02/05/2026
गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतें—आम जनता पर दोहरी मार
घरेलू रसोई का सबसे अहम हिस्सा एलपीजी गैस आज लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। एक ओर जहां गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
एक समय था जब 1997 में गैस सिलेंडर महज 123 रुपये में आसानी से मिल जाता था, लेकिन आज वही एलपीजी सिलेंडर आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई और गैस के दामों में लगातार इजाफा होने से रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है, जिससे हर वर्ग का परिवार प्रभावित हो रहा है।
गैस की किल्लत के पीछे सप्लाई चेन में रुकावट, परिवहन की समस्याएं और वितरण प्रणाली में खामियां प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और गरीब वर्ग पर पड़ता है। गैस की अनुपलब्धता के कारण उन्हें फिर से लकड़ी और पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर अभी भी सीमित नजर आता है। जरूरत है कि गैस की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए, वितरण में पारदर्शिता लाई जाए और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
अंत में कहा जा सकता है कि गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतें केवल एक आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि यह आम लोगों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी हैं।
संवाददाता कृष्णचंद्र की कलम से