Lead Delhi

Lead Delhi Media and Law Association

14/02/2026

मौजपुर के लोग रात को घर से बाहर न निकले गलगोटू गैंग लगातार सक्रिय है
और दिल्ली की उत्तरी पूर्वी जिला की सब डिविजन भजनपुरा की पुलिस खासतौर पर जाफराबाद के पुलिस पूर्ण रूप से
निरस्त
अप्रभावी
निष्प्रभावित
जड़वत
मृतप्राय
निर्णयहीन
अविश्वसनीय
शिथिल
लचर
कमज़ोर
निरुत्साही
बेपरवाह
है

जान आपकी इनके भरोसे ना रहे अपनी जान अपनी सुरक्षा

18/11/2025

पंजाबी बाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत चौकी #मादीपुर की सीमाओं में स्थित #रविदास_मंदिर से सटी गली में, आपकी जानकारी के अनुसार, कालू नामक एक सज्जन मानो “कानून को जेब में रखकर” खुलेआम शराब की गाड़ियों की अवैध अनलोडिंग करवा रहे हैं — और आश्चर्य यह कि चौकी-इंचार्ज श्री नरेश अहलावत जी को शायद इस पूरे प्रकरण की भनक तक नहीं लग पाती।
क्या यह चमत्कारिक अनभिज्ञता है या फिर उदार प्रशासनिक मौन? इसका उत्तर केवल वही जानें।

महोदय, बड़ा विनम्र-सा प्रश्न उभरता है —
क्या अब आपके ‘होनहार’ अधिकारी कानून-व्यवस्था संभालने के साथ-साथ मदिरा-व्यापार के अनौपचारिक संरक्षक भी बन चुके हैं?
अगर नहीं, तो फिर यह निर्भीक संचालन किस दैवीय संरक्षण में फल-फूल रहा है?









दिल्ली पुलिस के संरचनात्मक दायरे में ऐसी गतिविधियाँ अगर खुलेआम घटित हो रही हैं, तो यह न केवल कानून की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ है बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी खुली परीक्षा है।

मैं यह स्पष्ट कर देना आवश्यक समझता हूँ कि इस पूरे प्रकरण पर शीघ्र ही विस्तृत सूचना प्राप्त करने हेतु एक विधिवत RTI आवेदन दायर किया जाएगा, जिसमें संबंधित अधिकारियों से उत्तर-तलब किया जाएगा कि—

अवैध गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं?

स्थानीय अधिकारी को घटनाओं की जानकारी क्यों नहीं?

अथवा यह “अनदेखी” सच में अनदेखी थी या सुव्यवस्थित सुविधा?

यदि विभाग ने अब भी चुप्पी साधे रखने का निश्चय किया है, तो कृपया अवगत रहे कि भविष्य में यह चुप्पी स्वयं एक साक्ष्य बन सकती है।

15/11/2025

🚨 बृजपुरी–मुस्तफाबाद–दयालपुर में अवैध बोरवेल का साम्राज्य: पुलिस–माफिया गठजोड़ का भंडाफोड़! 🚨
कानून सोया, माफिया जागा — और बीट ऑफिसर्स ने दोनों हाथों से ‘आशीर्वाद’ बरसाया!

नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाना क्षेत्र में अवैध बोरवेल का इतना विशाल और बेलगाम नेटवर्क सक्रिय है कि लगता है मानो पूरा इलाका ‘भूजल लूट महाकुंभ’ का आयोजक हो और पुलिस उसके मुख्य यजमान।
बृजपुरी, मानसिंह नगर, पुराना मुस्तफाबाद, न्यू मुस्तफाबाद, नेहरू विहार, बाबू नगर, महालक्ष्मी एन्क्लेव, भगत बिहार, मूंगा नगर, चाँद बाग, संजय चौक—इन सभी इलाकों में अवैध बोरवेल का भूमिगत साम्राज्य पुलिस की नाक के नीचे नहीं, बल्कि पुलिस की नाक के सहारे चल रहा है।

💧 जल संकट है गहरा, लेकिन अवैध बोरवेल माफिया को पुलिस की ‘खुली छूट’ और भी गहरी
दयालपुर क्षेत्र पहले से ही जल संकट का शिकार है, लेकिन यहाँ के बीट ऑफिसर्स मानो पूरे क्षेत्र को सूखा मरुस्थल बनाने की ‘विशेष परियोजना’ पर काम कर रहे हों। माफिया बेखौफ हैं क्योंकि उन्हें पता है—
“पुलिस संरक्षण में पनपता अपराध कभी नहीं रुकता, वह केवल फलता-फूलता है।”

