15/11/2025
🚨 बृजपुरी–मुस्तफाबाद–दयालपुर में अवैध बोरवेल का साम्राज्य: पुलिस–माफिया गठजोड़ का भंडाफोड़! 🚨
कानून सोया, माफिया जागा — और बीट ऑफिसर्स ने दोनों हाथों से ‘आशीर्वाद’ बरसाया!
नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाना क्षेत्र में अवैध बोरवेल का इतना विशाल और बेलगाम नेटवर्क सक्रिय है कि लगता है मानो पूरा इलाका ‘भूजल लूट महाकुंभ’ का आयोजक हो और पुलिस उसके मुख्य यजमान।
बृजपुरी, मानसिंह नगर, पुराना मुस्तफाबाद, न्यू मुस्तफाबाद, नेहरू विहार, बाबू नगर, महालक्ष्मी एन्क्लेव, भगत बिहार, मूंगा नगर, चाँद बाग, संजय चौक—इन सभी इलाकों में अवैध बोरवेल का भूमिगत साम्राज्य पुलिस की नाक के नीचे नहीं, बल्कि पुलिस की नाक के सहारे चल रहा है।
💧 जल संकट है गहरा, लेकिन अवैध बोरवेल माफिया को पुलिस की ‘खुली छूट’ और भी गहरी
दयालपुर क्षेत्र पहले से ही जल संकट का शिकार है, लेकिन यहाँ के बीट ऑफिसर्स मानो पूरे क्षेत्र को सूखा मरुस्थल बनाने की ‘विशेष परियोजना’ पर काम कर रहे हों। माफिया बेखौफ हैं क्योंकि उन्हें पता है—
“पुलिस संरक्षण में पनपता अपराध कभी नहीं रुकता, वह केवल फलता-फूलता है।”
🔻 संरक्षण का संगठित आरोप
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि अवैध बोरवेल गिरोह को दयालपुर थाने के बीट ऑफिसर्स की तरफ से सीधा, स्पष्ट और बेझिझक संरक्षण प्राप्त है—जैसे यह कोई सरकारी लाइसेंस हो।
🔻 ₹25,000 प्रति बोरवेल की वसूली — पुलिस की ‘अघोषित फी-लिस्ट’!
सूत्रों के मुताबिक:
▪ प्रति अवैध बोरवेल ₹25,000 की मोटी रकम वसूली जाती है।
▪ ₹15,000 सीधे दयालपुर थानाध्यक्ष की थैली में।
▪ शेष ₹10,000 बीट स्तर पर ‘भाईचारे के भाव’ में आपस में बाँट लिए जाते हैं।
यह रकम इतनी नियमित है कि इसे ‘साप्ताहिक दान’ कहना भी गलत नहीं होगा।
📛 लगातार शिकायतें — और लगातार प्रशासनिक बहरेपन का प्रदर्शन!
शिकायतें नियमित रूप से मिल रही हैं, वीडियो और फोटो साक्ष्य खुलेआम सामने आ रहे हैं, लेकिन अवैध बोरवेल माफिया उतनी ही निर्भीकता से जमीन का सीना चीरते जा रहे हैं।
किसी भी जिम्मेदार पुलिस फोर्स के लिए यह शर्म, विफलता और मिलीभगत—तीनों का संगम है।
🔥 ताज़ा मामला: पुराना मुस्तफाबाद, C-60, गली नंबर 11, जामा मस्जिद के पास
यहाँ पर अवैध बोरवेल के लिए खुलेआम गड्ढे खोदे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार—
बीट ऑफिसर्स का संरक्षण अभी भी बरकरार है, और बोरवेल मशीन की आवाज़ ठीक उसी समय गूँजती है जब कानून सो जाता है और ‘कल्याणकारी पुलिस’ जाग जाती है।
यह तस्वीर स्पष्ट है—
दयालपुर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी है;
बल्कि जिम्मेदारी को माफियाओं के हवाले कर दिया है।
🏛️ एसडीएम की चुप्पी: प्रशासनिक मौन या प्रशासनिक मिलीभगत?
अवैध बोरवेल रोकने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं—एसडीएम भी इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण अधिकारी हैं।
लेकिन यहाँ पर चुप्पी इतनी भारी है कि लगता है मानो पूरा विभाग किसी गहरे सन्नाटे की रिश्वती निद्रा में सो रहा हो।
जनता अब सवाल पूछ रही है:
क्या यह केवल लापरवाही है,
या पुलिस–प्रशासन–माफिया का संयुक्त व्यवसाय मॉडल?
👥 जनता की मांग — उच्चस्तरीय जाँच और सख्त कार्रवाई
लोग अब इस पूरे गोरखधंधे की उच्च-स्तरीय जाँच, पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच, और भूजल बचाने के लिए कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जल संकट मजाक नहीं—यह पूरे क्षेत्र के भविष्य का सवाल है।
📌 नोट:
उत्तर पूर्वी दिल्ली थाना दयालपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध बोरवेल—समर सिविल—की हर गतिविधि का हम प्रतिदिन लाइव अपडेट जारी करेंगे और उच्च अधिकारियों एवं संबंधित विभागों को लगातार जवाबदेही के कटघरे में खड़ा करते रहेंगे।