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श्रद्धेय डॉ. रामविलास शर्मा जी की पुण्यतिथि पर श्वेतवर्णा परिवार उनकी पावन स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।ह...
30/05/2026

श्रद्धेय डॉ. रामविलास शर्मा जी की पुण्यतिथि पर श्वेतवर्णा परिवार उनकी पावन स्मृति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

हिंदी साहित्य, भाषा-विज्ञान और आलोचना के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके विचार, उनकी लेखनी और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

"भाषा संस्कृति का वाहन है और उसका अंग भी।"

आपकी अमूल्य साहित्यिक विरासत को शत्-शत् नमन।

#श्वेतवर्णा #रामविलासशर्मा

बहुत अजीज़ है मुझको तुम्हारी महफ़िल लेकिन,मैं उठ के जा भी सकता हूँ अदब के साथ। #बशीरबद्र
28/05/2026

बहुत अजीज़ है मुझको तुम्हारी महफ़िल लेकिन,
मैं उठ के जा भी सकता हूँ अदब के साथ।

#बशीरबद्र

किताबों के संग उड़ान / कामना झा‘किताबों के संग उड़ान’ कामना झा द्वारा रचित एक प्रेरणादायी शैक्षिक कहानी-संग्रह है, जो सच...
28/05/2026

किताबों के संग उड़ान / कामना झा

‘किताबों के संग उड़ान’ कामना झा द्वारा रचित एक प्रेरणादायी शैक्षिक कहानी-संग्रह है, जो सच्ची घटनाओं पर आधारित होकर बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास की दिशा में मार्गदर्शन करता है। यह पुस्तक केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली सीखों का संग्रह है, जो पाठकों को सोचने, समझने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

इस कृति की विशेषता यह है कि इसमें प्रस्तुत प्रत्येक कहानी वास्तविक जीवन के अनुभवों से उपजी है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता और बढ़ जाती है। लेखक ने विद्यालय, परिवार और समाज के बीच के संबंधों को बड़ी सहजता से उजागर किया है, यह बताते हुए कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती है।

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

लोक संवेदना के स्वर सत्यनारायण / भगवती प्रसाद द्विवेदी लोक संवेदना के स्वर : सत्यनारायण हिंदी और भोजपुरी साहित्य के प्रख...
27/05/2026

लोक संवेदना के स्वर सत्यनारायण / भगवती प्रसाद द्विवेदी

लोक संवेदना के स्वर : सत्यनारायण हिंदी और भोजपुरी साहित्य के प्रख्यात जनकवि सत्यनारायण के बहुआयामी व्यक्तित्व, रचनात्मक अवदान और लोकधर्मी चेतना को समर्पित एक महत्वपूर्ण अभिनंदन-ग्रंथ है। इस पुस्तक में उनकी कविताओं, नवगीतों, नुक्कड़ कविताओं, संस्मरणों, वैचारिक लेखों और सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित विस्तृत आलेख संकलित हैं, जो उन्हें केवल एक कवि नहीं, बल्कि जनचेतना के सशक्त स्वर के रूप में स्थापित करते हैं।

यह ग्रंथ सत्यनारायण की उस काव्य-दृष्टि को सामने लाता है, जिसमें लोकजीवन की पीड़ा, संघर्ष, प्रतिरोध, मानवीय करुणा और सामाजिक न्याय की आकांक्षा गहरे रूप में अभिव्यक्त हुई है। यह पुस्तक उनके साहित्यिक जीवन, बिहार राज्यगीत के रचयिता के रूप में उनकी भूमिका, लोकभाषा और लोकसंस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा समकालीन हिंदी कविता में उनके विशिष्ट स्थान का समग्र दस्तावेज प्रस्तुत करती है।

(ख़रीद लिंक कमेंट में)

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

शब्दों से समाज को दिशा देने वाले महान साहित्यकारपदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की जयंती परश्वेतवर्णा परिवार की ओर से शत्-शत्...
27/05/2026

शब्दों से समाज को दिशा देने वाले महान साहित्यकार
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की जयंती पर
श्वेतवर्णा परिवार की ओर से शत्-शत् नमन।

उनकी लेखनी आज भी साहित्य प्रेमियों को प्रेरणा देती है।

#श्वेतवर्णा

मुझे न्याय चाहिए / डॉ. यू. एस. आनन्द‘मुझे न्याय चाहिए’ डॉ. यू. एस. आनंद का एक प्रभावशाली सामाजिक नाटक है, जो वर्तमान समा...
26/05/2026

मुझे न्याय चाहिए / डॉ. यू. एस. आनन्द

‘मुझे न्याय चाहिए’ डॉ. यू. एस. आनंद का एक प्रभावशाली सामाजिक नाटक है, जो वर्तमान समाज की विसंगतियों, अन्यायपूर्ण व्यवस्था और नैतिक पतन को तीव्र संवेदनात्मकता के साथ उजागर करता है। यह कृति केवल एक कथा नहीं, बल्कि उस पीड़ित मनुष्य की पुकार है, जो व्यवस्था के अन्याय के बीच न्याय की तलाश में भटक रहा है।

