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25/08/2026

सशक्त बहना उत्सव में दिखा सरकार और मातृशक्ति के बीच विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता

मातृशक्ति बोली—आप हमारे भैया हैं धामी जी !

रिश्ते केवल खून से नहीं, विश्वास, अपनत्व और सम्मान से भी बनते हैं। ‘सशक्त बहना उत्सव’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश की मातृशक्ति के बीच ऐसा ही आत्मीय रिश्ता देखने को मिला। जब डोईवाला की एक बहन ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami को प्रदेश की महिलाओं का ‘बड़ा भाई’ कहा, तो यह केवल संबोधन नहीं, बल्कि हजारों बहनों के मन में बसे विश्वास और अपनत्व की भावनाओं की अभिव्यक्ति थी।

पौड़ी गढ़वाल की बहन ने मुख्यमंत्री के साथ अपने रिश्ते को ‘गुरु-शिष्य’ जैसा बताते हुए कहा कि सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। कभी संसाधनों की कमी से जूझने वाली महिलायें आज मसाले, अचार, धूपबत्ती, राखी, होली के रंग, सिलाई और बकरी पालन जैसे कार्यों से अपनी पहचान बना रही हैं।
यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का भी है। सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ किसी परिवार की जिंदगी में उम्मीद और किसी महिला के जीवन में आत्मनिर्भरता बनकर दिखाई दे।

‘सशक्त बहना उत्सव’ की ये कहानियाँ बताती हैं कि उत्तराखंड की मातृशक्ति अब सहायता लेने वाली नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज को आगे बढ़ाने वाली शक्ति बन रही है।

मुख्यमंत्री धामी के लिए बहनों का यह विश्वास निश्चित रूप से सबसे बड़ा सम्मान और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है🙏

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रक्षाबंधन : मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का संकल्परक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व नहीं, बल्कि यह ...
23/08/2026

रक्षाबंधन : मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का संकल्प

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व नहीं, बल्कि यह नारी सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के संकल्प को दोहराने का भी पावन अवसर है। देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चौधरी फार्म और सर्वे स्टेडियम में बहनों के बीच पहुँचकर रक्षासूत्र बंधवाया और मातृशक्ति के प्रति अपने आत्मीय भाव व्यक्त किए।

मुख्यमंत्री का यह कहना कि वे “मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, एक भाई के रूप में आपके बीच आए हैं” इस पर्व की भावनात्मक गरिमा को और गहरा करता है। उत्तराखंड की मातृशक्ति का स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास उनके लिए प्रदेश सेवा की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

महिला स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी अभियान, स्वरोजगार, आरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि जब महिलायें सशक्त होती हैं तो परिवार ही नहीं, पूरा समाज और प्रदेश मजबूत होता है।

रक्षाबंधन पर 28 और 29 अगस्त को महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा की सौगात भी बहनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण है।

आइए, इस रक्षाबंधन हम संकल्प लें : "हर बेटी सुरक्षित हो, हर बहन आत्मनिर्भर बने और हर माँ को सम्मान मिले। यही सच्चे अर्थों में रक्षाबंधन की भावना है।"

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23/08/2026

** रक्षा सूत्र में बंधा बहनों का स्नेह और विश्वास **

रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधा एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, अपनत्व और जीवनभर साथ निभाने का पवित्र संकल्प है। देहरादून के सर्वे स्टेडियम में आयोजित भव्य रक्षाबंधन समारोह इस आत्मीय रिश्ते की अद्भुत मिसाल बना, जहाँ करीब 20 हजार बहनों एवं मातृशक्ति ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों बहनों का यह स्नेह और आशीर्वाद गणेश जोशी के साथ उनके आत्मीय जुड़ाव और जनसेवा के प्रति विश्वास का प्रमाण है।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भावुक होकर कहा कि बहनों का स्नेह उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है और यही स्नेह उनकी सबसे बड़ी ताकत एवं प्रेरणा है। उन्होंने बहनों को परिवार का हिस्सा बताते हुए हर सुख-दु:ख में साथ खड़े रहने का संकल्प दोहराया।

गढ़वाली, कुमाऊँनी और नेपाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा यह आयोजन भाई-बहन के प्रेम के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति का भी सुंदर उत्सव बन गया। रक्षा सूत्र में बंधा यह स्नेह निश्चित ही रिश्तों की उस डोर को और मजबूत करता है, जो समाज को प्रेम और विश्वास से जोड़ती है।

