Samaya sakshaya

Samaya sakshaya Samaya Sakshaya is a leading publishing house of the central Himalayan state of Uttarakhand.

चन्द्रशेखर तिवारी की पुस्तक उत्तराखंड का भूगोल का दूसरा संस्करण बहुत जल्द आपके हाथों में होगा। इस बार कलेवर कुछ बदला हुआ...
11/07/2026

चन्द्रशेखर तिवारी की पुस्तक उत्तराखंड का भूगोल का दूसरा संस्करण बहुत जल्द आपके हाथों में होगा।
इस बार कलेवर कुछ बदला हुआ है, ज्यादा फ्रेश लगेगा।

उत्तराखंड का भूगोल

किसी भी स्थान विशेष की परियोजनाओं के नीति निर्धारण व नियोजन व संरचनात्मक विकास के लिए उस परिवेश से सम्बन्धित तथ्यात्मक विवरणों के साथ ही भौगोलिक सूचनाओं, आधारभूत आंकड़ों, व मानचित्रों की जरूरत होती है। इन विवरणों के अध्ययन और विश्लेषण से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर ही सम्बन्धित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिलती है। इसी दिशा में हिमालयी भौगोलिक परिवेश पर केन्द्रित उत्तराखण्ड का भूगोल : प्राकृतिक व सामाजिक सन्दर्भ पुस्तक का लेखन एक बेहतरीन प्रयास है। जिसका लेखन सामाजिक विज्ञान व संस्कृति के अध्येता श्री चन्द्रशेखर तिवारी ने किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री तिवारी का मूल विषय भूगोल होने के कारण उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से उत्तराखण्ड के प्राकृतिक भौगोलिक परिवेश को सामाजिक संदर्भ में गहराई से रेखांकित किया है।

पुस्तक में कुल आठ अध्याय शामिल हैं। प्रथम अध्याय में उत्तराखण्ड का सामान्य परिचय दिया गया है। द्वितीय अध्याय भौगोलिक प्रदेश में इसके प्राकृतिक भागों तथा विशेष स्थलाकृतियों की व्यापक जानकारी वर्णित है। तृतीय अध्याय जल प्रवाह पर आधारित है। इसमें प्रदेश की नदियों के जल प्रवाह, जल प्रवाह प्रणाली, भूमिगत जल, हिमनद, प्राकृतिक झीलों व गर्मजल के सोतों का वर्णन किया गया है। जलवायु से सम्बन्धित विवरण चतुर्थ अध्याय में शामिल है। इस अध्याय में जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक, जलवायु वर्गीकरण, उत्तराखण्ड की जलवायुगत विशेषताएं और स्थानीय वर्षा व तापमान के स्थानीय परिदृश्य को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। पंचम अध्याय में प्राकृतिक वनस्पतियों के अन्र्तगत उत्तराखण्ड के वनावरण, वर्गीकरण, वनस्पति प्रजातियों व उसके सामाजिक उपयोगिता आदि की जानकारी शामिल है। छठा अध्याय वन्य जीवों पर आधारित है। इसमें उत्तराखण्ड के वन्य जीव क्षेत्र, प्रमुख वन्य जीव, वन्य जीवों की दहशत, वन्य जीवों पर संकट तथा संरक्षित वन्य जीव विहार तथा पर्यटन विकास का वर्णन किया हुआ है। मृदा एवं खनिज विषय की जानकारी सप्तम अध्याय में दी गई है। इसमें मृदा के प्रकार व उनका वितरण, खनिज सम्पदा व उनका वितरण क्षेत्र, खनिज सम्पदा का उपयोग व विकास का वर्णन किया हुआ है। अन्तिम आंठवें अध्याय में उत्तराखण्ड में प्रकृति आधारित विविध परम्परागत उद्योगों की तब और अब की स्थिति के साथ ही उनके सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करने का प्रयास किया है।

कुल मिलाकर इस पुस्तक में उत्तराखण्ड प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और उसमें विद्यमान प्राकृतिक व सामाजिक विशेषताओं को उजागर करने का प्रयास किया गया है। महत्वपूर्ण तालिकाओं, रेखाचित्रों, मानचित्रों और छायाचित्रों को शामिल कर पुस्तक को आकर्षक व उपयोगी बनाने की कोशिश की है। पुस्तक के अंत में परिशिष्ट के तौर पर सन्दर्भ ग्रन्थ सूची,प्रमुख भौगोलिक शब्दों के स्थानीय नाम तथा स्थानीय भौगोलिक स्थलाकृति व अन्य विशेषताओं के आधार पर जगहों के नामकरण की सूची भी दी गयी है। मानचित्रों, भौगोलिक सूचनाओं व तथ्यों को प्रमाणिक व सार्थक बनाने के उद्देश्य से स्थान-स्थान पर विविध सन्दर्भ स्रोतों का उल्लेख भी किया गया है।

