13/10/2026
चमकते मंचों के बीच उत्तराखंड के क्षेत्रीय कलाकारों से बेरुखी क्यों?
मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड–2026’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन्फ्लुएंसर्स और मनोरंजन जगत की प्रतिभाओं से संवाद किया। सवाल है—प्रदेश में रहकर क्षेत्रीय सिनेमा, संगीत और लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों को ऐसा अवसर कब मिलेगा?
क्षेत्रीय कलाकारों की शिकायत है कि बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनकी समस्याएँ सरकार तक नहीं पहुँच पातीं। मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD स्तर पर भी मुलाकात और अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलने की शिकायतें हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय को इन शिकायतों का संज्ञान लेकर संवाद की उचित व्यवस्था बनानी चाहिए।
सरकारी आयोजनों में योगदान देने वाले सांस्कृतिक कलाकार यदि अपनी माँगों के लिए सड़क पर धरना-प्रदर्शन को मजबूर हों, तो सुनवाई की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बड़ी विडंबना यह भी है कि कलाकारों की शिकायतों के अनुसार, कई मंत्री, विधायक और सांसद स्थानीय कलाकारों व अभिनेताओं को पहचानने तथा उनके योगदान को स्वीकार करने में असहज दिखाई देते हैं। उत्तराखंड की पहचान बनाने वालों के प्रति ऐसा व्यवहार उनके सम्मान को ठेस पहुँचाता है।
फिल्म विकास परिषद में क्षेत्रीय फिल्मों से जुड़े फिल्मकारों और विषय विशेषज्ञों को नामित करने का प्रावधान है। सरकार बताए—वर्तमान परिषद में क्षेत्रीय सिनेमा के प्रतिनिधि कौन हैं? स्थानीय कलाकारों, निर्माताओं, निर्देशकों और तकनीशियनों को निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी कब मिलेगी?
राज्य फिल्म पुरस्कारों की पहल स्वागतयोग्य है। अब चयन, परिणाम और पुरस्कार वितरण की स्पष्ट समय-सारिणी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
फिल्म, संगीत, लोक संस्कृति, रंगमंच और रेडियो से जुड़े कलाकार तथा तकनीशियन इस प्रदेश के नागरिक और मतदाता भी हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका है। उनकी उपेक्षा की शिकायतों को अनसुना करना असंतोष और दूरी बढ़ा सकता है।
मुख्यमंत्री धामी जी, स्थानीय कलाकारों के साथ खुला संवाद कीजिए। उनकी समस्याएँ सुनिए और परिषद में प्रतिनिधित्व की स्थिति स्पष्ट कीजिए। उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान सँभालने वालों को सम्मान और अपनी बात रखने का उचित मंच दीजिए।
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