🔻 संरक्षण का संगठित आरोप
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि अवैध बोरवेल गिरोह को दयालपुर थाने के बीट ऑफिसर्स की तरफ से सीधा, स्पष्ट और बेझिझक संरक्षण प्राप्त है—जैसे यह कोई सरकारी लाइसेंस हो।

🔻 ₹25,000 प्रति बोरवेल की वसूली — पुलिस की ‘अघोषित फी-लिस्ट’!
सूत्रों के मुताबिक:
▪ प्रति अवैध बोरवेल ₹25,000 की मोटी रकम वसूली जाती है।
▪ ₹15,000 सीधे दयालपुर थानाध्यक्ष की थैली में।
▪ शेष ₹10,000 बीट स्तर पर ‘भाईचारे के भाव’ में आपस में बाँट लिए जाते हैं।

यह रकम इतनी नियमित है कि इसे ‘साप्ताहिक दान’ कहना भी गलत नहीं होगा।

📛 लगातार शिकायतें — और लगातार प्रशासनिक बहरेपन का प्रदर्शन!
शिकायतें नियमित रूप से मिल रही हैं, वीडियो और फोटो साक्ष्य खुलेआम सामने आ रहे हैं, लेकिन अवैध बोरवेल माफिया उतनी ही निर्भीकता से जमीन का सीना चीरते जा रहे हैं।
किसी भी जिम्मेदार पुलिस फोर्स के लिए यह शर्म, विफलता और मिलीभगत—तीनों का संगम है।

🔥 ताज़ा मामला: पुराना मुस्तफाबाद, C-60, गली नंबर 11, जामा मस्जिद के पास
यहाँ पर अवैध बोरवेल के लिए खुलेआम गड्ढे खोदे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार—
बीट ऑफिसर्स का संरक्षण अभी भी बरकरार है, और बोरवेल मशीन की आवाज़ ठीक उसी समय गूँजती है जब कानून सो जाता है और ‘कल्याणकारी पुलिस’ जाग जाती है।

यह तस्वीर स्पष्ट है—
दयालपुर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी है;
बल्कि जिम्मेदारी को माफियाओं के हवाले कर दिया है।

🏛️ एसडीएम की चुप्पी: प्रशासनिक मौन या प्रशासनिक मिलीभगत?
अवैध बोरवेल रोकने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं—एसडीएम भी इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण अधिकारी हैं।
लेकिन यहाँ पर चुप्पी इतनी भारी है कि लगता है मानो पूरा विभाग किसी गहरे सन्नाटे की रिश्वती निद्रा में सो रहा हो।

जनता अब सवाल पूछ रही है:
क्या यह केवल लापरवाही है,
या पुलिस–प्रशासन–माफिया का संयुक्त व्यवसाय मॉडल?

👥 जनता की मांग — उच्चस्तरीय जाँच और सख्त कार्रवाई
लोग अब इस पूरे गोरखधंधे की उच्च-स्तरीय जाँच, पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच, और भूजल बचाने के लिए कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जल संकट मजाक नहीं—यह पूरे क्षेत्र के भविष्य का सवाल है।

📌 नोट:
उत्तर पूर्वी दिल्ली थाना दयालपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध बोरवेल—समर सिविल—की हर गतिविधि का हम प्रतिदिन लाइव अपडेट जारी करेंगे और उच्च अधिकारियों एवं संबंधित विभागों को लगातार जवाबदेही के कटघरे में खड़ा करते रहेंगे।



























15/11/2025

🚨 थाना क्षेत्र दयालपुर — ‘कानून ठेका सेवा’ का नया अध्याय शुरू!
नाम/ मुकेश
काम/ हरियाणा ब्रांड की देसी शराब व अन्य मादक पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति
पता/ रिंदा रेस्टोरेंट के सामने, गली नंबर 5, सादतपुर

जहां कानून कहता है प्रतिबंध,
वहां यह ठिकाना दिखाता है प्रबंधन —
गेट बंद, "चमत्कारी खिड़की" खुली, और वही खिड़की से बहता है नशे का कारोबार।
लगता है, इस खिड़की ने पुलिस की नजर को भी ‘आंखमिचोली’ में बदल दिया है।

धन्यवाद?
या फिर कानून के निरंतर शव-यात्रा पर शोक?
कृपया किस बात का — कार्रवाई या दिखावे?































