13/05/2023
#मताधिकार
आज जिस तरह की राजनैतिक सोच, विचारधारा है। वह समाज के हितों को न देख बल्कि धर्म, वर्ग और उच्च एवं निम्न जाति के आधार पर है।
आज लोग शिक्षित तो हो रहे हैं परंतु वे अपने मत का स्वयं चयन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वे प्रभाव में हैं जाति, धर्म, वर्ग एवं वरिष्ठता के।
इसी प्रभाव का इस्तेमाल आज कई पार्टियां कर रही हैं जिस वर्ग या धर्म की संख्या अधिक हो, बस बहाव की दिशा उस तरफ मोड़ दो, विजय निश्चित है।
परन्तु ये मताधिकार का प्रयोग नहीं, मताधिकार का प्रयोग सही मायने में तब परिणाम पुर्ण होता है। जब वह किसी धर्म या किसी वर्ग का पक्ष ना हो, वह पक्ष हो विकास का, परन्तु भारत में जहां स्वक्ष राजनिति की बात आती है वहां उस राजनैतिक व्यक्ति का राजनीत समाप्त समझा जाता है।
क्योंकि भारत में खुली दृष्टि कोण की शिक्षा का आभाव आज भी है। इस लिए भारत के लोगों पर धर्म, जाती, वर्ग का प्रभाव आसानी से डाला जा सकता है तथा उन्हें मानषिक रूप से तैयार कर लिया जाता है।
इस लिए यहां वही दल चुना जाता है जो बस आपके वर्ग तथा आपके धर्म की बात करे और जहां धर्म आ जाता है। वहां नेता नहीं धर्म चुना जाता है। मत पार्टी को नहीं उस कार्यकर्ता का अधिकार है जो समाज के लिए काम करे पार्टी के लिए नहीं।
मेरा ऐसा मानना है कि धर्म और वर्ग की अनैतिक राजनित विदेशों में भी होती हैं परंतु उन देशों में नहीं होती जहां शिक्षा का दृष्टी कोण हर मायने से खुला हो जहां नैतिक व अनैतिक की समझ हो। जहां वे जानते हैं की धर्म और वर्ग का उपयोग राजनिति में नैतिक नहीं है।
वे ऐसी राजनैतिक सोच या राजनिति करने वालों के आलोचक भी होते है क्योंकि वे जानते है कि धर्म एक पुजनीय विराशत है इसका अनैतिक उपयोग नहीं होना चाहीए।
शिक्षित अपने मत का उपयोग जानते हैं और वे अपने मत का उपयोग राष्ट्र के हित में ही करते हैं।
लेखक :- #शुभम्_कुमार_यादव