The Daak

The Daak : सम्पादकीय पत्रकारिता (Editorial Journalism)
सत्य में निष्ठा और समर्पण


Follow on Instagram:
X / Twitter:

27/04/2026

विवादित गाने 'सरके चुनर तेरी सरके' विवाद मामले में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने पेश हुए। उन्होंने आयोग के सामने एक लिखित माफी प्रस्तुत की, जिसमें समाज को अनजाने में पहुंची किसी भी ठेस के लिए खेद व्यक्त किया और रचनात्मक सामग्री में महिलाओं के जिम्मेदाराना चित्रण के महत्व को स्वीकार किया। संजय दत्त ने सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण में सकारात्मक योगदान देने के कदम के रूप में 50 आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा का प्रायोजन करने की प्रतिबद्धता जताई। इस गाने पर मचे बवाल के बाद एनसीडब्ल्यू ने उन्हें नोटिस जारी किया था।

27/04/2026
27/04/2026
21/04/2026

आर्काइव | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में संघ के कई सपने साकार हुए हैं, चाहे वह बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाने का सपना हो या अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर जम्मू और कश्मीर को हासिल विशेष दर्जा छीनने का. संघ की उपरोक्त जीतों में न्यायपालिका की भूमिका भी अहम रही है. इसीलिए एबीएपी को समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है.

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) की स्थापना 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वकीलों की शाखा के रूप में की गई थी. आज एबीएपी भारत में वकीलों का शायद सबसे बड़ा संगठन है. अध्ययन मंडलियों, रणनीतिक मुकदमेबाज़ी और निजी रिश्तों के लगातार बढ़ते नेटवर्क के ज़रिए, समाज के बढ़े हिस्से के साथ-साथ देश भर के हज़ारों जिला और ट्रायल कोर्टों में एबीएपी फैल चुका है.

एबीएपी आज एक ऐसे संगठन के रूप में उपस्थित है जो इस देश की ज़्यादातर अदालतों को प्रभावित करने की ताक़त रखता है. इसके के सदस्य बार एसोसिएशनों का नेतृत्व करते हैं, इसके संरक्षक बेंचों पर बैठते हैं और उनके बच्चे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की अगुआई करते हैं, और यहां तक कि हमारे वक़्त के न्यायिक मामलों पर टिप्पणी करते हैं.

इसके सदस्य अब संसद और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंच चुके हैं. इनमें महेश जेठमलानी, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आदर्श कुमार गोयल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और बीजेपी और विपक्ष शासित राज्यों के महाधिवक्ता शामिल हैं. इस रिपोर्टिंग के दो सालों में, मैं अलग-अलग तरह के वकीलों से मिला. इनमें से कुछ पैसे से और कुछ सत्ता से लेकिन अमूमन सभी कानून की विकृत कल्पना से आकर्षित हैं जो अति-राष्ट्रवादी से प्रेरित है. वे निचली अदालतों में युवा वकीलों और भारत के विधि विद्यालयों में युवा छात्रों के आदर्शों और महत्वाकांक्षाओं को आकार देते हैं. वे न केवल हमारे समय की हिंदू कट्टरपंथी वास्तविकता का मसौदा तैयार कर रहे हैं, दलील दे रहे हैं और बहस कर रहे हैं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों को चुनौती देने के लिए एक गहरे आंदोलन की ज़मीन तैयार कर रहे हैं.

पढ़ें एबीएपी पर सुशोवन पटनायक का लिखा यह पूरा लेख. लिंक कमेन्ट बॉक्स में.

21/04/2026

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के इंडिया गठबंधन का चेहरा बनने की अटकलों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में तेज प्रताप यादव ने कहा कि "प्रियंका गांधी ही चल सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जी की तरह हैं। राहुल गांधी से चलने वाला नहीं है। यात्रा निकलने से बुलेट पर बैठने से सफलता हासिल नहीं होती।

Address

Delhi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when The Daak posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to The Daak:

Share