15/11/2025

🚨 थाना क्षेत्र नंद नगरी — कानून नहीं, किस्मत का खेल चल रहा है! 🚨

नाम/ अहसान, पप्पू, जाहिद
काम/ सट्टा—पर्ची, चिड़िया, कबूतर का खुला साम्राज्य
कहां से संचालित?
📍 E-57 सुन्दर नगरी की झुग्गी में, अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट के सामने, ‘कृष्णा का ऑफिस’ नामक अनौपचारिक कैसिनो।

और सबसे दिलचस्प पात्र…
👉 बीट ऑफिसर — पदम साहब,
जिनकी मौजूदगी में यह कारोबार ऐसे फल-फूल रहा है
जैसे पुलिस का साइलेंट परमिशन लेटर लगा हो।

जहां कानून को सख़्ती दिखानी चाहिए,
वहां यह पूरा ‘सट्टा मठ’ पुलिस की आंखों के सामने
धर्मार्थ सेवा की तरह चलता नजर आता है।

पूछने पर यही कहा जाता है कि
“टीम पेट्रोलिंग पर है।”
लगता है पेट्रोलिंग अवैध धंधों की सुरक्षा पेट्रोलिंग बन चुकी है।

सुन्दर नगरी में कानून का हाल ऐसा है कि
सट्टा-पर्ची खुलकर उड़ती है
और पुलिस केवल पंख गिनती रहती है।

यह कार्यालय—कृष्णा का ऑफिस—
अब क्षेत्र का नया ‘भाग्य निर्धारण केंद्र’ बन चुका है,
जहां लोग किस्मत आजमाते हैं
और पुलिस अपनी निष्क्रियता का रिकॉर्ड बढ़ाती है।

कृपया इस अवैध कारोबार को बंद कराएं—
क्योंकि धन्यवाद से पहले
RTI के नोटिस तैयार हो चुके हैं।
नोटिंग शीट से लेकर बीट डायरी तक—
हर पन्ना, हर दस्तावेज मांगा जाएगा।

अब कार्रवाई
सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं,
जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।






























15/11/2025

📰 जल संकट के बीच ‘खुले दरबार’: अवैध बोरवेल माफिया पर पुलिस का ‘वरदान’, कानून बन गया है तमाशा!

उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर क्षेत्र में अवैध बोरवेल द्वारा भूजल का निर्मम दोहन बदस्तूर जारी है,
और इस पूरे धंधे पर स्थानीय पुलिस का वो मौन आश्रय मंडरा रहा है, जिसे देखकर लगता है कि कानून नहीं, माफियाओं की उंगलियों पर नाचती प्रशासनिक कठपुतलियाँ काम कर रही हैं।

📍 पुराना मुस्तफाबाद, गली नंबर 14, मकान नंबर C-165, दिल्ली-94 — यही वह स्थान है जहाँ खुलेआम जमीन का सीना चीरकर पानी चूसने की ‘सुपरफास्ट सेवा’ चल रही है।
रिया मिश्रा द्वारा GPS लोकेशन और वीडियो साक्ष्यों सहित Mishra Twitter handle ID पर डाली गई शिकायतें, और 112 नंबर पर दी गई सूचना — सबकुछ हवा में।
जैसे पुलिस की नोटबुक में “अवैध” शब्द अब सिर्फ मुज़ाहिरों के लिए आरक्षित रह गया हो, माफियाओं के लिए नहीं।

🚨 पुलिस संरक्षण का महाघोटाला: हेड कांस्टेबल संदीप पर गंभीर आरोप

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे ‘जल लूट महोत्सव’ का मुख्य महायजमान पुराना मुस्तफाबाद का बीट ऑफिसर— हेड कांस्टेबल संदीप।
आरोप इतने स्पष्ट हैं कि पूछताछ की ज़रूरत ही नहीं लगती—
▪ प्रति बोरवेल ₹25,000 की टैक्स-फ्री वसूली,
▪ जिसमें से ₹15,000 दयालपुर थानाध्यक्ष की थैली में,
▪ और बचे ₹10,000 बीट स्तर पर आपसी भाईचारे की तरह बाँट दिए जाते हैं।

