02/11/2021
【अमिताभ रंजन, (वरिष्ठ पत्रकार)】
13 राज्यों में लोकसभा की तीन और विधानसभा की 29 सीटों के लिए उपचुनाव के रिजल्ट पर गौर करें तो हर जगह सत्ताधारी दल ने ही बाजी मारी है, हिमाचल प्रदेश को अगर छोड़ दें तो वहां बीजेपी को कांग्रेस पूरी तरह मात दी है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने चारों सीटें जीती हैं, मध्य प्रदेश में दो सीटों पर भाजपा और एक पर कांग्रेस जीती है। हिमाचल में तीनों विस सीट और एक लोकसभा सीट भी कांग्रेस जीती है। राजस्थान की भी दो विस सीटों के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गए हैं। बिहार में दोनों सीटें जदयू ने जीती हैं। हरियाणा की एक मात्र सीट पर हुए विस चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के अभय सिंह चौटाला ने बाजी मारी है। अन्य जगह भी क्षेत्रीय दल ही हावी रहे हैं। कांग्रेस को तो आत्ममंथन की जरूरत तो है ही। लेकिन भाजपा को भी आत्ममंथन की जरूरत है। हिमाचल प्रदेश में उसकी सरकार है, वहाँ उपचुनाव की सभी सीट हार गई। हिमाचल का परिणाम बीजेपी को चिंता में जरूर डालेगी। इसका असर उत्तराखण्ड पर भी पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हार का कारण महंगाई बताया है।
बिहार में राजद हार गई लेकिन वह अकेले लड़ी थी और जदयू के साथ बीजेपी भी थी। राजद भले हार गई हो लेकिन जद यू अगर अकेले होगी तो राजद भारी पड़ेगी। विपक्ष का बिखराव भी जदयू को जीतने में मदद की है।
बिहार में कांग्रेस को इस हार से घबराना नही चाहिये, क्योंकि उसने अचानक अकेले लड़ने का फैसला किया, वो भी जब चुनाव का दौर आया। इसलिए वोटर से उतनी कनेक्ट नही हो पाई, अगर वह संगठन पर ध्यान देते हुए आगे भी अकेले लड़ती है, और छोटे -छोटे दलों को साथ लेती है, तो इसका फायदा भविष्य में जरूर होगा।