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क्या आप जानते हैं?माँ कालरात्रि, माँ दुर्गा का सातवाँ स्वरूप हैं। वे शक्ति, साहस, निर्भयता और बुराई के विनाश की प्रतीक ह...
17/10/2026

क्या आप जानते हैं?

माँ कालरात्रि, माँ दुर्गा का सातवाँ स्वरूप हैं। वे शक्ति, साहस, निर्भयता और बुराई के विनाश की प्रतीक हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कालरात्रि ने रक्तबीज जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर दुष्ट शक्तियों का संहार किया। उनका उग्र और दिव्य स्वरूप हमें भय का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और सत्य व धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

माँ कालरात्रि की कृपा से जीवन में भय और नकारात्मकता दूर हो, सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।

जय माँ कालरात्रि!

17/10/2026

जब प्रभु श्रीराम ने उठाया शिवधनुष, मिथिला की धरती पर गूँज उठा जयघोष!

माता सीता के स्वयंवर में राजा जनक की प्रतिज्ञा थी कि जो वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, वही माता सीता का वर बनेगा।

अनेक राजा और राजकुमार अपनी शक्ति आजमाते हैं, लेकिन शिवधनुष को उठाना भी उनके लिए असंभव हो जाता है। तभी गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम आगे बढ़ते हैं।

प्रभु श्रीराम सहजता से शिवधनुष उठाते हैं और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष भंग हो जाता है। इस दिव्य क्षण के साथ माता सीता के स्वयंवर की प्रतिज्ञा पूर्ण होती है और मिथिला में आनंद एवं उत्सव छा जाता है।

प्रेम, धर्म और नियति के इस अद्भुत प्रसंग को देखिए रामायण की अमर गाथा में।

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रामायण के 10 विशेष एपिसोड की इस दिव्य यात्रा में हमारे साथ जुड़िए और सनातन संस्कृति की अमूल्य विरासत को करीब से जानिए।

जय श्री राम! जय माता सीता!

17/10/2026

मिथिला की पावन धरती पर राजा जनक ने रखी एक अद्भुत प्रतिज्ञा, माता सीता के स्वयंवर में शिवधनुष उठाने वाले वीर से होगा उनका विवाह!

माता सीता के स्वयंवर के लिए राजा जनक ने एक कठिन शर्त रखी। जो भी वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, वही माता सीता का वर बनेगा।

मिथिला के राजदरबार में अनेक राजा और राजकुमार अपनी शक्ति और पराक्रम का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन कोई भी शिवधनुष को हिला तक नहीं पाता। राजा जनक की प्रतिज्ञा पूरी होती दिखाई नहीं देती और वे चिंतित हो उठते हैं।

तभी गुरु विश्वामित्र के साथ आए प्रभु श्रीराम की ओर सबकी दृष्टि जाती है। क्या प्रभु श्रीराम राजा जनक की प्रतिज्ञा पूरी कर माता सीता के स्वयंवर में विजयी होंगे?

यह पावन प्रसंग धैर्य, धर्म और नियति पर अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसने रामायण की अमर गाथा में एक ऐतिहासिक अध्याय रचा।

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जय श्री राम! जय माता सीता!

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना। क्या आप जानते हैं? माँ कालरात्रि का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन उनका...
17/10/2026

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना।

क्या आप जानते हैं?
माँ कालरात्रि का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन उनका यह स्वरूप केवल भय का प्रतीक नहीं है।

परंपरा में उन्हें अधर्म, नकारात्मकता और भय का अंत करने वाली शक्ति के रूप में समझा जाता है। उनका उग्र स्वरूप रक्षा, साहस और निर्भयता का भी प्रतीक माना जाता है।

जय माँ कालरात्रि!

16/10/2026

मिथिला की पावन धरती पर सजा माता सीता का स्वयंवर, प्रभु श्रीराम ने उठाया शिवधनुष और रच गया इतिहास!

राजा जनक द्वारा आयोजित माता सीता के स्वयंवर में अनेक राजा और राजकुमार भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई सफल नहीं हो पाता। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम आगे बढ़ते हैं और सहजता से शिवधनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते ही उसे तोड़ देते हैं।

शिवधनुष भंग होते ही मिथिला में जयघोष गूँज उठता है और माता सीता एवं प्रभु श्रीराम के दिव्य मिलन का मार्ग प्रशस्त होता है।

यह पावन प्रसंग प्रेम, मर्यादा और नियति के उस अद्भुत संगम का प्रतीक है, जिसने रामायण की अमर गाथा को एक नया मोड़ दिया।

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जय श्री राम! जय माता सीता!

16/10/2026

पत्थर की शिला बनी माता अहिल्या, प्रभु श्रीराम के दिव्य स्पर्श से मिला पुनः जीवन!

रामायण की एक करुणामयी गाथा, जहाँ ऋषि गौतम के श्राप के कारण माता अहिल्या शिला रूप में प्रतीक्षा कर रही थीं। प्रभु श्रीराम के आगमन और उनके दिव्य स्पर्श से माता अहिल्या का उद्धार हुआ और उन्हें पुनः अपना स्वरूप प्राप्त हुआ।

यह पावन प्रसंग हमें आशा, आस्था और प्रभु की असीम कृपा का संदेश देता है। माता अहिल्या का उद्धार रामायण की उन दिव्य घटनाओं में से एक है, जो प्रभु श्रीराम की करुणा और महिमा का स्मरण कराती हैं।

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जय श्री राम! जय माता अहिल्या!

16/10/2026

धर्म की रक्षा के लिए प्रभु श्रीराम का पहला पराक्रम, ताड़का वध की दिव्य गाथा!

ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने और राक्षसों के आतंक का अंत करने के लिए प्रभु श्रीराम ने ताड़का का वध किया। यह प्रसंग रामायण में श्रीराम के शौर्य, साहस और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

गुरु की आज्ञा का पालन, अधर्म के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की स्थापना का संकल्प — ताड़का वध की यह कथा हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए साहस के साथ खड़ा होना आवश्यक है।

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जय श्री राम!

16/10/2026

क्या आप जानते हैं?

माँ कात्यायनी, माँ दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। वे साहस, शक्ति, न्याय और धर्म की प्रतीक हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। उनका दिव्य स्वरूप हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य के मार्ग पर चलने और जीवन में साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

माँ कात्यायनी की कृपा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।

जय माँ कात्यायनी!

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना। क्या आप जानते हैं? माँ कात्यायनी के नाम का संबंध ऋषि कात्यायन से जोड़ा जाता...
16/10/2026

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना।

क्या आप जानते हैं?
माँ कात्यायनी के नाम का संबंध ऋषि कात्यायन से जोड़ा जाता है।

परंपरा के अनुसार, देवी का यह स्वरूप ऋषि कात्यायन से संबंधित माना जाता है और इसी कारण उन्हें ‘कात्यायनी’ नाम से जाना जाता है।

माँ कात्यायनी की कृपा से जीवन में साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनी रहे।

जय माँ कात्यायनी!

#माँकात्यायनी #जयमातादी #नवरात्रि #शारदीयनवरात्रि #नवरात्रि2026

15/10/2026

क्या आप जानते हैं?

माँ स्कंदमाता, माँ दुर्गा का पंचम स्वरूप हैं। वे मातृत्व, प्रेम, करुणा और शक्ति की प्रतीक हैं।

वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को अपनी गोद में धारण करती हैं और सिंह पर विराजमान होती हैं। उनके दिव्य स्वरूप से ममता, साहस, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

माँ स्कंदमाता की कृपा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।

जय माँ स्कंदमाता!

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