पंछी बनती मुक्ति की चाह पोस्टर Lovekush Kumar आभार व धन्यवाद
06/07/2026

पंछी बनती मुक्ति की चाह
पोस्टर Lovekush Kumar
आभार व धन्यवाद

गढ़वाल की लोककथाएं दो किताबें दो नए सन्सकरण गढ़वाल की लोककथाओं से सम्बंधित दो किताबों के नए संस्करण आये हैं. सुरेंद्र दत्त...
12/06/2026

गढ़वाल की लोककथाएं
दो किताबें दो नए सन्सकरण

गढ़वाल की लोककथाओं से सम्बंधित दो किताबों के नए संस्करण आये हैं. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी और आशाराम 'आशाजीत' की किताबों में मिलाकर गढवाल की कुल 30 लोककथाएं प्रकाशित हुई है । आशाराम 'आशाजीत ' वाली लोक का मूल्य रु 190 है तथा डॉ. सुरेद्र दत सेमल्टी वाली पुस्तक का मूल्य रु 200 है। दोनों ही पुस्तकें उपलब्ध हैं । इन्हें बुक पार्सल के माध्यम से भी छूट के साथ मंगाया जा सकता है।
संकलक द्वय के विषय में बात की जाय तो डॉ. सुरेद्र दत्त सेमल्टी गढवाली लोक के बड़े विद्वान हैं । आपकी गढ़वाल के लोक जीवन समाज और संस्कृति पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । आशाराम आशाजीत गढवाली लोक के जानकार रहे हैं । इन लोककथाओं को प्रकाश में लाने में उनके सुपुत्र साहित्यकार शांति प्रकाश जिज्ञासु ने बड़ी भूमिका निभाई है, यहाँ तक की इन कथाओं का अनुवाद भी जिज्ञासु द्वारा ही किया गया है।

Traditional Children's Games and Children's Literature of Uttarakhand are Our Priceless Cultural HeritageDehradun, June ...
08/06/2026

Traditional Children's Games and Children's Literature of Uttarakhand are Our Priceless Cultural Heritage

Dehradun, June 8, 2026

Doon Library and Research Centre today organized a special discussion on two significant books by noted litterateur and researcher Dr. Surendra Dutt Semalty — Traditional Children's Literature of Uttarakhand and Traditional Children's Recreation and Games of Uttarakhand. The programme witnessed the participation of a large number of writers, academicians, researchers and culture enthusiasts, who described these books as an important contribution towards preserving Uttarakhand’s rich folk-cultural heritage.

On the occasion, child psychologist Ambrish Bisht observed that in the traditional society of Uttarakhand, children’s lives were deeply connected with nature, folk culture, family and community life. Entertainment was not dependent on mobile phones, television or digital media; rather, it revolved around folk songs, folk tales, lullabies, riddles, fairs, festivals and a variety of traditional games. These activities not only provided enjoyment but also played a vital role in shaping children’s personalities, social values, leadership qualities, cooperative spirit and creative thinking.

Senior litterateur Mahabir Rawalta stated that through extensive research, field visits and interaction with local communities, Dr. Semalty has documented traditional games, folk songs and children’s literary traditions that are gradually disappearing. He noted that these books serve as valuable records of Uttarakhand’s collective memory, cultural identity and social life.

Prof. Alka Mohan Sharma emphasized that in the present digital age, when children are increasingly drifting away from their roots and local cultural environments, the relevance of such books has grown significantly.

Prof. Guddi Bisht remarked that children’s literature is an effective medium for the intellectual, emotional and moral development of young minds. Literature based on local languages, dialects and folk traditions helps children connect with their culture and social surroundings. She highlighted that the book presents a rich collection of lullabies, children's songs, folk tales, riddles, value-based literature, and literary forms related to nature and festivals.

The speakers further noted that Traditional Children's Recreation and Games of Uttarakhand documents games that contribute to the physical and mental development of children without requiring expensive resources. Based on locally available materials and community participation, these games foster teamwork, decision-making abilities, discipline and creativity.

The assembled scholars, writers and distinguished participants appreciated Dr. Semalty’s painstaking and visionary efforts, stating that both books would serve as valuable sources of knowledge, inspiration and cultural awareness for future generations. They also stressed the need to make these books available in schools, libraries and educational institutions.

