10/05/2021
*क्या हमारे देश मे कॅरोना की दूसरी हत्यारी लहर चीन की देन हैं।*
आज ये शंका मेरे मन मे रह रह कर सवाल करती हैं, मुझे इसको साबित करने के लिये न ही तथ्य हैं और न ही सबूत पर हालात इस तरफ़ इशारा जरूर करते हैं।
सरहदों पर मात खाने के बाद औऱ मोदी जी के बढ़ते अंतराष्ट्रीय कद पर चीन मे भारी बौखलाहट थी।
अतंराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदलते घटनाक्रम और भारत को मिलता अंतररष्ट्रीय समर्थन चीन के लिये किरकिरी का सबब बना हुआ था।
भारत ने चौतरफा घराबन्दी कर रखी थीं, जिससे चीन कई मोर्चों पर हाथ खींचने पर मजबुर हुआ, तो क्या चीन जैसा धूर्त देश इतनी आसानी से हार मान कर बैठ सकता था।
मेरा मानना है, नहीँ, और चीन ने कही न कही, किसी न किसी रूप में हमारे देश पर अदृश्य विषाणु का प्रहार किया है जो हमारे देश मे कॅरोना की दूसरी लहर के रुप मे कहर बरपा हैं।
अगर इसमें थोड़ी सी भी सच्चाई हैं तो चीन ने बिना युद्ध लड़े हमको सामाजिक रूप में, राजनीतिक रूप में, आर्थिक रूप में और वैश्विक तौर पर भारी नुकसान पहुंचाया हैं और अभूतपूर्व क्षति पहुंचाई हैं।
चीन ने इस महामारी की आड़ मे देश के आर्थिक हितों को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया हैं और जान और माल की इतनी हानि पहुँचाया हैं कि शायद वो सीधे युद्ध मे भी नहीँ पहुंचा सकता था।
ऐसा प्रतीत होता हैं, चीन इस महामारी की आड़ में देश मे अनिश्चितता का माहौल खड़ा करना चाहता था।
ऐसा प्रतीत होता हैं, जनता में अविश्वास पैदा कर चीन देश मे राजनीतिक नेतृत्व के ख़िलाफ़ माहौल खड़ा करना चाहता हैं।
चीन देश मे अराजक माहौल पैदा कर देश मे राजनीतिक अस्थिरता लाना चाहता हैं।
ऐसा लगता हैं चीन अपनी अमानवीय चाल में कहीं न कहीं कामयाब भी हुआ, इस क्षद्म विषाणु हमले से देश पूरी तरह घुटनों पर आ गया।
देश के अंतराष्ट्रीय हितों को चीन ने चौतरफा चोट पहुंचाया।
मुझे ये कहने में कोई गुरेज नहीं कि धूर्त चीन की चालो को समय रहते भांपने और नाकाम करने में देश का शिषर्थ राजनीतिक नेतृत्व नाकाम रहा और देश चीन की चालो का शिकार हो गया।
देश के राजनीतिक नेतृत्व को ऐसी किसी भी संभावना को देखते हुये ऐसे जैविक हमले के लिये तैयार करना था और जरूरी मेडिकल उपकरणों और दवाइयों का प्रचुर मात्रा में प्रबंधन करना चाहिए था।
इसमें कोई दो राय नहीं हमसे चूक हुई और हमारा ध्यान इस तरफ गया ही नहीं, हमारी प्राथमिकता बदल गई, हमने चुनावों की तैयारी और धार्मिक आयोजनों पर ज्यादा ध्यान दिया , इधर हमारा ध्यान भटका और दुश्मन चीन ने चाल चल दी।
अब कोशिश , देश को इन हालातों से बाहर निकालने की होनी चाहिए और स्थिति संभलते ही इस दिशा से भी जाँच होनी चाहिए ,चाहे तो इसमें मित्र देशों की भी सहायता ली जा सकती हैं।
इस अदृश्य दुश्मन से सरकार अकेली लड़ नहीं सकती हैं , हमें भी इस मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे का हाथ थामना पड़ेगा।
अगर आपको लगता हैं मेरी शंका में रति भर भी सच्चाई हैं तो इसको आगे बढ़ाये।
धन्यवाद।
कमलेश्वर सिंह