बहनों के हाथों का स्पर्श, कलाई पर राखी बनकर आया,
बीस हजार दुआओं ने जैसे इस जीवन को अपना बनाया।
हर धागे में अटूट प्रेम, विश्वास और आशीषों का है संसार,
बहनों का यह स्नेह ही है, जीवन का सबसे अनमोल उपहार।

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बहुत सुंदर। प्रेरणाप्रद। "माता-पिता की सेवा—सभी तीर्थों से ऊपर"हमारे जीवन में माता-पिता का स्थान सबसे ऊँचा है। उन्होंने ...
23/08/2026

बहुत सुंदर। प्रेरणाप्रद।

"माता-पिता की सेवा—सभी तीर्थों से ऊपर"

हमारे जीवन में माता-पिता का स्थान सबसे ऊँचा है। उन्होंने हमें जन्म दिया, संस्कार दिए, उंगली पकड़कर चलना सिखाया और अपने सुखों का त्याग करके हमारे भविष्य को संवारने में अपना जीवन लगा दिया। इसलिए माता-पिता की सेवा करना केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि सबसे बड़ा धर्म है।
कहा जाता है कि संसार के सभी तीर्थों की यात्रा करने से जो पुण्य मिलता है, उससे भी बड़ा पुण्य अपने माता-पिता के चरणों की सेवा में मिलता है। मंदिरों में भगवान की तलाश करने से पहले हमें अपने घर में मौजूद उन देवतुल्य माता-पिता का सम्मान करना चाहिए, जिनके आशीर्वाद से हमारा जीवन सुखमय बनता है।
बुढ़ापे में माता-पिता को धन से अधिक हमारे समय, प्रेम और अपनत्व की आवश्यकता होती है। उनके साथ कुछ पल बैठकर बात करना, उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची सेवा है।

याद रखिए, माता-पिता का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। जब वे हमारे साथ हैं, तब उनकी सेवा का अवसर मत खोइए। क्योंकि दुनिया के किसी भी तीर्थ पर जाकर वह सुख नहीं मिल सकता, जो माता-पिता के चरणों में बैठकर मिलता है।

जिन्होंने अपनी इच्छाएँ त्याग दीं, ताकि हमारी हर इच्छा पूरी हो सके—वो हैं हमारे माँ-बाप। 🙏❤️

21/08/2026

** हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती मालदेवता की सास-बहू की जोड़ी **

रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी लोककला, हुनर और आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान देने का अवसर है। देहरादून के मालदेवता की लीला रावत और उनकी बहू अलका रावत ने इसी भावना को अपने परिश्रम से साकार किया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी इस सास-बहू की जोड़ी हाथ से आकर्षक राखियाँ तैयार कर अपने हुनर को स्वरोजगार में बदल रही है। पिछले वर्ष करीब 1,200 राखियाँ बनाकर उन्होंने लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा कमाया। इस वर्ष उनका लक्ष्य 2,000 से अधिक राखियाँ तैयार करना है।

अलका ने निजी नौकरी छोड़कर अपनी सास के साथ स्वरोजगार की राह चुनी और ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के माध्यम से राखियों के साथ स्थानीय एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का कारोबार भी आगे बढ़ा रही हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें ऑनलाइन ऑर्डर भी मिल रहे हैं।

रायपुर के साथ सहसपुर और डोईवाला की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलायें भी राखियाँ तैयार कर रही हैं। सचिवालय और देहरादून के प्रमुख मॉलों में इनके स्टॉल लगने से ग्रामीण महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।

इन महिलाओं की कहानी यह संदेश देती है कि हुनर, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो गाँव की बेटियाँ और बहुयें भी आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।
आइए, इस रक्षाबंधन स्थानीय महिलाओं के हाथों से बनी राखियाँ खरीदकर उनके हुनर और स्वावलंबन को प्रोत्साहित करें।

नारी शक्ति को सम्मान, स्थानीय हुनर को पहचान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा, "यही सशक्त समाज की पहचान है।" 🌸

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बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनायें💐सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में उपनिदेशक श्री बद्रीचंद्र नेगी जी को प्रिंट मीडिया...
21/08/2026

बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनायें💐

सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में उपनिदेशक श्री बद्रीचंद्र नेगी जी को प्रिंट मीडिया का प्रभार मिलने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनायें।

