्‍यूरो की माने तो अंतराष्‍ट्रीय श्रम संगठन की ओर से जारी यह रिपोर्ट भारत की नकारात्‍मक छवि बनाने की साजिश है। गौर करने वाली बात है कि इस रिपोर्ट में भारत में कपड़ा उद्योग में बाल मजदूरी की बात की गई है। खैर, इस रिपोर्ट ने जो तस्‍वीर पेश की है वह चिंताजनक है। करीब पंद्रह करोड़ बच्‍चे, जो किसी न किसी कारण से मजदूरी करने को मजबूर है वह दुनिया भर के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। यह तादात दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से ज्‍यादा है। भारत में बाल मजदूरी रोकने को कड़े कानून है इसके बावजूद जनगणना में भी सामने आया है कि भारत में अभी भी करीब 82 लाख बच्‍चे बाल मजदूरी कर रहे हैं। जो कि देश के लिए शर्मनाक बात है। ऐसे में जरूरी है कि देश के नवनिर्माण की बात हो रही है तो क्‍यों न ऐसे देश का निर्माण किया जाए जहां एक भी बच्‍चा बाल मजदूरी दुष्‍चक्र में न फंसा हो, जहां हर बच्‍चे को बुनियादी और अनिवार्य शिक्षा मुहैया होना सुनिश्चित हो। बचपन को सुरक्षित किए बगैर एक खुशहाल समाज की परिकल्‍पना करना भी बेमानी है।

पंकज कुशवाल, देहरादून। अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की ओर से बीते सितंबर महीने में बधुंवा मजदूरी और जबरन विवाह पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट दुनिया में हो रहे मानवाधिकारों के हनन की एक खतरनाक तस्‍वीर सामने रखती है। रिपोर्ट की माने तो दुनियाभर में 152 मिलियन बच्‍चे (करीब पंद्रह करोड़ से ज्‍याद...

नई दिल्‍ली। दिग्गज मीडिया ग्रुप एनडीटीवी का मालिकाना हक़ अब स्पाइसजेट एयरलाइंस के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह के हाथ मे...
22/09/2017

नई दिल्‍ली। दिग्गज मीडिया ग्रुप एनडीटीवी का मालिकाना हक़ अब स्पाइसजेट एयरलाइंस के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह के हाथ में आ सकता है. एक प्रतिष्ठित अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक अजय सिंह उन लोगों में शुमार होते हैं जो 2014 में भाजपा के प्रचार अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया, ‘हां, सौदा हो चुका है और अजय सिंह संपादकीय अधिकारों के साथ एनडीटीवी पर नियंत्रण हासिल करने जा रहे हैं.’ सूत्रों की मानें तो सौदा क़रीब 600 करोड़ रुपए का है. इसके मार्फत अजय एनडीटीवी का 400 करोड़ रुपए का कर्ज़ भी अपने ऊपर ले रहे हैं. इस सौदे के हिसाब से एनडीटीवी में अब अजय सिंह के पास 40 और प्रणय रॉय तथा उनकी पत्नी राधिका के पास 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी. एनडीटीवी और इसके प्रमोटर- प्रणय व राधिका रॉय बीते दो साल से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उनके ख़िलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज कर रखा है. उन पर एक बैंक से कर्ज़ लेकर उसे न चुकाने का आरोप है. इस मामले में बीती पांच जून को रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित चार ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे थे. इसके अलावा आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी एनडीटीवी से संबंधित मामलों की जांच कर रहे हैं. ईडी ने 2015 में एनडीटीवी को नोटिस जारी किया था. इसमें कहा था कि कंपनी में किए गए 2,030 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश में नियमों का उल्लंघन हुआ है. जबकि इसके अगले साल आयकर विभाग ने एनडीटीवी को नोटिस ज़ारी किया. इसमें 2009-10 में हुए करीब 500 करोड़ रुपए के लेन-देन में कर चोरी का आरोप लगाया गया था. वहीं दूसरी तरफ अजय सिंह के बारे में भी कुछ चीजों का ज़िक्र ज़रूरी है. वे केंद्र में अटलबिहारी वाजपेयी की पहली एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार के दौरान वरिष्ठ मंत्री प्रमोद महाजन के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) रह चुके हैं. बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन का डीडी स्पोर्ट्स चैनल शुरू कराया. साथ ही डीडी न्यूज़ से जुड़ी योजना में भी वे शामिल रहे. आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट अजय 2014 के चुनाव के दौरान भाजपा के प्रचार अभियान का हिस्सा रहे और कहा जाता है कि ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा उन्हीं के दिमाग की उपज था.

