09/04/2026
ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते,
कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते।
कभी चाँदनी में तेरी सूरत नज़र आ जाती,
कभी रात के आफ़ताब में तुझे देखते।
तेरी याद आई तो हर तरफ़ तू ही तू लगा,
कभी दिल में, कभी हिजाब में तुझे देखते।
हमने चाहा था तुझे उम्र भर के लिए,
हर सुबह, हर शाम के हिसाब में तुझे देखते।
तेरे बाद भी ये दिल तुझी को ढूंढता रहा,
कभी अश्कों के सैलाब में तुझे देखते।
कभी राहों में तेरी आहट सी सुनाई देती,
कभी तन्हा से इक जवाब में तुझे देखते।
ये मोहब्बत भी अजीब सी दास्तां निकली,
कभी दर्द में, कभी गुलाब में तुझे देखते।
’ दिल की यही आरज़ू रही हरदम,
कभी हक़ीक़त में, कभी ख़्वाब में तुझे देखते।