23/08/2026
क्या महिला अधिकार और सुधार सिर्फ एक धर्म तक सीमित हैं?
छात्रों के बीच राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देकर महिलाओं की स्वतंत्रता पर बात की। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सुधार और बराबरी की बहस सिर्फ चुनिंदा धर्मग्रंथों तक ही सीमित रहनी चाहिए?
जब बात महिला सशक्तिकरण की हो, तो शरीयत या अन्य मजहबी संहिताओं में महिलाओं के अधिकारों, उत्तराधिकार और वैवाहिक कानूनों पर चुप्पी क्यों? अगर संविधान और लैंगिक समानता ही एकमात्र पैमाना है, तो यह हर वर्ग और हर धर्म पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
क्या यह वास्तविक महिला हितैषी सोच है या सिर्फ चयनात्मक राजनीति (Selective Secularism)? अपनी राय कमेंट में बताएं।