30/05/2026
मोदी सरकार ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा (मोहान) में स्थित देश की एकमात्र सरकारी आयुर्वेदिक और यूनानी दवा निर्माता कंपनी इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL) का विनिवेश (Disinvestment) कर दिया है।
26 मई 2026 को इस मुनाफे वाली पीएसयू (PSU) कंपनी को ₹121 करोड़ में एक निजी कंपनी 'मेसर्स स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड' को बेच दिया गया है।
🏢 कंपनी का इतिहास और महत्वस्थापना: इस फैक्ट्री की स्थापना 12 जुलाई 1978 को उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के मोहान नामक स्थान पर हुई थी। यह केंद्र सरकार (51%) और राज्य सरकार (49%) का एक संयुक्त उद्यम थी।
यह भारत की एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री थी, जिसके पास करीब 1200 प्रकार की औषधियां बनाने का लाइसेंस था। यह देश के केंद्रीय अस्पतालों, रिसर्च संस्थानों और राज्यों के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई करती थी।जमीन: यह कारखाना जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटी वन विभाग की लगभग 40 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है, ताकि हिमालयी क्षेत्र की शुद्ध जड़ी-बूटियों से दवाएं बनाई जा सकें।
📉 कम कीमत पर बेची गई: IMPCL कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के अनुसार, करीब ₹145 करोड़ की नेटवर्थ और ₹200 करोड़ से अधिक की सालाना वैल्यू वाली इस मुनाफेदार कंपनी को मात्र ₹121 करोड़ में निजी हाथों में सौंप दिया गया है, जिसे वे एक बड़ा घोटाला बता रहे हैं।
रोजगार का संकट: इस फैक्ट्री के निजीकरण से वहां काम करने वाले करीब 300 से 500 नियमित और संविदा कर्मचारियों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। साथ ही उत्तराखंड के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों के लगभग 4,000 से 5,000 स्थानीय किसान इस फैक्ट्री को कच्चा माल (जड़ी-बूटियां) सप्लाई करते थे, उनको भी रोज़ी रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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