It is noteworthy that both books have been published by Samay Sakshya, Dehradun.

The programme was organized by Doon Library and Research Centre and was attended by writers, researchers, literary figures and members of the public. The event concluded with a collective resolve to preserve and promote the folk-cultural traditions of Uttarakhand.

Among those present were Ranu Bisht, Ramakant Benjwal, Om Prakash Semwal, Kanta Ghildiyal, Beena Benjwal, Chandrashekhar Tiwari, Praveen Bhatt, Devendra Kandpal, Kalyan Butola, Dr. D. K. Pandey, Dr. Lalta Prasad, Dr. Inderjit Singh, S. P. Semalty, Alok Sareen, Satyanand Badoni, Jagdish Singh Mahar, Abhishek Maindola, Harichand Nimesh, and several other writers, litterateurs and literature enthusiasts.

-------------------------------------------
Doon Library and Research Centre
Dehradun – 248001
Uttarakhand, India

प्रसिद्ध लोक कवि, मंच कलाकार, आंदोलनकारी और किस्सागोह गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' की पहली आधिकारिक जीवनी प्रकाशित होकर आ गई है...
08/06/2026

प्रसिद्ध लोक कवि, मंच कलाकार, आंदोलनकारी और किस्सागोह गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' की पहली आधिकारिक जीवनी प्रकाशित होकर आ गई है, इस अथक प्रयास के लिए लेखिका दीपा तिवारी को हार्दिक बधाई, सहयोग करने वाले सभी साथियों का आभार. पुस्तक का मूल्य ₹175 है, पुस्तक जल्द amazon पर भी उपलब्ध होगी.
पुस्तक का सुन्दर आवरण रोहित जोशी द्वारा बनाया गया है.

ताकि आपको याद रहे आपको आना है आज डॉ. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी DrSurendra Dutt Semalty का यह काम थोड़ा नया और अलग तरह का है, ...
08/06/2026

ताकि आपको याद रहे
आपको आना है आज

डॉ. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी DrSurendra Dutt Semalty का यह काम थोड़ा नया और अलग तरह का है, आप आओगे, इस काम को देखोगे तो आपको बहुत अच्छा लगेगा, आपका स्वागत है.

लोकार्पण नहीं लोकोत्सव बन गया-  रवांई के लोकगीत पुस्तक से जुड़ा आयोजन उत्तराखंड के सीमान्त उत्तरकाशी जनपद की सीमान्त नौगा...
07/06/2026

लोकार्पण नहीं लोकोत्सव बन गया- रवांई के लोकगीत पुस्तक से जुड़ा आयोजन

उत्तराखंड के सीमान्त उत्तरकाशी जनपद की सीमान्त नौगांव तहसील के विकासखंड राजगढ़ी का अंतिम गाँव है सरनौल. यह गाँव नीचे बुग्यालों से शुरू होकर गहरी घाटी तक विस्तृत भूभाग में फैला है. बीते 5 जून को सरनौल के ग्रामीण स्थानीय इंटर कालेज सभागार में एक अनूठे आयोजन के गवाह बने, मौका था लोकवेत्ता और शिक्षक ध्यान सिंह रावत 'ध्यानी' की पुस्तक ' रवांई के लोकगीत' पुस्तक के लोकार्पण का, यह भी दिलचस्प रहा कि बड़कोट, देहरादून और सरनौल में समान रूप से अधिकार रखने वाले ध्यानी ने अपनी पुस्तक के लोकार्पण के लिए उसी विद्यालय के सभागार को चुना जहाँ की मिट्टी में वे खेलकर बड़े हुए थे, यह ध्यानी के लिए ही नहीं बल्कि वहाँ उपस्थित सभी वक्ताओं और श्रोताओं के लिए अभिभूत कर देने वाला अवसर था, ऐसा इसलिए भी कि किताब का लोकार्पण ज्यादा बड़े शहर में ज्यादा चमक के साथ भी हो सकता था लेकिन ध्यानी ने लोक के गीतों को लोक को ही समर्पित करना ज्यादा बेहतर समझा, यह सभी लोक लेखकों के लिए एक सीख है कि जिस लोक से सामग्री ली जा रही है पहला समर्पण उसी माटी को किस प्रकार किया जा सकता है.
अब बात आयोजन की - रवांई क्षेत्र की लोक संस्कृति और लोकगीतों को संरक्षित करने की दिशा में ग्राम सभा सरनौल में एक महत्वपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत द्वारा संकलित पुस्तक ‘रवांई के लोकगीत’ का लोकार्पण राजकीय इंटर कॉलेज सरनौल के सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान किया गया।
कार्यक्रम के साथ लोक संस्कृति संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ पुस्तक के सहयोगियों व लोक ज्ञाताओं को सम्मानित कर हुआ। इसके पश्चात पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि रवांई क्षेत्र की लोक परंपराएं, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरें आज भी समाज की पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि लोक साहित्य किसी भी समाज की आत्मा और उसकी सांस्कृतिक पहचान का आधार होता है। ऐसे साहित्यिक प्रयास न केवल संस्कृति को संजोते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का कार्य भी करते हैं। प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने रवांई क्षेत्र के लोकगीतों की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकगीत हमारे पूर्वजों की स्मृतियों और जीवन मूल्यों के जीवंत दस्तावेज हैं। भारती आनंद ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा की और इसे लोक साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
संगोष्ठी में प्रो. आर.एस. असवाल, कुलवंती असवाल, प्रवीन कुमार भट्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज सेमवाल, प्रधान बलेन्द्र रावत सहित अनेक वक्ताओं ने लोक संस्कृति के संरक्षण, लोकगीतों के दस्तावेजीकरण तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर जबर सिंह, सरदार सिंह, अनिल बेसारी, हरदेव रावत, भगत सिंह, तरवीन राणा, प्रवीन असवाल, जगमोहन राणा, बलदेव, सुरवीर, भरत सिंह, जोगेंद्र सिंह, बलबीर सिंह, वीरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन रवांई की समृद्ध लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने और लोक साहित्य को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।