नई दिल्‍ली। दिग्गज मीडिया ग्रुप एनडीटीवी का मालिकाना हक़ अब स्पाइसजेट एयरलाइंस के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह के हाथ में आ सकता है. एक प्रतिष्ठित अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक अजय सिंह उन लोगों में शुमार होते हैं जो 2014 में भाजपा के प्रचार अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र...

नई दिल्‍ली, (सार संदेश) । यूं तो विवाह को सात जन्‍मों का बंधन कहा जाता है लेकिन पति अगर एक पत्र भेजकर यह ऐलान कर दे कि स...
22/08/2017

नई दिल्‍ली, (सार संदेश) । यूं तो विवाह को सात जन्‍मों का बंधन कहा जाता है लेकिन पति अगर एक पत्र भेजकर यह ऐलान कर दे कि सात जन्‍मों के इस बंधन को वह सिर्फ तीन लफ्जों में खत्‍म करना चाहता है तो आप पर क्‍या बितेगी। मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए करीब एक हजार साल (जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने बताया) से यह प्रथा अभिशाप बनी हुई थी। धर्म के बंधन में जकड़ी मुस्लिम महिलाओं को आज सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने एक बड़ी आजादी दी है कि अब उनके शौहर (पति) उन्‍हें सिर्फ तीन लफ्जों के बदले अपनी जिंदगी से बेदखल नहीं कर सकेगा। जी हां, सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने छह महीने तक मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक पर रोक लगाने हुए सरकार से इस पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाने को कहा है। बता दें कि तीन तलाक पर रोक को लेकर कई मर्तबा विभिन्‍न संगठन सरकार से मांग कर चुके हैं। लेकिन, क्‍या आप जानते हैं कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे कौन हैं। हिमालयी राज्‍य उत्‍तराखंड की की एक बेटी शायरा बानो। उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली शायरा बानो का निकाह साल 2002 में इलाहाबाद के रिजवान अहमद से हुई थी. ससुराल वालों की दहेज प्रताड़ना, फिर पति के तलाक देने के बाद शायरा बानो कोर्ट पहुंचीं. आरोप है कि पति शायरा बानो को लगातार नशीली दवाएं देकर याददाश्त कमजोर कर दिया और साल 2015 में मायके भेजकर तलाक दे दिया था. शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने की बात को नहीं मानती हैं. शायरा की याचिका में ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937’ की धारा 2 की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं. यही वह धारा है जिसके जरिये मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह, ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) और ‘निकाह-हलाला’ जैसी प्रथाओं को वैधता मिलती है. इनके साथ ही शायरा ने ‘मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939’ को भी इस तर्क के साथ चुनौती दी है कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुरीतियों से संरक्षित करने में सार्थक नहीं है. इस फैसले को मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए आजादी के दिन के तौर पर देखा जा रहा है। बेहद मामूली बात पर तलाक, तलाक, तलाक बोलकर रिश्‍ते तोड़ देने वाले शौहरों (पति) पर कानूनी शिकंजा आखिरकार कस ही गया है। उम्‍मीद ही है कि केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ जल्‍द ही कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे सकेगा।

http://www.sarsandesh.com/muslim-woman-get-independence-because-of-uttarakhadi-women/

नई दिल्‍ली, (सार संदेश) । यूं तो विवाह को सात जन्‍मों का बंधन कहा जाता है लेकिन पति अगर एक पत्र भेजकर यह ऐलान कर दे कि सात जन्‍मों के इस बंधन को वह सिर्फ तीन लफ्जों में खत्‍म करना चाहता है तो आप पर क्‍या बितेगी। मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए करीब एक

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