ताजा वीडियो में स्पष्ट दिख रही छोटी बोरवेल मशीन यह साबित करती है कि दिल्ली के भूजल संरक्षण नियम अब केवल फाइलों की कब्रगाह में दफन दस्तावेज बनकर रह गए हैं।

बताया जा रहा है कि हेड कांस्टेबल संदीप का माफियाओं को दिया गया 'आशीर्वचन' कुछ ऐसा है—
"तुम बोरवेल करो, बाकी मैं देख लूंगा।"
अर्थात: कानून पर ताला, और अवैध धंधे पर पुलिस का स्नान कराने लायक पवित्र जल।

🏛️ एसडीएम और संबंधित विभागों की रहस्यमयी चुप्पी : प्रशासनिक मौन या साजिश?

इस अवैध जल-लूट को रोकना केवल पुलिस का कार्य नहीं था — एसडीएम, दिल्ली जल बोर्ड, DM कार्यालय—सबकी संयुक्त जिम्मेदारी थी।
लेकिन यहाँ पर चुप्पी इतनी गहरी है कि लगता है मानो पूरा विभाग ‘निरीक्षण’ नहीं, बल्कि नाटकीय बेहोशी में चला गया हो।

NGT ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि अवैध बोरवेल पर कठोर कार्रवाई की जाए, लेकिन लगता है आदेशों का वजन सरकारी टेबल पर रखे चाय के कप से भी हल्का है।

स्थानिय लोग अब सीधे पूछ रहे हैं—
क्या पुलिस और विभाग अवैध बोरवेल माफियाओं के हिस्सेदार हैं?
क्योंकि 112 पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई का न होना सिर्फ लापरवाही नहीं — यह प्रशासनिक दिवालियापन है।

🛑 कानूनी प्रावधान और चेतावनी

दिल्ली में अवैध बोरवेल प्रतिबंधित है। NGT के निर्देशों के अनुसार भारी भरकम Environmental Damage Compensation (EDC) और सख्त दंड का कानून में स्पष्ट प्रावधान है।

इस मामले में उच्च अधिकारियों से तत्काल माँग:

▪ मकान नंबर C-165, गली नंबर 14, पुराना मुस्तफाबाद, दिल्ली-94 पर चल रहा अवैध बोरवेल तत्काल प्रभाव से सील किया जाए।
▪ और यह भी देखा जाए कि हमारी यह रिपोर्ट छपने के बाद पुलिस जागती है या अपनी ‘पारम्परिक निद्रा’ को ही धर्म मानकर चलती रहती है।

और स्पष्ट चेतावनी —
👉 इस प्रकरण में जल्द ही आरटीआई दायर कर अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा।
अगर कोई सोचता है कि यह मुद्दा दो ट्वीटों में खत्म हो जाएगा, तो वह प्रशासन की पुरानी सोच का पुराना चश्मा पहन रहा है।

























15/11/2025

🚫 ई-रिक्शा प्रतिबंध: काग़ज़ पर ‘शून्य’, सड़क पर ‘पूर्ण स्वतंत्रता’

रोड नंबर 57 पर ई-रिक्शा, जिन्हें हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में उनकी अनियंत्रित प्रजनन-गति और नियम-प्रतिरोधी प्रकृति के कारण “वायरस” का नाम दिया है, काग़ज़ों में “पूर्णतः प्रतिबंधित” बताए जाते हैं।
पर हक़ीक़त में वही “वायरस” हर मोड़ पर ऐसे दौड़ रहे हैं मानो कानून नहीं, कानून-निर्माता ही इन्हें विशेष छूट देकर भेजते हों।

ये “वायरस” पुलिस कर्मियों की आंखों के सामने से निकलते हैं —
नियमों का नहीं, प्रशासन की अनुमति का प्रमाण-पत्र लिए हुए।
उनकी गति ऐसी कि लगे जैसे दिल्ली के ट्रैफिक नियमों पर किसी अदृश्य सत्ता ने म्यूट बटन दबा दिया हो।

दिल्ली सरकार ने काग़ज़ों पर ई-रिक्शा पर रोक लगाकर शायद सोचा होगा कि अव्यवस्था पर अंकुश लगेगा,
लेकिन रोड नंबर 57 पर हालात यह बताते हैं कि रोक तो बस जनता के भरोसे पर लगी है,
बाकी “वायरस बेड़ा” अबाध, निर्भीक और सिस्टम की संपूर्ण सहमति के साथ दौड़ रहा है।

दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस, जो अन्य जगहों पर छोटे से छोटे उल्लंघन पर शिकंजा कसने में सिद्धहस्त मानी जाती है,
गांधीनगर सर्कल में इन “वायरसों” के आगे ऐसी चुप्पी साधे हुए है,
जैसे बैन तोड़ना नहीं, बैन लागू करना अपराध हो।

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग के कैमरे इस सच्चाई को रिकॉर्ड कर चुके हैं—
पुलिस की मौजूदगी में, प्रतिबंधित घोषित ई-रिक्शा निर्भीक रूप से फर्राटा भरते हुए,
न सिर्फ नियमों का उपहास उड़ा रहे हैं, बल्कि
प्रशासनिक इच्छाशक्ति की पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट भी सड़क पर ही तैयार कर रहे हैं।

और यही वह बिंदु है जहां यह पूरा तंत्र,
कानून, जनता और लोकतांत्रिक जवाबदेही — तीनों के साथ
एक साथ विश्वासघात करता दिखाई देता है।
⚠️ प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी

यह पूरी रिपोर्ट — कैमरे, प्रत्यक्षदर्शी, तारीख, समय और लोकेशन सहित —
आगामी समय में RTI के माध्यम से पूछी जाएगी।
उस समय “कार्रवाई जारी है”, “जांच की जाएगी”, “जानकारी उपलब्ध नहीं” जैसी साधारण पंक्तियाँ
इस जबरदस्त दस्तावेज़ी साक्ष्य के सामने किसी भी अधिकारी को बचा नहीं पाएँगी।

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डीडीए के इंजीनियर वाकई “मल्टीटास्किंग जीनियस” हैं — विकास भी करते हैं, कब्ज़ा भी करवाते हैं, और सबसे बढ़िया बात — “रेड” ...
14/11/2025

डीडीए के इंजीनियर वाकई “मल्टीटास्किंग जीनियस” हैं — विकास भी करते हैं, कब्ज़ा भी करवाते हैं, और सबसे बढ़िया बात — “रेड” आने से पहले ही तैयारी कर लेते हैं!”

बात हो रही है के की, जहाँ इंजीनियरों और टेंट माफिया की जोड़ी ने ऐसा “सांठगांठ मॉडल” खड़ा कर दिया है कि MBA के कोर्स में पढ़ाया जा सके।

बुधवार को प्लॉट नंबर 36 पर चल रहे दो अवैध टेंट हाउस — और — का पर्दाफाश हुआ, तो गुरुवार को आनन-फानन में कार्रवाई भी हो गई।
वाह! इतनी फुर्ती आम नागरिकों की शिकायत पर कभी दिखाई होती, तो दिल्ली अब तक सिंगापुर बन चुकी होती।

लेकिन ज़रा आगे बढ़िए — प्लॉट नंबर 63, जहाँ ने खुलेआम कब्ज़ा जमा रखा है, वहाँ डीडीए का बुलडोज़र मानो ध्यान मुद्रा में बैठ गया हो।
क्योंकि, सूत्रों की मानें तो यहाँ के “कलाकार” जी पहले ही अपना किरदार निभा चुके हैं — “नजराना” लेकर माफिया को VIP Immunity का भरोसा दे आए हैं।

कहा जा रहा है कि से लेकर तक सबकी “मंथली” तय है। इसलिए जब ऊपर से “डंडा” चलता है, तो कार्रवाई दिखा दी जाती है — मगर कमाई के पाइपलाइन कनेक्शन कभी नहीं कटते।

अब असली सवाल यह है कि पुलिस इस खेल में ‘धर्मनिरपेक्ष साधु’ बनेगी या ाहब भी “साझेदारी” में हैं?
क्योंकि जनता अब तमाशबीन नहीं — इस बार RTI की धार से जवाब निकलेगा, और तब छिपी फाइलें भी बोल उठेंगी कि कौन “प्लान पास” कर रहा था, और कौन “प्लॉट बेच” रहा था।

🤬“जब ईमानदारी को ट्रांसफर लेटर और भ्रष्टाचार को प्रमोशन लेटर मिल जाए — तब समझिए अस्पताल नहीं, ‘संविधान की आईसीयू’ चल रही...
14/11/2025

🤬“जब ईमानदारी को ट्रांसफर लेटर और भ्रष्टाचार को प्रमोशन लेटर मिल जाए — तब समझिए अस्पताल नहीं, ‘संविधान की आईसीयू’ चल रही है।”🤬