आप एक अनुभवी, कर्मठ एवं संवेदनशील अधिकारी के रूप में पत्रकारिता जगत और सूचना विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए सदैव जाने जाते हैं। इससे पूर्व जिला सूचना कार्यालय में सहायक निदेशक/जिला सूचना अधिकारी के पद पर रहते हुए आपने अपनी कुशल कार्यशैली, सरल व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण से कार्यालय की व्यवस्थाओं को चार-चाँद लगाए। आपके कार्यकाल में पत्रकारों के साथ आत्मीय संवाद और सहयोग की भावना ने विभाग के प्रति विश्वास को और मजबूत किया।

प्रिंट मीडिया का दायित्व मिलना निश्चित रूप से आपके अनुभव और कार्यकुशलता का सम्मान है।
पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व, सकारात्मक सोच और पत्रकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण से प्रदेश में प्रिंट मीडिया से जुड़े कार्यों को नई गति, नई दिशा और नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी।

इस नई जिम्मेदारी के लिए पुनः हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलकामनायें।

🌺अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने रचा गौरव का नया अध्याय🌺उत्तराखंड की देवभूमि केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और गौ...
20/08/2026

🌺अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने रचा गौरव का नया अध्याय🌺

उत्तराखंड की देवभूमि केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि यहाँ की प्रतिभाशाली युवा शक्ति के लिए भी पहचानी जाती है। अल्मोड़ा के युवा "रवि टम्टा" ने अपनी प्रतिभा, लगन, तकनीकी सोच और नवाचार के माध्यम से उत्तराखंड का नाम एक बार फिर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का प्रेरणादायी कार्य किया है।

रवि टम्टा ने इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल 'HAPIDA SKYNeX' के विकास और परीक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है। उनके इस अभिनव प्रयास को Influencer Book of World Records में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं की वैज्ञानिक सोच, सृजनात्मक क्षमता और कुछ नया कर दिखाने के जज्बे का प्रतीक है।

पहाड़ों में जीवन सदैव चुनौतियों से भरा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, सीमित संसाधन और दुर्गम क्षेत्र यहाँ के लोगों की परीक्षा लेते हैं। ऐसे वातावरण में यदि कोई युवा तकनीक और नवाचार के माध्यम से भविष्य की संभावनाओं को तलाशता है, तो यह पूरे समाज के लिए आशा और प्रेरणा का संदेश बन जाता है। रवि टम्टा का प्रयास इसी सोच को मजबूती देता है कि पहाड़ का युवा केवल परिस्थितियों का सामना करने वाला नहीं, बल्कि परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखने वाला भी है।

HAPIDA SKYNeX जैसी परिकल्पना भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन की नई संभावनाओं की ओर संकेत करती है। यदि ऐसे नवाचारों को उचित तकनीकी मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग, निवेश और अनुसंधान का साथ मिले, तो उत्तराखंड के युवा देश और दुनिया के सामने अनेक नए उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।

रवि टम्टा की यह उपलब्धि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं। सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन निरंतर मेहनत, धैर्य और नवाचार की भावना असंभव दिखने वाले लक्ष्य को भी संभव बना सकती है।

रवि टम्टा को इस प्रेरणादायी उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी प्रतिभा को नई उड़ान मिले, उनके प्रयोग सफलता की नई ऊँचाइयाँ छुयें और उनकी उपलब्धियाँ उत्तराखंड के अनगिनत युवाओं को अपने सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करती रहें।

सड़क से आगे… अब आसमान की ओर !




Ravi Tamta

20/08/2026

मा० मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के संबंध में दिए गए वक्तव्य की बाइट। Pushkar Singh Dhami




