12/03/2026
जब जीत का जश्न बड़ा हो, तो विवादों की जगह कहाँ?
ईशान किशन ने जो कहा, वह सिर्फ एक खिलाड़ी का गुस्सा नहीं था, बल्कि उन करोड़ों भारतीय फैंस की आवाज़ थी जो पिछले कई सालों से इस सुनहरे पल का इंतज़ार कर रहे थे। एक खिलाड़ी जब मैदान पर पसीना बहाता है, तो उसका सपना सिर्फ तिरंगा ऊँचा करना होता है। लेकिन विडंबना देखिए, जीत के बाद जब खिलाड़ी को अपनी माँ के हाथ का खाना और सुकून के दो पल मिलने चाहिए, तब उन पर 'विवादों का रायता' परोसा जा रहा है।
ईशान किशन ने बिल्कुल सही कहा - "बेकार सवाल!" > "जब पूरा देश वर्ल्ड कप की ट्रॉफी और टीम इंडिया की मेहनत का जश्न मनाना चाहता है, तो ऐसे समय में कीर्ति आज़ाद के ट्वीट्स या गूगल मैप्स की गलियों में विवाद ढूँढना क्या सही है?"
फैंस को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ट्रॉफी किस गली से गुज़री या किसने क्या ट्वीट किया, हमें फर्क पड़ता है उस 'World Champion' के टैग से जिसे हमारी टीम ने छीन कर हासिल किया है।
ईशान किशन का यह बेबाक अंदाज़ दिखाता है कि हमारी नई पीढ़ी के खिलाड़ी सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि शब्दों से भी विरोधियों को 'क्लीन बोल्ड' करना जानते हैं।
हम आपके साथ हैं ईशान ! फालतू विवादों को छोड़िए, जश्न मनाइए!
#