🏥VMMC & Safdarjung Hospital🏥 में एक Sr. Admin Officer — SH. ASHA RAM MEENA की कारगुज़ारी ने सरकारी व्यवस्था को निजी लिमिटेड में बदल दिया —
सरकारी आवास से चला STAR SALES & HOSPITALITY का साम्राज्य,
GST में दर्ज वही मोबाइल नंबर — जो सरकारी फाइलों में दर्ज था।

खरीददार भी वही, सप्लायर भी वही, और भुगतान की मंज़ूरी भी उसी के हस्ताक्षर से!
यह ‘सिस्टम की सर्जरी’ नहीं, ‘सिस्टम की शव परीक्षा’ है —
एक ऐसा Conflict of Interest का क्लासरूम केस,
जहां ऑडिट फाइलें जलाकर ईमानदारी की चिता सजाई जाती है।

यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, यह संस्थागत नैतिक पतन का महाभोज है —
जहां बेईमानी को नीति और नीति को नौकरशाही का आभूषण बना दिया गया है।

अब यह प्रकरण सिर्फ़ शिकायत की सीमाओं में नहीं बंधेगा।
आगामी कार्यवाही Prevention of Corruption Act, 1988 की धाराओं के अधीन विधिवत आरंभ की जाएगी —
जहां हर बिल, हर कॉल रिकॉर्ड, और हर भुगतान का हिसाब
‘कानूनी अभियोजन के मंच’ पर रखा जाएगा, न कि विभागीय फाइलों की तह में।

इस पूरे भ्रष्ट नेटवर्क में SH. ASHA RAM MEENA, AJAY SHARMA, और OM PRAKASH (O.P.) SHARMA के गठजोड़ ने
VMMC & Safdarjung Hospital को निजी लाभ का ठेका घर बना दिया है।

आरटीआई और विधिक प्रावधानों के ज़रिए हर बिल, हर कॉल रिकॉर्ड, और हर ट्रांज़ैक्शन का खुलासा कराया जाएगा।
सावधान रहें सारे अधिकारी — अब यह मामला ‘विभागीय फाइलों’ में नहीं, ‘अदालत की फाइलों’ में खुलेगा।





























14/11/2025

दक्षिणी दिल्ली का इलाक़ा इन दिनों एक अनोखे “शहरी चमत्कार” का गवाह बन रहा है—जहाँ अवैध प्लॉटिंग इतनी बेखटके, इतनी निर्बाध और इतनी सहजता से चल रही है मानो यह कोई सरकारी स्वीकृत तीर्थ-यात्रा हो।

जनता का मानना है कि यह ऐसा उपक्रम है, जिसे डीएम, एसडीएम, स्थानीय पुलिस और निगम की ऊँची दिमाग़ी कृपा के बिना सम्पन्न करना लगभग उतना ही असंभव है जितना बिना बैटरी के मोबाइल चलाना।

यह भूमि Gold Horticulture (P) Ltd. के की बताई जाती है, और खसरा नंबर 32/7/1, 7/2, 8/1, 14 पर आरोपों के अनुसार प्लॉटिंग का कारोबार ऐसे फल-फूल रहा है जैसे किसी ने पूरे क्षेत्र को “रेवेन्यू एक्सप्रेसवे” घोषित कर रखा हो।

लोगों का तंज है कि , और के “कर्तव्यनिष्ठ” अधिकारी इतने सहृदय हैं कि काम कहीं रुके ही नहीं—
और सचमुच, रुका भी नहीं।

हालाँकि ने कागज़ी फरमान जारी कर कार्य रोकने का आदेश दिया था, जिसकी सूचना , और पुलिस को भी दे दी गई थी, परन्तु धरातल पर इसका परिणाम बिल्कुल वैसा ही हुआ जैसे बारिश में बिजली का बिल:
सबको पता है, पर कोई करता कुछ नहीं।

लोग कहते हैं, आदेश का वास्तविक उद्देश्य शायद काम रुकवाना नहीं था—
बल्कि यह संकेत देना था कि
“भाइयों, अवसर आ गया है… अपनी-अपनी थाली सँभाल लो!”

