24/09/2025
गलती किसकी!
बच्चों को उनके मन का काम करने दें:
अपने बच्चे के कौशल और प्रतिभा के बारे में जाने:
महाराष्ट्र के चंद्रपुर के नवरगांव का 19 वर्षीय अनुराग बोरकर, Neet में 99.99 परसेंटाइल, ओबीसी वर्ग में 1475वीं रैंक, गांव की शान और परिवार की उम्मीद. एमबीबीएस में दाखिला तय हो चुका था. लेकिन उस होनहार चेहरे के पीछे एक अनकही सच्चाई दबकर रह गई. अनुराग डॉक्टर नहीं बनना चाहता था. उसी चाहत और मजबूरी की खींचतान ने उसे मौत चुनने पर मजबूर कर दिया. जिस दिन उसे गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए रवाना होना था, उसी दिन उसने अपने घर में फांसी लगाकर जिंदगी खत्म कर लीl
सोचिए जब मन नहीं था जिस चीज को करने का, तब 100% हासिल किया उसने!
जिस चीज का मन था, उसमें क्या करता!
लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता🤔
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