(ख़रीद लिंक कमेंट में)

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

अधखिले फूल / धर्मेन्द्र कुमार‘अधखिले फूल’ धर्मेन्द्र कुमार का प्रथम काव्य-संग्रह है, जिसमें बाल्यावस्था की तुकबंदियों से...
26/05/2026

अधखिले फूल / धर्मेन्द्र कुमार

‘अधखिले फूल’ धर्मेन्द्र कुमार का प्रथम काव्य-संग्रह है, जिसमें बाल्यावस्था की तुकबंदियों से लेकर किशोर मन की भावगत उथल-पुथल, जीवन-संघर्ष, प्रेम, करुणा, गरीबी, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदना तक की अनेक छवियाँ संकलित हैं।

‘अधखिले फूल’ उन मासूम, उपेक्षित और संघर्षरत जीवनों की कथा है, जो पूरी तरह खिलने से पहले ही परिस्थितियों की आँधी में झुलसने लगते हैं। इस काव्य-संग्रह में कवि की सहज भावुकता, लोक-संवेदना और मानवीय करुणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह संग्रह पाठकों को केवल भावुक नहीं करता, बल्कि समाज, मनुष्य और जीवन के प्रश्नों पर पुनर्विचार करने के लिए भी प्रेरित करता है।

(ख़रीद लिंक कमेंट में)

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

श्वेतवर्णा परिवार की ओर से श्री प्रकाश यादव भोला जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!
25/05/2026

श्वेतवर्णा परिवार की ओर से श्री प्रकाश यादव भोला जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!

गीत मुझे तुम पर लिखना है / हरिवंश प्रभातगीत मुझे तुम पर लिखना है’ पलामू के जन कवि हरिवंश प्रभात का ऐसा गीत-संग्रह है, जि...
24/05/2026

गीत मुझे तुम पर लिखना है / हरिवंश प्रभात

गीत मुझे तुम पर लिखना है’ पलामू के जन कवि हरिवंश प्रभात का ऐसा गीत-संग्रह है, जिसमें जीवन के अनेक रूप सहजता के साथ अभिव्यक्त होते हैं। इस संग्रह का केंद्र भाव प्रेम है, लेकिन यह प्रेम केवल एक संबंध तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षा, प्रकृति और मनुष्य के भीतर चलने वाले संवाद तक फैल जाता है।

इन गीतों में एक ओर निजी अनुभवों की ऊष्मा है, तो दूसरी ओर समाज और परिवेश की झलक भी मिलती है। कवि ने अपने आसपास के जीवन – गाँव की सादगी, शहर की हलचल, ऋतुओं के बदलाव और रिश्तों की जटिलता को सरल शब्दों में पिरोया है। कई गीत ऐसे हैं जो सीधे मन से निकलते प्रतीत होते हैं, जबकि कुछ पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

“शब्दों को अमर बनाने वाले महान शायरमजरूह सुल्तानपुरी जी को उनकी पुण्यतिथि परश्वेतवर्णा परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजल...
24/05/2026

“शब्दों को अमर बनाने वाले महान शायर
मजरूह सुल्तानपुरी जी को उनकी पुण्यतिथि पर
श्वेतवर्णा परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

उनकी लेखनी आज भी दिलों में जज़्बात जगाती है
और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

“मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया।”

#पुण्यतिथि #श्वेतवर्णा #मजरूहसुल्तानपुरी

सत्येन्द्र तिवारी जी के गीत और नवगीत संवेदना की उस धरती से उपजते हैं, जहाँ व्यक्ति का निजी दर्द समष्टि की पीड़ा से जुड़क...
23/05/2026

सत्येन्द्र तिवारी जी के गीत और नवगीत संवेदना की उस धरती से उपजते हैं, जहाँ व्यक्ति का निजी दर्द समष्टि की पीड़ा से जुड़कर व्यापक मानवीय सरोकारों का रूप ले लेता है। बदलते समय की अंधी दौड़, पश्चिमी प्रभाव, राजनीतिक विसंगतियाँ, वृद्धों की उपेक्षा, नैतिक अवमूल्यन और आम आदमी की संघर्षमय दिनचर्या; इन सबके बीच सत्येन्द्र जी का स्वर कहीं प्रतिरोध बनकर उभरता है तो कहीं करुणा और करुणाशीलता का मधुर आमंत्रण देता है।
इस संग्रह की विशेषता इसकी सहज, लयात्मक और गेय भाषा है। गीतों में जीवन-दर्शन है, रिश्तों की ऊष्मा है, प्रेम की तरलता है और समाज को जाग्रत करने का सजग स्वर भी। यहाँ वेदना है, पर निराशा नहीं; प्रश्न हैं, पर समाधान की आकांक्षा भी; विघटन है, पर समरसता का स्वप्न भी।

#श्वेतवर्णा #नयीआमद

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