क्योंकि प्लॉटिंग जारी रही, कमाई भी जारी रही, और आदेश जारी करने वाले साहब भी अवलोकन मुद्रा में शांत दिखाई दिए।

आख़िर यह की यूपी तो है नहीं जहाँ भूमाफ़िया देखकर मशीनें गरजने लगें;
यहाँ तो “रामराज्य” है—
जहाँ जिसे भी सूचना दो, वह अपना टिफ़िन लेकर किसी न किसी को तत्काल सेवा पर भेज देता है।

इस क्षेत्र से जुड़े कई विभागों में तैनात अधिकारियों पर वर्षों से “संगठित वसूली” के आरोप चर्चा में रहे हैं—और वर्तमान परिदृश्य देखकर लगता है कि परंपरा को अत्यंत मर्मस्पर्शी निरंतरता देकर निभाया जा रहा है।

अब आगामी समय में यह पूरा मामला RTI की सर्जिकल धार पर भी परखा जाएगा—
और उस वक़्त हर विभाग को अपने उत्तर सिर्फ़ फाइलों में नहीं, रिकॉर्ड की सच्चाई पर देने होंगे।


14/11/2025

🚌 पॉइंट नंबर 9: अवैधता का ‘वैध’ बस अड्डा — जहां कानून ठहरता है, और डग्गामार चलती है

गांधीनगर सर्कल का पॉइंट नंबर 9 दिल्ली का वह अनौपचारिक, पर प्रशासनिक मौन से अधिकृत बस अड्डा है
जहां डग्गामार बसें ऐसे खड़ी मिलती हैं जैसे यह सड़क नहीं,
लोकल सत्ता द्वारा मान्यता प्राप्त टर्मिनल हो।

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग की फुटेज इस काली सच्चाई को निर्वस्त्र करती है—
ये अवैध बसें दिन ढलते ही लाइन बनाकर ऐसे जम जाती हैं
जैसे शहर की धमनियों पर किसी ने
अवैध परिवहन का आधिकारिक समारोह आयोजित कर दिया हो।

बसों के भीतर भीड़ का जमघट, बाहर खड़े यात्रियों की लाचारी,
और सड़क पर खुलेआम होता लोड़-अनलोड का महा-व्यापार—
सब कुछ इतना निर्लज्जता से होता है
कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का तंत्रिका तंत्र सुन्न हो जाना चाहिए,
यदि वह वास्तव में “जिम्मेदार” हो।

यह दृश्य किसी थर्ड-ग्रेड रेज़िडेंसी एरिया का नहीं,
दिल्ली के दिल में चल रही वह पैरेलल ट्रांसपोर्ट गवर्नमेंट है
जिसे शायद ट्रैफिक सर्कल का मौन,
और स्थानीय प्रशासन की असाधारण चुप्पी
सुरक्षा कवर प्रदान करती है।

डग्गामार बसों के लिए यह पॉइंट
केवल पार्किंग नहीं—
यह नो-टेंडर, नो-लाइसेंस, नो-परमिट, पर फुल-ऑपरेशन वाला राजस्व मंडप बन चुका है,
जहां हर बस आराम से अपना “रोज़गार” चलाती है,
और कानून दूर खड़े होकर
अपना अपमान देखता रहता है।

हमारी कैमरा रिकॉर्डिंग में
⛔ सवारियों को ठूंसा जाता हुआ,
⛔ माल को खुलेआम उतारा-चढ़ाया जाता हुआ,
⛔ ट्रैफिक के बीच रोड को गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जाता हुआ,
सब कुछ दर्ज है।

यह केवल अवैध गतिविधि नहीं —
यह ट्रैफिक कानूनों का योजनाबद्ध दाह-संस्कार है।
और चिता की आग में घी डालने का काम
प्रशासन की घोर चुप्पी करती है।

⚠️ प्रशासन के लिए स्पष्ट, ठोस चेतावनी

यह पूरा मामला —
तारीख, समय, वीडियो, फोटो और लाइव ऑन-ग्राउंड गवाहियों के साथ
हमने दस्तावेज़ीकृत कर लिया है।

आने वाले समय में RTI के माध्यम से
इस पूरे प्रकरण की एक-एक सूचना,
एक-एक कार्रवाई (या उसकी अनुपस्थिति),
एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी
पूछी जाएगी।

उस समय
“मामला संज्ञान में आया है”,
“टीम भेजी गई थी”,
“जांच जारी है”
जैसे पुराने घिसे-पिटे वाक्य
इस अटल दृश्य-साक्ष्य के सामने
किसी भी अधिकारी की ढाल नहीं बन पाएँगे।





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