14/08/2026

** विदेश नीति पर बहस हो, अश्लीलता नहीं **
कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित से जुड़ा जो प्रसंग सामने आया, उसे देखकर एक नागरिक के रूप में मुझे गहरी शर्मिंदगी और निराशा हुई। विदेश नीति जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर चर्चा करते समय राजनीतिक मंच से ऐसी भाषा और ऐसे इशारों का प्रदर्शन भारतीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।
आज भारत की विदेश नीति को दुनिया भर में गंभीरता से देखा जाता है। भारत वैश्विक मंचों पर अपनी स्वतंत्र आवाज़, रणनीतिक क्षमता और बढ़ते प्रभाव के साथ उपस्थित है। ऐसे समय में देश के प्रधानमंत्री की विदेश नीति की आलोचना करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों, तर्क और वैकल्पिक नीति के आधार पर होनी चाहिए, व्यक्तिगत संकेतों, भद्दे मज़ाक या अशोभनीय टिप्पणियों के माध्यम से नहीं।
जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, विशेषकर किसी मित्र देश के प्रधानमंत्री का नाम राजनीतिक हास-परिहास में इस तरह घसीटा जाए, तो प्रश्न केवल एक नेता की भाषा का नहीं रह जाता; यह भारत की राजनीतिक संस्कृति और हमारी अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जुड़ जाता है। ऐसे मजाक स्वीकार्य नहीं होने चाहिए, हर तरफ इसकी आलोचना होने चाहिए तथा ऐसे व्यक्ति को देश के साथ-साथ वैश्विक स्टार पर माफ़ी माँगनी चाहिए।
लोकतंत्र में सरकार की आलोचना आवश्यक है, विपक्ष की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। लेकिन विपक्ष का नेता जब राष्ट्रीय स्तर के मंच पर बोलता है, तो उसके शब्द केवल उसके व्यक्तिगत शब्द नहीं रह जाते, वे देश की राजनीतिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए भाषा की मर्यादा और आचरण की गंभीरता अपेक्षित है।
मैं स्वयं इस पूरे प्रसंग से बेहद आहत और शर्मिंदा हूँ। किसी राजनीतिक दल से असहमति होना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र के प्रति सम्मान बनाए रखना उससे भी बड़ा दायित्व है। कांग्रेस की राजनीति और उसके नेताओं के ऐसे आचरण से मेरी निराशा और गहरी हुई है।
मेरी स्पष्ट आपत्ति किसी व्यक्ति के राजनीतिक मत से नहीं, बल्कि राजनीतिक असहमति को अश्लीलता और उपहास में बदल देने वाली मानसिकता से है।
देश की विदेश नीति पर बहस संसद में हो, सार्वजनिक मंचों पर हो, टीवी स्टूडियो में हो, लेकिन वह तथ्य, तर्क और गरिमा के साथ हो। भारत आज जिस वैश्विक सम्मान और प्रभाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसकी चर्चा करते हुए नेताओं से भी अपेक्षा है कि वे अपने शब्दों और व्यवहार से भारत की गरिमा बढ़ायें, घटायें नहीं।
राजनीति में कटुता स्वीकार की जा सकती है, मतभेद स्वीकार किए जा सकते हैं, तीखी आलोचना भी स्वीकार्य है, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर अशोभनीयता को मनोरंजन बना देना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
इसी कारण इस घटना के प्रति मेरा तीव्र विरोध है। मैं ऐसे राजनीतिक दल, ऐसी राजनीतिक संस्कृति का समर्थन नहीं कर सकता और न ही करना चाहता हूँ, जिसमें देशहित और विदेश नीति जैसे गंभीर विषयों पर भी मर्यादा को पीछे छोड़कर व्यक्तिगत एवं अश्लील संकेतों को हास्य का विषय बना दिया जाए।
** “नेताओं की पहचान केवल उनके भाषणों से नहीं, बल्कि उनके शब्दों की मर्यादा और आचरण की गरिमा से होती है। **
** "राष्ट्र की प्रतिष्ठा से बड़ा कोई राजनीतिक व्यंग्य नहीं—भारत की गरिमा के लिए हमें राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित का मार्ग चुनना होगा।" *






Pushkar Singh Dhami

11/08/2026

97 दिनों बाद घर लौटे उत्तराखंड के दो भाई, परिवार में लौटी खुशियाँ 🙏

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप एवं राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से रूस में करीब 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ निवासी दो भाई आनंद सिंह कार्की एवं भूपेंद्र सिंह कार्की आखिरकार सकुशल अपने घर लौट आए। लंबे इंतजार के बाद जब दोनों भाई परिवार के बीच पहुँचे तो परिजनों की आँखों में खुशी और राहत के आँसू छलक उठे।

दोनों युवकों को बेहतर रोजगार का भरोसा देकर एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से रूस भेजा गया था। परिवार के अनुसार, उनसे करीब ₹ 8 लाख लिए गए, लेकिन रूस पहुँचने के बाद उन्हें वादा किए गए रोजगार के बजाय अन्य कार्यों में लगाया गया और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
मामला मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में आते ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित वापसी के निर्देश दिए। राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय एवं रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार समन्वय करते हुए प्रयास जारी रखे और अंततः दोनों की सुरक्षित वतन वापसी संभव हुई।

घर लौटने के बाद मुख्यमंत्री जी ने दोनों भाइयों से फोन पर बात कर उनकी कुशलक्षेम जानी। परिजनों ने मुख्यमंत्री जी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और सहयोग करने वाले सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

मुश्किल समय में अपनों के साथ खड़ी सरकार ही भरोसे की सबसे बड़ी ताकत होती है।🙏

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