सादर आमंत्रण लोक, समाज और संस्कृति के मर्मग्य डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी की उत्तराखंड में बाल साहित्य, बाल खेल, बाल मनोर...
06/06/2026

सादर आमंत्रण

लोक, समाज और संस्कृति के मर्मग्य डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी की उत्तराखंड में बाल साहित्य, बाल खेल, बाल मनोरंजन सम्बन्धी दो पुस्तकों का लोकार्पण आगामी 8 जून को होना है. आप इस आयोजन में सादर आमंत्रित हैं.
समय व स्थान संलग्न कार्ड में दिए गए हैं.

अमर उजाला के लिए युवा संपादक अल्का त्यागी ने बात की कवि और बतकव्वा अनिल कार्की से यह बातचीत अमर उजाला के यूट्यूब डिजिटल ...
29/05/2026

अमर उजाला के लिए युवा संपादक अल्का त्यागी ने बात की कवि और बतकव्वा अनिल कार्की से

यह बातचीत अमर उजाला के यूट्यूब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.

29 likes, 8 comments. "लेखक और लेखनी...वरिष्ठ लेखक Anil Karki से उनकी साहित्यिक यात्रा पर खास बातचीत | Amar Ujala"

एक बार पुनः आपके लिए द भोटियाज आफ अल्मोड़ा एन्ड ब्रिटिश गढ़वाल सी.ए. शेरिंग एफ.आर.जी.एस., आई.सी.एस. द्वारा 1906 में एशियाट...
27/05/2026

एक बार पुनः आपके लिए

द भोटियाज आफ अल्मोड़ा एन्ड ब्रिटिश गढ़वाल

सी.ए. शेरिंग एफ.आर.जी.एस., आई.सी.एस. द्वारा 1906 में एशियाटिक सोसायटी आफ बंगाल वोल्यूम 1 नम्बर 8 पेज 98-110 में प्रकाशित इस पाठ को एक लघु पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया है। सर्वप्रथम यह लेख 1906 में एशियाटिक सोसायटी कलकत्ता के वोल्यूम 1 जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

इसे लघु पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने का उद्देश्य यह है कि इससे तत्कालीन जानकारियों के कुछ नए स्रोत विकसित होंगे। यह लघु पुस्तिका अधिकतम 36 पृष्ठ में प्रकाशित होगी। इस इस पुस्तिका में भोटियाओं के विभिन्न उपसमूहों, पर्यावासों, तत्कालीन जनसंख्या, भाषा, रीति रिवाज, परम्पराएं, जीवन शैली, विभिन्न संस्कार, भोजन, वस्त्र, जेवरात, विवाह, संबंध विच्छेद, व्यापार, स्थानीय व्यवस्था आदि के विषय में प्रकाश डाला गया है। आशा है यह पुस्तिका पाठकों के काम की साबित होगी।

Address

15 Faltu Line, Darshan Lal Chowk, Dehradun
Dehra Dun
248001

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm

Telephone

+917579243444

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Samaya sakshaya posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category